मायावती के दबाव में बनी डीएसपी धीरेन्द्र राय के खिलाफ रिपोर्ट : अमिताभ ठाकुर

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने आज डीएसपी धीरेन्द्र राय को पत्र भेज कर रिटायर्ड आईपीएस बद्री प्रसाद सिंह द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के दवाब के कारण उनके खिलाफ रिपोर्ट लिखने के बारे में बताया है. ठाकुर ने कहा है बद्री प्रसाद ने पूर्व डीजी बृजलाल के ऑफिस में स्वयं बताया था कि वे इस मामले में जांच अधिकारी थे. तत्कालीन डीजीपी करमवीर सिंह और प्रमुख सचिव गृह फ़तेह बहादुर सहित सभी पुलिस और गृह विभाग के सभी अफसर चाहते थे कि ठोकिया द्वारा पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में धीरेन्द्र राय दण्डित नहीं हों क्योंकि उनकी कोई गलती नहीं थी.

पर चूँकि इस मामले में स्वयं मायावती का निर्देश था, अतः बद्री प्रसाद को वैसी ही रिपोर्ट देनी पड़ी. पत्र के अनुसार बद्री प्रसाद ने बताया था कि वे दोनों तरह की रिपोर्ट ले कर करमवीर सिंह के पास गए थे और आदेश मिलने पर दंड वाली रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जिस पर करमवीर सिंह ने उनकी काफी प्रशंसा की थी. ठाकुर ने कहा है कि वे अपनी बात के सम्बन्ध में कभी भी परीक्षित किये जाने को तैयार रहेंगे. नीचे वो पत्र है जो अमिताभ ठाकुर ने धीरेंद्र राय को भेजा है….

श्री धीरेन्द्र राय साहब,

नमस्कार,

मैं ठोकिया मुठभेड़ में आप पर हुई विभागीय कार्यवाही और इस सम्बन्ध में आप द्वारा एक लम्बे समय से लड़े जा रहे न्यायिक लड़ाई को बहुत करीब से देखता रहा हूँ. मैंने इस सम्बन्ध में आप द्वारा मा० इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दायर मुक़दमा धीरेन्द्र कुमार राय बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य (SERVICE BENCH No. – 768 of 2008) का निर्णय दिनांक 15/07/2010 भी पढ़ा है जिसमे अन्य बातों के अलावा यह भी लिखा था- “(II)Records have been fabricated by the authorities to initiate the disciplinary proceeding against the petitioner. Fraud has been committed to create evidence. Because of commission of fraud entire action vitiates.  (IV)In spite of information received and having sufficient time no backup was provided to the petitioner’s team right from 8.15 am to late in the night. Addl. Director General of Police, STF Shri Shailja Kant Mishra and SSP Chitrakoot as well as Superintendent of Police STF were duly informed and in case the additional force would have rushed to the spot in time incident would have not occurred. Petitioner has been made escape goat for extraneous reasons to save the authorities who fail to provide necessary backup force during and after the encounter.  (VI)Action taken against the petitioner does not only suffer from malice in law but seems to be oppressive.”

हाई कोर्ट के उपरोक्त विस्तृत और गहन आदेश से यह बात सामने आती है कि आपके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही करने के लिए अभिलेखों में हेराफेरी की गयी और इस फ्रॉड के कारण आपके खिलाफ की गयी कार्यवाही दूषित हो जाती है. यह भी कहा गया कि आपको इस मामले में अन्येतर कारणों से बलि का बकरा बनाया गया. मैं दिनांक 20/11/2013 को श्री बृज लाल, रिटायर्ड आईपीएस, तत्कालीन निदेशक सिविल डिफेन्स के सरकारी कक्ष में बैठा था कि समय लगभग 01 से 02 बजे के बीच रिटायर्ड आईपीएस श्री बद्री प्रसाद सिंह उनसे मिलने आये. बातचीत के क्रम में अकस्मात् आपका उल्लेख आ गया और इसी के साथ आपके द्वारा हाल में एफआईआर दर्ज कराने के लिए दायर किये मुकदमे का भी उल्लेख आ गया.

इस पर श्री बद्री प्रसाद सिंह ने बताना शुरू किया कि वे भी इस मामले अभियुक्त बनाए गए हैं यद्यपि अभी तक उनके पास कोई नोटिस नहीं आई है. उन्होंने बताया कि इस मामले में हुई विभागीय कार्यवाही उनके द्वारा सम्पादित की गयी थी. उन्होंने बताया कि किस प्रकार वे इस मामले को एक लम्बे समय तक रोके हुए थे क्योंकि वे भी आपकी ईमानदारी और कर्तव्यशीलता से पूर्णतः परिचित थे.

उन्होंने बताया कि सिर्फ वही नहीं उनके साथ तत्कालीन डीजीपी श्री करमवीर सिंह और प्रमुख सचिव श्री कुंवर फ़तेह बहादुर भी इस बात से सहमत थे कि श्री धीरेन्द्र राय एक सक्षम पुलिस अधिकारी हैं और यदि संभव हो तो उनकी मदद करनी चाहिए. लेकिन इसके साथ वे यह भी कहते थे कि चूँकि सुश्री मायावती, तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री धीरेन्द्र राय से व्यक्तिगत स्तर पर नाराजगी का भाव रखे हुए हैं, अतः बिना ऊपर से पूछे श्री राय की मदद नहीं की जा सकती है.

श्री बद्री प्रसाद सिंह ने यह भी बताया कि उन्होंने यह विभागीय जांच लम्बे समय तक अपने पास लंबित रखा हुआ था क्योंकि वे इस सम्बन्ध में ऊपर के निर्देश के लिए रुके हुए थे. उन्होंने बताया कि उन्होंने जब कभी इसके बारे में ऊपर के अधिकारियों से पूछा तो वे लोग यही कहते थे कि अभी रुके रहें, आगे बताया जाएगा. इस तरह मामला एक लम्बे समय तक यूँ ही लंबित रहा था. लेकिन दूसरी तरफ उन्हें लगातार एडीजी कार्मिक की ओर से इस लंबित कार्यवाही को समाप्त करने के लिए पत्र आते रहते थे जिससे वे परेशान रहते थे कि कहीं ऐसा ना हो कि वे ही कार्यवाही लंबित रखने पर दण्डित हो जाएँ. 

इसी तरह एक बार जब उन्होंने श्री करमवीर सिंह से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वे जल्दी ही इसके बारे में बताएँगे. फिर श्री करमवीर सिंह ने उन्हें बुला कर कहा कि वे चाहें तो इसे समाप्त कर दें क्योंकि मामले में कोई अधिक दम नहीं है. लेकिन इसी बीच उन्हें श्री फ़तेह बहादुर ने भी बुलाया और श्री बद्री प्रसाद सिंह के सामने श्री फ़तेह बहादुर ने स्व० शशांक शेखर सिंह, तत्कालीन कैबिनेट सचिव से फोन पर बात की जिन्होंने कहा कि वे तुरंत इस सम्बन्ध में अग्रिम निर्देश दे रहे हैं.

श्री बद्री प्रसाद सिंह ने हमें बताया कि वे जब श्री फ़तेह बहादुर के कक्ष में बैठे ही थे तभी स्व० शशांक शेखर का फोन आया कि सुश्री मायावती नहीं मान रही हैं और लगता है श्री धीरेन्द्र राय को दण्डित करना ही पड़ेगा. श्री फ़तेह बहादुर ने यह बात श्री बद्री प्रसाद को बतायी और कहा कि आगे इस सम्बन्ध में कोई अन्य निर्देश मिलेंगे. श्री बद्री प्रसाद के अनुसार उन्हें कुछ दिनों बाद श्री करमवीर सिंह द्वारा बुलाया गया जहां श्री करमवीर सिंह ने दुखी मन से कहा कि सुश्री मायावती नहीं मान रही हैं और अब श्री राय को दण्डित ही करना पड़ेगा. श्री करमवीर सिंह ने उन से पूछा कि आप कितने दिनों में अपनी जांच रिपोर्ट दे सकते हैं तो श्री बद्री प्रसाद ने कहा कि वे दस मिनट में अपनी रिपोर्ट दे सकते हैं.

श्री बद्री प्रसाद के अनुसार उनकी बात सुन कर श्री करमवीर सिंह हंस दिए और उन्होंने पूछा कि दस मिनट में कैसे रिपोर्ट तैयार हो जायेगी. इस पर श्री बद्री प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्होंने दोनों तरह के रिपोर्ट तैयार रखे हैं- एक दण्डित करने का और एक माफ़ करने का, ताकि जैसा निर्देश हो वे वैसा रिपोर्ट प्रस्तुत कर दें. उनकी यह बात सुन कर श्री करमवीर सिंह ने उनसे कहा कि आज समझ में आया पुलिस विभाग में उनकी इतनी इज्जत क्यों हैं. फिर श्री बद्री प्रसाद सिंह ने वहीँ डीजीपी ऑफिस में फोटोकॉपी करा कर कुछ ही समय में वांछित रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी और दूसरी रिपोर्ट नष्ट कर दी गयी.

चूँकि मैंने ये बातें अपनी व्यक्तिगत हैसियत में आपसी अनौपचारिक बातचीत में सुनी थी और चूँकि मैं इस सम्बन्ध में आपके स्तर पर लगातार न्याय के लिए किये जा रहे संघर्षों से पूर्णतया वाकिफ हूँ, अतः स्वयं लगातार पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के क्षेत्र में कार्यरत रहने के कारण मैं इसे अपना दायित्व समझता हूँ कि मैं आपको इन तथ्यों से अवगत कराऊं. मैं नहीं जानता ये तथ्य आपके किसी उपयोग के हैं अथवा नहीं, यह भी अच्छी तरह जानता हूँ कि इस पत्र में जितने भी लोगों का मैंने उल्लेख किया है संभवतः वे कभी भी इन बातों को स्वीकार नहीं करेंगे और शायद मुझ पर ही गलतबयानी का आरोप लगाएं. मेरी श्री बद्री प्रसाद सिंह ने कभी कोई व्यक्तिगत नाराजगी भी नहीं रही है.

लेकिन मुझे यह लगा कि मैं इस मामले में न्याय के पक्ष में रहूँ, भले इसके कारण मुझे व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की नाराजगी ही क्यों ना झेलनी पड़े. अतः मैं ये समस्त तथ्य अपनी व्यक्तिगत हैसियत में आपकी जानकारी हेतु इस पत्र के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ. मैं आपको यह आश्वस्त करना चाहूँगा कि इसके कही गयी हर बात मेरी याददाश्त के अनुसार पूरी तरह सही है, यद्यपि यह संभव है कि बातचीत का क्रम और कुछ डिटेल्स प्रस्तुत करने में गलती हो गयी हो. मैं आपको यह भी बताना चाहूँगा कि मैं अपनी कही बातों पर अंत तक कायम रहूँगा और इनके सम्बन्ध में किसी के भी सामने परीक्षित किये जाने को निरंतर तत्पर रहूँगा.

दिनांक- 13/12/2014
आपका,
अमिताभ ठाकुर
आईपीएस
लखनऊ

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