कोरोना के नाम पर ‘पत्रिका’ ने तो अपनी पूरी दुकान ही समेट दी!

कोरोना के नाम पर पत्रिका ने अपनी दुकान समेटना शुरू कर दिया है ताकि इसमें लाइबलिटी कम रहे और एसेट ज्यादा। इसके चलते ही पत्रिका ने अपने बहुत सारे एडिशन बंद कर दिए हैं। पत्रिका आठ साल पहले मध्य प्रदेश में आया था और यहां छिंदवाडा, रतलाम, उज्जैन और सागर, सतना एडिशन बंद कर दिए हैं। इनके आफिस भी बंद कर दिए हैं।

पत्रिका ने दो साल पहले शुरू किया अपना कोयम्बटूर एडिशन बंद कर दिया है। वहीं मुम्बई में शुरू किया एडिशन पहला जन्म दिन भी नहीं मना सका और मर गया। मुम्बई एडिशन को भी ताला लगा कर अखबार छापना बंद कर दिया है। वहां के संपादक सिद्धार्थ भट्ट को जयपुर बुला लिया है। बाकी सारे स्टाफ को अग्रिम आदेश तक घर पर रहने को कहा गया है।

राजस्थान में भीलवाडा, बांसवाडा, बीकानेर श्रीगंगानगर और एडिशन पहले ही बंद किए जा चुके हैं। पत्रिका में इन दिनों बडे स्तर पर छटनी का काम चल रहा है। सारे कर्मचारियों की तनख्वाह आधी कर दी है। इन सबका नतीजा यह निकला कि पत्रिका अपने गढ़ राजस्थान में भी भास्कर से पिछड़ गया है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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One comment on “कोरोना के नाम पर ‘पत्रिका’ ने तो अपनी पूरी दुकान ही समेट दी!”

  • If anyone try to humiliate their worker than god give them punishment. Lord krishna said that karma is only worship.

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