दैनिक भास्कर के जालंधर आफिस की कुर्की का आदेश

BHASKAR

मजीठिया वेजबोर्ड का बकाया ना देने के कारण होगी कार्रवाई… ए.एल.सी. द्वारा पास किया 23.52 लाख का क्लेम ब्याज सहित अदा ना किया तो होगी भास्कर कार्यालय की नीलामी…

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां सहायक लेबर कमिश्रर फिरोजपुर की कोर्ट द्वारा भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा को 23 लाख 52 हजार 945 रुपये 99 पैसे की राशि देने के आदेश के बाद भास्कर प्रबंधन द्वारा आनाकानी करने के उपरांत भास्कर के जालंधर कार्यालय की संपत्ति की कुर्की का आदेश हो गया है। भास्कर की प्रॉपर्टी अटैच करके वहां नोटिस भेज दी गयी है। जल्दी ही नीलामी की कार्यवाही शुरू कर कोर्ट राजेन्द्र मल्होत्रा को उसका बकाया हक दिलवाएगी। Continue reading

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मजीठिया जंग : हेमकांत को स्टे के बावजूद ऑफिस में न घुसने देने वाले दैनिक भास्कर प्रबंधन पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई

मजीठिया मांगने वाले हेमकांत चौधरी को ट्रांसफर पर स्टे के बावजूद ऑफिस में नहीं घुसने देने वाले दैनिक भास्कर के अफसरों पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई… तीन महीने जेल की सजा और 5000 जुर्माना होना तय, भास्कर के अफसरों में हड़कंप… मजीठिया मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक भास्कर के मराठी अखबार दिव्य मराठी से आई है। यहाँ प्रबंधन की लगातार धुलाई कर रहे हेमकांत चौधरी ने अबकी बार प्रबंधन के चमचों को पटखनी देते हुए एक ही दांव में न केवल धूल चटा दी है बल्कि चारों खाने चित्त कर दिया है।

मजीठिया वेजबोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लगाने पर दैनिक भास्कर मैनेजमेंट ने चौधरी का डेपुटेशन के नाम पर रांची ट्रांसफर कर दिया था। इसके खिलाफ औरंगाबाद इंडस्ट्रियल कोर्ट से चौधरी को स्टे मिल गया था। इसके बावजूद ताकत के खोखले नशे में चूर भास्कर के अहंकारी अफसरों ने चौधरी को ऑफिस में घुसने नहीं दिया और धक्के देकर बाहर कर दिया था। इससे आहत चौधरी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया था।

मामले में भास्कर के वकील पिछले लगभग एक साल से तारीख पर तारीख ले रहे थे। कुछ दिन पहले हुई सुनवाई में भी जब भास्कर के वकीलों ने तारीख लेने की कोशिश की तो हेमकांत चौधरी के वकीलों ने जोरदार विरोध करते हुए आरोपियों पर अवमानना कार्रवाई शुरू करने की अपील कोर्ट से की थी। तब कोर्ट ने बाद में आदेश जारी करने की बात कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी। अंततः पिछले हफ्ते कोर्ट ने दिव्य मराठी महाराष्ट्र के सीओओ निशित जैन और सीनियर एचआर एग्जीक्यूटिव अनवर अली को अवमानना का दोषी मानते हुए दोनों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।

आगामी दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और कोर्ट की अवमानना मामले में दोनों को तीन महीने जेल की सलाखों के पीछे काटना पड़ेंगे साथ ही 5 हजार रुपए जुर्माना भी भरना पड़ेगा। उधर, जब से इस आदेश की खबर आरोपियों और कर्मचारियों का शोषण कर रहे भास्कर प्रबंधन के दूसरे चमचों को लगी है उनके खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब उन्हें भी जेल जाने का डर सता रहा है।

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डीबी कॉर्प ने मुंबई के ब्यूरो चीफ सहित कई पत्रकारों को बनाया मैनेजेरियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ!

मुंबई से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट…

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सबसे ज्यादा शिकायत डीबी कॉर्प लिमिटेड के अखबारों- दैनिक भास्कर, दिव्य भास्कर और दिव्य मराठी आदि के मीडियाकर्मियों ने कर रखी है। इस संस्थान के पत्रकारों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय सहित महाराष्ट्र के लेबर डिपार्टमेंट और मुंबई के लेबर कोर्ट में तमाम शिकायतें कर रखी हैं। एक तरफ जहां डी बी कॉर्प का दावा है कि वह खूब लाभ कमा रहा है, वहीं जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के मानकों के मुताबिक वेतन न देना पड़े, इसके लिए इस कंपनी ने अपने मुंबई के माहिम दफ्तर में कार्यरत कई सीनियर पत्रकारों को मैनेजेरियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ बना दिया है। पत्रकारों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उन्हें संपादकीय में नहीं बल्कि मैनेजर और एडमिन स्टाफ में रख कर काम लिया जा रहा है।

डीबी कॉर्प ने माहिम ऑफिस में कर्मचारियों की संख्या भी काफी कम, मात्र 13, बताई है, जबकि यहां 70-75 लोग काम करते हैं। यह खुलासा हुआ है आर टी आई के जरिये। हम अगर माय एफएम, डीबी डिजिटल और मार्केटिंग स्टाफ को छोड़ दें, तब भी वहां मजीठिया वेज बोर्ड के हकदार कर्मचारियों की अच्छी-खासी संख्या छिपायी गई है। सो, भास्कर प्रबंधन जिन-जिन के नामों को छिपाकर उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों से वंचित रखना चाहता है, उनके नाम आपको हम बताएंगे।

वे नाम हैं- गुजराती अखबार ‘दिव्य भास्कर’ के राजेश पटेल (सहायक संपादक), विपुल शाह (रिपोर्टर कम सब एडिटर), समीर पटेल (सब एडिटर) और मनीष पटेल (कंपोजिटर)। यहां पर कंपनी के चमचों को शर्म आनी चाहिए कि मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक देय राशि से बचने के लिए कुछ समय पहले ही आफिस ब्वाय जॅार्ज कोली को कॅान्ट्रैक्ट पर कर दिया गया, जबकि वह करीब 10 वर्षों से पेरोल पर था। अब बात इसी कंपनी के मराठी अखबार ‘दिव्य मराठी’ के कर्मवीरों की, जिनके नाम कंपनी ने छिपाए हुए हैं… ये नाम हैं- प्रशांत पवार (सहायक संपादक), प्रमोद चुंचूवार (ब्यूरो चीफ), शेखर देशमुख (संपादक-रसिक), विनोद तलेकर (प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट), चंद्रकांत शिंदे (स्पेशल करेस्पॅान्डेंट), मृण्मयी रानाडे (संपादक-मधुरिमा), समीर परांजपे (सहायक समाचार संपादक), सुजॅाय शास्त्री (सहायक समाचार संपादक) और तुकाराम पवार (कंप्यूटर आपरेटर)।

कंपनी ने जो 13 नाम कामगार आयुक्त कार्यालय में दिए हैं, उन्हें भी पत्रकार के साथ-साथ प्रबंधकीय एवं प्रशासनिक क्षमता से लैस बता दिया है। ये नाम हैं- दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ अनिल राही, जो बतौर पत्रकार महाराष्ट्र शासन द्वारा मान्यताप्राप्त हैं, मगर कंपनी उन्हें भी मैनेजेरियल स्टाफ मानती है। इसके बाद दूसरा नाम धर्मेन्द्र प्रताप सिंह का है। गौर करने की बात यह है कि पत्रकार के तौर पर धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को भी महाराष्ट्र सरकार ने मान्यता दे रखी है और इन्होंने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर लेबर कोर्ट के अलावा एडवोकेट उमेश शर्मा के जरिये सुप्रीम कोर्ट में भी केस लगा रखी है।

अन्य प्रमुख नाम हैं- सीनियर रिपोर्टर सुनील कुकरेती, रिपोर्टर कम सब एडिटर उमेश कुमार उपाध्याय, फीचर एडिटर चंडीदत्त शुक्ला, सीनियर रिपोर्टर विनोद यादव, सीनियर करेस्पॅान्डेंट सलोनी अरोड़ा और प्रियंका चोपड़ा। डी बी कॉर्प ने जिन कर्मचारियों की लिस्ट कामगार विभाग को सौंपी है, उसमें पत्रकार से प्रबंधक और प्रशासक बने इन लोगों के अलावा लतिका चव्हाण और आलिया शेख नामक दो  रिसेप्शनिस्ट का भी नाम शामिल है।

लतिका और आलिया ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लेकर मुंबई के कामगार विभाग में कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध पहले ही शिकायत कर रखी है, जिसकी सुनवाई जारी है। हां, इस सूची में इन्वेस्टर हेड प्रसून पांडे और उनकी सहयोगी (डिप्टी मैनेजर) सोनिया अग्रवाल का नाम जरूर चौंकाता है। वह इसलिए, क्योंकि मार्केट से निवेशक ढूंढने के लिए नियुक्त इन दोनों जन को नेम ऑफ़ द जर्नलिस्ट के रूप में दिखाने की मजबूरी जहां समझ से परे है, वहीं सोनिया अग्रवाल का तो अक्टूबर (2016) की पहली तारीख को ही मुंबई से भोपाल ट्रांसफर किया जा चुका है। ऐसा दावा मुंबई के इंडस्ट्रियल कोर्ट में एचआर के सतीश दुबे ने एक हलफनामा के जरिए किया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
shashikantsingh2@gmail.com
9322411335

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अपने मीडियाकर्मियों का हक मारने वाली कंपनी डी बी कार्प का तीसरी तिमाही मुनाफा बढ़कर 118 करोड़ रपये हुआ

केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद अपने मीडिया कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार सेलरी, भत्ता और बकाया न देने वाली भास्कर समूह की कंपनी डीबी कार्प का मुनाफा तीसरी तिमाही में 6.64 प्रतिशत बढ़ गया है. मीडिया क्षेत्र की कंपनी डी बी कार्प का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 6.64 प्रतिशत बढ़कर 118.1 करोड़ रुपये हो गया है.

ये सारा लाभ कंपनी के मालिक अपने पाकेट में रखेंगे, जबकि कंपनी को आगे बढ़ाने में इसके मीडियाकर्मियों का पूरा का पूरा योगदान है. फिर भी वे मुनाफे में हिस्सा तो छोड़िए, अपना वाजिब हक तक नहीं पा रहे हैं और इसके लिए इन्हें कोर्ट और श्रम विभाग का सहारा लेना पड़ रहा है. ज्ञात हो कि मजीठिया वेज बोर्ड के तहत लाभ पाने के लिए सबसे ज्यादा शिकायतें भास्कर समूह के कर्मियों ने दर्ज कराई है.

बंबई शेयर बाजार को भेजी सूचना में भास्कर समूह की कंपनी डीबी कार्प ने कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में अक्तूबर से दिसंबर तिमाही में उनका शुद्ध लाभ 110.74 करोड़ रपये रहा था. आलोच्य अवधि में कंपनी की अपने कारोबार से कुल आय 6.32 प्रतिशत बढ़कर 627.27 करोड़ रपये हो गई। एक साल पहले यह 589.97 करोड़ रपये थी. इस दौरान डी बी कार्प की विज्ञापन से होने वाली आय 4 प्रतिशत बढ़कर 453 करोड़ रपये हो गई.

नोटबंदी के प्रभाव पर डीबी कार्प के प्रबंध निदेशक सुधीर अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमारा नोटबंदी का खपत पर मध्यम अवधि प्रभाव रहने का अनुमान है. यह अगले कुछ महीने में सामान्य होने लगेगा, इसमें सुधार दिखने लगा है.’’

एक अलग जानकारी में डी बी कार्प ने कहा है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिये अपने शेयरधारकों को 10 रपये के शेयर पर चार रपये का अंतरिम लाभांश देने की घोषणा की है.

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बैलेंसशीट मांगने पर डीबी कॉर्प के अधिकारी सुनवाई में ही नहीं आये

सहायक महाप्रबंधक को भी होना था हाजिर, होगी कारवाई

मुंबई : डी.बी. कार्प की रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख द्वारा लगाए गए 17(1) के मजीठिया वेज बोर्ड रिकवरी क्लेम मामले में प्रबंधन को अपनी कम्पनी का वर्ष 2007 से 10 तक की बैलेंसशीट देनी थी मगर गुरुवार को आयोजित सुनवाई में ना ही डी बी कॉर्प की तरफ से कोई आया ना ही इस सुनवाई में डी बी कॉर्प का कोई वकील ही आया। इसी सुनवाई में डीबी कॉर्प की सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) श्रीमती अक्षता करनगुटकर को भी मुम्बई की सहायक कामगार आयुक्त नीलांबरी भोषले ने उपस्थित होने का निर्देश दिया था मगर इस सुनवाई में वे भी नहीं आईं।

इसके बाद डी बी कॉर्प की महिला कर्मचारियों की तरफ से आयी एनयूजे की महाराष्ट्र महासचिव शीतल करंदीकर और मुम्बई के निर्भीक पत्रकार और मजीठिया सेल के समन्यवयक तथा आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह और आलिया एवं लतिका ने कड़ा एतराज जताया और कहा कि ये जानबूझ कर किया गया है ताकि कम्पनी की बैलेंसशीट न देना पड़े। इस एतराज को सहायक कामगार आयुक्त ने भी सही माना और कहा कि ये काफी गंभीर मामला है और वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी देकर आगे की कार्रवाई करेंगी।

आपको बता दें कि डी बी कॉर्प को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू कराने के बारे में एक एफिडेविट देने का निर्देश कामगार आयुक्त कार्यालय द्वारा लिखित रूप से दिया गया था मगर उसे भी कंपनी ने नहीं दिया। डी बी कॉर्प का रिकार्ड है जितने कर्मचारियो ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन माँगा उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। मगर आलिया और लतिका पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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डीबी कॉर्प को एक सप्ताह में बैलेंसशीट देने का सख्त निर्देश

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में कामगार आयुक्त कार्यालय के साथ लगातार असहयोग कर रहे दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प को अब अपना वर्ष 2007 से 2010 तक की बैलेंसशीट देनी ही पड़ेगी। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में डी बी कॉर्प के धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, जो दैनिक भास्कर के मुम्बई यूनिट में प्रिंसिपल करेस्पॅान्डेंट हैं, के अलावा रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख ने 17 (1) का रिकवरी क्लेम और उत्पीड़न का मामला लगाया है। इन दोनों मामलो की सुनवाई कामगार आयुक्त कार्यालय में रखी गयी थी।

नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट (महाराष्ट्र) की महासचिव शीतल करदेकर तथा मुम्बई के निर्भीक पत्रकार शशिकान्त सिंह ने सुनवाई के दौरान इस बात पर कड़ा एतराज जताया कि दैनिक भास्कर संचालित करने वाली मूल कंपनी का प्रबंधन आखिर अपना 2007 से 2010 तक की बैलेंसशीट क्यों नहीं दे रहा है? इस पर सहायक कामगार आयुक्त नीलांबरी भोसले ने शीतल करदेकर और शशिकान्त सिंह के एतराज को सही बताया और डीबी कॉर्प के एडवोकेट अविनाश पाटिल को निर्देश दिया कि आप एक सप्ताह के अंदर कंपनी की बैलेंसशीट लेकर आइये, नहीं तो शिकायतकर्ताओं के क्लेम को सही मान कर एक पक्षीय आदेश जारी कर दिया जाएगा।

इस सुनवाई में शीतल करदेकर, जो राज्य सरकार द्वारा गठित मजीठिया वेज बोर्ड की टीम की सदस्य भी हैं, ने महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न पर घोर चिंता जताई और कहा कि अगली सुनवाई पर डीबी कॉर्प की सहायक महाप्रबंधक (कार्मिक) श्रीमती अक्षता करंगुटकर को बुलाया जाय, क्योंकि वह सिर्फ एक डेट पर आई हैं, जिस पर उन्हें उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया। अगली तिथि पर श्रीमती करंगुटकर को स्वयं उपस्थित रह कर कर्मचारियों द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोप पर स्पष्टीकरण देना होगा।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
9322411335

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सबसे ज्यादा बददुआ पाने वाली मीडिया कंपनी है डीबी कॉर्प!

राजश्री प्रोडक्शन ने एक से बढकर एक हिट फिल्में दी हैं जिन्हें लोगो ने बार बार देखा और बार बार सराहा। राजश्री प्रोडक्शन के सूरज बड़जात्या से एक बार मैंने सवाल पूछ लिया और जो उत्तर मिला वो आज तक नहीं भुला सका। सवाल था राजश्री प्रोडक्शन की कामयाबी का राज आप क्या मानते हैं? सूरज जी ने उत्तर दिया- हम फिल्में पैसे से नहीं, दुआओं से बनाते हैं। तह तक गया तो पता चला राजश्री प्रोडक्शन में आज भी कई लोग ऐसे हैं जो ‘दोस्ती’ फिल्म के समय से जुड़े और इसी कंपनी के होकर रह गए। कंपनी प्रबंधन उनके हर सुख दुख में साथ देता है।

काश ये बात डीबी कार्प प्रबंधन भी समझ लेता। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर से सबसे ज्यादा शिकायत डीबी कॉर्प के खिलाफ माननीय सुप्रीमकोर्ट और लेबर विभाग में की गयी है। इस कंपनी में शोषण का आलम यह है कि डीबी कार्प के समाचार पत्रों दैनिक भास्कर और दिव्य मराठी से आज भी लोगों के फोन आते हैं। वे मुझसे कहते हैं सर मजीठिया मांगने की सिर्फ किसी साथी से चर्चा कर दी तो कंपनी ने कह दिया आपका परफार्मेंस खराब है और नौकरी से निकाल दिया।

किसी का फोन आता है तो बताता है कि सर मजीठिया माँगा तो महाराष्ट्र से ट्रांसफर करके झारखण्ड भेज दिया। किसी को राजस्थान भेज दिया गया। एक साथी ने बताया इस कंपनी की एच आर हेड ने मुझे कह दिया कि तुम मजीठिया मांगते हो तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर दूंगी।

अब सवाल ये उठता है जिस अखबार का नाम ही भास्कर यानि उगता सूर्य से है, वो अस्त कैसे हो रहा है। जाहिर सी बात है भास्कर को बददुआ लग गयी है। ये बददुआ उन लोगों की है जो इसके कर्मचारी हैं या थे। जो कर्मचारी हैं वो इसलिए बददुआ देते हैं कि कंपनी जो कर रही है, गलत कर रही है और जो बाहर हैं वो इसलिए बददुआ दे रहे हैं कि कंपनी ने जो किया गलत किया। बाहर निकाले गए लोगो के बीवी बच्चे भी बददुआ दे रहे हैं। आज इस कंपनी में लोगों का पेट पालना मुश्किल है। कर्मचारियों ने क्या गलत कर दिया, सिर्फ यही कहा न कि दो जून की रोटी दे दो। आपने क्या किया? आपने उनकी रोटी ही छीन ली।

डीबी कॉर्प प्रबंधन से मेरा सीधा सवाल है आपके पास कोई नौकरी क्यों करेगा। शायद अब आपके यहाँ कोई नौकरी की तलाश में बायोडाटा लेकर भी नहीं जाएगा। अगर गया तो वो भी आपको एक दिन बददुआ देगा। फिर ऐसा काम क्यों करना। उम्मीद है आपकी तरफ से जवाब मुझे जरूर मिलेगा। जवाब का इंतजार रहेगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्टिविस्ट
9322411335
shashikantsingh2@gmail.com

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भास्कर ग्रुप की कंपनी डीबी कार्प में 24 घंटे के भीतर श्रम विभाग डालेगा छापा!

महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त ने मजीठिया संघर्ष मंच द्वारा दिए गए ज्ञापन पर कार्रवाई के आदेश दिए….  समाचार कर्मियों से अनुरोध ये है कि वो श्रम आयुक्त को अपना क्लेम निवेदन भेजें….

समाचार पत्र कर्मियों के वेतन भत्ते और एरियर्स से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आज महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त श्री केरुरे से मजीठिया संघर्ष मंच के अध्यक्ष शशिकान्त सिंह के नेतृत्व में पत्रकारों की एक टीम उनके कार्यालय में मिली. इस मौके पर श्रम आयुक्त को एक ज्ञापन दिया गया. बाद में उनसे बातचीत में मजीठिया वेज बोर्ड के राज्य में ठीक से क्रियान्वयन न होने को लेकर उनसे कई बिंदुओं पर गंभीर चर्चा की गई.

ज्ञापन को आधार बनाकर श्रम आयुक्त ने भास्कर ग्रुप की कंपनी डीबी कॉर्प के माहिम स्थित कार्यालय में 24 घंटे के अन्दर श्रम विभाग की टीम को पहुंचने का आदेश दिया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार छापा-सर्वे करके रिपोर्ट तैयार करने का आदेश निर्गत किया. इस बाबात श्रम आयुक्त ने छापा मारने और सर्वे करने की जिम्मेदारी अपने विभाग की महिला श्रम अधिकारी निशा नागराले को दिया.

श्रम आयुक्त श्री केरुरे ने मजीठिया संघर्ष मंच से चर्चा के दौरान साफ़ कहा कि समाचारपत्र कर्मी बिना डर के क्लेम करें। मजीठिया संघर्ष मंच के सदस्यों ने उन्हें अवगत कराया कि कर्मचारी प्रबन्धन के भयानक दबाव में हैं जिसके चलते वह कोई पहल नहीं कर पा रहे हैं लेकिन उन सबके दिल में क्लेम लेने की इच्छा भरपूर है. इस पर श्रम आयुक्त श्री केरुरे ने कहा कि अगर एक भी मामला मेरे सामने आया कि प्रबन्धन अपने कर्मचारियों पर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को लेकर क्लेम न करने का दबाव डाल रहा है या जानबूझ कर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू नहीं कर रहा है तो ऐसे अखबार मालिकों के खिलाफ तत्काल उचित कार्रवाई की जाएगी और उन्हें ज्यादा हीलाहवाली करने पर जेल भी भेजा जा सकता है.

ज्ञापन दिए जाने और वार्ता के मौकै पर भास्कर ग्रपु की कंपनी डीबी कॉर्प के वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने खुलकर अपना पक्ष रखा. इस अवसर पर कई श्रम अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे. इन अधिकारियों को श्री केरुरे ने मजीठिया वेज बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में लागू किए जाने से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए.

शशिकान्त सिंह

पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट

9322411335

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कोर्ट जाने पर छह मीडियाकर्मियों को भास्कर प्रबंधन ने किया टर्मिनेट

गुजरात से खबर है कि दैनिक भास्कर वालों के गुजराती अखबार दिव्य भास्कर की मेहसाणा यूनिट के 20 मीडियाकर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप सेलरी एरियर न दिए जाने के खिलाफ कोर्ट गए हैं. प्रबंधन को अपने कर्मियों के कोर्ट जाने की जानकारी मिली तो अब सभी को परेशान किया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने छह लोगों को टर्मिनेट कर दिया है. अन्य लोगों को नौकरी पर न आने को कह दिया गया है. इस तरह स्टेट एडिटर अवनीश जैन और एचआर स्टेट हेड राहुल खिमानी ने अपना असली रंग दिखा दिया. बावजूद इसके, सारे कर्मचारी एकजुट हैं और इनकी एकता तोड़ने में ये दोनों नाकामयाब रहे.

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गुजरात हाईकोर्ट ने दिया दिव्यभास्कर (डीबी कॉर्प) को तगड़ा झटका, भास्कर प्रबंधन के सभी कुतर्क अस्वीकार

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन और एरियर देने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति परेश उपाध्याय की पीठ ने डीबी कॉर्प (दैनिक भास्कर और दिव्य भास्कर की प्रकाशक कंपनी) के खिलाफ दिव्य भास्कर कर्मचारियों की याचिका को सही माना है। हाईकोर्ट ने बीते आठ तारीख को कर्मचारियों की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करने को लेकर दिव्य भास्कर के प्रबंधन के सभी तर्कों को अस्वीकार कर दिया।

याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश के मुताबिक प्रबंधन तत्काल प्रभाव से वेतन और एरियर का भुगतान करे। इसके लिए पीठ गुजरात सरकार को भी इसे लागू कराने का आदेश दे। इसके साथ ही हाईकोर्ट प्रबंधन की ओर से इस मामले में किए गए कर्मचारियों के ट्रांसफर को अवैध घोषित करते हुए उसी स्थान पर पूर्ववत काम करते रहने का आदेश दे। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति संलग्न है, नीचे के लिंक पर क्लिक करें…

GUJARAT HIGHCOURT ORDER

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भास्कर चेयरमैन रमेश अग्रवाल की पत्नी की याचिका पर बहू-बेटों को नोटिस

रमेश अग्रवाल यानि भास्कर के चेयरमैन की सच्ची कहानी इंदौर के अखबार दबंग दुनिया ने प्रकाशित की है. पत्रकार विनोद शर्मा की बाइलाइन इस खबर को दूसरे अखबारों ने इसलिए नहीं प्रकाशित किया क्योंकि मामला चोर-चोर मौसेरे भाई का है. तू मेरी कहानी छिपा, मैं तेरी छिपाउंगा टाइप का गठबंधन है मीडिया हाउसेज में. इसीलिए दूसरों की जिंदगी में घुसकर ढेर सारी एक्सक्लूसिव खबरें फोटो निकालने छापने वाले मीडिया हाउसेज के मालिक एक दूसरे की कुत्ती कहानियों को छिपा-ढंक के रखते हैं.

दबंग दुनिया ने भास्कर की कच्ची सच्ची अच्छी गंदी कहानियां इसलिए छापता है क्योंकि भास्कर वालों ने एक जमाने में दबंग दुनिया के मालिक को काफी परेशान किया था. उसी से दुखी होकर दबंग दुनिया का प्रकाशन किया और भास्कर वालों को दौड़ाया. आप भी पढ़िए रमेश अग्रवाल के बुढ़ापे की सच्ची कहानी.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

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भास्कर अंदरुनी कथा के लिए इस शीर्षक पर भी क्लिक कर सकते हैं…

रमेश अग्रवाल की संपत्ति पर ‘मां’ के हक ने उड़ाई समूह संचालकों की नींद

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