पीएम मोदी के हेलीकॉप्टर पर छापा मारने वाले आईएएस के निलंबन प्रकरण ने तूल पकड़ा

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हेलिकॉप्टर की जांच के मामले में चुनाव आयोग ने अपनी छवि सुधारने का मौक़ा गंवा दिया है? प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर पर रेड से ये दिखाया जाना चाहिए था कि क़ानून की नज़र में सब बराबर हैं। प्रधानमंत्री पर बार-बार आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और चुनाव आयोग पर इसे नज़रअंदाज़ करने के आरोप हैं।लेकिन चुनाव आयोग ने रेड करनेवाले अधिकारी को निलम्बित करके यह मौका गंवा दिया है।वैसे भी इस लोकसभा चुनाव में जितनी छीछालेदर चुनाव आयोग की हो रही है वैसी इसके पहले शायद कभी नहीं हुई।

पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी का कहना है कि प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर की जांच के मामले में चुनाव आयोग ने अपनी छवि सुधारने का मौक़ा गंवा दिया है। ट्विटर पर क़ुरैशी ने कहा हैकि प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर की जाचं करने पर ओडिशा में तैनात आईएएस अधिकारी को निलंबित करना न सिर्फ़ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि न सिर्फ़ चुनाव आयोग बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री की छवि सुधारने के एक अच्छे मौक़े को गंवाना भी है। इन दोनों ही संस्थानों पर जन निगरानी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री पर बार-बार आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और चुनाव आयोग पर इसे नज़रअंदाज़ करने के आरोप हैं। प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर पर रेड से ये दिखाया जाना चाहिए था कि क़ानून की नज़र में सब बराबर हैं। एक ही झटके में दोनों की आलोचनाओं का जबाव दिया जा सकता था।

दरअसल चुनाव आयोग ने उड़ीसा में प्रधानमंत्री मोदी के हेलीकॉप्टर का निरीक्षण करने वाले सामान्य प्रेक्षक मोहम्मद मोहसिन को निलंबित कर दिया है। मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी उड़ीसा के संबलपुर में एक रैली को संबोधित करने गए थे, वहां एक फ्लाइंग स्क्वायड ने उनके हेलीकॉप्टर की जांच की थी।चुनाव आयोग का कहना है कि प्रथम दृष्ट्या मोहम्मद मोहसिन को कर्तव्यविमुखता का दोषी पाया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार मोहसिन ने गणमान्य लोगों को मिलने वाले एसपीजी सुरक्षा के निर्देशों का पालन नहीं किया. इस निलंबन को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

चुनाव आयोग के इस निर्णय पर न केवल पक्षपात के आरोप लग रहे हैं बल्कि यह भी सामने आ रहा है कि आयोग द्वारा दिए गए निलंबन पत्र में जिन दो नियमों का हवाला दिया गया है, उसमें के एक नियम में इस तरह के कोई निर्देश नहीं हैं और दूसरा नियम चुनाव आयोग के वेबसाइट पर नहीं दिख रहा।

चुनाव आयोग ने इस निलंबन पत्र में दो निर्देशों का हवाला दिया है. पहला नियम 12 अप्रैल 2014 को जारी किया गया था, जिसकी संख्या 464/आईएनएसटी/2014/इपीएस थी। दूसरा निर्देश 22 मार्च 2019 को जारी किया गया था जिसका क्रम संख्या 76/निर्देश 2019/इइपीएस/विओएल -1 है। 464/आईएनएसटी/2014/इपीएस क्रम संख्या वाले पत्र में एसपीजी सुरक्षाधारियों के वाहन या काफ़िले की तलाशी से संबंधित कोई प्रावधान नहीं लिखे गए हैं। इसी प्रकार चुनाव आयोग की ऑब्जर्वर हैंडबुक में भी एसपीजी सुरक्षाधारियों के काफ़िले की तलाशी से जुड़ा कोई नियम नहीं हैं।चुनाव आयोग की वेबसाइट पर 76/निर्देश 2019/इइपीएस/विओएल -1 जैसा कोई प्रावधान नहीं मिला।सामान्य तौर पर भारतीय निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार चुनावी अभियान में शामिल गाड़ियों की तलाशी ली जाती है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में किसी प्रकार की धांधली ना हो सके।

इस मामले के सामने आने के बाद उप चुनाव आयुक्त ने संबलपुर का दौरा किया और जिलाधिकारी शुभम सक्सेना से बुधवार को मुलाकात की।चुनाव आयोग हर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य प्रेक्षकों की बहाली करता है। इनका उद्देश्य पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराना होता है। इसके लिए प्रदेश के बाहर के अधिकारियों को चुना जाता है ताकी किसी भी प्रकार की पैरवी या पक्षधरता वाली बात ना हो।

मोहम्मद मोहसिन के निलंबन आदेश में चुनाव आयोग ने कई नियमों का हवाला दिया है।अप्रैल 2014 से लेकर मार्च 2019 तक के कई नियम इस आदेश में लिखे गए हैं।कहा गया है कि संबलपुर में प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर की जांच करना निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत नहीं था. एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोगों को ऐसी जांच से छूट मिली होती है। तलाशी की वजह से पीएम को 15 मिनट तक रुकना पड़ा था।चुनाव आयोग ने मोहम्मद मोहसिन को निलंबित करते हुये कहा है कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा घेरे में रहने वाले लोगों की जांच की प्रक्रिया के अनुसार उन्होंने काम नहीं किया। इस आदेश में लिखा है कि मोहम्मद मोहसिन ने एसपीसी के संबंध में चुनाव आयोग के 22 मार्च 2019 और 10 अप्रैल 2014 के आदेश के अनुरूप कार्य नहीं किया है। विभिन्न नियमों का हवाला देते हुए लिखा है कि चुनाव आयोग इस अधिकारी को निलंबित करता है।

आयोग ने 10 अप्रैल 2014 के आदेश का हवाला दिया है कि एसपीजी की सुरक्षा वालों की चेकिंग नहीं होगी।लेकिन हकीकत है कि 10 अप्रैल 2014 का आदेश यह कहीं नहीं कहता है कि एसपीजी सुरक्षा घेरे में व्यक्ति के सरकारी हेलिकाप्टर की तलाशी नहीं ली जा सकती है।10 अप्रैल 2014 के आदेश में यह ज़रूर लिखा है कि चुनाव अभियान या चुनाव से संबंधित किसी भी काम में सरकारी वाहनों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। मगर प्रधानमंत्री व अन्य राजनीतिक शख्सियतों को छूट है कि वे सरकारी वाहनों का इस्तमाल कर सकते हैं, क्योंकि इन्हें आतंकी और चरमपंथी गतिविधियों से ख़तरा होता है और उच्च स्तरीय सुरक्षा की ज़रूरत होती है।इनकी सुरक्षा संसद या विधानसभा के बनाए संवैधानिक प्रावधानों से होती है।चुनाव आयोग का 14 जुलाई 1999 का भी एक आदेश है। इसमें लिखा है कि तलाशी से किसी भी सरकारी विमान या हेलिकाप्टर को छूट नहीं दी गई है। अब सवाल यही है कि क्या चुनाव आयोग ने एक ऐसे प्रावधान के सहारे मोहम्मद मोहसिन को निलंबित किया है जो प्रावधान है ही नहीं।

ग़ौरतलब है कि बीते रविवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में प्रधानमंत्री मोदी के हेलीकॉप्टर से एक रहस्यमयी बक्सा निकलते हुए देखा गया। इस बक्से को प्रधानमंत्री मोदी के हेलीकॉप्टर से निकालकर सीधे इसे एक निजी सवारी में लादकर ले जाया गया। कांग्रेस ने इस मामले की जांच की मांग की थी। इस पर भाजपा नेताओं का कहना था कि उस बक्से में साउंड सिस्टम से जुड़े सामान थे।हालांकि, यह बक्सा किसी निजी वाहन में क्यों ले जाया गया, इस पर अभी तक कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

लेखक जयप्रकाश सिंह इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं.

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