कोरोना संक्रमित वरिष्ठ पत्रकार पहुंचे कोमा में, किसी तरह बची जान (पढ़ें संस्मरण)

Vijay Vineet : कोरोनाकाल में मौत के 14 दिन… संस्मरण.. जीवन और मौत के बीच कोरोना वायरस से करीब 14 दिनों तक जंग लड़ने के बाद हम घर लौट आए। शुरुआत में कोविड-19 ने हमें जकड़ा तो लगा कि यह फ्लू जैसी मामूली बीमारी है। लेकिन बाद में जो लक्षण नजर आए वह काफी गंभीर थे। वैसे भी जब किसी इंसान को यह पता चल जाता है कि वह कोविड-19 से घिर गया है गया है, तो आधी जान यूं ही हलक में अटक जाती है।

17 जुलाई को अचानक मुझे हल्का बुखार हुआ। ढेरों चिकित्सक मित्रों से परामर्श लिया। सबने इसे मामूली बीमारी बताकर टालने की कोशिश की। लेकिन मैं इस गंभीर बीमारी की तासीर को समझता था। तीन दिनों तक लगातार कमिश्नर, कलेक्टर, सीएमओ से लेकर जिले के ढेरों आला अफसरों को अनगिनत फोन करता रहा। किसी का जवाब नहीं मिला। सरकार को ट्वीट किया।

बाद में गृह मंत्रालय से मेरे लिए गाइडलाइन जारी हुई। तब अफसरों के फोन आने शुरू हुए। इसके बाद लंबी जद्दोजहद के बाद जांच हुई और घोषित किया गया कि मैं कोरोना की जद में हूं।

जिस समय मैं एंबुलेंस सेअस्पताल के लिए निकला सैकड़ों लोग मुझे उत्सुक देख रहे थे, जैसे कोई मैं बड़ा गुनहगार हूं। कुछ वीडियो बनाने में मशगूल थे तो कोई फोटो खींच रहा था। साहस देने के लिए एक शख्स भी सामने नहीं आया। उस समय मेरी सांस उखड़ रही थी। पहले चौकाघाट आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुआ और हालत बिगड़ने पर रात 2:00 के बाद में नदेसर के निजी अस्पताल होटल गुप्ता इन में। दोनों अस्पतालों की अपनी राम कहानी है। उसे हम बाद में सुनाएंगे।
प्राइवेट अस्पताल में करीब 14 दिन तक जीवन और मौत से जूझता रहा। 24 जुलाई को मेरी सेहत तेजी से बिगड़नी शुरू हुई और अगले दिन 25 जुलाई को मैं कोमा में चला गया। लेवल-तीन वाली स्थिति थी। डॉक्टरों ने उम्मीद भी छोड़ दी थी, क्योंकि ऑक्सीजन सैचुरेशन 60 पर पहुंच गया था।

जब बचने की उम्मीद नहीं थी तो अस्पताल वालों ने मेरा सामान बंधवा दिया था। शहर के किसी ऐसे अस्पताल की तलाश की जा रही थी जहां मुझे ठेला जा सके और अस्पताल प्रबंधन मेरी मौत का कलंक अपने सिर पर लेने से बच जाए।
बस एक उम्मीद थी जिंदा बच पाने की। इसी उम्मीद के सहारे अस्पताल के चिकित्सक डॉ राममूर्ति सिंह की टीम ने मेरा इलाज शुरू किया। लगातार 24 घंटे तक एक चिकित्सक के पर्वेक्षण में रखा। डॉक्टर सारस्वत राठौर ने मुझे बचाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। तमाम मशीनें और औजार लगाए गए। वो खाने-पीने की सुध तक भूल गए। तीसरे दिन उम्मीद की किरण लौटी। इसके बाद डॉक्टर सारस्वत अपने घर लौटे। तब भी अस्पताल के डॉक्टरों को पुख्ता भरोसा नहीं था कि हम सचमुच कोविड-19 से जंग जीत लेंगे?

प्राइवेट अस्पताल के जिस कमरे में मुझे रखा गया था, “किसी को भी वहां आने और मुझसे मिलने की इजाज़त नहीं थी। होटल के कमरे में टीवी मौजूद थी, फिर भी वहां मुझे बहुत अकेला महसूस होता था। जेल के कैदी की तरह। मुंह पर 24 घंटे ऑक्सीजन का मास्क लगा रहा। दो-तीन दिन तक तो मैं बिस्तर से उठा तक नहीं। यहां तक की टॉयलेट के लिए भी नहीं जा सका। जब मेरी बेडशीट बदलनी होती थी तो मैं दूसरी करवट हो जाता था। कोरोनावायरस ने शरीर की सारी ताकत निचोड़ दी थी।”

“मुझे सांस लेने में कई बार दिक्क़त होती तो भी मुझे अटेंडेंट का इंतज़ार करना पड़ता। मुझे उसी हालत में कुछ देर रहना पड़ता ताकि जो भी मुझे अटेंड करने आ रहा है वो ख़ुद के सारे सुरक्षा आवरण पहन ले। गाहे-बगाहे मेरे परिवार वाले मेरे साथ फ़ोन पर बात करते रहते ताकि मैं शांत बना रहूं।

दरअसल मुझे यकीन होने लगा था कि अब घर लौट पाना मुश्किल है। इसके बावजूद मैं डरा नहीं। मैंने मान लिया था की हर चीज के लिए मैं तैयार हूं। चाहे जिंदा रहूं या ना रहूं। आखिरी दिन तक मेरा हौसला नहीं डिगा। शायद यही हौसला मेरी ताकत बना और हम कोविड-19 के खिलाफ जंग जीत पाए। दरअसल कोविड-19 के खिलाफ मैं इसलिए हर सांस के लिए जूझ रहा था कि ये लड़ाई मेरे मेरी खुद की नहीं थी। मुझसे अनगिनत असहाय और बेबस लोगों की उम्मीदें जुड़ी हुई थीं जिनके लिए मेरी कलम की आवाज ताकत बनती रही है।

मैं कभी उस वक्त को नहीं भूल पाता जब अस्पताल से बाहर निकला। ताज़ी और ठंडी हवाएं आज भी मुझे वह सुखद एहसास कराती हैं। इतना जरूर है कि अस्पताल के उन कुछ अकेले गुज़ारे हफ़्तों ने मेरी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। मुझे यह बात अच्छी तरह समझ में आ गया कि हर छोटी से छोटी चीज़ का अपना महत्व है।

कोविड-19 से जंग हम भले जीत गए, लेकिन नौकरशाही के खेल ने सीने पर जो मूंग दली है, उसका जख्म कब मिटेगा यह का पाना कठिन है?अस्पताल में जितने दिन रहे सरकारी मशीनरी ने अपराधियों की तरह परेशान किया। फोन दर फोन करके मानसिक यातनाएं दी। कुछ ने गालियां तक सुनाई कि तुम लोगों के कोरोना की वजह से हम लोगों परेशान हैं। शायद कोविड से भी खतरनाक त्रासदी है नौकरशाही का यह खेल। पुलिस वालों के फोन तो ऐसे घनघनाते रहे जैसे हम कोई कुख्यात और फरार मुलजिम हों…। कोई भी सरकारी मुलाजिम ऐसा नहीं था जिस का फोन आया हो और वह प्यार व मोहब्बत भरी बातें की हो सिवाय उलाहना और दुत्कार के…।

विनम्र आग्रह- घर में रहें, सुरक्षित और बेहद सावधान रहें। कोरोना ऐसा रक्तबीज है, जो शैतान की तरह किसी भी समय आपके शरीर में घुस सकता है।

अमर उजाला समेत कई वरिष्ठ अखबार में कार्यरत रहे और इन दिनों जनसंदेश टाइम्स बनारस के संपादक के रूप में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की एफबी वॉल से.

उपरोक्त पोस्ट पर आए ढेरों कमेंट में से कुछ प्रमुख यूं हैं-

Harshvardhan Shahi
यार विनीत, सबसे पहले तुम्हारी जिजीविषा को सलाम जिसने तुम्हें बचा लिया। इस पोस्ट से स्पष्ट है कि तुमने कई मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ी और विजय प्राप्त की। मेरी निगाह में तुम कुछ और बड़े हो गए। बहुतों के लिए प्रेरणा स्त्रोत तो बन ही गए हो। यह बेरहम कोरोना और संवेदनहीन नौकरशाही के खिलाफ एक निहत्थे योद्धा की महान जीत है।
मैं बनारस जब भी आऊंगा, सलाम करने जरूर आऊंगा। आप लखनऊ आना तो सूचित करना।
महान जीत की एक बार फिर बधाई।

Nisheeth Joshi
आपने रक्त बीज को मात दी है। यह जिजीविषा ही तो है। जो इससे लड़े और विजय प्राप्त की। साथ ही अपने अनुभव को सबके साथ बांट रहे हैं ताकि जिंदगी का महत्व लोग समझ सकें। सदा स्वस्थ्य रहें और दीर्घायु हों। यही दुआ है।

Akhand Pratap Singh
बड़ा ही मार्मिक वर्णन है.
आप अपने नाम को सार्थक करते हुए कोरोना पर विजय प्राप्त कर सके, इसके लिये बधाई.
ईश्वर आपको स्वस्थ और सुखी रखे!

Abhinav Arun
आप स्वस्थ रहें ये कामना। लेकिन सब कुछ वैसा नही जैसा अखबार मीडिया चैनल दिखाते हैं। दुःखद है। हम प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में हैं।

Ajay Rai
जल्द आप स्वस्थ हो आपकी लेखनी मजदूरों किसानों की आवाज हैं! आप उनके लिए आशा की किरण हों आपके लिए सभी की दुआ हैं कि आप जल्द ही ठीक हों!

Arvind Upadhyay
विजय जी!आप एक बड़ी जंग बहुत ही हौसले के साथ जीत कर आए हैं, हम लोगों को इसकी प्रसन्नता है. आपके अनुभव जाहिर कर रहे हैं कि पूर्ण स्वस्थ होकर फिर से सक्रिय होने के बाद आपको फिर एक जंग लड़नी है उन वायरसों से जिनसे सिस्टम संक्रमित है. आपके अच्छे स्वास्थ्य और सुखमय जीवन के लिए मंगल कामना.

Manoj Rai Dhoopchandi
आप जुझारू प्रवित्ति के हैं और नाम भी विजय विनीत है तो बीमारी पर विजय पा ही लेंगे
बनारस में हालात बहुत खराब है
पर अफसोस प्रधानमंत्री जी के क्षेत्र का इतना बुरा हाल है
आपको शुभकामनायें आप पूर्ण रूप से जल्द स्वस्थ हो।

Anil Kumar Upadhyay
विनीत जी जब से हमें आपके बारे में पता चला था,हमें चिंता हुयी किन्तु हमें विश्वास था कि आप पूर्ण स्वस्थ हो जाएंगे,इसीलिए हमने बार-बार फोन करना उचित नहीं समझा।ताकि आप परेशान न हों।ईश्वर की कृपा और आपके आत्म बल ने आपको संक्रमण से बाहर किया।शीघ्र आप स्वास्थ लाभ कर पूर्ण स्वस्थ हों।नमस्कार।

DrPramod Pandey
विजय भाई अनभिज्ञ थे हम आपकी अस्वस्थता के प्रति।हमें याद है दो तीन वर्ष पूर्व भी आपका स्वास्थ्य संबंधी संघर्ष रहा परंतु इस बार इसकी भयावहता महसूस कर रहा हूँ, एक सभ्य और योग्य पत्रकार कीअभिव्यक्ति से इसे बहुत कुछ समझा जा सकता है ,,,, ईश्वर से आपके दीर्घायुष्य एवं स्वस्थ जीवन जीवन की प्रार्थना करता हूँ।

अरविन्द कुमार
पहली बात तो यह कि आप ठीक होकर घर आ गये। यह एक अच्छी खबर है। दूसरी बात यह कि आपके अनुभव में काफी इजाफा हुआ है। यह भी एक अच्छी खबर है। तीसरी बात यह कि आपके बहाने प्रशासन का खेल भी सामने खुल कर आ गया।

Ashok Kumar Shahi
अब आप स्वस्थ हो ।अब ठीक होने के बाद का फोटो डालो।लोगों की दुआवों में बडी शक्ति होती है।ईश्वर का आभार कि आप हम लोगों के बीच हैं ।अति शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ होने की शुभकामनाएं ।

Rajesh D Dixit
भैया जैसा कि आपने कहा बिल्कुल सच है, आप हमेशा से जुझारू प्रवित्ति के रहे और सच यही जिद है जो आपको सब मुश्किल से जीत दिलाती है। आपके हौसले को सलाम। आप हमेशा स्वस्थ और सुरक्षित रहे अभी आपको अपनी कलम के प्रभाव से इस समाज को बहुत कुछ बताना और सिखाना है। हम हमेशा आपकी कुशलता की कामना करते हैं। ईश्वर से यही कामना है कि आप जल्द से जल्द पूर्ण स्वस्थ हों।

Sanjeev Verma
विजय भैया आपने अपने आत्मबल से और करुणा से संघर्ष करके जो विजय प्राप्त की एक तरफ दुख भी आप के बीमार होने का लगा दूसरा आपके प्रति फक्र गर्व भी महसूस हुआ कि आप जैसा आत्म बलि व्यक्ति भी आज यहां है पत्रकारिता में या करुणा से लड़ाई में हर लड़ाई अपनी जीती है आप हमेशा स्वस्थ सुखी रहें हम भाइयों की कामनाएं

Subodh Kumar Singh
आपके अदम्य साहस, ईश्वर ईक्षा और डाॅक्टर सारस्वत की लगन, ज्ञान और सेवा ने आपको आपको स्वस्थ किया। बधाई। शीघ्र पूर्ण स्वस्थ हों। अपने लेखक और पत्रकार होने की जिम्मेदारियों का भी बेबाक निर्वहन कीजिएगा। बहुत कुछ है, जानने, समझने और बताने के लिए, और एक मोटा पर्दा भी पङा है, जिसने धूल और फूल दोनो को ढक रखा है।

Chandramauli Mishra
ईश्वर का लाख-लाख शुक्र है कि आप स्वस्थ है, इतनी गम्भीरवस्था की हम लोगों को उम्मीद नहीं थी, बाकी मेडिकल स्टॉप जिसने रात-दिन मेहनत कर आप को स्वस्थ किया उनका भी हम लोग शुक्रगुजार है। आपकी कभी न हार मानने वाला मनोबल भी तिनके में प्राण फूंक गया। फिर से ईश्वर को धन्यवाद, प्रणाम

Anuj Didwania
विनीत भैया बहुत मार्मिक वर्णन है मेरी तो समय आप से बात हुई थी आपकी तकलीफ ना तो देखी गई मैं तो सुनी जा सकती थी बाबा का भी आशीर्वाद है आपके ऊपर जिससे कि आप स्वस्थ होकर हम लोग के बीच आ गए

Laxmikant Dwivedi
विनीत जी, आपके लेख ने केवल आपकी ही नहीं, सभी कोरोनामरीजों की आपबीती बहुत मर्मस्पर्शी तरीके से बयां की है। आपके साहस और धैर्य को सलाम। ईश्वर आपको शीघ्रातिशीघ्र स्वस्थ करें।

Shivprakash Maurya
आप हम लोगों को विकट परिस्थितियों में धैर्य और साहस की प्रेरणा देते हैं। ऐसे व्यक्तित्व को ईश्वर सदैव अपना आशीर्वाद बनाए रखें। आप स्वस्थ रहिए यही माता अन्नपूर्णाऔर बाबा विश्वनाथ से मेरी प्रार्थना है।

Ramesh Pankaj
आपने कोरोना से जंग लड़ी , नौकरशाही से ठोकरें खाते और फिर एक बार सर्वसमर्थ होकर घर लौटे यह एक अविस्मरणीय संस्मरण पढ़कर साहसिक कार्य की अनुभूति हुई । शुभकामनाएं

Santosh Kumar
आपके साहस ने कोरोना को पराजित किया अन्यथा निराशा घनीभूत हो चुकी थी। निसन्देह स्थितियां बदतर हो चुकी हैं।

Rajesh Kumar
ईष्वर महान है भाई साहब, और आप जैसा हिम्मतीं कम ही मिलेंगे, आप सकुशल हैं ,इससे बड़ा कुछ नही

Shridhar Dwivedi
सच को उजागर करने की ताकत आपके भीतर महादेव ने भरी है इसीलिए कष्ट के महाभवसागर को पार करा लाये और फिर से समाज का दर्पण हम सभी को वापस कर दिया है। देवाधिदेव का बहुत बहुत आभार।

Shailesh Tripathi
आपके साहस का शब्दों में बयां नही किया जा सकता पर आपका यह संस्मरण बहुतों को सावधान करेगा जो इसे अभी भी हल्के में ले रहे हैं ।

Shri Prakash Shukla
सुखद की आप अब बाहर आ गए हैं।आपकी पोस्ट से साहित्य में पढ़े गए हाहाकार की गूंज सुनाई दे रही है जो सत्ता व्यवस्था के निकम्मेपन को दर्शाती है।

Ashish Kumar Srivastava
जो बीता आप पर ,वह शब्दो मे बयाँ नही किया जा सकता, यकीनन यह ज़िन्दगी की बहुत बड़ी जीत और सीख दोनो है आपके लिए और हमसभी के लिए।शुभकामनाएं !!!

Anand Misra
विजय विनीत जी मैं भी कोरोना को मात देकर 31 जुलाई को आया हूँ।
एकदम आपके साथ जो हुआ है उससे भी भयंकर मेरे साथ हुआ है मैं हॉस्पिटल मिड विन मैदागिन में भर्ती था।

Amit Khanna
भैया प्रणाम ,आप पर बाबा की कृपा बनी रहे।डॉक्टर राममूर्ति सिंह और टीम को और हार्दिक बधाई। अन्य बातें समय के अनुसार आप निश्चित रूप से क्रमबद्ध करेंगे ।आप कलम के सिपाही हैं , आप निश्चित रूप से इस महामारी पीड़ित लोगों के सभी प्रकार से अपने अनुभवों से लाभ देंगे सहायक होंगे बाबा की कृपा से आप स्वस्थ हो गए बधाई। सत्य कभी पराजित नहीं होता।

Firasat Husain
विजय विनीत जी आप की हालत इतनी ख़राब हो गई थी, पढ़कर दिल बेचैन हो गया, रात का खाना तक अच्छा नहीं लगा। आपने हिम्मत नहीं हारी और आप कोरोना की जंग जीतकर घर लौटे आपको दिल से बहुत बहुत बधाई। विनीत जी शायद आप मुझे भूल गए होंगे लेकिन बरेली दैनिक जागरण में आप के साथ काम करना मुझे आज भी याद है। कभी भी बरेली आना हो तो याद कर लीजियेगा। आपका भाई फिरासत हुसैन बरेली। मोबाइल नंबर 9410430786.

Dinesh Chaurasia
आप के द्वारा हकीकत का वर्णन कुछ ऐसा ही है जैसा मै कल्पना कर रहा था।इस क्रूर नौकरशाही से महामारी मे वही अपनी जीवन नौका पार लगा सकता है जो अपनी स्थिति को स्वीकार कर के अपने आप को धैर्य व साहस के साथ जल की धारा पर बहते तिनके की तरह समर्पित कर दे।
आप द्वारा कोरोना से किया गया संघर्ष अनुकरणीय व वंदनीय है

Vinod Kumar Sahay
Really sir, आप मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं बिल्कुल अपनी लेखनी की तरह..आप जल्द स्वस्थ हों यही कामना है..

Ravindra Pratap Singh
सरकारी तंत्र का यही हाल है ।
डोर टू डोर चेकिंग अभियान में केवलआयुष चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है तथा जहां भर्ती लोग हो रहे वहां के हालात तो आप प्रत्यक्षदर्शी है हीं ।
पोलियो अभियान हो या कोई नेशनल स्वास्थ प्रोग्राम आयुष वाले ही ड्यूटी में लगाए जाते रहे हैं।

Rahul Singh
आपने जिस तरह अपनी खट्टी मीठी यादें साझा की हैं वो बेहतरीन हैं और इससे बहुत से लोगों को इस जंग को जीतने में सहायता मिलेगी ये भी तय है । युद्ध जीतने की हार्दिक बधाई ।

Raj Kumar Singh
आप जैसे साहसिक व्यक्ति का जीवन बहुत ही मूल्यवान है यह भगवान भी जानते हैं इसीलिए आपको भयंकर कोरोना संक्रमण के बाद भी भगवान ने ताकत देकर दोबारा सत्य को उजागर करने के लिए तथा लोगों का उद्धार करने के लिए भेजा है। प्रार्थना है आप की ताकत और ऊर्जा दोगुनी हो जाए और आप समाज के लिए निरंतर काम करते रहे ।

Brijraj Singh
सर जब आपसे बात हुई तो एक बार भी आपने पता नही चलने दिया कि आप कोरोना से इतने जूझ रहै है। आपने रक्तबीज रूपी कोरोना से जंग जीत लिया हम लोगो की शुभकामनाएं आपके साथ है। और ये उन लोगो के दुवाओ का भी असर है जिनके लिए आप हमेशा लड़ते रहै है।

Sanjay Singh
आपसे मैं सिर्फ एक बार मिला हूं मुझे पता है आपके हौसलों की उड़ान आपको कुछ नहीं हो सकता अब आप दूसरे को स्वास्थ्य दिलाने की मुहिम छेड़ेंगे.

Raj Kumar Sonkar Kunwar
भैया आप ने कोरोना से जंग लड़ा ही नही बल्कि अपने मजबूत इच्छा शक्ति से उसे पराजित किया. मैं खुद होम क्वारन्टीन रहकर आपके पूर्ण स्वस्थ होने की बाबा भोले नाथ जी से प्रार्थना करते है. सादर प्रणाम

Vidya Shankar Tripathi
वास्तव में सही कहा आपने। आपके बारे में जानकारी होने पर हम सब सन्न रह गए थे तब। किन्तु आपने विजयी होने का मार्ग प्रशस्त किया। हार्दिक शुभकामनाएं

Santram Pandey
विनीत जी, आज आपकी इस पोस्ट से ही आपके बारे में जान सका।
पहले तो इसकी बधाई कि आप स्वस्थ होकर वापस आ गए।
दूसरी बात यह कि हम पत्रकारों की स्थिति न तो प्रशासन समझता है और न ही समझना चाहता है क्योंकि वह हमारी इस बिरादरी को अपनी नकेल मानता है, सहयोगी नहीं, जबकि पत्रकारों से प्रशासनिक अधिकारियों को जाने अनजाने बहुत मदद मिलती है, फिर भी जब मौका लगता है, वह अपनी कसर निकलने नहीं चूकते।
खैर, आप जल्द स्वस्थ हों
बाकी आप तो पहले भी योद्धा थे
और अब भी हैं।।
आपको ढेर सारी शुभकामनाएं।।

Arvind Mishra
बाबा विश्वनाथ की कृपा से आप अपने जज्बे से इस बीमारी को हराकर के तक के बीच में आए हैं बहुत-बहुत बधाई हो आपको नई जिंदगी मिली है फिर से एक नई पारी की शुरुआत करिए स्वस्थ रहिए अपना ख्याल रखिए वैसे भी विपत्ति में आपने अपने आप को मजबूत रखा कोई सी आगे भी मजबूत है

Umesh Chandra Awasthi
आप जल्द से जल्द स्वस्थ हों ! कौरोना पर विजय आपके आत्मबल की विजय है ! ताली , थाली और घंटा बजाने वाली हमारी सरकार और बेदर्द सिस्टम आम आदमी के प्रति कितना संवेदनहीन है ये परिलक्षित हो रहा है ! जिन डॉक्टरों ने आपकी जान बचाने में दिन रात एक कर दिया उनको सैल्यूट !

Kamlesh Chaturvedi
आपके अनुभव बता रहे हैं कि आम आदमी की हालत ठीक नही है। जो लोग सक्षम नही हैं उनके साथ क्या व्यवहार होता होगा।

Sanjiv Singh
आपके नाम में ही विजय है। यमराज पर अपने नाम के मुताबिक ही विजय पाई है। आपकी उम्र लंबी हो। यही कामना है।

सृजन सरोकार
आपने बहुत बड़ी जंग जीती है। आपको बधाई। आपके संस्मरण से लोगों को सही जानकारी मिलेगी और लडने की ताकत भी।

Manoj Tiwari Adv
सर बहुत बधाई, करोना जैसी महामारी से जंग जीतकर घर आए । आपने हमेशा हर परिस्थिति का सामना किया है और समय सफल हुए है। बाबा विश्वनाथ जी की कृपा हर समय आप रहेगा।

Vijay Pushpam
आप स्वस्थ, सानन्द रहें।सरकारी तंत्र किस तरह असंवेदनशील हैं, आपके लेखन से साफ ज़ाहिर हो रहा ।ऐसे समय मे सतर्कता ही बचाव है।सब आपकी तरह जीवट नही होते कि लड़कर निकल आएं।

Sumit Kumar Pandey
मैं कुछ नहीं कह पा रहा हूँ यह सब पढ़ कर…. बात करने की बार-बार इच्छा हुई… फ़ोन भी किया आपको पर आपकी आवाज़ सुनकर यह लगा कि आप बात करने की स्थिति में नहीं है। यह महसूस कर मन व्यथित और बेचैन हो गया…. कॉल कर नहीं सकते अपनी भावनाएं बयाँ कर नहीं सकते…. बस ईश्वर से प्रार्थना करता रहा कि बाकी बातें आपके साथ चाय पर करनी है…. मुझे यह अवसर ईश्वर जल्दी दे और हरदम देता रहे… पता नहीं क्यों मन में एक विश्वास था कि कुछ हफ्ते पहले ही आपने चाय पर बुलाया था… तो वो चाय पिलाने के लिए आप अस्पताल से जल्दी ही आएंगे….. शुक्र है और कोटिशः आभार ईश्वर का…. कि आप अब जल्दी ही हमें चाय पर बुलाएंगे…

Vijay Singh
विजय भैया आपके हिम्मत को सलाम आप जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं भगवान से यही प्रार्थना है और आपका आत्मबल और लेखनी इसी तरह शासन प्रशासन की पोल पोल खोलता रहे

Anil Singh
बहुत ही संवेदनशील और भयावह है। कोरोना काल मे
आत्मबल सबसे बड़ा बल है।
आप के हौसले को सलाम

Pyare Lal Yadav
आप एक शसक्त कलम के सिपाही हैं, लोगों की आशाएं हैं आप,लोगों की दुआओं और बाबा विश्वनाथ की कृपा से आप ठीक हो गए प्रभु का लाख लाख शुक्र है।

Changez Khan
बस अल्लाह का शुक्र है कि आप कोरोना के खिलाफ जीत दर्ज करके लौटे,बेशक आपके साथ किसी बहुत ख़ास की दिली दुआए होगी,वरना कोरोना और उसके ऊपर सिस्टम दोनो से एक ही वक्त मे लड़ना किसी बहुत ही बड़ी ज॔ग से कम नही है ऐसी जंग जिसमे आप(मरीज़)तनहा होता है,उसके सामने सब तरह की चुनौतिया होती है जैसा कि आपने उन चुनौतीयो को गाली अभद्र भाषा वगैरहा वगैरहा को हम सबसे साझा किया!
आख़िर मे यही कहूगा कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दुशमन को भी इस कोरोना से महफूज़ रखे! आमीन

Hárjêět Bäbbär
बस इसमें सिर्फ और सिर्फ अपनी विलपावर सबसे पहला औक्सीजन है उसके बाद बाकी सब मैंने भी झेला है ये कोरोना का दंश और बिल्कुल आप जैसा बस मैं हौसपिटल में ना जाकर घर में ही सारा कुछ किया और जीत दर्ज करा ली कोरोना के खिलाफ अब बिल्कुल ठीक हूँ हा शरीर की सारी ताकत निचोड़ ली वो भी ठीक कर लेंगे सर बस कुछ दिन और कोरोना आगे आगे और हम इसके पीछे पीछे इसकी तो… घर में रहें शवसथ रहें शुभकामनाएं आपको आप भी हीरो बन गए कोरोना को हरा कर जी

Shailesh Baranwal
ईश्वर आप को स्वस्थ जल्दी करे ।यही शुभकामना है।
Govt के तरफ से लापरवाही की खबरे बार बार आ रही हैं।आप ने अपने भी कड़वे अनुभव share किये ।
सुन के दुख हो रहा है ।govt और पूरा महकमा इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं इतने बड़े आपदा के वक़्त में ।

इसे भी पढ़ें-

कोरोना पाजिटिव होने के बाद दस दिन तक पूरे परिवार के साथ भय से जूझे इस खेल पत्रकार की दास्तान पढ़ें

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *