आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने रिकॉर्ड किया नया गाना ‘मजबूरियां’

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आई.ए.एस डॉ. हरिओम एक बेहतरीन सिंगर होने के साथ-साथ कमाल के साहित्यकार भी हैं. कहा जाता है कि, कला की कोई सीमा नहीं होती और इसी सार्थक करते हुये डॉ हरिओम का एक छुपा रूप सबके सामने आ गया या यूँ कह लीजिये कि, अब पूरी दुनिया इनके साहित्यिक और गायक रूप को देख और सुन पायगी. हो सकता है निकट भविष्य में ये एक्टिंग में भी अपने हाथ अजमाते नजर आये.

प्रशासनिक सेवा में कार्यरत होने के बाद भी एक इंसान में इतनी विविधताएं होना थोड़ा हैरत में डाल देता है. फिलहाल यहाँ हम बात कर रहे हैं उनके गायक रूप की. गाने का नाम है “मजबूरियां”. किशोर के लिखे इस गाने को संगीत से शानदार बनाया संगीतकार राज महाजन ने. एक इंसान में जीवन में क्या-क्या मजबूरियां हो सकती हैं जिनके चलते पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. इसी की झलक लिए यह गाना पछले दिनों रिकॉर्ड क्या गाया मोक्ष म्यूजिक में. राज महाजन के निर्देशन में गायक हरिओम की आवाज़ में ये गाना कुछ अलग ही बन पड़ा है.

इसे पहले भी डॉ हरिओम मोक्ष म्यूजिक के “यारा वे” और “सोचा न था जिंदगी” जैसे बेहतरीन गानों में अपनी आवाज़ का करतब दिखा चुके हैं. मोक्ष म्यूजिक और राज महाजन से अपने रिश्तों के बारे में डॉ हरिओम काफी खुल कर बात करते हुए नजर आये. रिकॉर्डिंग के दौरान हुई बातों का सिलसिला काफी लम्बा चला.

अपने इस गाने के बारे में हरिओम कहते हैं, “यह गाना मेरे गाये हुये पिछले दोनों से अलग है. इसमें काफी मुश्किल सुर लगाने थे क्यूंकि गाने की डिमांड ही कुछ ऐसी थी. इस बार राज ने (जो कि मेरे काफी अच्छे दोस्त भी हैं) काफी बेहतरीन और अलग गाना बनाया है जो मार्किट में आने के बाद खुद को आसानी से लोगों से जोड़ लेगा. ज़िन्दगी में इंसान कभी न कभी खुद को मजबूर महसूस करता होगा. बस इसी बारे में यह गाना है. इसे रिकॉर्ड करने का मेरा एक्सपीरिएंस काफी अलग रहा. मैं खुद को आसानी से जोड़ पाया इससे. लगा ही नहीं कि, कोई गाना गा रहा हूँ. कहीं-कहीं कुछ अप्स-डाउन भी रहे तो उसके लिए राज तो साथ में थे. इस गाने के लिए एक बात कहना चाहता हूँ. जिस चीज़ से एक आम आदमी खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है वो हमेशा कामयाब रहती है.”

राज हमेशा कुछ लीक से हटकर करने में यकीं रखते हैं. उनके मुताबिक इस गाने (मजबूरियां) को कोई भी डॉ. हरिओम से बेहतर गा ही नहीं सकता था. इसलिए नहीं कि वो मेरे मित्र हैं, बल्कि इस गाने को जितनी गहराई की जरुरत थी वो मुझे हरिओम जी की आवाज़ में नजर आई. जितना मर्म और लगाव इस गाने की आवश्यकता थी उतना ही हरिओम जी के गले से निकला. न कम न ज़्यादा. ये गाना सेमी गज़ल है. बहुत ही ठहराव से इसे निभाया गया है. गाना आम इंसान की ज़िन्दगी को छूता है, इसलिए लोग इसे पसंद करेंगे ऐसा मेरा मानना है.

एक आई.ए.एस अधिकारी अनुशासित जीवन जीते हैं. ऐसे में इस तरह की कलात्मकता जिसमें गाने के साथ लिखना भी शामिल हो. इस बारे में डॉ हरिओम कहते हैं, “मुझे कॉलेज के ज़माने से ही लिखने का बहुत शौक था. लिखना शुरू किया फिर गाना भी शुरू किया और हो सकता है आप फ्यूचर में मुझे कुछ और करते हुए भी देख सकते हैं. ऐसा बिक्कुल नहीं हैं कि आई.ए.एस ऑफिसर गा-बजा नहीं सकता. अपने शौक को मारकर जिंदगी जीना नीरस होता है. जो भी आपका शौक है उसे पूरा कीजिये.” वही राज भी हरिओम की बातों से इतेफ़ाक रखते हुये कहते हैं, “वाकई में अपनी चाहतों का गला घोंट कर जीना बिलकुल बेमानी है. आपकी चाहतें आपको जिन्दा रखती हैं. आपको तरो-ताज़ा रखती है जिससे जिंदगी जीने की और काम करने की ललक बनी रहती है.”

फ्यूचर प्रोजेक्ट्स को लेकर संगीतकार राज महाजन और डॉ. हरिओम काफी उत्साहित नजर आ रहे थे. बहुत जल्द अपने और भी कई बेहतरीन प्रोजेक्ट्स लिए एक बार फिर आपके साथ होंगे.

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