साहब इसे अंदर करो, ये कम्युनिस्ट है!

नेताओं की जहरीली भाषा ने उबर ड्राइवर के फर्जी राष्ट्रवाद को भाजपा के खूंटे से मजबूती से बांध दिया… लगता है जैसे कुएं में भांग नहीं, अफीम घोल दिया गया है!

Vishnu Nagar : कोई दिन नहीं जाता आजकल, जब अखबार पढ़ो, वेबसाइट देखो, टीवी चैनल देखो, कुछ न कुछ भयानक पढ़ने-सुनने को नहीं मिलता। कुछ न कुछ ऐसा, जो देर तक आपके दिमाग को झनझनाता रहता है, आपका रहा -सहा चैन छीन लेता है। मुंबई से ऐसी ही एक खबर आई है। प्रसिद्ध ‘कालाघोड़ा फेस्टिवल’ में जयपुर से 23 वर्षीय अंग्रेजी के युवा कवि बप्पादित्य सरकार भाग लेने आए थे। वह विचारों से कम्युनिस्ट हैं और सीएए और एनआरसी के विरोध में हुए धरनों- प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी करते रहे हैं।

शाहीनबाग के बाद मुंबई में भी यह युवा कवि मुंबईबाग (नागपाड़ा) गया, जहाँ दिल्ली के शाहीनबाग की तरह सीएए-एनआरसी के विरुद्ध धरना- प्रदर्शन चल रहा है। वहाँ से रात के समय एक टैक्सी से वह वापिस कुर्ला जा रहे थे, जहाँ वह ठहरे थे। रास्ते में वह अपने जयपुरिया मित्र से फ्रांसीसी क्राति, लाल सलाम सुनते ही लोगों के चेहरे पर आई घबराहट, शाहीनबाग के बाद विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शनों के जारी सिलसिले, जयपुर में विरोध प्रदर्शन को और अधिक प्रभावी बनाने आदि के बारे में बातें कर रहे थे।

टैक्सी ड्राइवर स्वाभाविक है कि हिंदी में हो रही यह बात सुन-समझ रहा था। उसने सांताक्रूज पुलिस स्टेशन के पास अपनी टैक्सी रोकी और अपनी सवारी से कहा कि अभी एटीएम से पैसे निकाल कर आता हूँ। इसके बजाय वह थाने से दो पुलिसकर्मियों को अपने साथ ले आया। थाने के अंदर ड्राइवर रोहित सिंह ने पुलिस से कहा-‘साहब इसे अंदर करो। ये देश जलाने की बात कर रहा था। ये कम्युनिस्ट है। मुंबई को शाहीनबाग बना देंगे, ऐसा कह रहा है। मैंने यह सब रिकार्ड किया है।’

बप्पादित्य ने खैर इससे इनकार किया कि उन्होंने देश जलाने जैसी कोई बात कही है। पुलिस चाहे तो ड्राइवर ने जो रिकॉर्ड किया है, उसे सुन ले।

पुलिस ने ढाई घंटे लंबी पूछताछ की। मोबाइल से बप्पादित्य ने किसे-किसे फोन किए, किसने बप्पादित्य को फोन किया, उनके पिता क्या करते हैं, विरोध प्रदर्शनों में भाग लेते हुए वह कमाई कैसे कर पाते हैं, वह कौनसी किताबें पढ़ते हैं, किस तरह की कविताएँ लिखते हैं, आदि बातें नोट कीं। बप्पादित्य को सावधान भी किया कि आगे से वह गले में लाल स्कार्फ न बाँधें, ढपली लेकर न चलें, वक्त अच्छा नहीं है। इतना कहकर बिना कोई केस बनाए दोनों से जाने को कह दिया गया। उसके अनुसार दोनों के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।

क्या उत्तर प्रदेश या कर्नाटक या हरियाणा या हिमाचल प्रदेश में पुलिस इतनी आसानी से मामला रफादफा कर देती? क्या महाराष्ट्र में भाजपा/शिवसेना की सरकार होती तो संभव था? वह किसी और धर्म का होता तो?और अगर पुलिस को यह पता नहीं चलता कि यह युवा टाइम्स समूह के एक कार्यक्रम में भाग लेने आया है, तो ऐसे ही वह छोड़ देती, इसके बावजूद कि उसने कई बेहूदा सवाल किए थे।

बड़ा सवाल रोहित सिंह का है, जिसके दिमाग में वर्तमान राजनीतिक माहौल तथा गोदी मीडिया आदि ने इतना हिंदूवादी जहर बो दिया है कि जब बप्पादित्य ने रोहित सिंह से पूछा कि तुम मुझे पुलिस थाने क्यों लाए हो, तो रोहित का जवाब था कि तुम देश जलाते रहो और हम देखते रहें? गनीमत है कि मैं तुम्हें पुलिस थाने लाया वरना मैं तुम्हें कहीं और भी ले जा सकता था!

जाहिर है कि पिछले साढ़े पाँच साल में राजनीति को जहाँ ले आया गया है, उसने उबर के इस ड्राइवर में भी इतना आत्मविश्वास भर दिया है कि न केवल वह अपनी सवारी को थाने ले आया बल्कि धमकाया भी कि मैं तुम्हें कहीं और भी ले जा सकता था। इसका ध्वन्यार्थ यह है कि मैं गुंडों से पिटवा या मरवा सकता था। उसके द्वारा दी गई इस धमकी के बाद रोहित सिंह की जगह जेल होनी चाहिए थी या जैसा कि हुआ, उसे छोड़ दिया जाना था, मैं इस विषय को नहीं छूऊँगा। मैं तो उसकी मनस्थिति तक पहुँचने की कुछ कोशिश करना चाहता हूँ, जहाँ उत्तर प्रदेश या बिहार या किसी और प्रदेश से इस महानगर में रोजीरोटी कमाने आए इस आदमी को पहुंचा दिया गया है। उसके लिए शाहीनबाग का धरना -प्रदर्शन ‘देशद्रोह’ है, देश को जलाने का षड़यंत्र है।

दिल्ली के चुनाव में नरेन्द्र मोदी, अमित शाह आदित्यनाथ से लेकर अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा ने जिस तरह की भाषा का दुरुपयोग कर वातावरण बनाया है, उसकी ताजा छापने इस ड्राइवर के इस फर्जी राष्ट्रवाद को भाजपा के खूँटे से मजबूती से बाँध दिया होगा। उसे इतनी बार इस ‘राष्ट्रवाद’ का पाठ पढ़ाया गया है कि उसे लगा होगा कि उसके लिए यह अच्छा अवसर है कि वह इस ‘देशविरोधी’ को पुलिस के हवाले कर रोजीरोटी से अधिक अपनी देशभक्ति का प्रदर्शन करे। देश बचेगा तो रोजीरोटी बचेगी, यह इस पाठ का एक अध्याय है।

उसे लगा कि यह लड़का देश का दुश्मन है और उसने इसे पुलिस थाने लाकर अपनी तरफ से देश हित में बड़ा काम किया है, देश को जलने से बचा लिया है। उसे पुरस्कृत होने की उम्मीद भी शायद रही हो और ऐसा हुआ भी। देशतोड़क भाजपा के स्थानीय अध्यक्ष ने रोहित को सम्मानित किया। सम्मानित नहीं भी होता तो भी उसका मनोबल टूटता, बढ़ता। संघी-भाजपाई और इसी तरह के लोगों ने उसकी हौसलाअफजाई की, पीठ थपथपाई तो और बढ़ा होगा। अपनों के बीच एक छोटामोटा चार दिन का हीरो वह बन चुका है। आगे का रास्ता उसका क्या होगा, कौन जाने? अगर वह इस ‘देशभक्ति’ में रोजीरोटी कमाना भूल गया, इसके नशे में डूबकर कोई अपराध कर बैठा और जेल गया भी तो अपराध भावना से मुक्त रहेगा। उधर दिल्ली-लखनऊ आदि में राजपाट कर रहे असली अपराधी हमेशा की तरह मौज करते रहेंगे।

उसके दिमाग में यह भी भर दिया गया है कि अपने को कम्युनिस्ट मानता है,कहता है,वह देशद्रोही ही होता है। उसे कौन बताता कि आज भी भले एक ही राज्य (केरल)में कम्युनिस्टों की सरकार है और जनता द्वारा संविधान सम्मत सरकार है।इसी तरह पश्चिम बंगाल तथा त्रिपुरा में भी उसकी सरकारें कभी हुआ करती थींं।कम्युनिस्ट होना ही अपने आप में अपराध नहीं है।कई छोटी -बड़ी वामपंथी पार्टियां संसदीय ढाँचे में काम कर रही हैं और वैध हैं।संभव है बप्पादित्य भी किसी ऐसी ही पार्टी से जुड़ा हो या अपने तौर पर कम्युनिस्ट हो।

इस घटना से उबर के प्रबंधन की चिंता भी बढ़ा दी है।अगर उबर की यह छवि बनती है कि उसके ड्राइवर किसी की निजी बातचीत को आधार बनाकर उसे इच्छित जगह पहुंचाने की जगह जेल पहुँचा सकते हैं तो लोग उसकी टैक्सी लेने की बजाए कोई दूसरी टैक्सी लेना पसंद करेंगे या सार्वजनिक परिवहन से जाएँगे या टैक्सी ड्राइवर और सवारी के बीच का सहज संबंध खत्म हो जाएगा। उसने तुरंत बप्पादित्य से क्षमा माँगी। उबर ने अस्थायी रूप से ड्राइवर को अपनी सेवा से हटा दिया है।वैसे युवा बप्पादित्य ने इतना सब होने के बावजूद परिपक्वता का परिचय देते हुए रोहित सिंह के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की।उनका कहना है कि इससे उस युवा ड्राइवर का करियर बर्बाद हो जाएगा।उबर को चाहिए कि वह उसे इस मनस्थिति से निकलने में मदद दे। बप्पादित्य की यह उदारता रोहित ने उसे सही समझ की ओर बढ़ने में मदद नहीं की।यही इस समय देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार और कवि विष्णु नागर की एफबी वॉल से.

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