नवतेज टीवी के धोखेबाज प्रबंधकों का नया कारनामा : कर्मियों को चेक देकर वापस लिया और चुपके से चैनल बेच दिया!

26 मई को क्वारंटाइन के नाम पर झूठ बोलकर अपनी दुकान बंद करने वाला नवतेज टीवी बार-बार धोखेबाज़ी, फरेब और चार सौ बीसी करने से बाज़ नहीं आ रहा है

नवतेज टीवी के फ्रॉड मैनेजमेंट ने अब अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को फर्जी चेक देकर ठगा है… पीड़ित पत्रकार अब पुलिस, प्रशासन व न्यायालय के जरिए ठगों को जेल भिजवाने की कर रहे तैयारी….

हम भड़ास और उसके पाठकों के ध्यान में एक बहुत जरूरी बात लाना चाहते हैं कि जिस (A-110, मैजिस्टिक टावर, सेक्टर-4, नोएडा) ऑफिस में नवतेज टीवी के प्रबंधक लोग पत्रकारिता का धंधा कर रहे हैं, वो पूरा सेटअप कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का है। इसकी देख-रेख कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रोमिला सिब्बल का खास आदमी दीपक चौधरी करता है।

इसी ऑफिस में एक साल पहले तिरंगा टीवी में वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त और उनकी टीम को भी कपिल सिब्बल द्वारा ठगा गया था।

अब अनुराग पांडेय और रोहित तिवारी कपिल सिब्बल का नाम लेकर धोखाधड़ी का धंधा चला रहे हैं।

नवतेज टीवी के धोखेबाज़ Editor in Chief रोहित तिवारी और फ्रॉड CEO अनुराग पांडेय ने अपना चैनल किसी को बेच दिया है। नए मालिक को ये झांसा दिया है कि नवतेज का 2.5 करोड़ रुपया कपिल सिब्बल के पास जमा है, वो पैसा उनकी डील में एडजस्ट हो जाएगा। बकाया सेलरी चैनल खरीदने वाले नए मालिक से देने को कहा।

नवतेज टीवी के पूर्व कर्मचारियों की सैलरी फ्रॉड चैनल नवतेज टीवी की पुरानी और नई धोखेबाज़ मैनेजमेंट की जालसाज़ी में फंस गई है।

लेकिन नवतेज टीवी के सताये हुए कर्मचारी ये ठान चुके हैं कि जब तक वो एक-एक कर्मचारी की मेहनत की सैलरी फ्रॉड रोहित तिवारी और धोखेबाज़ अनुराग पांडेय और नई मैनेजमेंट जिसके मालिक का नाम शायद गौरव है, से नहीं निकलवा लेते, तब तक चुप नहीं बैठेंगे। उनका ये प्रदर्शन आखिरी सांस तक जारी रहेगा।

नवतेज टीवी की धोखाधड़ी की शुरुआत कैसे हुई, अब जरा वो समझिए।

धोखेबाज़ी के इस गंदे खेल की शुरआत 26 मई 2020 को उस वक़्त हुई थी जब फ्रॉड CEO अनुराग पांडेय और नकली Editor In Chief रोहित तिवारी ने कर्मचारियों को अप्रैल, मई की सैलरी दिए बिना ही अपनी दुकान क्वारंटाइन के नाम पर बन्द कर दी थी।

उस वक़्त धोखेबाज़ Editor In Cheif रोहित तिवारी और CEO अनुराग पांडेय ने खुद आगे ना आकर अपने चमचे से ये घोषणा करवाई की चैनल 14 दिन बाद 10 जून से चलेगा। सबको 10 जून तक छुट्टी की सैलरी भी दी जाएगी। बता दें कि ये चमचा वही शख्स है जो सभी कर्मचारियों को सैलरी देता था।

इसी दौरान जब कुछ कर्मचारियों ने अप्रैल की सैलरी की मांग की तो झूठे HR नवीन जैन ने सबसे अकाउंट नम्बर ले लिए और 5 जून को सबके अकाउंट में सैलरी भेजने की बात कही।

5 जून को सैलरी नहीं आई। उसके बाद फ्रॉड मैनेजमेंट की तरफ से कहा गया कि 10 जून को जब सब मिलेंगे तो अप्रैल और मई दोनों महीने की सैलरी दे दी जाएगी। मैनेजमेंट के झूठे आश्वासन पर एक बार फिर कर्मचारियों ने भरोसा किया।

10 जून को जब कर्मचारियों ने अपनी-अपनी ऑफिस शिफ्ट का टाइम पूछा तो मैनेजमेंट ने 4-5 दिन बाद चैनल खोलने का खोखला दावा किया।

लेकिन 13 जून की शाम को अचानक फ़र्ज़ी मैनेजमेंट का एक तुगलकी फरमान आउटपुट हेड प्रेम शंकर सिंह के द्वारा व्हाट्सएप्प ग्रुप में डलवाया गया। इस फरमान में लिखा था कि 10 जून के बाद से आप सभी फ्री हैं और चैनल फिलहाल बंद रहेगा। आप सभी की अप्रैल, मई और 10 जून तक की तनख्वाह 16 से 20 जून के बीच में दे दी जाएगी।

चैनल बंद होने और 2 महीने 10 दिन की सैलरी फंसने के डर से कई कर्मचारी डिप्रेशन में चले गए। ऊपर से मकान मालिक और राशन वाले के तानों ने पत्रकारों पर मेंटल टॉर्चर शुरू कर दिया।

किसी तरह 20 जून भी आ गई। लेकिन सैलरी नहीं आई। मैनेजमेंट की तरफ से एक और नई तारीख कर्मचारियों को थमा दी गई। मैनेजमेंट ने 20 जून को एक हफ्ते बाद सैलरी देने का दावा ठोका।

लेकिन कर्मचारियों ने 22 जून से अपने हक की लड़ाई को लड़ना शुरू किया।

नवतेज टीवी के ठगे हुए कर्मचारी 2 बार नोएडा DM के ऑफिस, 1 बार एडिशनल DCP के ऑफिस, 2 बार लेबर कोर्ट, 1 बार सेक्टर 20 थाना, 1 बार चोर CEO अनुराग पांडेय के घर, 2 बार डायल 100 पीसीआर और लगभग हर रोज चैनल की बिल्डिंग के बाहर धरना प्रदर्शन करते रहे।

लेकिन सत्ता तक पहुंच रखने वाले और प्रशासन को अपनी जेब में समझने वाले अनुराग पांडेय, रोहित तिवारी और इनके चमचे राम पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

इसी बीच अनुराग पांडेय और रोहित तिवारी ने नवतेज टीवी को बेचने के लिए लखनऊ की एक कंपनी को फंसाया। इस काम में उनका साथ दिया इनपुट एडिटर प्रशांत ने। इसने लखनऊ पार्टी को सेट किया और पीड़ित पत्रकारों का हिमायती बनकर उन्हें डील होने के बाद सैलरी का भरोसा दिलाया।

लेकिन जब कुछ कर्मचारी इनपुट हेड प्रशांत की बातों में भी नहीं आये तो नवतेज मैनेजमेंट ने उन्हें 3 तारीख की शाम को बुलाकर सिर्फ 2 महीने की सैलरी का चेक दे दिया। कंपनसेशन तो छोड़िए, 10 दिन की सैलरी भी मार ली। ये चेक 9 जुलाई की तारीख का था। इसलिए चेक मिलने से गुस्साए कर्मचारी शांत हो गए और इसी का फायदा उठाकर रोहित तिवारी और अनुराग पांडेय की फ्रॉड कंपनी ने चैनल बेच दिया।

6 जुलाई को नए मालिक ने चैनल शुरू भी कर दिया।

नवतेज टीवी ने अपने कर्मचारियों की मेहनत की सैलरी हड़पने की ठान ली है इसलिए नवतेज टीवी ने एक और षड्यंत्र रचा।

8 जुलाई की शाम को HR नवीन जैन ने उन 10 लोगों को फ़ोन किया जिन्हें चेक दे दिया गया था और 9 जुलाई को चेक कम्पनी को वापिस करके कैश पैसा ले जाने को कहा।

लेकिन 9 जुलाई को जब पीड़ित पत्रकार धोखेबाज मैनेजमेंट की बात को मानते हुए अपनी मेहनत की सैलरी कैश में लेने और चेक लौटाने को पहुंचे तो मैनेजमेंट ने चेक जमा करने और बाद में कैश लेने की फ्रॉड शर्त रख दी। लेकिन पत्रकारों ने उनकी इस झूठी और खोखली शर्त को ठुकरा दिया।

याद हो, मैनेजमेंट ने खोखला चेक देने के बाद हम पीड़ित पत्रकारों से भड़ास को भी ये मैसेज करवाया था कि नवतेज टीवी मैनेजमेंट ने ज्यादातर कर्मचारियों को चेक दे दिया है।

लेकिन नवतेज टीवी का काला चेहरा एक बार फिर अब बेनकाब हो गया है। नवतेज टीवी का नया मैनेजमेंट किसी भी तरीके से पत्रकारों से चेक वापस लेकर उन्हें धोखा देना चाहता है।

लेकिन पत्रकारों ने ठान ली है कि नवतेज टीवी की मैनेजमेंट को इस धोखेबाजी में कामयाब नहीं होने देंगे क्योंकि अभी लगभग 40 कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें चेक भी नहीं दिया गया था। वो वैसे ही भटक रहे हैं और भूखे मर रहे हैं।

नवतेज टीवी के सभी पीड़ित कर्मचारी ये कसम खाते हैं कि जब तक कोरोना काल में दिन-रात काम करने का उन्हें वेतन नहीं मिल जाता तब तक वो चैन से नहीं बैठेंगे और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

धन्यवाद

नवतेज टीवी के सभी संघर्षरत कर्मी

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