पत्रकार ने खोला ‘नून रोटी ढाबा’, रोजाना दस हजार रुपये कमा रहे!

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से 5 लाख रुपए लेकर शुरू किया कारोबार, सारे मीडियाकर्मियों को लेनी चाहिए प्रेरणा, एक दोपहर अपन ने भी शानदार भोजन का मुफ्त में उठाया लुत्फ… मीडियाकर्मियों के लिए गाजीपुर के एक पत्रकार ने नजीर कायम किया है. इस पत्रकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बैंक से 5 लाख रुपए लेकर ‘नून-रोटी ढाबा’ खोला. इस ढाबे में कई लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ रोजाना दस हजार रुपये तक की कमाई करना शुरू कर दिया है. एक दोपहर अपन भी इस ढाबे का स्वाद लेने भाई Ashish Rai Kaushik और Umesh Srivastava के साथ पहुंच गया. काफी बड़े एरिया में बने इस ढाबे के बेहद साफ सुथरे हवादार माहौल को देखकर मन प्रसन्न हो गया. इसमें चार चांद लगा दिया खटिया ने. जाते ही खटिया पर पसर कर सो गए. बाद में इसी खटिया पर बैठकर मजे में पकवानों का लुत्फ उठाया.

पत्रकार जितेंद्र सिंह यादव का कहना है कि घर-परिवार की आर्थिक मजबूती के लिए कुछ नया करने की सोच रहा था. इसी क्रम में ढाबा खोलने का विचार आया. जिस जगह ये ढाबा है वहां से ढेरों ट्रक गुजरते हैं. कई सारे गोदाम और कोल्ड स्टोरेज हैं. बगल में जंगीपुर है जहां व्यापारियों की अच्छी खासी भीड़ रहती है. तो, इन सब संयोगों के चलते ढाबे पर शाम के बाद काफी बड़ी संख्या में लोग आते हैं. जो भी यहां का एक बार खाना खा लेता है, फिर वह आए दिन आता रहता है. परिवार के साथ शहर से बाहर जाकर इत्मीनान से खाने के लिए यह एक अच्छी जगह है. मैंने पत्रकार भाई को बधाई दी और उनकी उद्यमिता की भावना की तारीफ की.

मैं उनकी बात सुनकर सोचने लगा कि चंद रुपयों के लिए जमीर गिरवी रखने वाले या चंद रुपये की नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाले पत्रकार भाई क्यों नहीं जितेंद्र सिंह यादव की तरह सोचते हैं. उन्हें किसी भी हालत में नौकर ही बने रहने की मानसिकता से उपर उठकर स्वरोजगार की तरफ क्यों नहीं बढ़ना चाहिए. जब एक पत्रकार थोड़े से प्रयास में अच्छी खासी कमाई कर सकता है, दूसरों को रोजगार दे सकता है तो अन्य पत्रकार भाई क्यों नहीं एक स्टार्टअप की तरफ कदम बढ़ाते हैं. फूड, एजुकेशन, हेल्थ, टूरिज्म आदि दर्जनों क्षेत्र हैं जहां कभी मंदी नहीं आती. इन सबमें नया और बेहतर करने की अनंत गुंजाइश है.

मैंने लजीज पकवान खिलाने के लिए भाई जितेंद्र सिंह यादव को धन्यवाद कहा, ढाबा खोलने की बधाई दी और सकारात्मक सोच के लिए सलाम ठोंका.

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं-

Neelabh Rai गाजीपुर में यह ढाबा कहा है सर? साथी को शुभकामनाएं।

Yashwant Singh बाबतपुर वाले रोड पर. तस्वीर में देखिए, एक मोबाइल नंबर दिया होगा, उस पर काल कर डिटेल पता कर लें.

Deepak Sharma बहुत बढ़िया, अनुकरणीय। अगर सब पत्रकार ऐसा कर लेते हैं तो वाकई भारतीय मीडिया विश्व में अपना उत्तम स्थान हासिल कर सकता है, वरना 140 वा नंबर तो है ही।।

Abhishek Tripathi साथी ने लड़ने की ठानी लेकिन यह ग्रास रूट लेवल पत्रकारों की लाचारी का भी एक पहलू है भैया…साथी को शुभकामनाएं 🏆

Aroon Kumar Sachaan : lachari apki soch me hai… Aap sirf dusre ki naukri kar sakte hai kyuki safe and secure future chahiye… Risk uthane ke liye jigra chahiye so sabme ho ta nahi…

Yashwant Singh लाचारी कतई नहीं है भाई. यह केवल जज्बे और सोच का खेल होता है. अगर गुलाम मानसिकता से हम उबर जाते हैं तो ही अपने उद्यम के बारे में सोच पाते हैं. अन्यथा लाखों रुपये महीने सेलरी पाने वाले लोग भी अपने उद्यम के बारे में नहीं पहल कर पाते. वह नौकरी में बने रहने और नौकरी बचाए रखने में पूरा जीवन खपा देते हैं.

Abhishek Tripathi सहमत हूं भैया, लेकिन लाखों लोग ऐसे हैं जो नौकरी करते हुए ही वो सब कुछ कर रहे हैं जो उनकी इच्छा और शौक हैं। हमीं बागड़ बिल्ले ऐसे हैं जो लंबा समय सेवा करते बिता देते हैं, जब ठोकर लगती है तो फिर मन को स्थिर कर अपने उद्यम की तरफ सोचते है 😢

Manish Srivastava पत्रकारों को इस तरह इज्जत की रोटी न खाने की आदत लग चुकी है भैया आप भी क्या बात कर रहे हैं वैसे ढाबा खोलने वाले स्वाभिमानी पत्रकार को मेरा सलाम।।दोस्त तुमने नजीर पेश की है.

Nitin Srivastava बुधवार को हम भी अपने जन्मस्थान गाजीपुर जा रहे , नून रोटी ढाबा पर खाना पक्का

Anil Pandey ढाबे से ज्यादा मुझे आकर्षित किया सुतरी वाली पलँगरी ने। प्लास्टिक की निवार के इस दौर में अभी भी सुतरी वाली पलँगरी-खटिया चल रही है।

Asheesh K Agarwal पूना में एक मल्टीनेशनल software कम्पनी के IT इंजीनियर ने समोसा का खोमचा लगाया है।

Ashish Rai Kaushik पत्रकार मित्र जितेंद्र सिंह यादव की हौसला अफजाई के लिए और पत्रकारों का दुख-सुख बयां करने के लिए आपका आभार।

Rakesh Singh नाम बहुत जबरदस्त है। बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।

Kamlesh Sharma आज के समय के हिसाब से सही फ़ैसला…

Girish Malviya चारपाई बड़ी ग़जब की है, शुभकामनाएं..

Anil Pandey सन से हाथ से काती गई सुतली से खटिया को बीना गया है।

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