टाइम्स आफ इंडिया के पत्रकारों का गणित ज्ञान कमजोर, मोदी के गुणगान में आंख मूंद छाप दे रहे हैं कुछ भी

Abhishek Srivastava : ये है टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर, जो वैसे तो कई अख़बारों में छपी है लेकिन जस यहां है तस कहीं नहीं है। खबर का शीर्षक देखें और पूरी खबर पढ़ें। इसके मुताबिक प्रधानजी बनारस में रोहनिया के जिस गांव को गोद लेने वाले हैं, उसने  ‘450’  साल पहले औरंगज़ेब की फौज को हराकर भगा दिया था। औरंगज़ेब 1618 में पैदा हुआ था यानी आज से 396 साल पहले, लेकिन टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने 450 साल पहले बनारस पर उसका हमला करवा दिया है।

खबर के भीतर “nearly 450 years” भी आसपास नहीं बैठता।  दिलचस्‍प यह है कि इसी परिवार के दूसरे अखबार इकनॉमिक टाइम्‍स में संबंधित ख़बर में औरंगज़ेब का संदर्भ गायब है। Dilip Khan ठीक कहते हैं कि पत्रकारों को थोड़ा-बहुत गणित का ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है। The Times of India की खबर का शीर्षक है- ”450 years ago, Modi village stopped Aurangzeb’s army

टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने औरंगज़ेब का हमला बनारस पर 450 साल पहले करवाया तो हिंदी का पतरकार कैसे पीछे रहता। ये देखिए, दैनिक जागरण ने ”प्रधानजी के गांव” पर सीधे अकबर का ही हमला करवा दिया है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर का शीर्षक है: ”कभी अकबर को दी मात, आज खुद वक्त से हारा”।

मीडिया विश्लेषक और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से अंकित अग्रवाल का कमेंट इस प्रकार है…

Ankit Agrawal : इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक संघ 2002 से ही इस गाँव का विकास कर रहा है और वो मोदी द्वारा इसे हथिया लिया जाने से खुश नहीं है। वैसे इस गाँव से जुडा एक रोचक तथ्य ये भी है की यहाँ एक भी मुस्लिम नहीं है ऐसा एक स्वयंसेवक ने बड़े उत्साह के साथ पत्रकार को बताया। ये सिम्बोलिज्म कितना भयावह है!

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Comments on “टाइम्स आफ इंडिया के पत्रकारों का गणित ज्ञान कमजोर, मोदी के गुणगान में आंख मूंद छाप दे रहे हैं कुछ भी

  • इंसान says:

    आज का जयचंद सूचना प्रौद्योगिकी में कुछ ज्ञान प्राप्त कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच गया है| अब तक भारत को डुबोते इसकी पत्रकारीय वैश्य्वृति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को ही लाभान्वित करती रही थी और अब तो इसकी दूकानदारी अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज को छू रही है| दीमक के टीले पर बैठे जैसे तैसे अपने जीवन की अंतिम घड़ियाँ गिनते इसे अपने बच्चों और बच्चों के बच्चों का कोई ध्यान नहीं है| सैंकड़ों वर्षों बाद केंद्र में राष्ट्रवादी शासन के आगमन पर इस जयचंद और उसके भईयों का मोदी जी पर प्रहार केवल स्वयं उनकी आने वाली संतानों पर है|

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