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मोदी का जादू चुक गया, चैनल अब नहीं दिखा रहे लाइव कवरेज

मोदी के भाषण अब चुक गए हैं. उनका जादू खत्म हो चुका है. इसलिए उनकी अब टीवी चैनलों को जरूरत नहीं. एक दौर था जब मोदी के भाषण को घंटों दिखाने के कारण टीवी चैनलों की टीआरपी आसमान पर थी. तब मोदी खुद को नंबर वन होने का दावा कर रहे थे. लोकसभा चुनाव के दौरान तो प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी थी. मोदी भी अपने अनुसार चैनलों को चुनकर उनको खूब टीआरपी दिलवा रहे थे. शायद इसी का असर रहा कि कुछ टीवी चैनलों को इसका खूब लाभ मिला. मोदी अपने भाषणों से चैनलों को टीआरपी देते चले गए और मोदी चैनलों के मुनाफे के धंधे में तब्दील हो गए.

मोदी के भाषण अब चुक गए हैं. उनका जादू खत्म हो चुका है. इसलिए उनकी अब टीवी चैनलों को जरूरत नहीं. एक दौर था जब मोदी के भाषण को घंटों दिखाने के कारण टीवी चैनलों की टीआरपी आसमान पर थी. तब मोदी खुद को नंबर वन होने का दावा कर रहे थे. लोकसभा चुनाव के दौरान तो प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी थी. मोदी भी अपने अनुसार चैनलों को चुनकर उनको खूब टीआरपी दिलवा रहे थे. शायद इसी का असर रहा कि कुछ टीवी चैनलों को इसका खूब लाभ मिला. मोदी अपने भाषणों से चैनलों को टीआरपी देते चले गए और मोदी चैनलों के मुनाफे के धंधे में तब्दील हो गए.

लेकिन आज हालत ये है कि मोदी की असम रैली को किसी चैनल ने लाइव नहीं दिखाया. चैनल के भीतर के लोग बताते हैं कि मोदी अब टीआरपी नहीं दिला पा रहे. जनता उनको सुन सुन के बोर हो चुकी है. उनके जुमलों पर अब किसी को यकीन नहीं है. यही कारण है कि जब मोदी भाषण दे रहे होते हैं तो जनता चैनल बदल देती है. इस कारण चैनलों ने मोदी की रैली को लाइव दिखाना छोड़ दिया.

प्रधानमंत्री मोदी असम में होने वाले विधानसभा चुनाओं के मद्देनजर किसानों के बीच रैली कर रहे थे तो उसका प्रसारण किसी निजी चैनल ने नहीं किया. सिर्फ सरकारी चैनल दूरदर्शन ने ही इसे लाइव दिखाया. आजतक, एबीपी न्यूज़, इंडिया टुडे, टाइम्स नाउ, एनडीटीवी आदि ने मोदी के भाषण को नहीं दिखाया. रिलायंस के स्वामित्व वाले चैनल आईबीएन7 ने मोदी के भाषण का प्रसारण किया. मोदी भक्त समझे जाने वाले इंडिया टीवी और ज़ी न्यूज़ को भी अब मोदी से टीआरपी नहीं मिल रही है, यह भी साफ़ दिख रहा है.  हाल ही में टीवी रेटिंग मापने वाली संस्था TAM के आंकड़ों ने इस टीआरपी के खेल को साफ़ कर दिया. TAM ने जता दिया कि अब मोदी टीवी चैनलों की जरूरत नहीं रहे इसलिए चैनलों ने उनके लाइव भाषणों को दिखाना लगभग बंद कर दिया है.

उधर, इंटरटेनमेंट चैनलों की बात करें तो इस हफ़्ते ज़ी टीवी के ‘कुमकुम भाग्य’ ने कलर्स के सुपरहिट शो ‘नागिन’ को पहले पायदान से उतार दिया है. नंबरों की घटाजोड़ करने पर आप ‘नागिन’ को दूसरे नंबर पर पाएंगे, लेकिन अगर दर्शकों के इन धारावाहिकों पर बिताए गए समय की बात करें तो ‘नागिन’ का जादू इस हफ़्ते कुछ हल्का हुआ है. जहां पहले स्थान पर रहा ज़ी टीवी का ‘कुमकुम भाग्य’, वहीं स्टार पल्स के ‘साथिया’ ने दूसरे स्थान पर क़ब्ज़ा किया. धारावाहिकों की फ़ेहरिस्त में टॉप-3 में कुछ समय के लिए नज़र आए दो नए धारावाहिक थे- ज़ी टीवी का ‘जमाई राजा’ और ‘टश्न ए इश्का’. इन धारावाहिकों की टीआरपी पर अगर नज़र डालें, तो यह हफ़्ता ज़ी टीवी के नाम ही रहा.

सोनी और स्टार प्लस इस महीने में ‘तमन्ना’, ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ जैसे धारावाहिकों को लेकर आ रहे हैं, जो अपनी कहानियों को लेकर चर्चा में हैं. लेकिन इन धारावाहिकों से चैनल की टीआरपी को कितना फ़ायदा होगा, यह कुछ समय बाद पता चलेगा. रिएलिटी शो के फ़ील्ड में भी ज़ी टीवी का ‘इंडियाज़ बेस्ट ड्रामेबाज़’ कलर्स के ‘खतरों के ख़िलाड़ी’ को पछाड़ रहा है. हालांकि यह अंतर बेहद कम है. 90 के दशक के कॉमिक लोटपोट के मुख्य किरदार ‘मोटू पतलू’ पर आधारित कार्टून इस हफ़्ते नंबर एक पर रहा. निकोलडियोन चैनल पर आने वाले इस धारावाहिक ने ‘निंजा हथौड़ी’ (दूसरा स्थान), ‘डोरेमॉन’ (तीसरा स्थान), ऑगी एंड दि कॉक्रोचेस (चौथा स्थान) और छोटा भीम को पीछे छोड़ दिया. अब यह तो साफ़ नहीं है कि इस धारावाहिक को बच्चे देख रहे हैं या 90 के दशक में लोटपोट के फ़ैन रहे युवा, लेकिन यह साफ़ है कि यह कार्यक्रम हिट हो रहा है.

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