
ये हैं बीजेपी के सांसद और पंजाब केसरी अखबार के मालिक. क्या हाल है बिकी हुई मीडिया का, खुद ही देखिये. जब अख़बारों / चैनलों के मालिक / संपादक लोग अपनी पूरी उर्जा लोकसभा / राज्यसभा की सीट और पद्मभूषण आदि के लिये खर्च करते हुए इस चित्र में दिखाई मुद्रा में जा पहुंचें हों तब मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खम्भा कैसे माना जा सकता है? ये तो सत्ता के चारणों की मुद्रा है.
वर्तमान सत्ताधीश के दरबार में मीडिया के मालिकान किस रूप में हैं, कितने हैं और क्या छाप रहे /दिखा रहे हैं, यह तस्वीर एक नमूना है. इसे देखकर इतना ही कहा जा सकता है कि- उफ़… ये बिकाउ मीडिया. पत्रकारिता अब किस तरह दलाली, सत्ता, पावर, बिजनेस में कनवर्ट हो गई है, यह तस्वीर एक नमूना है. संपादकीय लिख कर लंबी-लंबी हांकने और जनता को मूर्ख बनाने वाले पंजाब केसरी के इस मालिक अश्विनी चोपड़ा पर एक बार एक थू तो बनता ही है. शेम शेम चोपड़ा. शेम शेम पंजाब केसरी.
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Yashvendra Pratap Si
May 26, 2015 at 12:50 am
बेवकूफो की जमात है भड़ास। अबे बेवकूफो पहली बात तो वो प्रधानमंत्री के सामने पंजाब केसरी के मालिक की हैसियत से नही बल्कि सांसद की हेसियत से खड़े है। तुम उल्लुओ को सिर्फ मोदी के खिलाफ लिखने के कितने पैसे मिलते है ?? माना कमिया हो सकती है मोदी में। लेकिन ऐसा तो नही है की आज तक एक भी काम सही नही किया मोदी सरकार ने। अंधभक्तों सुधर जाओ।
विनोद सावंत
May 26, 2015 at 4:40 am
प्रताप सिंह मोदी भक्त की खुबियां आप में दिख रही है..आपको मोदी जी ने कितने पैसे दिए है … या फिर पंजाब केसरी के कोई दल्लू पत्रकार ही हैं आप …..जो भड़ास की भड़ास से डर कर कुत्ते की तरह ना भौंकते….पत्रकारिता में हैं तो चाटुकारिता में ध्यान दें..भौंके…ना
johnkundra
May 26, 2015 at 6:22 am
Yashvendra Pratap ; दलाली करना कहा से सीखा। वह सांसद बाद में है पहले एक बड़े अखबार का मालिक है।
आनंद शर्मा शिमला
May 26, 2015 at 6:57 am
तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया में अधिकांश का हालत लगभग यही है। आज मीडिया समाज का आइना नहीं बल्कि निर्लज्ज नेताओं की विफलताओं को ढकने का साधन मात्र रह गया है। ऐसे पत्तरकारों का एक ही इलाज है- चमड़े का पुराना जूता, जो कम से कम 24 घंटे तक पानी में भीगा हुआ हो, को दे दनादन की तर्ज पर उसके सिर पर बरसाया जाए।
Yashvendra
May 26, 2015 at 9:11 am
ओय अकल के मच्छर johnkundra सांसद बाद में है तो इस प्रकार का कोई फ़ोटो 16 मई 2014 से पहले पड़ा है तुम्हारे पास।। वो हो तो डालो। मोदी देश के प्रधानमंत्री है और वो एक सांसद जैसे सारे संसद PM को report करते है वैसे ही ये कर रहे है।
Yashvendra
May 26, 2015 at 9:17 am
Vinod sawant भाईसाब भौकने की आदत तो कुत्तो की ही होती है। क्योंकि जब रोटी न मिले तो दूसरी की रोटी पर ओइ भौकते है। और रही बात भड़ास की तो इस पोर्टल पर कोई बुद्धजीवी पत्रकारिता तो होती नही है यहा सिर्फ छुट भैया पत्रकारिता ही होती है। तीसरा मै पत्रकार नही हूँ। और भाई मुझसे ज्यादा तो तुम अंधभक्तो को मीर्च लगती है तभी भौकना शुरू क्र देते हो
विनोद सावंत
May 26, 2015 at 9:44 am
प्रताप सिंह जी इस साईट पर पत्रकरिता नही होती है तो इस साईट पर क्यों भौंक रहे हो… जाकर मोदी जी का कोई गैंग ज्वाइन करें ..जिधर आपको चाटने का मौका मिलेगा ..और आपकी दलालगिरी भी चलेगी …पत्रकार तो हैं नही आप दलाल जरूर है आप..रोटी का सवाल आप जैसे दलाल के पास ही बन सकते है… क्योंकि आप मौका देखते है की दाल रोटी का कैसे बंदोबस्त हो…
Yashvendra Pratap Si
May 26, 2015 at 3:00 pm
लगता है विनोद बाबु आप किसी नई किस्म की नस्ल से ताल्लुक रखते है और लगता है आप रोटी की जगह गु का सेवन करते है तभी इतने अच्छे विचार है। आपके जैसे छुट भैया पत्रकारो को रोटी की जरुरत शायद पड़ती नही है और भैया दलाली का ज्यादा वास्ता तो आप जैसे महान पत्रकारों से ही है। और अभी इस देश में लोकतंत्र है जब तुम मोदी के बारे में कुछ भी भोंक सकते हो तो देश के PM के बारे में गलत लिखोगे तो हम टी बोल ही सकते है इस सुपारी छुट भैया तथाकथिक पत्रकारो की website पर।
pal singh nauli
May 26, 2015 at 3:29 pm
😀
pal singh nauli
May 26, 2015 at 3:30 pm
😀
pls
pal singh nauli
May 26, 2015 at 3:31 pm
मुक्त अर्थव्यवस्था आने के बाद से मीडिया में संपादक की जगह ब्रांड मैनेजर लेने लगे
Javed Akhtar
May 26, 2015 at 8:28 pm
कुछ भी बोला जाए मगर भड़ास पर ही सबसे जोरदार बहस देखने में आती है इसलिए तो वाकई भड़ास लाजवाब पोर्टल है। पंजाब केसरी के संपादक तो लेख में कई बार कानून का हवाला अच्छा देतें हैं और विचार भी। मगर कई बार इनकी संपादकीय अंग्रेज़ी इंटरनेशनल अखबारों के अनुवाद वाले भी हैं, चूंकि अधिकांश लोग इंटरनेशनल अंग्रेजी अखबारों को पढ़ते नहीं है जिसका लाभ कई बड़े नामी गिरामी संपादक उठाते हैं और अनुवाद कर चेंप देतें हैं ,ऐसे यह अकेले संपादक नहीं है बल्कि कुछ और नामी संपादकों की भी चोरी पकड़ी जा चुकी है अनुवाद वाले लेखों में। बहरहाल मोदी जी ने एक वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया मगर उन्होंने जो वादे किए थे उनमें वो खरे नहीं उतर पाए हैं, हाँ ये भी नहीं कहा जा सकता है कि मोदी जी ने कुछ भी अच्छा नहीं किया है उन्होंने कुछ ऐसे कार्य किए हैं जिनका गुणगान होना ही चाहिए। अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने से 100 प्रतिशत गलत तो नहीं कहा जा सकता है मगर कुल जमा देखा जाए तो मोदी जी को 10 में से 4 या 3.5 नंबर तो बनते ही हैं।
जावेद अख्तर, रायपुर, छत्तीसगढ़ से