ओम थानवी का केजरीवाल से मोहभंग, अब सिसोदिया से ही आशा!

ओम थानवी

Om Thanvi : केजरीवाल को क्या होने लगा? कभी जम्मू-कश्मीर पर केंद्र के क़ब्ज़े का समर्थन, कभी आर्थिक मन्दी में राग दरबारी। राष्ट्रवाद की भावना भरने के लिए देशभक्ति को पाठ्य-पुस्तकों में ला रहे हैं। जबकि दोनों दो अलग चीज़ें हैं। क्या वे अगले चुनाव से भय खा रहे हैं?

कभी हम लोग उन्हें कितना उम्मीद से देखते थे। 2014 की मोदी लहर को उन्होंने दिल्ली में उलट दिया था। राहुल गांधी तक संगठन में ‘आप’ पार्टी की सफलता से सीख लेने की बात करते थे। एक-एक कर ‘आप’ के दिग्गज पार्टी छोड़ गए, कुछ भगा दिए गए। योगेन्द्र यादव, प्रो. आनंद कुमार, प्रशांत भूषण, आशिष खेतान, कुमार विश्वास, आशुतोष आदि इत्यादि। उनकी जगह विवादास्पद गुप्ताओं ने ले ली है। बस मनीष का सहारा बचा है।

क्या इसलिए केजरीवाल को भी राष्ट्रवाद की राजनीति में कल्याण दीखने लगा है?

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं-

Vishnu Nagar : मुझे भी ऐसा लग रहा है और मैं कुछ दिन पहले यह आशंका व्यक्त कर चुका हूँ। मामला है तो गड़बड़। अभी विपक्षी दलों की बैठक में भी यह नहीं थे। अंदरखाने मामला कुछ है।

Tanvir Khan : केजरीवाल, अन्ना आंदोलन से जुड़े आख़री नेता हैं जो अभी तक बीजेपी के बाहर हैं. संजय सिंह और दिलीप पांडेय का प्रेशर ना हो तो यह अभी तक अपनी पार्टी जॉइन कर चुके होते! आख़िरकार हैं तो विवेकानंद फाउंडेशन से जुड़े हुए ही.

Rupesh Gupta : पहचानने में गलती हो गई। आपसे भी। मुझसे भी। ये शुरू से रीढ़ विहीन थे

Om Thanvi : राजनीति में कोई पहचान स्थाई नहीं होती। जहाँ तक मेरी बात है, जिस पार्टी में जो ठीक लगा उसे ठीक कहा, जो बेठीक लगा उसे बेठीक।

Arushi Verma : जितनी बैंड इस देश मे केजरीवाल ने अपनी बजवाई है उतनी 70 साल में किसी नेता ने नहीं बजवाई अपनी। फिर भी केजरीवाल टिका है उसके किये हुए कामों पर ध्यान दीजिए। अनगिनत मिलेंगे। केजरीवाल कुछ सोच समझ कर ही ऐसा कर रहा होगा उसे मालूम है उसके कोई काम को केंद्र आगे नहीं बढांने देगा ।बिना आपसी सहयोग के। इसलिए वो ऐसा कर रहे हैं जितनी दुश्मनी लेंगे सरकार से उतना EVM से सरकार उन्हें झटका देगी

उमेश उस्मान एंथोनी : Arushi Verma जी, ओम थानवी जी केजरीवाल के बहुत बड़े समर्थक और प्रशंशक रहे हैं । यदि उन्होंने लिखा है तो दम है । सत्ता बचाये रखने के लिए अपनी विचारधारा और सिद्धान्त से समझौता करना कहाँ तक जायज है ?

Arushi Verma : उमेश उस्मान एंथोनी जी, सत्ता रहेगी तभी तो जनता की सेवा का काम ज्यादा बड़े पैमाने पर होगा वरना घर बैठना होगा।

Brajesh Anay : Cbi/ ed से बचने केलिए। इसी भय में कहीं किसी दिन अपनी पार्टी समेत कहीँ bjp में न शामिल हो जाएं। और इसलिए कल जेटली को श्रद्धांजलि देने भी गए। हो सकता है वो शासकीय औपचारिकता भी हो। हां, मनीष तो अभी थोड़े शरीफ, साफ-सुथरे दिखते हैं…

Sanjeev Malik : ये आदमी शुरू से bjp की b टीम रहा है। अन्ना आंदोलन bjp के fund से चला था। bjp सामने आकर आंदोलन करती तो जनता नकार देती की राजनैतिक मंशा से किया गया आंदोलन है।जनता नही जुड़ पाती। आंदोलन को रूप दिया गया शुद्धता का। देश हित का। गैर राजनीतिक बताया गया। जनता को नयापन लगा और खूब जुड़ गई। कांग्रेस हार गई। आंदोलन से जुड़े सब बड़े नाम अब राजनीति में हैं। कुछ कामयाब कुछ नाकामयाब। केजरीवाल विपक्ष के वोट काटने को वहीं से चुनाव लड़ते हैं जहां bjp anti incumbency झेल रही होती है। पंजाब, गोआ, गुजरात। 500 वोट से फैसले हुए हैं bjp के पक्ष में। केजरीवाल के candidates 2000 वोट ले के विपक्ष के कैंडीडेट हरवा दिए।

Pankaj Chaturvedi : आप याद करें अन्ना आंदोलन से मैं कह रहा था कि यह संघ का बगल बच्चा है लेकिन आपको भगत सिंह लग रहा था

Om Thanvi : आपको ज़रूर अन्ना आंदोलन से अंतर्याम हो गया होगा। मैं उनमें नहीं जो जन्म से पहले ही निराशा पाल कर चलें।

Pankaj Chaturvedi : अन्तर्याम तो कोई नहीं लेकिन उस आंदोलन में लगी पूँजी व्यक्ति और योजना का अंदाज़ । कई लोग उम्मीदों में थे

Om Thanvi : यह भी बता दूँ कि शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में दिल्ली में बेहतर काम हुआ है। सरकारी स्कूलों को प्रतिष्ठा दिलाने में मनीष सिसोदिया के जतन को दुत्कारना निजी स्कूलों के कुचक्र को पुचकारना होगा।

Deepak Sharma : अब केजरीवाल की राजनीति में पिछले दो-तीन वर्षों से बदलाव आ रहा है अच्छे लोगों को पार्टी से दरकिनार किया जा रहा है, धनवान लोगों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है। जैसा कि आप लिख चुके हैं कि केजरीवाल को सिर्फ मनीष सिसोदिया का सहारा है। अगर केजरीवाल की सरकार में किसी ने शानदार और बेहतर प्रदर्शन किया है तो वह सिर्फ और सिर्फ मनीष सिसोदिया है।।

Ashish Ashish : माणिक सरकार हो या अरविंद केजरीवाल, इन सभी ने पूंजीवाद के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसकी स्वीकृति से, उससे तालमेल में सत्ता ली और इस सत्ता के रथ को पूरी ईमानदारी और स्वामीभक्ति से हांका। केजरीवाल जैसे सारे बूर्जुआ सुधारवादी, क्रान्ति और समाजवाद के पक्के शत्रु और पूंजीवाद के क्रीतदास हैं। उनका उद्देश्य, मीठी चाशनी में भीगी लफ्फाज़ी से युवाओं, मज़दूरों, मेहनतकशों के बीच यह भ्रम पैदा करना है कि क्रान्ति की कोई जरूरत नहीं है, पूंजीवाद को ही सुधारा जा सकता है। उनकी कुल भूमिका हम सबको यह समझाने में है कि क्रान्ति व्यर्थ और असंभव है और सत्ता, संपत्ति को पूंजीपतियों के हाथ ही छोड़कर, बस कुछ सुधारों पर ऊर्जा और ध्यान केंद्रित किया जाय।

Sanjeev Acharya : मुझे उनके एक करीबी ने बताया कि जिस विवादस्पद गुप्ता को उन्होंने राज्यसभा सीट दी, वही उनके और जेटली के बीच मध्यस्थ थे। उन्होंने केजरीवाल और मोदी सरकार के बीच ईंट-कुत्ते की लड़ाई बंद करवाई। तय हुआ कि केजरीवाल न केवल जेटली के खिलाफ केस में माफी मांग कर सारा दोष जेठमलानी पर थोंपेंगे, बल्कि मोदी की डिग्री समेत किसी भी मुद्दे पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हमला नहीं करेंगे। यह अमल में लाया गया। बदले में केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा ढीला पड़ा। एक समझौता सा हो गया है। सिसौदिया ने जावड़ेकर की तारीफ की। यह सिलसिला चल रहा है।

Rajesh Vyas : अगर केजरीवाल ने धारा 370 हटाने का सरकार समर्थन किया तो अन्य जगहो पर भरपूर विरोध भी तो किया। क्या हर बात पर मोदी विरोधी होना ही बुद्धिजीविता का परिचायक है। देश का एकमात्र “कुछ करके दिखाने वाला मुख्यमंत्री” है केजरीवाल। सही तो ये है कि वह व्यक्ति राजनीति के अनुकूल नही है। है भी तो हम जैसे लोग उसकी आलोचना का कुछ आयाम तो निकाल ही लेंगे।

Prem Shukla : IAC और जनलोकपाल आंदोलन के उनके अधिकतर साथी तो मुखौटे लगाकर आये थे। बाकियों का पहले ही उतर गया, इनका शायद अब उतर रहा हो।

Pankaj Chaturvedi : जिसकी योजना विवेकानन्द फाउंडेशन नें बन रही थी उससे उम्मीद रखने वाले नासमझ थे या निजी स्वार्थ के लिए क्रांतिकारी बना रहे थे। जब दो गुप्तों को राज्य सभा टिकट मिल गया तब कुछ पालकी उठाने वाले निराश हो कर तंखाइया हो गए

बिना ट्रेनिंग लिए मीडिया में आएंगे तो दुनिया हंसेगी

ये वीडियो देखकर मुस्कराने से खुद को न रोक पाएंगे

Posted by Bhadas4media on Thursday, August 22, 2019
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One comment on “ओम थानवी का केजरीवाल से मोहभंग, अब सिसोदिया से ही आशा!”

  • Thanki ko bahut namaskar कि उनको झूठा criminal party पसन्द आ रहा है।।

    एक मात्र स्वच्छ को भस्म करने की platform बना रहने हैं।
    क्यो कि वही सही माने में देश को इन बेइमानो से मुक्त करा सकता है।
    च्वन्नी चोर साबित कर दो ताकि बाकी की करोड़ों की चोरी वाले केजरीवाल के वर्ग में प्रचारित करें।
    भक्तों को समझ आ गयी की criminal जोड़ी को खतरा से बाहर रखने के लिए केजरीवाल-मनीष की स्वचछ जोड़ी को तोड़ो। उनके दशकों से स्वचछ कार्यों को देखें।
    Paid reports से बचें।

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