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यूपी की एक जेल के भीतर की रीयल जिंदगी देखें… क्या कुछ नहीं होता यहां… देखें वीडियो

झांसी जेल में सजा काट चुके कुछ कैदियों ने अंदर बनाए गए वीडियो को रिपोर्टर मधुर यादव को सौंपा…..  झांसी के पत्रकार मधुर यादव  ने जोरदार खुलासा किया है. उन्होंने झांसी की जेल के भीतर के रीयल फुटेज पब्लिक डोमन में लेकर आए हैं. इन फुटेज को देखने से पता चलता है कि जेल के भीतर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. वीडियो से साफ जाहिर है कि जेल के अंदर दुकानें सजती हैं जहां कैदियों को जिला कारगार प्रशासन की मदद से ऊंचे दामों में सामान बेचा जाता है.

झांसी जेल में सजा काट चुके कुछ कैदियों ने अंदर बनाए गए वीडियो को रिपोर्टर मधुर यादव को सौंपा…..  झांसी के पत्रकार मधुर यादव  ने जोरदार खुलासा किया है. उन्होंने झांसी की जेल के भीतर के रीयल फुटेज पब्लिक डोमन में लेकर आए हैं. इन फुटेज को देखने से पता चलता है कि जेल के भीतर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. वीडियो से साफ जाहिर है कि जेल के अंदर दुकानें सजती हैं जहां कैदियों को जिला कारगार प्रशासन की मदद से ऊंचे दामों में सामान बेचा जाता है.

इन दुकानों पर बीड़ी सिगरेट, गुटखा, मिठाईयां और कच्ची शराब मिलती है. जेल के अंदर कैदियों को मोबाइल फोन ले जाने की छूट दी जाती है. झांसी जेल में सजा काट चुके कई कैदियों ने सजा के दौरान जेल के अंदर की हालत का मोबाइल पर वीडियो बनाते हुए स्टिंग कर लिया. झांसी जेल से सजा काट चुके कैदियों ने बाहर आकर स्टिंग का वीडियो रिपोर्टर मधुर यादव को सौंप दिया. इन भूतपूर्व कैदियों का कहना है कि जेल में ऐसा कोई अवैध काम नहीं है जिसे न किया जाता हो.

कैदियों द्वारा दिये गये वीडियो को देखने से पता चलता है कि जेल के अंदर जलेबी, शराब, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट,  सब्जी आदि धड़ल्ले से बिकती है और इनकी कीमत पहले से ही तय रहती है. हर रोज जेल प्रशासन को इस व्यापार से 1 लाख रुपए से ऊपर की कमाई होती है. जेलर कैदियों को उनकी काबिलियत के हिसाब से काम देता है. पूरी जेल को पुलिस नहीं बल्कि फिल्मों की तरह राइटर और लंबरदार चलाते हैं. इनकी संख्या करीब 40 के आस-पास है. हर बैरिक में 2 राइटर और लंबरदार को रखा जाता है. 

राइटर एक प्रकार से आला अधिकारी के पीए का काम करते हैं और लंबरदार के पास एक डंडा होता है जो पूरी जेल में घूम-घूम कर कमजोर कैदियों पर अत्याचार करता है. झांसी जेल में लगभग 1500 कैदी हैं जबकि यहां 470 कैदी रखने की ही व्यवस्था है. जेल के अंदर हाई क्वालिटी मोबाइल से लेकर कैदियों के पास सारे ऐश और आराम के समान होते हैं.

कैदी पसंद का खुद खाना खुद बनाते हैं

जो ज्यादा पैसे वाले होते हैं उनके लिए तो अंदर ही खाने की व्यवस्था हो जाती है। लेकिन मीडियम क्लास के कैदी जेल से मिलने वाले खाने में रोटियां ज्यादा लेते हैं। फिर उन्हें सुखाकर ईंधन के काम में लाते हैं। पूरी जेल में अलग-अलग जगह कैदी अपनी पसंद का खाना बनाते हुए दिख जाएंगे। जेल के अंदर 150 रुपए किलो के हिसाब से जलेबी मिल जाती है और बालूशाही का एक पीस 10 रुपए का मिलता है। इसकी कीमत जेलर तय करता है।

जन्म दिन पर बाहर से आता है केक

कैदी पैसे देने में सक्षम है तो उसके जन्मदिन पर बाकायदा बाहर से केक और दूसरे सामान मंगाए जाते हैं। इसकी उन्हें मुंह मांगी कीमत देनी पड़ती है। पूरी जेल में एक बिजनेस की तरह नेटवर्क चलता है। यदि कोई नया कैदी आता है तो उससे मशक्कत न कराने के नाम पर 300 रुपए वसूले जाते हैं। यदि कैदी पैसे वाला है तो 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक मशक्कत न कराने के नाम पर ले लिए जाते हैं। कैदी जब जेल के अंदर पैसे लेकर जाते हैं तो उनसे 10 पर्सेंट कमीशन वसूला जाता है। आरोप है कि ये सब सुपरिटेंडेंट राजीव शुक्ला, जेलर कैलाश चंद्र और डिप्टी जेलर संदीप भास्कर के इशारे पर होता है।

जेल के अंदर इन कैदियों का है वर्चस्व

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का झांसी जेल में जलवा है. जेल प्रशासन के संरक्षण में मुन्ना बजरंगी के गुर्गे आनंद लेते हैं.  जेल के अंदर एक सत्येंद्र है। यह गरौठा थानाक्षेत्र का रहने वाला है। मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। यह सुपरिंटेंडेंट का राइटर है। इसकी बैरक में 56 इंच की एलसीडी टीवी लगी हुई है। अपने पास गलैक्सी ए5 मोबाइल रखता है। यह जेल के अंदर कैंटीन चलवाता है। इसका मंथली इनकम 50-60 हजार रुपए महीने है। कैंटीन में एक लाख रुपए की रोज की बिक्री है।

गोलू नाम का युवक भी जेल में बंद है। ये मऊरानीपुर थानाक्षेत्र का रहने वाला है। मर्डर केस में आजीवन सजा काट रहा है। इसका काम है कैदियों को उनके रिश्तेदारों से मिलाई कराना और पर हेड 20 रुपए उनसे लेना। इसमें से वो खुद 5 रुपए रखता है, बाकी 15 रुपए जेलर के पास जाते हैं। जेल में बंद जितेंद्र मर्डर केस में आजीवन कारावास काट रहा है। इसके पास खाद्य सामग्री का चार्ज रहता है। यह अपने नेटवर्क द्वारा कैदियों के लिए आई सरकारी सामग्री को बाहर मार्केट में बिकवा देता है। इसका कमीशन इससे लेकर जेल प्रशासन तक पहुंचता है। जेल में बंद छोटे श्रीवास मर्डर केस में आजीवन सजा काट रहा है। इसका काम है जेल के अंदर जुआ खिलवाना और ब्याज पर कैदियों को पैसा बांटना। जेल में बंद कौशल रावत जेलर का राइटर है। यह सिर्फ जेलर का आदेश मानता है। जेलर के इशारे पर कैदियों को पीटता है।

इन वीडियोज और आरोपों के बारे में झांसी जिला कारागार के सुपरिटेंडेंट राजीव शुक्ल का कहना है कि उनके संज्ञान में वीडियो आया है. इसकी जांच कराई जा रही है. पता किया जा रहा है कि यह वीडियो कब का है और किन परिस्थितियों में बनाया गया है. यह पुष्टि हो जायेगी, तभी आगे कुछ कह पाना ठीक होगा.

देखें झांसी जेल के भीतर का हाल….

झांसी से मधुर यादव की रिपोर्ट. संपर्क : 8853719246 या [email protected]

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