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उत्तर प्रदेश

बहुत बेआबरू हो कर नोएडा से वैभव कृष्ण निकले!

पत्रकारों पर गैंगस्टर लगाने वाले आईपीएस अफसर की छिनी कप्तानी, हुआ सस्पेंड, आरोपों के घेरे में आए पांच आईपीएस अफसरों को वर्तमान पद से हटाकर महत्वहीन तैनाती दी गई, गैंगस्टर लगाकर अंदर किए गए पत्रकारों को जमानत न देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को जारी किया नोटिस… नोएडा और लखनऊ जिले की पुलिसिंग में कमिश्नरी सिस्मट लागू किए जाने के आसार…

बहुत बेआबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले… एक मशहूर शेर की यह लाइन आज के दिन वैभव कृष्ण पर लागू हो रही है. वैभव कृष्ण को उम्मीद न थी कि वह नोएडा से यूं विदा होंगे. ईमानदार अफसरों में शुमार किए जाने वाले परम अहंकारी वैभव कृष्ण की मीडिया वालों के प्रति निजी खुन्नस इस हद तक बढ़ गई थी कि खबर लिखने वालों को गैंगस्टर लगाकर जेल में डलवा दिया और हाईकोर्ट से जमानत न मिल जाए, इसके लिए निजी तौर पर वकील की तैनाती करा दी.

कहते हैं बुरे करम का बुरा नतीजा. जल्द ही कुछ ऐसा होता है कि वैभव कृष्ण खुद मुश्किल में फंस जाते हैं. उनके कुछ अश्लील वीडियो लीक हो जाते हैं. इन वीडियोज से घिरे वैभव कृष्ण ने ध्यान भटकाने के वास्ते पांच आईपीएस अफसरों पर खुद के खिलाफ साजिश करने का आरोप मढ़ डाला और पत्रकारों-अफसरों के बीच चैटबाजी को आधार बनाकर एक बड़े संगठित गिरोह की कहानी रच डाली.

इस कहानी के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय को लिखी अपनी चिट्ठी भी लीक करा दी. कहा जाता है कि ये पूरा कर्मकांड वैभव कृष्ण ने अश्लील वीडियो कांड से ध्यान भटकाने के वास्ते किया था. पर उनका ध्यान भटकाने के एवज में किया गया कृत्य ज्यादा महंगा पड़ गया. उन पर गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का आरोप लगा. यह सब कुछ सर्विस रूल का उल्लंघन करने जैसा माना गया. इसे देखते हुए शासन ने शुरुआती जांच कराई. फिर नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण आज गाज गिरा दी. एसएसपी वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया है

नोएडा SSP समेत 6 IPS पर एक्शन हुआ. इनमें पांच वो हैं जिन पर वैभव कृष्ण ने आरोप लगाए थे. इन पांचों को महत्वहीन पदों पर तैनाती दी गई है. ये पांच अफसर हैं- हिमांशु कुमार, सुधीर सिंह, गणेश साहा राजीव नारायण मिश्रा और अजय पाल. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नोएडा एसएसपी वैभव कृष्ण सस्पेंड को तबादला उद्योग का खुलासा करना महंगा पड़ गया.

कई किस्म के विवादों के चलते वैभव कृष्ण पत्रकारों, अफसरों और शासन के निशाने पर आ गए थे. वैभव का अश्लील वीडियो वायरल होने से पूरा मामला ही संगीन हो गया. इन वीडियोज को लेकर वैभव ने कुछ अफसरों पर आरोप लगाए और उन अफसरों के संबंध में खुद के द्वारा शासन को प्रेषित किए गए गोपनीय दस्तावेज लीक कर वायरल करा दिए गए थे. सर्विस रूल के उल्लंघन के आरोपी वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया.

इस बीच वैभव कृष्ण द्वारा गैंगस्टर लगाकर जेल भिजवाए गए पत्रकार नीतीश पांडेय के मामले को जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर जारी हुई नोटिस.पत्रकार नीतीश पाण्डेय की नोयडा पुलिस द्वारा गिरफ्तारी मामले में प्रशांत भूषण ने दायर की है याचिका.

सूत्रों के अनुसार नीतीश पाण्डेय व अन्य पत्रकारों को जमानत न मिले, इसलिए नोयडा कप्तान वैभव कृष्णा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक निजी वकील नियुक्त कर रखा है. सवाल ये है कि इस निजी वकील का भुगतान कहाँ से किया जा रहा है. यह भी जांच का विषय है.कई तारीख़ों पर कोर्ट में केस डायरी नहीं प्रस्तुत की गई. बताया जाता है कि हाईकोर्ट वैभव कृष्णा द्वारा गोपनीय रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का संज्ञान ले सकता है.

नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण का मामला योगी सरकार के लिए गले की हड्डी जैसा हो गया था. अंतत: एसएसपी नोएडा आईपीएस वैभव कृष्ण के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ी कार्रवाई दी. एसएसपी नोएडा सस्पेंड कर दिए गए. आईपीएस वैभव कृष्ण की एक महिला से सेक्स चैट और अश्लील वीडियो चैट की वायरल वीडियो के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर शासन पर दबाव बढ़ गया था. सूत्रों का कहना है कि इन वीडियोज के संबंध में गुजरात की फोरेंसिक लैब से रिपोर्ट आते ही वैभव कृष्णा सस्पेंड हो गए.

बताया जाता है कि फोरेंसिव लैब की रिपोर्ट में वह वीडियो और चैट सही पाई गई जिसे वैभव कृष्णा ने बताया था फर्जी. फोरेंसिक जांच में सामने आय़ा कि वीडियो एडिटेड और मार्फ्ड नहीं था. वैभव ने वायरल वीडियो के संबंध में खुद कराई थी एफआईआर.

मेरठ के एडीजी और आईजी को दी गई थी जांच. जांच के दौरान आईजी ने फोरेंसिक लैब को भेजा था वीडियो. इसके बाद वैभव ने पत्रकार वार्ता खुद बुलाकर दी जानकारी और पत्रकार वार्ता में शासन को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट को कर दिया था लीक. अधिकारी आचरण नियमावली के उल्लंघन किये जाने के कारण सस्पेंड हुए वैभव कृष्णा. वैभव कृष्णा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं. लखनऊ के एडीजी एसएन साबत करेंगे जांच. जल्द से जल्द देनी होगी रिपोर्ट.

इस बीच ये भी कहा जा रहा है कि लखनऊ और नोयडा में जल्द लागू हो सकता है कमिश्नरी सिस्टम. आज जिन पुलिस कप्तानों को हटाया गया है उनमें लखनऊ के एसएसपी भी शामिल हैं. फिलहाल इन दोनों बड़े जिलों में अभी तक किसी की तैनाती नहीं की गई है. पंचम तल पर कमिश्नरी सिस्टम को लेकर मंथन तेज हो गया है. यह भी कहा जा रहा है कि नोएडा में नवीन अरोड़ा हो सकते है पहले पुलिस कमिश्नर.

लखनऊ से यह भी सूचना है कि आईपीएस वैभव कृष्णा के पत्र बम के प्रकरण में दिवाकर खरे, निदेशक मीडिया, मुख्य सचिव को भी पद से हटाते हुए इन्हें सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (मुख्यालय) / मंडलायुक्त कार्यालय लखनऊ से संबंद्ध किया गया है. इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी नियमावली (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के अंतर्गत आरोप पत्र निर्गत करते हुए विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई संस्थित करते हुए प्रकरण की जांच कराई जा रही है.

इस पूरे प्रकरण को लेकर भड़ास एडिटर यशवंत सिंह कहते हैं-

”वैभव कृष्ण इमानदार आफिसर हैं, इसमें कोई शक नहीं. वो एक चाय भी मुफ्त की नहीं पीते. वो घर पर हरी सब्जी भी खुद की सेलरी के पैसे की मंगाते हैं. ये सारी बातें वैभव के नजदीकी पत्रकार और इंस्पेक्टर बताते रहते हैं. पर वैभव का दूसरा पक्ष भी है. नकारात्मक पक्ष. यह आदमी परम अहंकारी है. अनप्रडिक्टेबल है. किसी से विवाद को दिल पर लेकर निजी खुन्नस पालने वाला व्यक्ति है. यह व्यक्ति सरकारी कामकाज में निजी खुन्नस से परे नहीं हो पाता. इनकी निजी दुश्मनियां इनके पब्लिक बिहैवियर में शामिल हो जाती हैं.

जिन अफसरों से वैभव कृष्ण की लड़ाई थी, उन्हें निपटाने के लिए उनके करीबी पत्रकारों पर गैंगस्टर लाद दिया. जबकि पत्रकारों ने ऐसा कुछ किया ही नहीं कि उन पर गैंगस्टर लादा जाए.

संभव है वैभव को वो पत्रकार दलाल टाइप लोग लगे हों, पर उनके खिलाफ किसी ने कंप्लेन तो किया नहीं. वो किसी को ब्लैकमेल तो कर नहीं रहे थे. उनका अपराध ये था कि वे उन अफसरों के करीबी थे जो वैभव को नापसंद थे. सो, आपने अचानक उन पत्रकारों को आतंकियों की तरह अरेस्ट कर गैंगस्टर लाद दिया. फिर उन्हें रिमांड पर लेकर जमकर टार्चर कराया.

ये सब क्या है?

आप उनके खिलाफ नियमत: जो कार्रवाई करनी थी, करते. वे किसी को ब्लैकमेल कर रहे थे तो ब्लैकमेल का केस करते. दलाली कर रहे थे, घूस ले दे रहे थे तो इससे संबंधित धाराएं लगाते. जो नियम कहता, उसके हिसाब से चलते. पर उनसे निजी खुन्नस क्यों पाल लिए भाई?

यही नहीं, वैभव जी का अश्लील वीडियो जो लीक हुआ तो उस मामले में टाइम्स आफ इंडिया मेरठ के पत्रकार को उठवाने के लिए सादी वर्दी में दो थानेदार भेज दिए.

अरे यार, इस मुल्क में तानाशाही नहीं, डेमोक्रेसी है. ऐसे कैसे किसी को उठवा लोगे? ऐसे कैसे किसी पत्रकार पर गैंगस्टर लगाकर उसे जेल में डाल दोगे?

दर्जन भर से ज्यादा ऐसे मामले हुए जिनमें मीडिया वालों को बेवजह पुलिस उत्पीड़न झेलना पड़ा. यह बताता है कि वैभव के मन में मीडिया के खिलाफ भयानक और एकतरफा गुस्सा था, घृणा के हद तक. ऐसी भावना किसी बड़े अफसर को पालना ठीक नहीं. खुद को हर नियम कानून से उपर मानना ठीक नहीं.

ये महोदय तानाशाह हो गए थे. लगे थे खुद को खुदा समझने. सो, उपर वाले ने भी ज्यादा देर नहीं की. बुरे करम का बुरा नतीजा.”

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें-

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1 Comment

1 Comment

  1. India rejuvenation initiative

    January 11, 2020 at 9:20 pm

    System सब जगह खराब है भारत की जनता के पास जब पावर आता है सही समय पर सही काम करने कोशिश नहीं करती है MP MLA को पकड़ने का प्रयास नहीं करती है प्रजातंत्र में सबसे ज्यादा पावरफुल MP MLA है इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन जनता यदि चाहे तो पुराने नियम हटवा कर सही कर सकती है विचार करो आपको सब पता है जागरूक करो 9045958851

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