देसी ब्वाय से ब्याह रचा विदेशी छोरी गाई- ‘नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया’, देखें वीडियो

ताज नगरी आगरा के जिला मुख्यालय पर देसी ब्वाय विनीत से विदेशी छोरी जैकलीन ने ब्याह रचाया. विदेशी छोरी को किस कदर देसी ब्वाय ने ट्रेंड किया है, यह तब पता चला जब विदेशी बाला ‘लकड़ी की काठी..’ और ‘नानी तेरी मोरनी…’ गा कर सुनाने लगी. Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मैनेजिंग एडिटर पद पर आसीन किसी पत्रकार का पहला म्यूजिक एलबम होने वाला है रिलीज, सुनें कुछ अंश

राणा यशवंत टीवी न्यूज इंडस्ट्री में पहले ऐसे मैनेजिंग एडिटर होंगे जिनकी रची ग़ज़लों का एलबम आ रहा है. राणा यशवंत इंडिया न्यूज चैनल में मैनेजिंग एडिटर पद पर कार्यरत हैं. राणा यशवंत टीवी न्यूज इंडस्ट्री में एक अलग मायने का नाम है. अलग सोच, अलग तबीयत, अलग फलसफा और कुछ अलग करने की धुन. …

यूपी के इस सीनियर IAS अफसर को संगीत से है बेहद प्रेम, सुनिए ये ताजी पेशकश

नाम है डा. हरिओम. यूपी कैडर के सीनियर आईएएस अधिकारी हैं. पैशन है गायकी, संगीत, सुर, लय और ताल. कई एलबम आ चुके हैं. इनकी लिखी एक ग़ज़ल अभी हाल में ही इन्हीं की आवाज़ में संगीत प्रेमियों के सामने आई है जिसे बेहद पसंद किया जा रहा है. Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और …

ग्वालियर में मैंने तानसेन को देखा… वीडियो देखें

Yashwant Singh : ग्वालियर गया था. आलोक तोमर जी की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में. वहां तानसेन मिल गए. उनको देखा महसूसा तो लगा कि अब इस देश में कबीर होना, तानसेन होना असंभव-सा हो गया है. वैसे प्रकृति का नियम बहुत जब्बर होता है. बहुत उल्टे माहौल, खराब पर्यावरण, प्रतिकूल तापमान में भी …

इन दो शानदार लोक गीतों और एक जानदार लोक कविता को अब तक नहीं सुना तो फिर क्या सुना… (देखें वीडियो)

जनता के बीच से जो गीत-संगीत निकल कर आता है, उसका आनंद ही कुछ और होता है. अवधी हो या भोजपुरी. इन देसज बोलियों की लोक रंग से डूबी रचनाओं में जो मस्ती-मजा है, वह अन्यत्र नहीं मिलता. नीचे तीन वीडियोज हैं. सबसे आखिर में जाने माने कवि स्व. कैलाश गौतम की रचना है, उन्हीं की जुबानी- ‘अमउवसा का मेला’. जो लोग इलाहाबाद में कुंभ-महाकुंभ के मेलों में जाते रहे हैं, उन्हें इस कविता में खूब आनंद आएगा.

अजराड़ा घराने के उस्ताद को संतूर शिरोमणि भजन सोपोरी ने यूं दी श्रद्धांजलि (देखें वीडियोज)

Yashwant Singh : क्या ग़ज़ब बजाते हैं भजन सोपोरी. इस संतूर उस्ताद को पहली बार लाइव देखा सुना. मेरठ के आरजी कालेज आडिटोरियम में आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शिरकत करने आए पंडित भजन सोपोरी को देखकर लग नहीं रहा था कि यह शख्स सन 1948 की पैदाइश है. वही चेहरा मोहरा और अंदाज जो उन्हें हम लोग तस्वीरों-वीडियोज में देखते-सुनते आए हैं. इस आयोजन में मैं अपने सीनियर रहे आदरणीय Shrikant Asthana सर के साथ पहुंचा था.

योगी को जेल भेजने वाले आईएएस अधिकारी हरिओम पर आज उनका ही अपना एक गाना एकदम फिट बैठ रहा

म्यूज़िक कंपनी ‘मोक्ष म्यूज़िक’ और संगीतकार राज महाजन के करीबी माने जाने वाले आईएएस अधिकारी डॉ. हरीओम से ऐसी क्या गलती हुई जिसका हर्जाना उन्हें आज 10 साल बाद भरना पड़ रहा है? आज के हालातों में गाया हुआ उनका अपना ही गाना ‘सोचा न था, जाना न था, यूँ हीं ऐसे चलेगी ज़िन्दगी’ उन पर एक दम सूट कर रहा है. आज से दस साल पहले IAS अधिकारी डॉ. हरीओम ने सांसद ‘योगी आदित्यनाथ को भेजा था जेल.  बस… यही थी उनकी खता जिसे आज वह भुगत रहे हैं.

दुनियादारी की हाय हाय में कुछ पल संगीत, भजन, बुद्धत्व, मोक्ष, मुक्ति के नाम…

Yashwant Singh : आज मोबाइल से फोटो वीडियो डिलीट कर रहा था तो एक वीडियो बचा लिया. यह वीडियो मैंने अपने मोबाइल से इंदौर में बनाया था. मौका था वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र शाह की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम का. इस वीडियो को यूट्यूब पर अपलोड किया.

बॉब डिलन का एक गीत “Masters of War” तो वाकई क़माल का है!

Om Thanvi : बीकानेर में छात्रजीवन में मेरे कमरे की दीवार पर बॉब डिलन का एक पोस्टर चिपका रहता था, लाल और काले महज़ दो रंगों में। JS (जूनियर स्टेटसमन) में कुछ अंकों में क़िस्तों में छपा था, जोड़कर टाँग दिया। मगर डिलन के बारे में जाना बाद में। उनका काव्य, उनके गीत और गान। फिर बरसों बाद कवि-मित्र लाल्टू ने डिलन के गीतों का एक कैसेट दिया। मैंने उसे आज तक नहीं लौटाया। अक्सर उसे सुना और अपनी सम्पत्ति बना लिया।

आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने रिकॉर्ड किया नया गाना ‘मजबूरियां’

आई.ए.एस डॉ. हरिओम एक बेहतरीन सिंगर होने के साथ-साथ कमाल के साहित्यकार भी हैं. कहा जाता है कि, कला की कोई सीमा नहीं होती और इसी सार्थक करते हुये डॉ हरिओम का एक छुपा रूप सबके सामने आ गया या यूँ कह लीजिये कि, अब पूरी दुनिया इनके साहित्यिक और गायक रूप को देख और सुन पायगी. हो सकता है निकट भविष्य में ये एक्टिंग में भी अपने हाथ अजमाते नजर आये. प्रशासनिक सेवा में कार्यरत होने के बाद भी एक इंसान में इतनी विविधताएं होना थोड़ा हैरत में डाल देता है. फिलहाल यहाँ हम बात कर रहे हैं उनके गायक रूप की. गाने का नाम है “मजबूरियां”. किशोर के लिखे इस गाने को संगीत से शानदार बनाया संगीतकार राज महाजन ने. एक इंसान में जीवन में क्या-क्या मजबूरियां हो सकती हैं जिनके चलते पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. इसी की झलक लिए यह गाना पछले दिनों रिकॉर्ड क्या गाया मोक्ष म्यूजिक में. राज महाजन के निर्देशन में गायक हरिओम की आवाज़ में ये गाना कुछ अलग ही बन पड़ा है.

जयपुर के पत्रकार दुष्यंत का लिखा गीत ‘बावलीबूच’ इन दिनों धूम मचा रहा है

रणदीप हुड्डा की 22 अप्रैल को रिलीज हो रही फिल्म ‘लाल रंग’ का गीत ‘बावलीबूच’ 2 अप्रैल को यूट्यूब पर आया, एक हफ्ते में ही 2 लाख से अधिक बार देखा गया. हरियाणा केंद्रित फिल्म का यह गीत भी हरियाणवी अंदाज का देसी रोमांटिक गीत है.

कहां तक ये मन को, अंधेरे छलेंगे, उदासी भरे दिन, कभी तो ढलेंगे… (सुनें)

कई फिल्मी गीत ऐसे हैं जो ढेर सारी आध्यात्मिक उपदेशात्मक बातों से बड़ी बातें कह समझा जाते हैं, वह भी बहुत थोड़े वक्त में और बहुत प्यार से. ऐसा ही एक गीत है किशोर कुमार की आवाज में. गीतकार योगेश हैं. संगीतकार राजेश रोशन. फिल्म है ‘बातों बातों में’ जो वर्ष 1979 में रिलीज हुई थी. इसका ये गाना आज भी बहुत पापुलर है: ”कहां तक ये मन को, अंधेरे छलेंगे…”. ये ऐसा गीत है जब कई किस्म के मन-मिजाज के वक्त सुना जा सकता है. जब ध्यान में जाने का दिल हो रहा हो तो इसे सुनें. जब अकेले चाय पीते हुए सिगरेट के छल्ले बनाने का मन कर रहा हो तो इसे सुनें.

मेहदी हसन की वापसी

गुरबत के दिनों में किसी घिसी हुई पतलून की जेब से कभी लापरवाही से रख छोड़े पैसे हाथ लग जायें तो कैसा महसूस होगा? मेहदी हसन की इन अनसुनी ग़ज़लों का खजाना हाथ लग जाने के बाद मुझे कुछ ऐसा ही लग रहा है। सदा-ए-इश्क मेरी जानकारी में मेहदी हसन साहब का अंतिम एल्बम था जो म्यूजिक टूडे वालों ने वर्ष 2000 के आस-पास निकाला था। इसके बाद केवल एक ग़ज़ल “तेरा मिलना बहुत अच्छा लगे है, मुझे तू मेरे दुःख जैसा लगे है” सुनने में आयी थी जो उन्होंने लता मंगेशकर के साथ गायी थी। इस ग़ज़ल में दोनों गायकों ने अपना-अपना हिस्सा भारत और पाकिस्तान में रेकार्ड किया था और बाद में इसकी मिक्सिंग भारत में हुई। एक साथ इन दो बड़े कलाकारों की यह संभवतः इकलौती और ऐतिहासिक प्रस्तुति थी। ग़ज़ल उन्हीं दिनों में सुनने में आयी जब मेहदी हसन साहब बीमार चल रहे थे और अपन ने भी मान लिया था कि इस खूबसूरत ग़ज़ल को खाँ साहब की अंतिम सौगात समझ लेना चाहिये।

पी7 के आंदोलनकारी पत्रकारों की इस छिपी प्रतिभा को देखिए

Yashwant Singh : आंदोलन अपने आप में एक बड़ा स्कूल होता है. इसमें शरीक होने वाले विभिन्न किस्म की ट्रेनिंग लर्निंग पाते हैं. सामूहिकता का एक महोत्सव-सा लगने लगता है आंदोलन. अलग-अलग घरों के लोग, अलग-अलग परिवेश के लोग कामन कॉज के तहत एकजुट एकसाथ होकर दिन-रात साथ-साथ गुजारते हैं और इस प्रक्रिया में बहुत कुछ नया सीखते सिखाते हैं. पी7 न्यूज चैनल के आफिस पर कब्जा जमाए युवा और प्रतिभावान मीडियाकर्मियों के धड़कते दिलों को देखना हो तो किसी दिन रात को बारह बजे के आसपास वहां पहुंच जाइए. संगीत का अखिल भारतीय कार्यक्रम शुरू मिलेगा.