आसाराम कांड के गवाह पर हमले की दस दिन पहले से जानकारी थी !

आसाराम मामले के पानीपत निवासी गवाह महेंद्र चावला पर हुए हमले की कुछ लोगों को दस दिन पहले से ही जानकारी थी और उन्हें हमला करने वालों के नाम भी मालूम थे. यह बात इंदौर निवासी आसाराम के पूर्व सहयोगी और अब उनके खिलाफ प्रमुख गवाह सतीश वाधवानी की एक व्यक्ति से फोन पर बात की रिकॉर्डिंग से सामने आई है.

इस बातचीत में श्री सतीश यह कहते सुने गए हैं कि उन्हें आठ-दस दिन पहले हमला होने और इसमें शामिल होने वालों के नाम मालूम हो गए थे और यह सारा काम आसाराम और नारायण साईं द्वारा कराया जा रहा है. उन्होंने इस मामले में इंदौर के गुटका किंग कहे जाने वाले किशोर वाधवानी की संलिप्तता की ओर भी इशारा किया है.

श्री चावला ने इस मामले में आसाराम और नारायण साईं के अलावा नारायण के बॉडीगार्ड हनुमान, बिजिनेस पार्टनर राजेन्द्र और पानीपत के लोकल पार्टनर निशांत धनधड पर भी संदेह व्यक्त किया है.

श्री चावला के माध्यम से यह जानकारी होने पर श्री चावला पर हमला और मुज़फ्फरनगर में गवाह अखिल गुप्ता की हत्या के मामलों पर निजी स्तर से पैरवी कर रहे आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने हरियाणा और यूपी के डीजीपी सहित केन्द्रीय गृह सचिव को ईमेल भेज कर तत्काल गहारी से जांच कराये जाने की मांग की है.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें – 

The recently attack on Asaram case witness Mahendra Chawla in Panipat was in the knowledge of certain people ten days ahead who even knew the names of persons planning it.

This fact has emerged from the phone conversation of Indore resident Satish Wadhwani, a previous Asaram aide and now key witness against him.

In the conversation Sri Satish is heard saying that he had come to know of prposed attack around 8-10 days ahead along with the assailants’ names. He said all such attacks were the handiwork of Asarama and his son Narayan Sai.  In the conversation he also mentioned certain definite role of Kishore Wadhwani, the Indore based industrialist and Gutka king.

Sri Chawla has placed his definite on Asaram and Narayan Sai, along with Narayan’s bodyguard Hanuman, business partner Rajendra and Panipat resident Nishant Dhandhad etc.

On being informed by Sri Chawla, IPS officer Amitbh Thakur, personally pursuing this attack along with murder of witness Akhil Gupta in Muzaffarnagar, sent emails to DGP of Haryana and UP along with Union Home Secretary seeking strong and fast action in these cases.  

डॉ.नूतन ठाकुर संपर्क : 94155-34525 अमिताभ ठाकुर संपर्क : 94155-34526

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घायल महेंद्र आसाराम आश्रम का राजफाश करने वाला था

आसाराम मामले के गवाह महेंद्र चावला पर कल पानीपत में हुए हमले पर मुज़फ्फरनगर में गवाह अखिल गुप्ता मामले में मृतक पक्ष की ओर से न्याय दिलाने में मदद कर रहे यूपी कैडर के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने हरियाणा के डीजीपी को पत्र लिख कर इस घटना में आसाराम बापू एंगल देखने का अनुरोध किया है.

ठाकुर ने अपने पत्र में कहा है कि चावला ने खुद उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर उनसे 01 मई 2015 को सुबह लगभग 10 बजे फोन पर लम्बी बातचीत की और यहाँ बताया था कि वे आसाराम बापू के आश्रमों की सच्चाई उजागर करने में लगे हुए हैं. ठाकुर के अनुसार चावला ने कहा था कि उनके पास आसाराम के आश्रमों की अनियामितातों से जुड़ी काफी जानकारियाँ हैं और उन्होंने ठाकुर से उत्तर प्रदेश के आश्रमों की गड़बड़ियों को सामने लाने में मदद करने को कहा था.

ठाकुर ने कहा कि महेंद्र चावला ने बातचीत में कई बार अपनी जान का खतरा बताया था, अतः उन्होंने इस एंगल पर विशेष ध्यान देने का निवेदन किया. उन्होंने पत्र की प्रति केन्द्रीय गृह सचिव को ऐसे सभी मामलों को एक साथ देखे जाने और यूपी के डीजीपी को अखिल हत्या का शीघ्र अनावरण और मृतक के परिवार और उनकी और उनकी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर की मामले की पैरवी करने के कारण यथेष्ट सुरक्षा सुनिशिचित करने हेतु भेजा है.

समाचार अंग्रेजी में पढ़े – 

IPS officer Amitabh Thakur, who is pursuing the murder case of Asaram follower Akhil Kumar Gupta in Muzaffarnagar, today wrote to DGP Haryana requesting him to look into Asaram angle in yesterday’s fatal attack on witness Mahendra Chawla in Panipat.

Thakur said that he had got a call from Chawla on 01 May 2015 morning when Chawla had said that he  is soon going to unearth many hidden facts about Asaram’s Ashrams. As per Thakur, Chawla said that he had many important information about the massive irregularities in these Ashram and he sought Thakur’s support in undertaking this work in UP.

Thakur said that Mahendra Chawla had specifically mentioned about threat to his life and hence requested DGP Haryana to focus particularly on this angle. He sent a copy of the letter to Union Home Secretary with request to see all the incidence related with Asaram witnesses in a holistic manner and to DGP, UP requesting him to get Akhil Gupta murder case unraveled at the earliest and to ensure adequate security of Akhil’s family members as that of his and his wife Dr Nutan Thakur, who are diligently pursuing the matter.  

संपर्क डॉ.नूतन ठाकुर : 94155-34525, अमिताभ ठाकुर : 94155-34526

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Asaram supporters zeroing on an IPS

IPS officer Amitabh Thakur, who is pursuing the murder case of Asaram follower Akhil Kumar Gupta in Muzaffarnagar, seems to have come in the target-zone of Asaram Bapu followers. Sri Thakur got a message on Facebook from a New Delhi swami that Asaram’s followers are eliciting information about him through a lady Police Circle Officer posted in Meerut. The message talked ofmany organizers of these Ashrams being criminal elements.

The message also mentioned a Meerut Ashram organizer as being in the loop of Akhil murder case. Sri Thakur talked to the lady CO to conclude that her family is indeed Asaram’s follower and one Asaram Bhakta had actually called her to seek information about him. Based on these facts, Sri Thakur has today requested DGPA K Jain to get the facts stated in the FB message enquired to ensure his and his wife’s security and to get the named Meerut organizer properly interrogated.

आईपीएस अमिताभ ठाकुर के बारे में आसाराम समर्थक सूचना एकत्र कर रहे

आसाराम मामले के गवाह अखिल कुमार गुप्ता की मुजफ्फरनगर में हुई हत्या में मृतक पक्ष की पैरवी कर रहे आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर आसाराम बापू के अनुयायियों के निशाने पर आ गए दिखते हैं. श्री ठाकुर को फेसबुक पर नयी दिल्ली निवासी एक स्वामी ने मेसेज कर बताया कि आसाराम के समर्थक मेरठ में तैनात उनकी एक पुलिस उपाधीक्षक शिष्या के माध्यम से उनके बारे में सूचना एकत्र कर रहे हैं. मेसेज में बताया गया कि उनके आश्रम में कई संचालक आपराधिक किस्म के हैं. मेसेज में मेरठ आश्रम के एक संचालक से पूछताछ करने पर अखिल हत्याकांड का खुलासा होने की पूरी सम्भावना व्यक्त की गयी.

श्री ठाकुर ने उक्त महिला सीओ से बात की तो उनके परिवार वालों के आसाराम की भक्त होने और एक भक्त द्वारा इस हत्याकांड के सन्दर्भ में उनके विषय में पूछताछ करने की बात सही साबित हुई. इनके आधार पर श्री ठाकुर ने आज डीजीपी ए के जैन को इस मेसेज के तथ्यों की गहराई से छानबीन कराते हुए अपनी और अपनी पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित कराने और मेरठ संचालक से पूछताछ कराने का निवेदन किया है.

सेवा में,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ 
विषय- आसाराम बापू मामले के गवाह श्री अखिल कुमार गुप्ता की हत्या मामले में मेरे द्वारा की जा रही पैरवी पर मुझे और मेरी पत्नी को संभावित खतरा/आशंका विषयक
महोदय,

कृपया निवेदन है कि मैंने अपने पत्र संख्या-AT/Complaint/52 दिनांक- 13/01/2015 द्वारा आसाराम बापू मामले के गवाह श्री अखिल कुमार गुप्ता की हत्या के विषय में कतिपय तथ्य प्रस्तुत करते हुए श्री आलोक शर्मा, आईजी मेरठ ज़ोन को  निवेदन किया था कि इस मामले में लूट तथा स्थानीय/ व्यक्तिगत रंजिश में हत्या होने की बहुत ही कम सम्भावना दिखती है और यह हत्या काफी हद तक श्री आसाराम बापू कांड में श्री अखिल की गवाही से जुडी दिख पड़ती है और प्रथमद्रष्टया उस दिशा में गंभीरता से तफ्तीश करना उचित जान पड़ता है.
मैंने पुनः अपने समसंख्यक पत्र दिनांक- 30/01/2015 द्वारा इस प्रकरण से जुड़े तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए कतिपय निवेदन किये थे और कालांतर में मैं और मेरी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर स्वयं मुज़फ्फरनगर जा कर श्री अखिल की पत्नी और परिवारवालों से मिले थे.

उस समय से आज तक इस मामले में प्रकरण जस का तस पेंडिंग है और यथेष्ठ कार्यवाही नहीं हुई है. इसी बीच आज दिनांक 27/04/2015 को मुझे मेरे फेसबुक पेज Amitabh Thakur (वेबलिंक- https://www.facebook.com/amitabh.thakur) पर A (वेबलिंक B) का दिनांक 26/04/2015 समय 09.23 PM बजे एक मेसेज प्राप्त हुआ जो निम्नवत है-“Apr 26th, 9:23pm आपके बारे में मेरठ की एक पुलिस सीओ वंदना मिश्र [ जो कि आशाराम कि शिष्य है. ] के माध्यम से सूचनाये आशाराम बापू के लोग एकत्र कर रहे है . आशाराम बापू के आश्रमों के ज्यादातर संचालक अपराधी किस्म के लोग है पर पुलिस उन लोगों पर कुछ ख़ास कारवाई नहीं करती . मेरठ आश्रम का उनका संचालक D से पूछताछ करने पर अखिल हत्याकांड के बारे में बहुत कुछ पता चल सकता है.”
उक्त A के सम्बन्ध में उनके फेसबुक अकाउंट पर अधिक डिटेल नहीं हैं, मात्र यह लिखा है कि वे खंडवा के रहने वाले हैं, नयी दिल्ली में रहते हैं, जेएनयू से पढ़े हैं और वर्तमान समय में फेसबुक पर उनके चार मित्र हैं.

इस मेल के आने के बाद मेरा सतर्क और सशंकित होना स्वाभाविक था और मैंने सुश्री वंदना मिश्रा से फोन नंबर 0522-2286662 से उनके फोन नंबर C पर संपर्क किया तो यह ज्ञात हुआ कि वे मेरठ में सीओ ऑफिस के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि उनके ससुराल के लोग श्री आसाराम के अनुयायी हैं और इस रूप में वे भी श्री आसाराम के सत्संग आदि में जाती रही हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ दिनों पूर्व उन्हें एक फोन आया था और पूछने वाले व्यक्ति ने उन्हें कहा था कि वे सुश्री वंदना से किसी सत्संग में मिले थे. उन्होंने इसी आधार पर सुश्री वंदना से मेरे बारे में जानकारी ली थी. यद्यपि सुश्री वंदना ने कहा कि उक्त व्यक्ति ने किसी प्रकार की धमकी भरी बात नहीं की थी और मूल रूप से यही कहा था कि आखिर श्री अमिताभ ठाकुर इस मामले में अनावश्यक क्यों रूचि ले रहे हैं और क्या उनसे संपर्क किया जा सकता है, आदि.

सुश्री वंदना से फोन पर मेरी वार्ता होने के बाद इतना स्थापित हो गया है कि वास्तव में सुश्री वंदना मिश्रा मेरठ में सीओ हैं, उनके परिवार वाले श्री आसाराम के भक्त हैं और सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें वास्तव में मेरे सम्बन्ध में कम से कम एक फोन आया था.

ऐसे में मुझे फोन करने वाले की बातों की सत्यता काफी बढ़ जाती है और साथ ही उनके बातों की गंभीरता थी. उन्होंने मेसेज में यही बात सामने आ रही है कि मेरे बारे में सूचनाएँ एकत्र की जा रही हैं और इसमें आपराधिक किस्म के लोगों की सहभागिता और उनके द्वारा कोई आपराधिक षडयंत्र किये जाने की पूर्ण आशंका है. हम इस बात से भी अवगत हैं कि श्री आसाराम के समर्थकों द्वारा उनके कथित विपक्षियों के सम्बन्ध में गंभीर और घातक हमले करने के दृष्टान्त पूरे देश भर में सामने आये हैं और इनसे इस मेसेज की गंभीरता और भी बढ़ जाती है.

उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत आपसे निम्न निवेदन है-

1. कृपया A की उपरोक्त सूचना के क्रम में पूरे प्रकरण की गहराई से छानबीन कराते हुए मेरी और मेरी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर, जो अनवरत इस मामले में मृतक पक्ष की ओर न्याय दिलाने में लगे हुए हैं, की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित कराने और यदि किसी प्रकार के षडयंत्र के तथ्य सामने आते हैं तो उनके सम्बन्ध में आवश्यक विधिक कार्यवाही कराये जाने की कृपा करें

2. कृपया मेरठ आश्रम के संचालक D से पूछताछ करने पर अखिल हत्याकांड के बारे में बहुत कुछ पता चलने के सम्बन्ध में दी गयी जानकारी के विषय में सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की कृपा करें

3. कृपया श्री अखिल गुप्ता के परिवार वालों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करवाने की कृपा करें

4. कृपया श्री अखिल गुप्ता हत्याकांड में यथाशीघ्र अनावरण कराने के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश देने की कृपा करें

पत्र संख्या-AT/Complaint/52                               

दिनांक- 27/04/2015
भवदीय,                                                     
(अमिताभ ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34526
amitabhthakurlko@gmail.com

प्रतिलिपि- प्रमुख सचिव गृह, उत्तर प्रदेश को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु

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खराब फसल से परेशान किसान ने डीएम ऑफिस के बाहर लगाई फांसी

बाराबंकी : दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘आप’ की रैली के दौरान किसान गजेंद्र सिंह की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया था कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है। रविवार को सुबह बाराबंकी में डीएम आवास के सामने किसान का शव लटका मिला। इसके बाद यहां ‌हड़कंप मच गया।

 

रविवार को बाराबंकी में डीएम ऑफिस के सामने पेड़ से झूलता आसाराम का शव

बताया जा रहा है कि आसाराम नाम का ये किसान 34 साल का था। जिले के ये हैदरगढ़  दतौली चंदा गांव का निवासी बताया जा रहा है। इस किसान की जमीन भी बंधक थी। सूत्रों के अनुसार इस किसान की जमीन गिरवी रखी थी और उसके ऊपर काफी कर्ज भी था। बेमौसम बारिश के कारण उसकी फसल तबाह हो चुकी थी। 

रविवार सुबह वह डीएम ऑफिस के सामने सागौन के पेड़ पर चढ़ा और उसने अपने गमछे का फंदा बनाकर उससे फांसी लगा ली। सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले एक व्यक्ति ने इस शव के बारे में पुलिस को सूचना दी। उसके बाद किसान के शव को पेड़ पर से उतरवाया गया। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

डीएम योगेश्वर राम ने बताया कि आसाराम ने कुछ जमीन बेच दी थी और जो बची थी वह गिरवी रखी थी। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे रहे हैं।

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आसाराम केस के गवाह के पिता को हत्या में आसाराम की बेटी पर शक

आसाराम बापू मामले के गवाह अखिल कुमार गुप्ता की हत्या में उनके पिता नरेश गुप्ता को आसाराम की बेटी भारती पर शक है. श्री नरेश ने आज आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को फोन कर विस्तार से बताया कि उनके लड़के का केस किसी रंजिश का परिणाम नहीं है और यह हत्या 05 जनवरी 2015 को गुजरात हाई कोर्ट द्वारा आसाराम की जमानत याचिका ख़ारिज होने से सीधा जुड़ा है. श्री नरेश ने कहा कि आसाराम के परिवार में उनके अरबों की संपत्ति के लिए आपसी झगड़े की स्थिति है और उनकी बेटी भारती, जो जेल से बाहर हैं, द्वारा यह कांड कराये जाने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

श्री नरेश ने भारती की साथियों रेखा, महक और ड्राईवर शीतल का नाम लेते हुए इन लोगों पर अपनी शंका व्यक्त की. श्री नरेश ने स्थानीय पुलिस के तफ्तीश पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और साथ ही उन लोगों की सुरक्षा में भारी लापरवाही का भी आरोप लगाया. श्री ठाकुर ने यूपी के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को इन तथ्यों से अवगत कराते हुए इन लोगों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित कराये जाने का निवेदन किया क्योंकि मृतक अखिल की पत्नी वर्षा भी इस मामले में गवाह हैं. उन्होंने मृतक के पिता द्वारा बताये गए तथ्यों का संज्ञान लेते हुए सही तफ्तीश कराये जाने का अनुरोध किया और स्थानीय पुलिस को दिक्कत होने पर यह तफ्तीश सीबीआई या किसी स्पेशियेलाईज एजेंसी से कराने का सुझाव दिया.

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पगड़िया बाबा… खपड़िया बाबा… ऐसे हजारों बाबा अपना खेल रच रहे, खबर आपको केवल रामपाल की है!

Shailesh Bharatwasi : लगभग 15 साल पुरानी बात है। मेरे गाँव, डोमा में एक बाबा आए। पगड़िया बाबा। सर पर पगड़ी बाँधते थे, इसलिए अपनी ख्याति इसी नाम से चाहते थे। बाबा हमारे गाँव में अखंड रामायण पाठ और जग (यानी यज्ञ) करवाने आए थे। उन्हें गाँव के लोगों ने कभी आमंत्रित नहीं किया था, वे ख़ुद ही अपना डेरा जमा लिए थे। हमारे तरफ़ के गाँवों के अधिकाधिक सार्वजनिक आयोजन गाँव के एकमात्र सरकारी प्राथमिक विद्यालय में ही होते हैं।

बाबा ने भी वहीं शरण ली थी। बाबा केवल फल, सेंधा नमक, सिंघाड़े का हलवा खाते थे और दूध पीते थे। दूध केवल सफेद गाय का पीते थे। भैंस या गैरसफेद गाय का दूध वे नहीं पीते थे। बाबा ने ही तय किया था कि उनके भोजन की ज़िम्मेदारी गाँव के प्रत्येक परिवार की होगी। बारी-बारी से एक-एक दिन के भोजन की व्यवस्था अलग-अलग परिवार करेगा। बाबा साष्टांग प्रणाम करवाना पसंद करते थे। जो साष्टांग प्रणाम नहीं करता था, उसे वे डाँट देते थे और भगवान का डर दिखाते थे। ब्राह्मण जाति के लोगों के अलावा अन्य किसी भी जाति को उनका चरण छूकर प्रणाम करने की अनुमति नहीं थी। ग़ैरब्राह्मण लोगों को वे छूत मानते थे। उन्होंने गाँव में लगभग 4 महीने का समय बिताया था और गाँव वालों को अखंड रामायण पाठ और जग करवाने पर मज़बूर कर दिया था। हमारे गाँव के अलावा आसपास के गाँवों के लोगों के ऊपर भी चंदे का भार आया था। बाबा के पास हर कोई अपना कष्ट लेकर आने लगा था। बाबा सबका कष्ट सुनते थे और उम्मीद बँधाते थे कि वे सब ठीक कर देंगे।

मैं उस समय रेणुकूट में रहकर इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा था। मेरी तरह और भी बहुत से ऐसे लोग थे जो गाँव से बाहर रहकर अपनी-अपनी पढ़ाई कर रहे थे। Pradeep Verma और Kaushal Kumar उस समय इलाहाबाद में रह रहे थे। बाबा की एक ख़ास बात यह भी थी कि उन्होंने अपने कुछ विश्वसनीय भक्त बना लिए थे, जिनके माध्यम से वो गाँव के हर आदमी, हर परिवार की पूरी टोह ले लेते थे। उन्हें पता था कि किसकी औलाद गाँव से बाहर रहकर पढ़ाई कर रही है, कौन नौकरी कर रहा है। मेरी माँ से उन्होंने कहा था कि पढ़ने-लिखने से कुछ नहीं होता, अपने बेटे से कहो कि वो हमारा आशीर्वाद ले। उनके ये कहने के 15 दिनों तक भी मैं गाँव नहीं पहुँचा तो उन्होंने माँ से कई बार कहा कि आपका बेटा घमंडी है। मेरे घमंड की पुष्टि तब हो गई थी, जब मैं गाँव गया था, उनसे मिला था, उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया था, लेकिन साष्टांग नहीं हुआ था।

Anjani चूँकि ब्राह्मण हैं तो वे उनके क़रीब जा सकते थे। एक बार अंजनी ने उनसे पूछा था कि बाबा आपने शादी की है या नहीं? उन्होंने कहा था- बच्चा, हम इन झमेलों में नहीं फँसे। अपने प्रवचन में भी उन्होंने खुद को गैरशादीशुदा और मोह-माया से दूर बताया। लेकिन इनके प्रवास के आख़िरी दिनों में यह भेद खुला था कि बाबा शादीशुदा हैं। राजपूत जाति के हैं और कई लड़कियों के बाप हैं। उस बाबा से जुड़े तमाम ग्रामीणों के संस्मरण को जमा करें तो पगड़िया बाबा-पुराण बाबा रामपाल के कारनामों से कम न होगा। थोड़े समय बाद ही हमारे पड़ोस के गाँव, मिश्री में खपड़िया बाबा आ धमके थे और जग कराकर ही दम लिया था। खपड़िया बाबा के बारे में बस इतना बता देना काफ़ी होगा कि मिश्री में जग कराने के लिए बाबा ने जितना धन जुटाया था, जग कराने के बाद बचे पैसों से खपड़िया बाबा ने एक पिक-अप (छोटा भारवाहक वाहन) खरीदा, और उसे केतार से कोन के बीच चलाने लगे। खुद पिकअप के ड्राइवर भी हो गए और खलासी भी। अभी भी इस तरह के हज़ारों बाबा अपना खेल रच रहे हैं, ख़बर तो आपको केवल रामपाल की है।

हिंदयुग्म प्रकाशन के मुख्य कार्यकारी शैलेष भारतवासी के फेसबुक वॉल से.

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बेल न मिली तो दीपक चौरसिया जा सकते हैं जेल (देखें कोर्ट आदेश)

लगता है आसाराम के खिलाफ पीछे पड़े रहने का ‘पाप’ दीपक चौरसिया को लगने लगा है. ऐसा आसाराम के भक्त सोशल मीडिया पर कह रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दीपक चौरसिया को गिरफ्तारी से मिले स्टे को खत्म कर दिया है और उनकी प्रार्थना को निरस्त कर दिया है. दीपक चौरसिया को महीने भर के भीतर कोर्ट जाकर बेल के लिए अप्लाई करना होगा और अगर कोर्ट ने बेल नहीं दी तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है.

‘इंडिया न्यूज’ के दीपक चौरसिया ने अपने चैनल पर आसाराम के खिलाफ लगातार खबरें दिखाने और टीआरपी पाने के क्रम में कुछ ऐसी झूठी खबरें भी दिखा दी हैं जो उनके गले की फांस बन गई है. आरोप है कि दीपक चौरसिया ने गुड़गांव के निवासी और आसाराम के एक भक्त की पारिवारिक प्राइवेट वीडिओ से छेड़छाड़ कर निहित स्वार्थ वश चैनल पर दिखाया. खबर के जरिए दीपक चौरसिया ने गुड़गांव के एक परिवार की 10 वर्षीय नन्ही स्कूली बच्ची और उसकी ताई के चरित्र को कलंकित कर दिया. इनकी शिकायत पर गुडगाँव पुलिस ने बड़ी मुश्किल से 15 दिसंबर 2013 को जीरो FIR करके जांच-पड़ताल नोएडा ट्रांसफर कर दी. इतने बड़े चैनल और इतने बड़े पत्रकार के मामले से बचने के उद्देश्य से नोएडा पुलिस ने केस को फिर गुड़गाँव वापस भेज दिया. कार्रवाई के लिए पुनः प्रार्थना दिए जाने दोनों जगहों की पुलिस एक दूसरे के सिर मामले को टालती रही.

पीड़ित परिवार की ओर से प्रार्थना पत्र आने पर कुछ समाजसेवी संस्थाओं (NGO)ने इसमें हस्तक्षेप कर व्यापक धरना-प्रदर्शन किया. इसके बाद दीपक चौरसिया ने इलाहबाद उच्च न्यायालय के तीन बड़े वकीलों द्वारा अरेस्ट स्टे (बेल) की अर्जी लगा दी. चूँकि पक्की FIR दर्ज नही हुई थी, फिर भी न्यायालय को गुमराह करते हुए, सेटिंग से 18 अप्रैल 2014 को अरेस्ट स्टे ले लिया. इस स्टे को पीड़ित परिवार ने चैलेन्ज किया. 8 अक्टूम्बर 2014 को दीपक चौरसिया का अरेस्ट स्टे इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने खारिज कर दिया. अपने आर्डर में कोर्ट ने कहा है कि जब जीरो FIR के आधार पर अभी तक कोई केस दर्ज ही नहीं हुआ है तो बेल का कोई औचित्य नहीं बनता है. 

पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों पर पुलिस कार्यवाही की मांग को लेकर अर्जी लगाई थी जिस पर 17 फरवरी 2014 को सुप्रीमकोर्ट ने गुड़गांव और नोएडा दोनों जगहों की पुलिस को जवाब देने का नोटिस दे दिया. सुप्रीम कोर्ट की नोटिस को कोई महत्व ना देते हुए दोनों जगहों की पुलिस इसे आठ महीने तक टालती रही. अंत में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्तूबर, 2014 को 7 दिन में जवाब देने और 27 अक्तूबर तक केस फाइल करने की म्याद देकर दोनों पुलिस को आर्डर पकड़ा दिया है. इस तरह दीपक चौरसिया के जेल जाने की स्थितियां तैयार होती दिख रही हैं.

मूल खबर…

आसाराम मामले में हाई कोर्ट ने दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्जी खारिज की

संबंधित खबर से जुड़े कुछ डाक्यूमेंट्स….

इन्हें भी पढ़ें…

आसाराम समर्थकों ने दीपक चौरसिया, अजीत अंजुम और अजय कुमार के खिलाफ जारी किया प्रेस नोट

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सिर्फ ‘न्यूज नेशन’ ही नहीं, ‘इंडिया न्यूज’ और ‘न्यूज24’ के भी खिलाफ हुआ है एफआईआर

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एफबी पर आसाराम समर्थकों ने दीपक चौरसिया को भी लिया निशाने पर

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Wanted Posters of Deepak Chaurasia, Ajit Anjum and Ajay Kumar

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‘न्यूज नेशन’ की घटिया पत्रकारिता, शैलेश कुमार समेत कइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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इस प्रकरण से जुड़े कुछ वीडियो लिंक….

https://bhadas4media.com/old1/video/viewvideo/775/media-world/noidafinalwithdc.html

https://bhadas4media.com/old1/video/viewvideo/776/media-world/noidadharna03012014.html

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आसाराम मामले में हाई कोर्ट ने दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्जी खारिज की

index

एक आपराधिक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंडिया न्यूज टीवी चैनल के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी है। चौरसिया व अन्य पर आसाराम बापू के विषय में आपत्तिजनक कार्यक्रम प्रसारित करने का आरोप है।

इस संबंध में चौरसिया तथा अन्य के विरुद्ध आईपीसी की धारा 469, 471, 120B, आईटी एक्ट की धारा 67B और पाक्सो एक्ट की धारा 13C के अंतर्गत मुक़दमा दर्ज किया गया था। चौरसिया पर आरोप है कि उन्होने आसाराम बापू से संबंधित कुछ दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की और उन्हे अपने चैनल के शो ‘सलाखें’ में दिखाया।

चौरसिया तथा अन्य पर आसाराम से संबंधित कुछ आपत्तिजनक क्लिपिंग भी दिखाने का आरोप है जो कि आईपीसी के साथ ही आईटी एक्ट और पाक्सो के अंतर्गत अपराध है।

हाई कोर्ट ने ज़मानत अर्जी खारिज करते हुए पुलिस को मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। पुलिस चौरसिया को इस मामले में गिरफ्तार भी कर सकती है।

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