पत्रकारों को गैंगस्टर बनाकर जेल भेजने वाले नोएडा के पुलिस कप्तान के कथित सेक्स वीडियोज-चैट हुए वायरल!

आज के अमर उजाला के नोएडा एडिशन के लोकल पेज पर छपी ख़बर

”एसएसपी नोएडा वैभव कृष्णा का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने से पुलिस महकमे में मचा हड़कंप. वैभव ने इसे साज़िश बताया. तेज़ी से हो रहा है इस आईपीएस का अश्लील वीडियो वायरल.” यह संदेश कल जब लखनऊ के 4पीएम वाले संजय भाई के ह्वाट्सअप ब्राडकास्ट से मुझे मिला तो मैं चौंक गया. तनिक विश्वास न हुआ कि बेगुनाह पत्रकारों को गैंगस्टर बनाकर जेल भेजने वाले आईपीएस अधिकारी वैभव कृष्ण को उनके किए धरे का नतीजा इतनी जल्दी भुगतना पड़ेगा.

नोएडा पुलिस के खिलाफ खबर लिखने के कारण पांच पत्रकारों को बिना आरोप अरेस्ट करने, गैंगस्टर घोषित करने, फिर टार्चर करने और आखिर में जेल में ठूंसने जैसा दुस्साहसिक कारनामा करने वाले नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने खुद का कथित सेक्स वीडियो सेक्स चैट के वीडियो स्क्रीनशाट वायरल होने के थोड़ी देर बाद रिएक्शन देने सामने आ गए. उनने इन सेक्स वीडियोज सेक्स चैट को फर्जी बताते हुए इसे साजिश करार दिया.

अब बात करते हैं उन वीडियोज और उन स्क्रीनशाट्स की जो वायरल हो रहे हैं. दो वीडियो क्लिप घूम रहे हैं. एक एक मिनट से कम के इन दो वीडियो क्लिप में एक में महिला से बातचीत है, अंग्रेजी में. महिला पूरा दिखाने के लिए कहती है. उस तरफ जो पुरुष है उसका चेहरा नहीं दिख रहा पर उसके हाथ खुद के लिंग को सहला रहे हैं. पुरुष अंग्रेजी में बातचीत करते हुए कामोत्तजना से भरा सुनाई पड़ रहा है. दूसरे वीडियो क्लिप में वैभव कृष्ण से मिलता जुलता एक आदमी का चेहरा नजर आ रहा है. महिला काम में बिजी होने के चलते फोन न उठा पाने या फोन न कर पाने जैसी कुछ बात कहती है. उधर से जो पुरुष दिख रहा है, उसकी कोई आवाज नहीं है, सिवाय हूं हां के.

चैट के दो स्क्रीनशाट वायरल हुए हैं जिसमें सेक्स रिलेशन बनाने संबंधी बातें अंग्रेजी में हैं. एक फोन नंबर स्क्रीनशाट पर दिख रहा है, जिसे वैभव कृष्ण का बताया जाता है. दूसरे स्क्रीनशाट में वीडियो काल्स हेतु संबंधित नंबर से आए गए फोन काल्स के डिटेल दिख रहे हैं कि उन नंबरों से कितनी दफे कब कब फोन आए.

इन दोनों स्क्रीनशाट्स से पुरुष के नंबर छिपा दिए गए हैं. इस नंबर के बारे में दावा किया जा रहा है कि ये एसएसपी वैभव कृष्ण का निजी नंबर है.

मतलब साफ है. जिसने भी ये स्क्रीनशाट्स और वीडियो क्लिप्स वायरल किए हैं, इन दो वीडियो क्लिप और दो स्क्रीनशाट्स के जरिए ये जस्टीफाई करने की कोशिश की गई है वीडियो में दिख रहे सज्जन आईपीएस वैभव कृष्ण ही हैं. उधर, वैभव कृष्ण इन वीडियोज को एडिटेड और फेक बताते हैं. वे दावा करते हैं कि उन्हें साजिशन फंसाया गया है. जो जो इनके पीछे हैं, उन्हें पकड़ कर दंडित कराया जाएगा.

डीजीपी ने भी अपने स्तर से जांच के लिए हापुड़ के एसपी को काम सौंप दिया है.

वैभव कृष्ण अपने बचाव में कहते हैं कि उनने आईपीएस, इंस्पेक्टर, पत्रकार आदि के एक बेहद बड़े रैकेट को पकड़ा और इनको लेकर संवेदनशील रिपोर्ट सीएम आफिस भेजी है, इसलिए ये लोग साजिश कर फंसा रहे हैं. पर उनका ये जवाब किसी के गले नहीं उतर रहा. पहली बात तो वीडियोज में बेहद निजी संबंध वाली बातचीत है. आखिर महिला पर भरोसा तो खुद उस पुरुष ने ही किया है, जो वीडियो में दिख रहा है.

सेकेंड, जब आप इतने बड़े तंत्र के मालिक होने के बावजूद एक महिला जिससे आप प्राइवेट बातचीत कर रहे हैं, वीडियो काल पर, पता नहीं लगा पाए कि वह महिला कैसी है, क्या वह आपको ट्रैप तो नहीं कर रही, तो फिर आपके उन आरोपों को कैसे सच माना जाए जिसमें आप कह रहे हैं कि आपके खिलाफ साजिश रची गई.

मतलब साफ है, साजिश रचने वाले आपसे ज्यादा चालाक और समझदार हैं जो आपको ट्रैप में लेने में कामयाब हो गए. तो इतने बड़े पद पर बैठा आदमी अगर खुद की निजता की रक्षा न कर सकेगा तो वह इतने बड़े जिले के लोगों को क्या न्याय दिलाएगा. पत्रकारों की गिरफ्तारी प्रकरण से तो यह साबित हो ही चुका है कि खबरों की खुन्नस से खार खाए एक कप्तान ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर, मानवाधिकारों का हनन कर निर्दोष पत्रकारों को न सिर्फ आतंकवादियों की तरह पकड़ा, बल्कि उन्हें रिमांड पर टार्चर किया, फिर जेल में सड़ने को डाल दिया. वे पत्रकार आज भी जेल में हैं. जाने कौन सा भय है कि हाईकोर्ट के जज ने जमानत पर फैसला सुरक्षित करने के बावजूद महीनों से हां या ना कुछ भी फाइनल ऑर्डर सुनाया ही नहीं.

उधर, कुछ लोग वैभव कृष्ण के अपने बचाव में दिए गए बयान को बचकाना मान रहे हैं. इनका कहना है कि यहां मामला सीएम आफिस या रैकेट से जुड़ा है ही नहीं. यहां सिर्फ मसला दो बालिग लोगों के बीच निजी संबंध बनाने को लेकर लगातार की जा रही वीडियो कालिंग से जुड़ा है. वीडियो में जो पुरुष है, उसे युवती पर पूरा भरोसा है, तभी वो अपने लिंग का सांकेतिक प्रदर्शन करता है. युवती अपने स्तर से पूरी तरह इस बात के लिए तत्पर है कि वह एक आईपीएस को ट्रैप कर रही है, उनके वीडियो काल्स की चुपचाप वीडियो रिकार्डिंग करा रही है.

ऐसे में सवाल खुद वीडियो में दिखने वाले पुरुष के विवेक का है. अगर पुरुष किसी बड़े जिम्मेदार पद पर है, तो उसे एक अनजान युवती के भरोसे में आ जाने और फिर निजी बातचीत वीडियो काल्स पर करने का रिस्क लेने की क्या जरूरत थी. बड़े पदों पर बैठे लोगों के निजी जीवन की भी एक मर्यादा होती है. इस मर्यादा के छिन्न भिन्न होने के गवाह हैं ये वीडियो.

फिलहाल तो वीडियो कितने सही हैं या कितने गलत, इनके बारे में दावे से तभी कहा जा सकता है कि जब इनका लैब में टेस्ट हो जाए. पर प्रथम दृष्टया जो कह कर ये वीडियो और स्क्रीनशाट प्रसारित किए गए हैं, उससे यही चर्चा है कि वीडियो में नोएडा के पुलिस कप्तान वैभव कृष्ण हैं. इन वीडियोज के वायरल होते ही वैभव कृष्ण को सफाई देने सामने आना पड़ा. नोएडा पुलिस की मीडिया सेल की ओर से भी एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है.

इसी मसले पर 4पीएम वाले संजय शर्मा का लखनऊ से जो अगला ब्राडकास्ट वाट्सअप पर आया, वो ये है-

”एसएसपी नोएडा को सुनिये और कुछ बिंदुओं पर सोचिये. कप्तान साहब कह रहे हैं कि कुछ बहुत संवेदनशील मामलों में उन्होंने सीएम कार्यालय को रिपोर्ट भेजी तो कुछ लोग नाराज़ हो गये. उनका मानना है कि इन्हीं लोगों ने यह चैट वायरल की. कप्तान साहब अगर आपकी रिपोर्ट इतनी ही संवेदनशील है तो आप कहना क्या चाह रहे हैं? आपकी गुप्त रिपोर्ट क्या आपके दफ़्तर ने लीक की या फिर सीएम दफ़्तर ने? यह आरोप आपकी चैट से भी ज़्यादा गंभीर है. आपकी चैट में कही भी यह साबित नहीं हो रहा कि आप ज़बरदस्ती कर रहे हैं तो यह दो लोगों के बीच आपसी सहमति से बन रहा संबंध साबित होगा. पर आपके और सीएम दफ्तर के बीच की रिपोर्ट लीक हो रही है तो यह गंभीर बात है. दूसरा अपने ऊपर लगे इस आरोप पर सीएम दफ़्तर को बीच में घसीटना सही नहीं लगता.”

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लेखक यशवंत सिंह भड़ास के ए़डिटर और फाउंडर हैं. संपर्क- वाट्सअप 9999330099

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