कानपुर प्रेस क्लब पोलखोल : महामंत्री के बयान में सच को छिपाने की कोशिश

कानपुर प्रेस क्लब के वर्तमान स्वयंभू महामंत्री अवनीश दीक्षित ने अपने और अपने साथियों के अपराध को छिपाने के लिए कुछ ऐसे बयान दे दिए, जिन्होंने प्रेस क्लब की विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए।  

दबंगई के बल पर कानपुर प्रेस क्लब पर फ़र्ज़ी प्रपत्रों और फ़र्ज़ी चुनाव के जरिये कब्ज़े की शिकायत कानपुर के अधिकारीयों के साथ प्रदेश के डीजीपी, मुख्यमंत्री और राजयपाल से की गई थी, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म सोसायटीज एवं चिट्स ने जून में ही अवनीश दीक्षित को नोटिस जारी कर सुनवाई की डेट पर जवाब देने के लिए लिख दिया था, जिस पर विगत दो डेट में सुनवाई में दीक्षित ने अपना 25 बिन्दुओं पर जवाब प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने बचाव के लिए कुछ ऐसे बयान दिए, जिन्होंने कानपुर प्रेस क्लब की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं । 

दीक्षित ने अपने जवाब में कहा है कि कानपुर प्रेस का गठन एक निर्वाचन के बाद हुआ। उपनिबन्धक कार्यालय से प्राप्त नियमावली के अनुसार ही संस्था अपने दायित्व का निर्वाहन कर रही है। हम नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने किसी भी स्तर पर नियमों का उलंघन नहीं किया है। 12 दिसम्बर 2010 को भूपेन्द्र तिवारी की अध्यक्षता में आहूत विशेष बैठक का कोरम पूरा था तथा सभी फैसले न्याय संगत थे।  

जबकि 2013 में चुनाव कराये जाने व चुनाव अधिकारी की नियुक्ति का अधिकार संस्थापक प्रबन्धकारिणी समिति को ही पंजीकृत नियमावली के अनुसार था, क्योंकि वर्तमान प्रबन्धकारिणी समिति संस्था के नवीनीकरण के लिए संस्थापक प्रबन्धकारिणी समिति की जो सूचियां 2005 से 2013 तक की प्रस्तुत की गयी हैं, उन पर वर्तमान प्रबन्धकारिणी समिति के समस्त पदाधिकारियों/ सदस्यों ने अपने – अपने हस्ताक्षर कर 2013 तक उनकी वैधता को स्वयं प्रमाणित किया है। वर्तमान प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा पंजीकृत नियमावली के बिन्दु 5 में सदस्यता की समाप्ति शीर्षक के अनुसार 2005 से 2013 तक की संस्थापक प्रबन्धकारिणी समिति के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करने या पारित कराने का कोई प्रमाण नवीनीकरण के लिये आपके समक्ष प्रस्तुत प्रपत्रों के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त से स्वतः स्पष्ट है कि संस्था के सम्बन्ध में समस्त निर्णय लेने के अधिकार संस्थापक प्रबन्धकारिणी समिति के अलावा किसी को प्राप्त नहीं थे। 

2013 में चुनाव कराये जाने और चुनाव समिति, चुनाव अधिकारी व चुनाव समिति के सदस्यों के मनोनयन का निर्णय लेने के लिये वैध संस्थापक प्रबन्धकारिणी समिति के हस्ताक्षर चुनाव कार्यक्रम के निर्धारण की कार्यवाही के प्रपत्र पर न होने से यह स्वतः स्पष्ट है कि इस प्रपत्र में अंकित कार्यवाही का कोई निर्णय वैध नहीं है। इस प्रपत्र पर चुनाव अधिकारी के हस्ताक्षर न होने और वर्तमान महामंत्री और उनके सहयोगियों के ही हस्ताक्षर, प्रपत्र के कूटरचित होने और नवीनीकरण के लिये धोखाधड़ी के इरादे से हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा ही बनाये जाने के हमारे सन्देह को बल प्रदान करते हैं। 

उप निबन्धक फर्म चिट्स एवं सोसायटीज के कार्यालय से प्राप्त प्रमाणित प्रतिलिपि की क्रमांक 5 पर संलग्न छायाप्रति का भी अवलोकन करने की कृपा करें। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी का कार्यवृत अंकित है, इस अभिलेख पर भी स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन एवं सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं। प्रबन्धकारिणी समिति की वर्ष 2011-2012 व 2012-2013 की सूची पूर्व में संलग्नक क्रमांक 6 व 7 में अंकित प्रबन्धकारिणी संमिति के किसी भी पदाधिकारी और सदस्य के हस्ताक्षर भी नहीं है। इस अभिलेख में यह भी अंकित नहीं है कि स्क्रीनिंग कमेटी का गठन और इसके चेयरमैन एवं सदस्यों का मनोनयन कब किसके द्वारा किस तिथि को किया गया था ? उपरोक्त प्रपत्र पर किसी भी पदाधिकारी और सदस्य के हस्ताक्षर न होने तथा स्क्रीनिंग कमेटी के गठन की तिथि अंकित न होने से यह भी संदेह होता है कि यह अभिलेख भी कूट रचित है और धोखाधड़ी के इरादे से बनाया गया है। 

वर्तमान महामंत्री अवनीश दीक्षित का उपरोक्त अंकित स्पष्टीकरण भी कई कारणों से असत्य और भ्रामक होने के कारण स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। 2013 में पंजीकृत नियमावली के बिन्दु संख्या 9 में प्रबन्धकारिणी समिति के पदाधिकारियों का अधिकार व कर्तव्य शीर्षक में अंकित अध्यक्ष के अधिकार के अनुसार उप समितियों के गठन का अधिकार तत्कालीन अध्यक्ष के पास था। नवीनीकरण के लिये आपके समक्ष संस्थापक प्रबन्धकारिणी समिति की जो सूचियाॅ 2005 से 2013 तक की प्रस्तुत की गयी है उन पर वर्तमान प्रबन्धकारिणी समिति के समस्त पदाधिकारियों/सदस्यों ने अपने – अपने हस्ताक्षर कर 2013 तक उनकी वैधता को स्वयं स्वीकार व प्रमाणित किया है। वर्तमान प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा पंजीकृत नियमावली के बिन्दु 5 में सदस्यता की समाप्ति शीर्षक के अनुसार 2012 के अध्यक्ष श्री अनूप बाजपेई के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करने या पारित कराने का कोई प्रमाण नवीनीकरण के लिये आपके समक्ष प्रस्तुत प्रपत्रों के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त से स्वतः स्पष्ट है कि स्क्रीनिंग कमेटी नामक उप समिति के गठन और उसके चेयरमैन तथा सदस्यों के मनोनयन का निर्णय लेने का अधिकार केवल तत्कालीन अध्यक्ष के अलावा किसी को भी प्राप्त नहीं था। 

स्क्रीनिंग कमेटी नामक उपसमिति के गठन की कार्यवाही 2012 के तत्कालीन अध्यक्ष श्री अनूप बाजपेई द्वारा किये जाने का कोई भी प्रपत्र नवीनीकरण के लिये आपके समक्ष प्रस्तुत प्रपत्रों के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपरोक्त से स्वतः स्पष्ट है कि सक्षम अधिकारी द्वारा स्क्रीनिंग कमेटी का न तो गठन किया था और कमेटी के चेयरमैन और सदस्यों का मनोनयन भी नहीं किया था। महामंत्री ने अपने स्पष्टीकरण के बिन्दु 7 में यह अंकित कर कि जनपद के सभी पत्रकारों ने विधान को ठेंगा दिखाते हुए सभी नियमों के प्रतिकूल पदों पर बने रहने व चुनाव न कराने की धाॅधली से आजिज आकर ही स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया था। वर्तमान महामंत्री अवनीश दीक्षित ने उपरोक्त सत्य को स्वयं स्वीकार भी किया है। वर्तमान महामंत्री ने अपने उपरोक्त कथन को प्रमाणित करने के लिए जनपद के पत्रकारों द्वारा भी स्क्रीनिंग कमेटी के गठन की कार्यवाही का कोई भी प्रपत्र नवीनीकरण के समय आपके समक्ष प्रस्तुत न करने के कारण स्क्रीनिंग कमेटी का गठन, महामंत्री की कल्पना मात्र ही प्रतीत होता है। 

उपरोक्त बिन्दु में अंकित तथ्यों से यह स्पष्ट हो चुका है कि सक्षम अधिकारी और तत्कालीन अध्यक्ष अध्यक्ष श्री अनूप बाजपेयी द्वारा स्क्रीनिंग कमेटी का गठन नहीं किया गया है और जनपद के पत्रकारों द्वारा स्क्रीनिंग कमेटी के गठन का कोई प्रमाण अब तक वर्तमान महामंत्री द्वारा प्रस्तुत नहीं करने के कारण यह भी स्पष्ट हो चुका है कि स्क्रीनिंग कमेटी का गठन महामंत्री की कल्पना मात्र ही है। यह प्रश्न फिर भी बना हुआ है कि स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन श्री अंशुमान तिवारी ने दिनांक 19.10.2012 को प्रेस क्लब में कार्यवृत्त जारी करने हेतु क्या वास्तव में कोई बैठक की थी ? और स्क्रीनिंग कमेटी ने कोई कार्यवृत्त भी क्या वास्तव मे ही जारी किया था ? कार्यवृत्त पर श्री अंशुमान तिवारी के ही हस्ताक्षर न होने और वर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों के ही हस्ताक्षर होने से इस प्रपत्र को नवीनीकरण के लिये धोखाधड़ी के इरादे से हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा ही बनाये जाने के हमारे सन्देह को बल मिलता हैं। 

उपरोक्त बिन्दु में अंकित तथ्यों से यह स्पष्ट हो चुका है कि स्क्रीनिंग कमेटी का गठन वर्तमान महामंत्री अवनीश दीक्षित की मात्र कल्पना ही है। यह प्रश्न तो अब भी बना हुआ है कि स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन श्री अंशुमान तिवारी ने दिनांक 19.10.2012 को प्रेस क्लब में कार्यवृत्त में स्मृति पत्र के बिन्दु 4 में अंकित उद्देश्यों को किस आधार पर अतिकृमित कर ? किसके आदेश ? और किस अधिकार से केवल 3 वर्ष पूर्व पंजीकृत दैनिक समाचार पत्रों के वेतन भोगी पत्रकारों को ही सदस्यता प्रदान करने का निर्णय लिया ? उपरोक्त के सम्बन्ध वर्तमान महामंत्री के बिन्दु दो में अंकित स्पष्टीकरण में कुछ भी नहीं है। कार्यवृत्त पर श्री अंशुमान तिवारी के ही हस्ताक्षर न होने और वर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों के ही हस्ताक्षर होने से इस प्रपत्र को भी नवीनीकरण के लिये धोखाधड़ी के इरादे से हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा ही बनाये जाने के हमारे सन्देह को बल मिलता है। 

वर्तमान महामंत्री का कहना है कि उनके द्वारा क्रमांक 8 में समविष्ट स्मृति पत्र के किसी भी तथ्य को अतिक्रमित नहीं किया गया है। वर्तमान कार्यकारिणी पत्रकारों के हर दुःख सुख में सदैव सहभागी है। संस्था के महामंत्री व अन्य पदाधिकारी कानून व समाज का हमेशा ध्यान और सम्मान रखते हैं। कभी भी कोई फरेब, हिंसा व कूट रचना जैसा अमानवीय कृत्य कारित नहीं किया है। दीक्षित ने स्पष्टीकरण के बिन्दु संख्या 4 में अंकित कथन में स्मृति पत्र के बिन्दु संख्या 4 में अंकित उद्देश्यों को उनकी काल्पनिक स्क्रीनिंग कमेटी के स्वहस्ताक्षरित कार्यवृत्त दिनांक: 19.10.2012 में अतिक्रमित करने के कारणों का कोई युक्ति युक्त स्पष्टीकरण अंकित नहीं किया है। वर्तमान महामंत्री का बिन्दु संख्या 4 में अंकित कथन भ्रामक होने के कारण स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। 

एसआर न्यूज़ से साभार

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PRESS CLUB CONDEMNS KILLING OF JOURNALIST SANDEEP KOTHARI

Mumbai : The Mumbai Press Club expresses its shock over the killing of Madhya Pradesh-based journalist Sandeep Kothari, who has been burnt to death for exposing the sand mafia.

Kothari, 40, hailed from Balaghat district and was writing for several Jabalpur-based newspapers as a tehsil correspondent. He was a good journalist and had been relentlessly exposing criminals and the sand mafia in particular.

The burnt body of Sandeep Kothari, who was abducted from Katangi tehsil in Balaghat district two days back, was found lying near railway tracks at Sindi town in Wardha district of Vidarbha region.

We request the governments of Madhya Pradesh and Maharashtra to order a joint police investigation into this sordid killing of a member of the Fourth Estate. The Club also demands that the Maharashtra government, in whose jurisdiction the body was found, ensure that the culprits are subject to the maximum punishment – be it the foot-soldiers or the masterminds.

Kothari was abducted on June 19 night when he was headed towards Umri village with his friend on his bike.His bike was hit by a four-wheeler and its occupants bundled him inside the vehicle and fled before beating up Kothari’s friend Rahandle who was riding pillion. His body was also found on June 21. The family of Kothari is an a state of shock.

This incident of setting afire of a journalist comes in the wake of freelance journalist Jagendra Singh by members of the UP police, who acted at the behest of Uttar Pradesh’s minister for backward Classes Welfare, Ram Murti Verma. Jagendra Singh was mercilessly set afire after kerosene was poured on him by the goons, and he died a horrific death on 8 June.The attack on the journalist on 1 June in Shahjahanpur was organized by the minister after Jagendra Singh exposed Ram Murti Verma in a series of Facebook posts accusing him of involvement in illegal mining activities and land grabbing.

These two back-to-back incidents has come as a shock to the journalist fraternity in India. At the time of crisis, we stand behind both the families and condemn the killing in strongest possible words and urge for speedy investigation and trial.

It is to be mentioned here that these two incidents must not be treated separately – and by and large there has been a trend on increasing number of attacks on journalists in cities as well as rural areas. The reasons may be varied. Even we can cite the recent incident of Mumbai photojournalist Amey Kharade being manhandled by policemen.

The Mumbai Press Club over the last several years – particularly since the killing of journalist J Dey – have been demanding that incident of attacks on journalists must be made non-bailable and congnizable.

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एनडीटीवी के प्रणॉय, आजतक के शम्स समेत 24 पत्रकारों को प्रेस क्लब मुंबई का रेडइंक अवॉर्ड

मुंबई : एनडीटीवी ग्रुप के एग्जक्यूटिव को-चेयरमैन डॉ. प्रणॉय रॉय को टीवी पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रेस क्लब मुंबई के रेडइंक लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया है। डॉ. रॉय को मुंबई के जमशेद भाभा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। मानवाधिकार श्रेणी में ‘आजतक’ के शम्स ताहिर खान को इस सम्मान से नवाजा गया। हाल ही में यह पुरस्कार मुंबई प्रेस क्लब की ओर से स्थापित किया गया है। 

यह पुरस्कार टीवी समाचार और पत्रकारिता में लगातार अग्रणी योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है। रेडइंक अवॉर्ड्स का निर्णय हाल में हुआ है, जिसमें 10 श्रेणियां शामिल हैं। वर्ष 2014 में उत्कृष्ट और प्रभावशाली समाचार करने के लिए 24 पत्रकारों को ये पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कारों के लिए प्रिंट्र, ऑनलाइन श्रेणी के लिए 800 से ज्यादा प्रविष्टियां संकलित हुई थीं, साथ ही टीवी पत्रकारों की करीब 250 खबरों पर भी विचार किया गया था।

द रेडइंक अवॉर्ड में पहली बार स्थापित किया गया ‘जर्नलिस्ट ऑफ दि ईयर’ एनडीटीवी के ही श्रीनिवासन जैन को ‘ट्रूथ वर्सज़ हाइप’ और अन्य कार्यक्रमों की श्रृखंला द्वारा खोजी कार्य के लिए दिया गया। एनडीटीवी की ही सुप्रीता दास को बेस्ट टीवी स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के अवॉर्ड मिला। समाचारों और फीचरों के वैकल्पिक स्रोत के रूप में अपना प्रभाव तेजी से बढ़ाने के लिए ‘स्क्रॉल डॉट इन’ को ‘न्यूज स्टार-अप ऑफ दि ईयर’ पुरस्कार दिया गया।

वारदात की खबरों में पैठ बना चुके ‘आज तक’ के कार्यकारी संपादक शम्स ताहिर खान को मानवाधिकार श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ स्टोरी के लिए यह अवॉर्ड दिया गया। शम्स के सहयोगी रजत सिंह को भी इस दौरान ‘पर्यावरण’ श्रेणी के तहत रेड लिंक अवार्ड-2015 से सम्मानित किया गया। रजत को उनकी स्टोरी ‘अरावली का अलर्ट’ पर पुरस्कार मिला।

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A caste-ridden society is worse than a society of slavery : Arundhati Roy

New Delhi : A caste-ridden society is worse than a society of slavery, and even apartheid, said Arundhati Roy, during a function held at the Constitution Club, New Delhi, on April 29 to mark the 6th anniversary of India’s first fully Hindi-English, bilingual magazine, FORWARD Press.

The theme of function, graced by eminent personalities like Anupriya Patel, Ramdas Athawale, Ali Anwar, Ramnika Gupta, Braj Ranjan Mani, Sheoraj Singh Bechain, Jaiprakash Kardam and Arvind Jain, was the “The Future of Bahujan Politics and Literature”. “We are on to an important idea,” said Roy, after releasing FORWARD Press’ fourth Bahujan Literature Annual. She was referring to the idea of Bahujan literature, the idea of fighting casteism with anger at the injustice “while holding in our hearts the idea of justice, love, beauty, music, literature”, without being reduced to a “bitter, small people”.

Ali Anwar, who heads the All India Pasmanda Muslim Mahaz, said Pasmandas are Bahujan first and then Muslims. “We don’t want to be called minorities. We are Bahujans”, he said. He was surprised by Ramdas Athawale’s proposal of reservations for the economically backward among the upper castes. He said we are not “mentally prepared” for such a move. The only criteria, he added, should be social and educational backwardness.

Braj Ranjan Mani, the author of Debrahmanising History, mooted the idea of a “social democracy” and the stressed the need for an “emancipatory unity” among Bahujans. Sujata Parmita said the Dalit-Bahujans have been the creators of culture throughout history but religion has been used to enslave them and seize their culture from them. Anupriya Patel shared the view that once the oppressed masses are educated, their leaders will stop making compromises.

Sheoraj Singh Bechain recalled a conversation with Kanshiram shortly before his BSP formed its first government in Uttar Pradesh in alliance with the BJP. Instead of eyeing power, he should have started a magazine, Bechain had advised Kanshiram – for it is “social power, cultural power, intellectual power” that brings real empowerment to the Bahujans.

On the occasion, the second Mahatma Jotiba and Krantijyoit Savitribai Phule Balijan Ratna awards were presented to Braj Ranjan Mani, A.R. Akela (poet, folk singer, author and publisher) and Dr Hiralal Alawa (senior resident doctor at AIIMS and founder of Jai Adivasi Yuva Shakti).

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The Foreign Correspondent’s club of South Asia elects new committee

New Delhi : The Foreign Correspondent’s club of South Asia elects new committee. The Foreign Correspondent’s Club of South Asia, a premier body of foreign media representatives based in South Asia, has elected a new committee to run club for next two years.

Mr. Juergen Webermann, South Asia Bureau Chief of ARD-German Radio would be the new President while Mr. Sanjay Jha, India Bureau Chief of ITV News has been elected as new Member Secretary of the Club. Before coming to India in 2013, Juergen Webermann worked as an investigative reporter for the North German TV & Radio Network in Hamburg, Germany, writing on many issues, among them the involvement of German banks in the financial meltdown and “Offshore Leaks”, an international cooperation in which Indian Media took part, too.

Mr. Sanjay Jha is the winner of prestigious Gerald Loeb award and has worked with several foreign media outlets including The Guardian, London in the past. Ms. Kate Peters, South Asia Bureau Chief of BBC News has been elected as new Vice President of the Club. Ms. Peters worked as a Moscow bureau chief before she arrived in Delhi. Mr. Anoop Saxena from ARD-German Radio would be new treasurer for the incoming term of 2015-17.

Among other elected members are South Asia Bureau Chief of the New York Times Ms. Ellen Barry, South Asia Bureau Chief of CNN Mr. Ravi Agrawal who managed to get first & only interview with Indian Prime Minister Shri Narendra Modi, South Asia Bureau Chief of Time Magazine Mr. Nikhil Kumar, South Asia Correspondent of ARD-German Sandra Petersmann, Senior Correspondent of Ria Novosti Ms. Anna Pasyutina, Senior Correspondent of Kyodo News Mr. Pankaj Yadav, Bureau Chief of Thomson Reuters Mr Douglas Busvine and India Producer of ARD-German TV Mr. Sanjay Kumar.

Founded in 1958, The FCC South Asia is an exclusive, high profile club of journalists, who cover India and other countries in the region for the global media. Based in New Delhi, the club has almost 700 members, including about 260 foreign correspondents and photographers, 250+ local journalists from leading Indian Publication, as well as foreign diplomats, lawyers, and people dealing with the media from corporates and NGOs and is the only club of its kind.

The FCC regularly hosts press conferences with prominent personalities which is broadcast live in India and abroad, and are covered extensively by the Indian and foreign media. In addition, FCC events include press conferences, photo exhibits, debates, receptions, film screenings, pub quizzes, book launches, and cricket tournaments.

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नदीम अहमद काजमी ने बिल्डर से कांट्रैक्ट साइन करने की इच्छा के कारण प्रेस क्लब इलेक्शन टलवाया?

: Raise a voice against delay in elections and demand immediate elections : New Delhi : On March 23, 2015, the office bearers and managing committee of the PRESS CLUB OF INDIA (PCI) held a meeting in which it was decided to postpone the Club’s elections, which were originally scheduled to take place in March. 

It is learnt that this is all the game-plan of the Club’s current Secretary General Nadeem Ahmad Kazmi, who wants to inordinately postpone the elections, so that he gets the chance to sign the contract with a builder to construct the new building for the Press Club, and, pocket hefty commission amount. I urge upon all the Press Club members to raise a voice against this (delay in elections), and demand immediate elections.

Press Club’s Assange… a whistle-blower…

(एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित)

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बिजनौर प्रेस क्लब में गंगा-जमुनी होली

बिजनौर : गंगा-जमुनी तहजीब कायम रखते हुए बिजनौर प्रेस क्लब की ओर से ऐजाज अली हाल की लाइब्रेरी में अध्यक्ष ज्योति लाल शर्मा की अध्यक्षता व मरग़ूब रहमानी के संचालन में होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया।

बिजनौर प्रेस क्लब में गंगा-जमुनी होली-मिलन कार्यक्रम की एक झलक ।

इस अवसर पर पत्रकारों ने एक-दूसरे को रंगों से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में पत्रकारों ने गजलें और चुटकुले सुनाए। बड़ी संख्या में मुस्लिम पत्रकार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वीरेशबल , योगेश राज, विनय शर्मा,अनूप खन्ना , नरेंद्र मारवाड़ी , फहीम शेख,गुफरान मुस्तकीम ,वसीम अख्तर , कमरूदीन फारुखी , अरशद जैदी, खुशनूद हसन, जितेंद्र शर्मा, अनुराग शर्मा, राजेन्द्र राजपूत, प्रवीण कुमार, इमरान अंसारी, नीरज कुमार ,दीपक कुमार, मिंटू आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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प्रिंट एवं ईलेक्ट्रॉनिक मिडिया के पत्रकारों के लिए रामगढ़ प्रेस क्लब का गठन

रामगढ़ (झारखंड) जिले में प्रेस क्लब के गठन को लेकर 11 सदस्यीय तदर्थ कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी के निर्देशन में चलाया जा रहा सदस्यता अभियान अंतिम दौर में है। लगभग 130 पत्रकारों को इस संस्था से जोड़ने के प्रयास के तहत सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। सदस्यता शुल्क के रूप में सहयोग राशी 51 रू. रखी गई है। दुर्गा पूजा के बाद संभवतः इसी माह में चुनाव होने की संभावना है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब प्रिंट एवं ईलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी पत्रकार एक संगठन के लिए कार्य करेंगे।

 

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