एक न्यूज चैनल का बौद्धिक दिवालियापन (देखें वीडियो)

साधना न्यूज नामक एक न्यूज चैनल ने भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पर इसलिए मुकदमा किया है क्योंकि भड़ास पर छपी एक धारावाहिक व्यंग्य कथा ‘चांपना न्यूज’ को उसने खुद की कहानी मान लिया है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में यह मामला मजेदार मोड़ में है. कोर्ट की तरफ से मध्यस्थता कर रहे शख्स का कहना है कि चांपना न्यूज नामक संबंधित भड़ास की पोस्ट में तो कहीं साधना न्यूज या इसकी कंपनी शार्प आई प्राइवेट लिमिटेड का नाम ही नहीं है तो आपकी मानहानि कैसे हुई?

इस पर साधना न्यूज के वकील का जवाब है कि ये जो चांपना न्यूज नाम है, वह साधना न्यूज टाइप का ही लगता है, उच्चारण में, इसलिए हम लोगों की मानहानि हुई है. तब भड़ास के वकील की तरफ से कहा गया कि क्या चांपना न्यूज के अलावा किसी अन्य नाम से कोई कहानी लिखी जाए तो आपको दिक्कत तो नहीं होगी, यथा- ठोंकना न्यूज,  बेलना न्यूज, मापना न्यूज, खांसन न्यूज… इस पर साधना न्यूज का वकील चुप रह गया. इस पर कोर्ट में मामले की मध्यस्थता के लिए नियुक्ति किए गए सज्जन ने मुस्कराते हुए साधना न्यूज के वकील से पूछा- कहीं चोर की दाढ़ी में तिनका तो नहीं!

पूरे मामले को जानने के लिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें : https://www.youtube.com/watch?v=KSpA2G2jKEE


नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करके पूरे मामले को विस्तार से समझ सकते हैं…

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‘साधना न्यूज’ ने ‘चांपना न्यूज’ वाले व्यंग्य को दिल पर लिया, भड़ास पर मुकदमा ठोंका, जानिए कोर्ट में क्या हुआ

भड़ास पर ‘चांपना न्यूज’ नामक एक चैनल के बारे में पांच किश्तों में व्यंग्यात्मक खबर छपी. ‘चांपना न्यूज’ एक काल्पनिक नाम है, जिसे वर्तमान न्यूज चैनलों की दुनिया के अंदर का हाल बताने के लिए सृजित किया गया और उसके सहारे उसके बहाने पूरी अंतरकथा बताई गई. पर इस व्यंग्य को साधना न्यूज नामक चैनल नहीं पचा पाया और उसके कर्ताधर्ता चले गए दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट. वहां इन लोगों ने कहा कि योर आनर, दरअसल चांपना न्यूज नामक जिस चैनल की कहानी भड़ास में बताई गई है, वह उसी के साधना न्यूज नामक चैनल के बारे में है, इसलिए इस मानहानि कारक कंटेंट को रिमूव कराया जाए और अंतिम फैसला आने से पहले इस वेब पोर्टल को आदेशित किया जाए कि वह साधना न्यूज के बारे में कुछ न छापे.

कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से साधना न्यूज को मना कर दिया और ताजी सूचना ये है कि 28 मार्च को न्यायालय में सुनवाई के दौरान विद्वान न्यायाधीश महोदय ने साधना न्यूज और भड़ास4मीडिया को मीडिएशन में जाने को कहा है. यानि दोनों लोग मीडिएटर के साथ बैठकर मामले को बातचीत के जरिए सुलझा सकते हों तो सुलझा लें. इस पूरे मामले को कोर्ट में भड़ास की तरफ से वकील हिमाल अख्तर लड़ रहे हैं. एडवोकेट हिमाल अख्तर यह केस फ्री में इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसे मुकदमों के जरिए न्यू मीडिया की स्वतंत्र आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिसका हर आम ओ खास को विरोध करना चाहिए. एडवोकेट हिमाल अख्तर ने भड़ास के एडिटर यशवंत से बातचीत के दौरान कोर्ट में चल रहे इस केस के बारे में क्या क्या बताया, जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=YV-K85AjJIQ

‘चांपना न्यूज’ की पूरी सीरिज पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर एक एक कर क्लिक करते जाएं…

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट एक)

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एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट दो)

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एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट तीन)

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एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट चार)

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एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट पांच)

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‘चांपना न्यूज’ में बिना सेलरी के कार्यरत रहे थे ‘महीन कुमार’!

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लाला लाजपत राय को भाजपाई पटका पहनाने के मामले में कोर्ट ने किरण बेदी के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा

किरण बेदी अपनी मूर्खताओं, झूठ, बड़बोलापन और अवसरवाद के कारण बुरी तरह घिरती फंसती जा रही है. पिछले दिनों नामांकन से पहले किरण बेदी ने स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की प्रतिमा को भगवा-भाजपाई पटका पहना दिया. इस घटनाक्रम की तस्वीरों के साथ एक कारोबारी सुरेश खंडेलवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के जाने-माने वकील हिमाल अख्तर के माध्यम से किरण बेदी को कानूनी नोटिस भिजवाया फिर कोर्ट में मुकदमा कर दिया. इनका कहना है कि लाला लाजपत राय किसी पार्टी के प्रापर्टी नहीं बल्कि पूरे देश के नेता रहे हैं. ऐसे में किसी एक पार्टी का बैनर उनके गले में टांग देना उनका अपमान है.

इस मामले में दायर मुकदमें को संज्ञान लेने हुए आज कोर्ट ने पुलिस को किरण बेदी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संबंधि में पूछा है कि पुलिस ने क्या क्या किया है अब तक, इस बारे में रिपोर्ट पेश करे. सुनवाई की अगली तारीख 18 फरवरी है. उपर कोर्ट का आदेश है. नीचे पूरे मामले से संबंधित तस्वीर, अखबारी कटिंग, कंप्लेन और लीगल नोटिस का प्रकाशन किया जा रहा है. इस मामले में किसी अन्य जानकारी के लिए वरिष्ठ वकील हिमाल अख्तर से संपर्क उनके मोबाइल नंबर 09810456889 के जरिए किया जा सकता है.

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किरण बेदी का पुलिसिया अंदाज़ देखकर मैं हैरान था : रवीश कुमार

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