आज तक, एबीपी न्यूज और एनडीटीवी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का नोटिस

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने याकूब मेमन की फांसी कवरेज पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तीन न्यूज चैनलों को कार्रवाई के नोटिस जारी कर दिए हैं। सरकार को फांसी से संबंधित समाचारों को प्रस्तुत करने के तरीके पर गंभीर आपत्ति है।

सरकार ने आज तक, एबीपी न्यूज, एनडीटीवी को मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब पर उसकी फांसी के दिन कुछ विशेष कंटेंट दिखाकर न्यायपालिका और राष्ट्रपति का अनादर करने का आरोप लगाया है और उनके अलग-अलग शो कॉज नोटिस भेजे हैं। मंत्रालय को सबसे ज्यादा आपत्ति आज तक और एबीपी न्यूज पर छोटा शकील से फोन पर बातचीत दिखाने को लेकर है। उस इंटरव्यू में छोटा शकील ने याकूब मेमन को बेगुनाह बताया है। 

अब चैनलों को 15 दिनों में अपना जवाब भेजना है। इस जवाब की समीक्षा गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक इंटर मिनिस्टीरियल कमेटी करेगी और आगे की कार्रवाई पर चैनलों के संबंध में फैसला लेगी।

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जन सरोकारों से कटने का दंड, ‘आजतक’ तो लुढ़का ही, ‘सर्कस न्यूज चैनल तेज’ भी फीका पड़ा

इन दिनों सोशल मीडिया में आजतक की साख पर सवाल उठ रहे हैं। अपने रिपोर्टर अक्षय की मौत के बाद से ही ये चैनल सोशल मीडिया की सुर्ख़ियों में आ गया है। जिस तरह से आजतक ने अपने ही रिपोर्टर अक्षय की मौत से किनारा किया, उससे सोशल मीडिया में खासी नाराज़गी है।

कहते हैं, घमंडी का सर हमेशा नीचा होता है। क्योंकि घमंड का बोझ वो लंबे समय तक सह नहीं पाता। कुछ ऐसा ही हुआ है आजतक के साथ। अपने मुँह मिया मिट्ठू बनने वाला और खुद को देश का सर्वश्रेष्ठ न्यूज़ चैनल बताने वाला ये चैनल एक बार फिर नंबर तीन पर लुढक गया है। इण्डिया टीवी ने एक बार फिर इसे ज़ोरदार पठकनी दी है। लेकिन सोशल मीडिया में इन दिनों ये चैनल चर्चा में नंबर एक पर बना हुआ है। दरअसल आजतक की गिनती अब बाज़ारू चैनलों में होने लगी है। इसके कारणों पर गौर करें तो आप पाएंगे कि चैनल पर अब ऐसा एक भी कार्यक्रम नहीं है जो जन सारोकार से ताल्लुक रखता हो। 

पुण्यप्रसून वाजपयी का तिलिस्म भी अब उम्र के साथ फीका पड़ता जा रहा है। तो शम्स ताहिर खान जैसे दिग्गज क्राइम रिपोर्टरों ने भी चमक खो दी है। एंकर बेहद बुझे हुए और ख़बरें बेहद साधारण और बेदम नज़र आती हैं। ज़्यादातर ख़बरें एकतरफा और सरकारी विज्ञापन की तर्ज़ पर ही चलने लगी हैं। ऐसा लगता है मानो चैनल में कुछ ऐसी गाइडलाइन जारी की गयी हैं कि ख़बरों में जनसारोकार या सत्ता के विरुद्ध आक्रामकता नहीं चाहिए।

ताज़ा नमूना चैनल के रिपोर्टर की शहादत का है। जिसकी व्यापम के रहस्य का पर्दाफ़ाश करने की कोशिश में लगे अक्षय की मौत पर जिस तरह आज तक ने घड़ियाली आंसू बहाए और चैनल के आला अधिकारी सत्ता के साथ खड़े होकर मातम मनाते दिखे, उससे चैनल की साख देश भर में धूमिल हुई है। सोशल नेटवर्किंग पर लोगों ने इस बात पर  हैरानी जताई जिस तरह के साधारण सवाल अक्षय की हत्या के बाद राहुल कँवल ने शिवराज से पूछे ऐसा लग रहा था राहुल कँवल शिवराज चालीसा का पाठ कर रहे थे। राहुल कँवल इसी ग्रुप के अंग्रेजी न्यूज़ चैनल इण्डिया टुडे के संपादक है और खुद को अक्षय का करीबी मित्र और सहयोगी बताते हैं। बावजूद इसके शहीद अक्षय की आत्मा भी उनकी इस दोस्ती और फ़र्ज़ पर हैरान होगी। 

टीवी स्क्रीन पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले बड़े पत्रकार असल ज़िन्दगी में कितने बौने होते हैं इस प्रकरण ने साबित कर दिया। अक्षय तो शहीद होकर भी पत्रकारिता का फ़र्ज़ निभा गए। लेकिन, राहुल कँवल और आजतक के तथाकथित पत्रकारों ने एक बार फिर ये बता दिया उनके लिए अक्षय की शहादत भी महज़ एक खबर ही थी, जो उनकी नज़र में आम ख़बरों की ही तरह बिकाऊ है। सत्ता ने ऊंची बोली लगाई, सरकार से महंगे विज्ञापन मिले तो ये खबर भी बेच दी क्योंकि, बुलेटिन में कमर्शियल ब्रेक तो मजबूरी है।

आज तक के एक और चैनल तेज़ की बात किये बिना आजतक पुराण पूरी नहीं हो सकता। तेज़ को आजतक का सर्कस न्यूज़ चैनल कहा जाता है। इसके पीछे ठोस वजह हैं, दरअसल इस चैनल पर ख़बरें सर्कस और खेल तमाशे की तरह, मदारी-जम्बूरे वाले अंदाज़ में ही पेश की जाती हैं। दिन भर ज्योतिष और अंधविश्वास फैलाने वाले कार्यक्रम सोफेस्टिकेटेड तरीके से पेश करने की कोशिश तो होती है, लेकिन स्क्रीन पर वो फूहड़ ही नज़र आते हैं। एस्ट्रो अंकल, बादल वाले बाबाजी, आंटी, ताई, चाचाजी से लेकर महाभारत के संजय वाले नाटकीय अंदाज़ में ज्योतिष और ख़बरें परोसी जाती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस चैनल के संपादक संजय सिन्हा साहब जाने माने साहित्यकार हैं, साहित्य, कला, प्रेम, सौंदर्य, और रिश्तों जैसे विषयों में अपनी गहरी रूची के चलते उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट को समेटे एक पुस्तक भी प्रकाशित की है, जिसका नाम है रिश्ते।

संजय सिन्हा शायद इन्हीं रिश्तों के तार से ख़बरों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यकीन है कि ख़बरों को रिश्तों की चासनी में डुबोकर बेच जा सकता है। शायद यही कारण है कि तेज़ के हर खबरिया प्रोग्राम के टाइटल के आगे पीछे अंकल, आंटी, ताऊ, बाबाजी जैसे शब्द जुड़े होते हैं। तेज़ का एक भी ऐसा कार्यक्रम नहीं जो लोकप्रिय हुआ हो, यही कारण है कि देशभर में आजतक के साथ डिस्ट्रीब्यूशन होने के बावजूद, ये चैनल टीआरपी में कभी दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाया है। तेज़ की पहचान एक नॉनसीरियस न्यूज़ चैनल की बन चुकी है, क्योंकि ये ख़बरों को मज़ाकिया अंदाज़ में पेश करता है। प्रोग्रामिंग के नाम पर कुछ नहीं है, स्क्रिप्टिंग में भी धार या रफ़्तार नज़र नहीं आती। ख़बरों में बेहद पिछड़ा रहने वाले इस चैनल का नाम तेज़ क्यों है समझ से पर है। क्योंकि इसकी छबि सबसे स्लो वाली बन चुकी है, जिससे उबरना अब नामुमकिन सा है। टीआरपी में हमेशा सबसे निचले पायदान पर रहने वाला ये चैनल अपनी इस दशा से फिलहाल संतुष्ट दिखता है, इसलिए भविष्य में भी सुधार की कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

लेखक अमित सूद से संपर्क : amitsud00@gmail.com

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यही हाल रहा तो ‘आज तक’ के मंच पर जो हुआ, वो हर मंच पर होगा

सवाल ये कि ऐसी डिबेट्स में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेता व प्रतिष्ठित लोगों को ही क्यों रखा जाता है। आम आदमी रिक्शे वाला, ढकेल वाला या युवा छात्र, गृहिणी व अन्य जमीन से जुड़े लोगों की राय कोई मायने नहीं रखती क्या? उन लोगों के बीच जाकर बहस क्यों नहीं करायी जाती। 

अरे सब नहीं तो कुछ ऐसे लोगों को तो बुलाओ, उनसे पूछो या केवल उनके नाम पर गला फाड़कर अपने सवालों की नोक को पैना ही कर सकते हैं आप, और हाँ अगर नहीं बुला सकते तो देखिएगा, यही हाल रहा तो जो आज तक के मंच पर हुआ, वो हर मंच पर होगा। उस बहस में शामिल लोग मोदी मोदी चिल्ला रहे थे जो साफ़ दर्शा रहा था कि वो लोग कौन थे। लोकसभा चुनाव के दौरान भी मेने देखा है ऐसी डिबेट्स में विभिन्न दलों से जुड़े लोगों को विशेष जगह दी जाती है अब यही हाल रहा तो ये तो होगा ही…….

1 जून की शाम को आज तक चैनल पर स्मृति ईरानी व आज तक के सीनियर रिपोर्टर अशोक सिंघल के बीच नोकझोंक की स्थिति पैदा हो गयी। कारण था कि अशोक सिंघल ने स्मृति ईरानी से पूछा कि आपकी डिग्री को लेकर विवाद है, आप ग्रेजुएट या अंडरग्रेजुएट हैं, फिर नरेंद्र मोदी ने आपको सबसे कम उम्र की मंत्री बनाया। क्या खूबी लगी आप में ऐसी, क्या वजह थी, अब इस सवाल पर स्मृति असहज नजर आयीं और वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए इस सवाल को दोबारा पेश किया। 

वहाँ मौजूद लोग भड़क गए। नौबत मारपीट तक की आ गयी और ये सब हुआ देश के सबसे बड़े न्यूज चैनल पर, साथ में एक महिला एंकर भी थीं अंजना ओम कश्यप, वो कुछ बोली नहीं, बस भड़के लोगों को रोकने लगीं। अब कौन गलत था, इसका निर्णय आप खुद लें, खैर ये सब तो वीडियो में दिख जायेगा… 

मोहित गौर से संपर्क : mohitmithila@gmail.com

वीडियो लिंक : आजतक स्मृति ईरानी प्रकरण

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पढ़ाई-लिखाई से टीवी पत्रकारों का कोई वास्ता नहीं

ना जाने क्यों टीवी एंकर्स के चेहरों पर दो किस्म के भाव रहते हैं। अव्वल तो यह मान कर टीवी एंकर्स चलते हैं, सामने वाला शख्स मूर्ख है और मैं यह भी तय करूंगा कि सामने वाले को क्या बोलना है। दूसरे, कुछेक एंकर्स ऐसी अदा से कैमरे को ताकते हुए मेहमान पर मुस्कराते हैं मानो कह रहे हों, जरा इस लल्लू को देखो तो..या फिर इस कदर आक्रामक हो उठते हैं..लगता है कि दर्शक मेहमान को नहीं, एंकर को सुनने टीवी खोल के बैठा है। 

स्मृति ईरानी के इंटरव्यू में अंजना ओम कश्यप और अशोक सिंघल ने साफ कर दिया कि अध्ययन और पढ़ाई-लिखाई से टीवी पत्रकारों का कोई वास्ता नहीं है। धन्य हो। सवाल जो पूछे जाने चाहिए थे..

1. 2011 से संसद में शिक्षा पर कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई है…मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में यह बिंदू कहां हैं..?

2. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शिक्षा का मुख्य बिंदू रहा है. शिक्षा का व्यावसायीकरण रोकना…वो प्रश्न कहां लुफ्त है..?

3. बतौर प्रोफेसर और बतौर मानव संसाधन मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी के होने के बाद भी मोदी ने क्यों स्मृति ईरानी को चुना..?

4. क्या कभी इस बात की तस्दीक होगी कि सरकारी इमदाद पर चलने वाली यूनिवर्सिटीज तक पहुंचने वाले छात्रों में कितने छात्र वास्तविक दलित और मुस्लिम हैं..?

5. लिंगदोह के मसले पर मोदी सरकार का क्या रुख है….?

सवाल और भी है..फिलहाल इतना ही.

सुमंत भट्टाचार्य के एफबी वाल से 

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अंजना ओम कश्यप और आज तक का सच से सामना हो गया कल शाम

कल एक प्रोग्राम में उनके एक एंकर अशोक सिंघल ने मजमा ज़माने के लिये वह पूछ लिया जो सबके मन में है पर हर आदमी Avoid करना चाहता है क्योंकि सवाल के निशाने पर एक मंत्री तो है पर वह स्त्री भी है! नतीजे में पिटते पिटते बचे एंकर साहब और एंकर श्रेष्ठ कश्यप जी! इन्हीं महोदया ने चुनाव के ठीक पहले “आप” के आशीष खेतान को एक live कार्यक्रम में कहा था ” आपकी औक़ात क्या है ” पर खेतान ने सभ्य व्यक्ति की तरह मुस्कुराते हुए उन्हें टाल दिया था।

कश्यप संध्या बहसों में “आप” को बेइज़्ज़त करने और बीजेपी का पक्ष लेने के लिये सोशल मीडिया में बदनाम हैं । वे मोदी के साथ एक कैम्पेन चित्र में बीजेपी का झंडा फहराते हुए एक बालकनी में साथ खड़ी हुई फ़ोटो फ़्रेम में हैं जो सोशल मीडिया में आमफहम है। टीवी चैनल ” आप” की दैनिक फ़ज़ीहत का अभियान छेड़े हुए हैं पर इस बार उन्होंने एक कड़वा सवाल अपनी मेहबूब पार्टी की स्टार मंत्री से पूंछने की जुर्रत दिखाई और औक़ात बोध हो गया! इस टिप्पड़ी में यह बताने की कोशिश है कि आलोचना/निन्दा/पेड न्यूज़ के बावजूद आप” की प्रतिक्रिया और आलोचना पर बीजेपी की प्रतिक्रिया में क्या बुनियादी अन्तर है, यह नहीं कि आजतक ने कभी केजरीवाल की तारीफ़ नहीं की! इस टिप्पणी में यह बताने की कोशिश है कि आलोचना / निन्दा / पेड न्यूज़ के बावजूद ‘आपट’ की प्रतिक्रिया और सिर्फ कड़ा सवाल या हल्की-सी आलोचना पर बीजेपी वालों की प्रतिक्रिया में क्या बुनियादी अन्तर है।

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह के एफबी वाल से

Sharad Tripathi : आज ‘आजतक’ पर स्मृति की परीक्षा कार्यक्रम देखा। अच्छा लगा की स्मृति ईरानी ने दृढ़ता से जवाब दिए, तथा कार्यकुशलता दिखाते हुए विभिन्न मसलों को हल करने की दक्षता भी दिखाई। लेकिन अपने अजेंडे से लाचार आजतक का रिपोर्टर/एंकर फिसल ही गए। अशोक सिंघल ने पूछ लिया की मोदी ने (नोट करिये मोदी ने, मोदीजी नहीं) आपमें क्या देखा की इतनी कम उम्र में आपको शिक्षा मंत्री बना दिया! सुनने वाले मतलब समझ चुके थे। लेकिन स्मृति ने अशोक सिंघल को जो समझाया वो शायद उसको समझ आ गया था ये उसका चेहरा बता रहा था। ऐसी घिनोनी मानसिकता कभी बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए और तुरंत रिएक्शन देना चाहिए । जो स्मृति ने और पब्लिक ने दिया। स्मृति का जवाब बहुत कुछ कह गया जिसमे उन्होंने कहा की आप किसी पुरुष मंत्री से तो ऐसा सवाल नहीं पूछते! बड़ा दुःख तो इस अंजना ॐ कश्यप से रहा जो शांति से ऐसा बचकाना सवाल सुनती रही। बड़ी दोषी अंजना हैं! बाद में ट्वीट करके आप स्मृति को अहंकारी कह सकती हैं लेकिन आप तो घटिया लेवल की निकलीं। आजतक आज एक बार फिर शर्मसार हुआ। लेकिन ये तो क्रांतिकारी चैनल है न शर्म इसे आती नहीं।

मीडियाकर्मी शरद त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.


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सबसे बड़े रेटिंग सिस्टम बार्क में भी आजतक की बादशाहत

सबसे तेज और सर्वश्रेष्ठ न्यूज चैनल आजतक ने सबसे बड़े रेटिंग सिस्टम बार्क में भी सबको पछाड़ दिया है. ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (बार्क) की ओर से जारी टीआरपी रेटिंग में आजतक 24 फीसदी के साथ टॉप पर कब्जा जमाए हुए है. इसके अलावा दिल्ली और मुंबई में भी आजतक ने अपनी बादशाहत कायम रखी है.

गौरतलब है कि पहले टैम (TAM) नाम की संस्था, हर हफ्ते टीआरपी देती थी. अब टैम की जगह बार्क नाम की एजेंसी ने टीआरपी देनी शुरू की है. पहले हफ्ते की टीआरपी आ गई है. इसके मुताबिक आजतक इस मंच पर भी न सिर्फ नंबर वन न्यूज चैनल है, बल्कि 24 प्रतिशत टीआरपी तो अकेले आजतक की ही है.

दूसरे नंबर पर 15 प्रतिशत की टीआरपी के साथ एबीपी न्यूज है. जी न्यूज तीसरे स्थान पर है. चौथे स्थान पर न्यूज नेशन है और इंडिया टीवी पांचवें स्थान पर खिसक गया है.

यही नहीं आजतक के सहयोगी चैनल तेज का भी मार्केट शेयर 8.5 प्रतिशत है. अगर इन दोनों को मिला दिया जाए, तो हिंदी न्यूज चैनलों के 33.5 प्रतिशत शेयर पर सिर्फ टीवी टुडे ग्रुप का कब्जा है.

इससे पहले टैम की टीआरपी रेटिंग में आजतक 17 से 20 प्रतिशत के बीच रहता था, लेकिन बार्क की टीआरपी में आजतक के हिस्से में छप्परफाड़ टीआरपी आई है. शुक्रिया उन करोड़ों दर्शकों का, जो आजतक देखते हैं, आजतक पर भरोसा करते हैं.

साभार आजतक

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‘आजतक’ के रिपोर्टर सुरेश गाँधी सड़क हादसे में गंभीर घायल, साजिश का अंदेशा

उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद से आजतक चैनल के रिपोर्टर सुरेश गाँधी सोमवार की रात 9 बजे घर लौटते समय सड़क दुर्घटना घायल हो गए. अंदेशा जताया जा रहा है कि वह किसी साजिश के शिकार हो हुए हैं क्योंकि माफिया और भ्रष्ट तत्वों के खिलाफ वह लगातार लिखते रहे हैं.

बताया जा रहा है कि रूटीन कामकाज के बाद वह घर की तरह जा रहे थे कि कंधिया फाटक चौरी मोड़ पर बाइक से असंतुलित होकर गिर पड़े। उसी बीच दूसरी तरफ तेज रफ्तार आ रही अन्य गाड़ी ने भी उन्हें धक्का मार दिया. सुरेश गाँधी को सड़क पर गिरा देख क्षेत्रीय लोगो ने निजी अस्पताल जीवनदीप में भर्ती कराया. चिकित्सक ए.के. गुप्ता के मुताबिक सुरेश गाँधी के सीने की हड्डी टूट गई है और अंदरूनी गंभीर चोटें हैं। उन्हें आईसीयू में रखा गया है लेकिन हालत खतरे से बाहर है. 

सुरेश गाँधी जनपद में चल रहे कई अवैध कार्यो का पर्दाफाश कर चुके हैं, जिससे वह अक्सर माफिया और भ्रष्टचारियों की आंख की किरकिरी बने हुए हैं. उनके दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिलने के बाद सभी लोगों के मुंह पर एक ही बात तैर रही है कि वह किसी साजिश के शिकार हो गए. गाँधी जनपद के अवैध कार्यो और भ्रष्टाचारो को आजतक न्यूज चैनल के साथ-साथ कई अखबारों में भी उजागर करते रहे हैं.

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ITA अवॉर्ड्स : आजतक ने जीता चार एवार्ड

खबरों के मामले में आपको हमेशा सबसे आगे रखने वाला आपका चहेता आजतक एक बार फिर देश का सर्वश्रेष्ठ न्यूज चैनल चुना गया है. शनिवार को मुंबई में हुए ITA (इंडियन टेलीविजन अकैडमी) अवॉर्ड्स में आजतक को लगातार 14वीं बार बेस्ट न्यूज चैनल का अवॉर्ड मिला. आजतक की झोली में कुल 4 अवॉर्ड्स आए. आजतक के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘सीधी बात’ को बेस्ट टॉक शो का अवॉर्ड मिला. इसके लिए इंडिया टुडे ग्रुप के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल को बेस्ट एंकर का अवॉर्ड दिया गया. आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप को बेस्ट एंकर का अवॉर्ड दिया गया.

आज तक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने अवॉर्ड के साथ अपनी तस्वीर ट्वीट की है. उन्होंने अवॉर्ड मिलने पर खुशी जताई है. “@anjanaomkashyap: life’s overwhelming moment ! Feel honoured to get the ITA Award. pic.twitter.com/MiQJZDhKch”you are truly deserved it…..
    — love_you (@fond_care) November 1, 2014

राहुल कंवल इस अवॉर्ड फंक्शन में पहुंच नहीं पाए. उन्होंने ट्वीट किया- Thanks also to all the guests over the years who gave us time and took on the toughest & trickiest of questions. Best Talk Show #SeedhiBaat
    — Rahul Kanwal (@rahulkanwal) November 1, 2014

‘जीतेगा भई जीतेगा’ शो को बेस्ट न्यूज एंड करंट अफेयर्य शो चुना गया और इसके लिए शम्स ताहिर खान को अवॉर्ड मिला. 2001 से आजतक को बेस्ट हिंदी न्यूज चैनल का अवॉर्ड मिल रहा है.

उपरोक्त खबर आजतक की वेबसाइट पर प्रकाशित है. वहीं से साभार.

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