टाइम्स आफ इंडिया वालों ने चित्रा सिंह को लेकर इतना बड़ा झूठ क्यों छाप दिया!

खबर पढ़ाने के चक्कर में खबरों के साथ जो बलात्कार आजकल अखबार वाले कर रहे हैं, वह हृदय विदारक है. टाइम्स आफ इंडिया वालों ने छाप दिया कि सिंगर चित्रा सिंह ने 26 साल बाद का मौन तोड़ा और गाना गाया. टीओआई में सचित्र छपी इस खबर का असलियत ये है कि चित्रा सिंह ने कोई ग़ज़ल / भजन नहीं गया. उन्हें मंच पर बुलाकर सिर्फ सम्मानित किया गया था. लेकिन खबर चटखारेदार बनाने के लिए छाप दिया कि चित्रा ने गाना गाया.

पढ़िए आप भी टीओआई में छपी झूठी खबर….

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TOI MUST APOLOGISE FOR FALSE NAJEEB STORY

The Delhi Union of Journalists is shocked that a leading daily like the Times of India should have discredited itself by publishing a malicious and misleading report on the missing JNU student Najeeb. The DUJ demands that the TOI issue an immediate apology for maligning a boy who is ‘missing and unable to defend his reputation.

The TOI report alleged that Najeeb had been surfing the Internet for information on the Islamic State and ways to join it.  It claimed that he had watched many videos on the Islamic State and was “watching a video of the speech of an IS leader on the night of October 14, just before he had a scuffle with ABVP members…” The story by TOI reporter Rajshekhar Jha was published both on the front page and page three on March 21, 2017.

This kiteflying story was attributed to unnamed police sources and claimed the police had received “a report on the browsing history of Najeeb’s laptop from Google and YouTube”.  The following day Deputy Police Commissioner Madhur Verma denied that any report had been received from Google and YouTube and said “investigation conducted so far has not revealed anything to suggest that Najeeb had accessed any site relating to IS”. Special Commissioner of Police and Delhi police spokesperson Dependra Pathak also rubbished the TOI story in his statement to Hindustan Times.

It is apparent that the story was meant to discredit Najeeb and find an alibi for the Delhi Police’s inability to trace the missing boy. The story went into great detail on reported Police moves to search for him.

Jha’s clearly motivated story also went into allegations about Najeeb’s medical history, claiming he had been on drugs for obsessive compulsive disorder, sleeplessness, depression, fits, panic attacks and agoraphobia.  Najeeb’s family has previously denied that he was on such medication but the TOI chose to repeat all this in great detail.

The TOI published the false story on its front page with the heading “Najeeb saw IS videos, websites” on March 21, 2017 and another report on page three with a three-column bold headline “Najeeb searched for information on IS”.  However, the retraction it was forced to publish after criticism on social media was carried as a single column item on page 5 with the neutral headline, “Police deny Najeeb report” on March 22, 2017. This was merely a verbatim report of a statement by DCP Verma.

The Delhi Union of Journalists demands an apology by the TOI for its irresponsible and false reports. It also demands that the story be removed from its website immediately.

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हाथ पर प्लास्टर चढ़ाए नीरज पटेल पहुंचे उरई कोतवाली (देखें तस्वीरें)

न्यूज़ नेशन चैनल में यूपी इनपुट पर कार्यरत रहे नीरज पटेल हाथ पर पलस्तर चढ़ाए बीते दिनों यूपी के उरई कोतवाली पहुंच गए. वहां उन्होंने कोतवाली उरई के निरीक्षक संजय गुप्ता को बताया कि उनका हाथ प्रिंस कुशवाहा ने तोड़ा है, उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाए. नीरज पटेल पूरी तैयारी से आए थे. वे अपने साथ मेडिकल रिपोर्ट वगैरह भी लाए थे. पुलिस ने उनसे पूछा कि जब आपका हाथ तोड़ा गया तब आपने खबर नहीं की. एक रोज बाद मेडिकल कराकर वह यहां पहुंच रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक पुलिस को पूरा मामला संदिग्ध लगा. पुलिस ने डॉक्टर को मौके पर बुलवाने के लिए कहा. बताया जाता है कि इसके बाद नीरज पटेल और उसके साथी अनुज कौशिक वहां से निकल लिए. पुलिस का कहना है कि मामला फर्जी था. नीरज पटेल न्यूज़ नेशन चैनल की धौंस दिखाकर कुछ पत्रकारों पर मुकदमा लिखाने की फिराक में था. बाद में कुछ स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस को न्यूज़ नेशन हेड आफिस का नंबर दे दिया जहां संपर्क करने पर बताया गया कि नीरज पटेल का चैनल से अब कोई संबंध नहीं है.

इस बारे में बातचीत में कोतवाली उरई के निरीक्षक संजय गुप्ता का कहना है कि चैनल से बात की गई तो बताया गया कि न्यूज नेशन में अब नीरज पटेल नहीं हैं. साथ ही हाथ तोड़े जाने की घटना भी संदिग्ध नजर आई. फिलहाल जांच की जा रही है. रिपोर्ट नहीं लिखी गई है.

उधर, नीरज पटेल का कहना है कि उनके बाइक को टक्कर मारी गई जिसके कारण उनका हाथ टूट गया. नीरज के मुताबिक प्लास्टर अभी भी उनके हाथ पर चढ़ा हुआ है और वह हर हाल में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट लिखाएंगे. न्यूज नेशन चैनल से निकाले जाने के बारे में पूछे जाने पर नीरज पटेल का कहना है कि चैनल ने उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा था लेकिन अभी तक उन्होंने रिजाइन नहीं किया है. उन्होंने ये माना कि वे अब आफिस नहीं जा रहे हैं.

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लाल किले से मोदी ने झूठ बोला! सच्चाई सुनिए पत्रकार विनय ओसवाल से

सरकार जनता से कैसे दूर हो जाती है और शासकों को अधिकारी योजनाओं की सफलता के मामले में कैसे गुमराह कर देते है, इसकी बानगी आज स्वतंत्रता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के बाद देखने को मिली। दरअसल पीएम ने अपने भाषण में यूपी के हाथरस जिले के गांव नगला फतेला का जिक्र किया। कहा कि दिल्ली से महज तीन घंटे की दूरी के इस गांव में बिजली आने में 70 साल लग गए। लेकिन यह हकीकत नही है। सच्चाई यह है कि इस गांव में बिजली की लाइन तो खिंच गयी है लेकिन एक साल से इस लाइन में करंट नही आया है।

हाथरस जिले की सासनी तहसील के गांव नगला फतेला में एक साल पहिले खिंची बिजली की इन लाइनों को देखिये। इन्ही लाइनों के बूते आज पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जिक्र किया कि दिल्ली से महज तीन घण्टे की दूरी के इस गांव में 70 साल बाद बिजली पँहुची है। गांव के लोगों ने भी उनकी यह बात सुनी तो सब हैरान रह गए। दरअसल पीएम ने जो कहा सचाई उसके विपरीत है। गांव में एक साल पहिले विद्युतीकरण हो गया था। लेकिन एक साल से इन लाइनों में करंट नही दौड़ा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के लिए उन्हें आज भी वही दिक्कतें झेलनी पड़ रही है जो कि वे आजादी के 70 साल से झेल रहे है। दरअसल इस गांव के ग्रामीण अपने ट्यूबवेलों की लाइन से १५० से २०० मीटर तक की केबिलें स्वयं खीचकर जैसे तैसे बिजली का इंतजाम करते है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को लिखकर दिया है फिर भी उनकी सुनवाई नही होती। इन ग्रामीणों को तो गांव में दो तीन घण्टे बिजली आने से भी परेशानी है।

आइए, गांव वालों की जुबानी बिजली की असल कहानी जानें… नीचे दिए यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/ZEVtLapuxBY

https://youtu.be/GczPEq1QC-s

https://youtu.be/_5B34eoQm0k

https://youtu.be/yrawZP-vUpg

हाथरस से वरिष्ठ पत्रकार विनय ओसवाल की रिपोर्ट. विनय ओसवाल लंबे समय तक नवभारत टाइम्स में कार्यरत रहे. इन दिनों सोशल मीडिया और भड़ास के जरिए अपनी बेबाक लेखनी को धार दे रहे हैं. उनसे संपर्क 9837061661 के जरिए किया जा सकता है.


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भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा

भास्कर डाट काम की जिस खबर पर बवाल मचा है, उसके बारे में कुछ तथ्य साझा करना चाहता हूं. भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा था. जिसका डोभाल ने तत्काल  खंडन कर दिया लेकिन भास्कर बेशर्मी से इंटरव्यू को अभी तक चलाये जा रहा है. कोई भी हिंदी मीडिया को गंभीरता से नहीं लेता उसका ये फायदा उठाते हैं. अगर यह इंटरव्यू किसी अंग्रेजी अखबार की साइट पर होता तो अब तक बवाल मच गया होता.

हकीकत यह है कि डोभाल साहब से कुछ मिनट की अनौपचारिक बातचीत में इस संवाददाता रोहिताश्व मिश्र ने सहमे अंदाज के एक दो सवाल पूछे उसके बाद पूरा इंटरव्यू मनगढ़ंत लिख के चला दिया. डोभाल साहब ने इस पर कारर्वाई करने को कहा है. इससे पहले भी यह संवाददाता पाकिस्तान जाकर दाउद के घर से खबर करने का झूठा दावा कर चुका है जबकि यह आज तक इंडिया से बाहर नहीं गया.

उस वक्त उसने जो खबर की थी वह कई महीने पहले एक्सप्रेस व हिंदू में छप चुकी थी. इंटरव्यू पढ़कर देखिये. क्या एनएसए इस भाषा में बात करता है. यह दसवीं पास पत्रकार की भाषा है. इस पत्रकार से ज्यादा तरस तो इस अखबार के मालिकों व संपादकों पर आता है जो ऐसे चोर व फर्जी पत्रकारों को अपने यहां जगह दिये हैं. इतना ही नहीं, एनएसए के खंडन के बाद उसे गाड़ी व सुरक्षा भी भास्कर प्रबंधन ने मुहैया करायी है. जय हो.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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फेकू मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर हुआ वायरल…

पीएम नरेंद्र मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा हुआ है कि सीमेंट की एक बोरी 120 रुपये में मिल रही है. एबीपी न्यूज द्वारा चलाई गई ऐसी खबर का स्क्रीनशाट लगाकर लोग लिख रहे हैं कि अब मोदी जी ही बता दें कि वो दुकान कहां है जहां पर इतने सस्ते रेट पर सीमेंट की बोरी मिल रही है.

फेसबुक पर Gulshan Kumar Arora ने एबीपी न्यूज के स्क्रीनशाट का फोटो चिपकाकर लिखा है: ”झूठ के अतिरिक्त इस व्यक्ति के मुंह से आप कभी और कुछ नहीं सुन पाएंगे….. कहाँ मिल रही है सीमेंट की एक बोरी १२० रुपये में? जरा आप खुद ही पता कर लें.. प्रधान मंत्री होकर ऐसा सफ़ेद झूठ? शर्म आनी चाहिए… जो कि है ही नहीं.

पत्रकार Surendra Grover लिखते हैं: क्या कोई बताएगा कि 120 रूपये में सीमेंट की बोरी किस शहर में किस दूकान पर मिलती है..? कृपया पता लगाएं..

फेसबुक पर विक्रम सिंह चौहान लिखते हैं – नरेंद्र मोदी की सुबह की शुरुआत ही झूठ से होती है. आज फिर उन्होंने झूठ बोला कि सीमेंट की बोरी अब 120 रूपए में मिल रही है. मेरे नए घर की ढलाई के लिए 200 बोरी सीमेंट की जरूरत पड़ेगी. सोच रहा हूँ पीएमओ को इसी न्यूज़ को आधार मानकर पूछूं कि कहाँ किस कंपनी की सीमेंट इतनी सस्ती मिलती है?शर्म आती है ये आदमी इस महान देश का प्रधानमंत्री बन बैठा है. शर्म उन्हें भी आना चाहिए जिन्होंने इसे वोट किया.

अनीला ने ट्विट किया – आज फेंकने का विश्व रिकोर्ड टुटा सीमेंट की बोरी 120/- रुपए की होगई ?? मोदी जी लीमिट में फेंकिए।

योगेश शर्मा जर्नलिस्ट ने भी पूछ लिया कि लो भई मोदी जी ने आज कह दिया है कि सीमेंट की बोरी 120 रूपए में हो गई है।  इससे ज्यादा कोई मांगे तो मत देना दुकानदार को….चाहे कुछ भी हो जाए, आपको पता नहीं हो तो मोदी जी से पूछ लेना। 120 रूपये में सीमेंट की बोरी किस शहर में किस दूकान पर मिलती है..?

Mohammad Anas लिखते हैं: नरेंद्र मोदी द्वारा सिमेंट का दाम 270 रूपए के बजाए 120 बताना कुछ और नहीं जनता का उनकी सरकार के प्रति घटता विश्वास है। जनता दिमाग तक पर असर कर जाती है। कुछ दिनों बाद वे यह भी कह सकते हैं कि डीजल 5 रूपए लीटर मिलता है। वैसे सच कहूं तो प्रधानमंत्री पद की गरिमा को जिस तरह मोदी जी ठेस पहुंचा रहे हैं उतना पहले कभी नहीं पहुंचा था। वे वाकई में पहले पीएम हैं। शायद अब पहले भारतीय भी बन गए।

इससे पहले भी नरेंद्र मोदी के झूठ मिडिया की सुर्खियों में रहे हैं। उन्होंने कहा था कि चीन अपनी जीडीपी का 20 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है, लेकिन भारत सरकार नहीं। हकीकत यह है कि चीन अपनी जीडीपी का महज 3.93 प्रतिशत ही शिक्षा पर खर्च करता है। वहीं भारत में एनडीए सरकार के कार्यकाल में शिक्षा पर 1.6 प्रतिशत खर्च हुआ और यूपीए के कार्यकाल में सालाना जीडीपी का 4.04 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च हुआ है। मोदी ने कहा था कि सिकंदर महान को गंगा नदी के तट पर बिहारियों ने हराया था। सिकंदर महान 326 ई.पू. तक्षशिला से होते हुए पुरु के राज्य की तरफ बढ़ा, जो झेलम और चेनाब नदी के बीच बसा हुआ था। राजा पुरु से हुए घोर युद्ध के बाद वह व्यास नदी तक पहुंचा, परन्तु वहां से उसे वापस लौटना पड़ा। उसके सैनिक मगध (वर्तमान बिहार) के नन्द शासक की विशाल सेना का सामना करने को तैयार न थे। इस तरह से सिकंदर पंजाब से ही वापस लौट गया था। 

मोदी ने कहा था कि विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला या टेक्सिला विश्वविद्यालय बिहार में था। तक्षशिला प्राचीन भारत में शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। तक्षशिला वर्तमान समय में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी जिले की एक तहसील है। मोदी ने कहा था कि एनडीए की कार्यकाल में भारत की विकास दर 8.4 प्रतिशत थी, जबकि एनडीए के कार्यकाल में भारत की विकास दर मात्र 6 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा था कि गुजरात में देश में सबसे अधिक विदेशी पूंजी निवेश होता है, जबकि आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से 2011 तक गुजरात में 7.2 बिलियन डॉलर का विदेशी पूंजी निवेश हुआ है और इसी अवधि में महाराष्ट्र में 45.8 बिलियन डॉलर और दिल्ली में 26 बिलियन डॉलर का विदेशी पूंजी निवेश हुआ है।

मोदी ने कहा था कि नर्मदा पर बांध बनने पर लोगों को मुफ्त बिजली मिलेगी। अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि किसी प्रदेश में नदियों पर बांध बनने से मुफ्त में लोगों को बिजली मिली हो। राष्ट्रीय बिजली नियामक आयोग के अनुसार बिजली के लिए पैसा देना ही होगा। लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने कहा था कि उनके पटना भाषण के बाद सरकार ने टीवी मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की नीयत से मीडिया एडवाइजरी जारी की। हकीकत उल्टी है। नरेन्द्र मोदी ने 27 अक्टूबर को पटना में भाषण दिया था, जबकि सूचना प्रसारण मंत्रालय की एडवाइजरी इससे एक सप्ताह पहले 21 अक्टूबर को ही जारी कर दी गई थी। यह एडवाइजरी सूचना प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मौजूद है। एक बड़े अखबार के इंटरव्यू के बाद मोदी का एक और ‘झूठ’ सुर्खियों में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरदार पटेल की अंत्येष्टि में पंडित जवाहर लाल नेहरू शामिल नहीं हुए थे। 

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सच सामने आया : किरण बेदी नहीं, सुरजीत कौर आजाद भारत की पहली महिला आईपीएस अफसर

Sanjaya Kumar Singh : शीशे के घरों से चुनाव लड़ना… भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर पार्टी की ओर से दिल्ली की मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनना किरण बेदी के लिए काफी महंगा पड़ा। चुनाव अभी हुए नहीं है फिर भी उनके जीवन की दो प्रमुख कमाई इस चुनाव में खर्च हो गई। पहली कमाई थी इंदिरा गांधी की कार टो करने का श्रेय जो पिछले दिनों बुरी तरह खर्च हो गई। उनकी दूसरी कमाई थी – देश की पहली महिला आईपीएस होने का श्रेय। और अब यह कमाई भी खर्च होती दिखाई दे रही है।

एक पुराने अखबार के कतरन की यह तस्वीर बताती है कि देश की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर पंजाब कैडर की सुरजीत कौर (1956) थीं जिनका 1957 में एक कार दुर्घटना में निधन हो गया था। जबकि हम लोग अभी तक किरण बेदी को ही देश की पहली महिला आईपीएस अफसर जानते-मानते रहे हैं। सुरजीत कौर के आईपीएस के लिए चुने जाने के बाद जल्दी ही निधन हो जाने और इसके करीब 16 साल बाद 1972 में किरण बेदी के आईपीएस बनने पर हो सकता है उस समय किरण बेदी को पहली महिला आईपीएस अधिकारी कहा और मान लिया गया होगा। और उनकी यही छवि बनी रही। अब अगर यह खुलासा हो रहा है तो इसका श्रेय सूचना और संचार क्रांति के साथ भारतीय चुनावों को भी देना पड़ेगा। अभी तक तो यही कहा जाता था कि शीशे के घरों में रहने वालों को दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए। पर बुलेट प्रूफ शीशे के जमाने में इसमें संशोधन की आवश्यकता लग रही है। शीशे के घरों से चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।

किरण बेदी वाकई पहली महिला आईपीएस नहीं है वाले सच को छुपाए रखने के लिए कितने लोगों को दोषी माना जाए। जैसा कि नरेन्द्र मोदी ने कहा है कांग्रेस ने 67 साल कुछ नहीं किया – पर यह एक काम तो किया कि उनके (उनकी पार्टी) के लिए किरण बेदी तैयार करने में योगदान किया। खबर के मुताबिक दिल्ली में जाने-माने वेद मारवाह सुरजीत कौर के बैचमेट हैं, उन्होंने भी यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की तो क्या वेद मारवाह को इस काम में कांग्रेस पार्टी का सहयोगी माना जाए। इंदिरा गांधी की कार टो करने के जिस मामले से वे स्टार बनीं उस मामले में भी कांग्रेस ने सार्वजनिक तौर पर कुछ कहा हो ऐसा सुनने में नहीं आया। उसकी इस चुप्पी को क्या माना जाए।

यूपीएससी, जो लोगों के समान्य ज्ञान की परीक्षा लेकर आईएएस-आईपीएस चुनता बनाता है, इतने वर्षों तक इस जानकारी को छिपाए रहा या एक गलत सूचना को सही करने की जरूरत नहीं समझी। क्या उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। इतना जबरदस्त सहयोग मिलने के बाद भी किरण बेदी की पसंद कांग्रेस पार्टी नहीं रही। पहले तो अन्ना आंदोलन में भाग लेकर वे कांग्रेस सरकार का विरोध करती हैं और फिर प्रमुख विरोधी दल भाजपा में शामिल हो जाती हैं। कांग्रेस का विरोध तो आम आदमी पार्टी भी कर रही थी पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चुना। क्या इसलिए कि उन्हें लगता है कि उनके जैसे लोगों की शरणस्थली भाजपा है। बहुत सारे सवाल हैं और मीडिया की भूमिका भी। पर उसकी चर्चा फिजूल है। कटघरे में सिर्फ किरण बेदी नहीं – देश की राजनीति, राजनीतिक पार्टियां, समाज और संस्थाएं और कुछ दूसरे प्रमुख नागरिक भी हैं। सिर्फ किरण बेदी को दोषी मानना मुझे ठीक नहीं लग रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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पाठकों से खुलेआम चीटिंग : सीबीएसई का नाम लेकर एक निजी इंस्टीट्यूट की वेबसाइट को प्रमोट कर रहा है दैनिक जागरण

आदरणीय यशवंत जी, एक ओर दैनिक जागरण खुद को देश का नंबर एक अखबार होने का दावा करता है दूसरी ओर जागरण के संपादक व कार्यकारी अधिकारी समाचार पत्र को उतनी गंभीरता से नही लेते। इसकी बानगी 20 जनवरी 2015 के जागरण के बागपत संस्करण में देखने को मिली। हालाकि दी गई खबर मेरठ के एक पत्रकार ने लिखी है तो जाहिर है कि खबर मेरठ यूनिट के अन्य संस्करणों में भी गई होगी।

20 जनवरी के जागरण के बागपत संस्करण में पेज नंबर 6 पर प्रकाशित समाचार जिसका शीर्षक ‘सीबीएसई बनी है हर परीक्षार्थी की गाइड’ में बताया गया है कि सीबीएसई ने छात्रों की सुविधा के लिए एक वेबसाइट बनाई है (www.mycbseguide.com) जहां कक्षा 3 से 12 तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। यह पत्रकार अमित तिवारी की बाईलाइन खबर है। मुझे हैरानी तब हुई जब पता चला कि जिस वेबसाइट का समाचार में जिक्र किया जा रहा है उसका सीबीएसई से कोई संबंध नही। वेबसाइट पर दिया गया पता दिल्ली के द्वारका के सेक्टर आठ का है। जोकि एलपिस टैक्नोलॉजी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही है।

सवाल यह है कि क्या जागरण जैसे प्रसिद्ध बैनर अपने पाठकों को बिना पड़ताल किए ऐसे भ्रामक समाचार मुहैया कराता है। यह वास्तव में जागरण परिवार के लिए सोचनीय प्रश्न है।

भड़ास को भेजे गए एक पत्र पर आधारित.

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कुमार विश्वास के खिलाफ झूठ का ज़हर उगलते अमर उजाला के पत्रकार!

Dr Kumar Vishwas Passport Issue Wrongly reported by Amar Ujala

पत्रकारिता की गिरती साख के कई भागीदार हैं। लेकिन इस पेशे से जुड़े कई ऐसे लोग हैं, जो पत्रकारिता की अर्थी को कन्धा देने के लिए बहुत जल्दी में नज़र आते हैं। पिछले दिनों ‘अमर उजाला’ ने खबर छापी, कि कवि और आप नेता डा कुमार विश्वास का पासपोर्ट किसी विवाद के कारण गाज़ियाबाद स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय द्वारा जमा करवा लिया गया है। अगले ही दिन पासपोर्ट अधिकारी श्री यादव के हवाले से निर्देश आया, कि पूरा मामला साफ़ है। इसलिए पासपोर्ट वापस निर्गत कर दिया जाएगा। दिनांक 14 नवम्बर को डा कुमार विश्वास को पासपोर्ट निर्गत कर दिया गया।

इस पूरी प्रक्रिया की पाँच हज़ार रूपए की फीस होती है, जिसका भुगतान विश्वास द्वारा किया गया। इस खबर को दो प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों ने छापा।  दैनिक जागरण ने यथास्थिति बताई, और पूरे मामले की अक्षरशः सही जानकारी दी। वहीँ अमर उजाला ने इसी खबर को ऐसे प्रस्तुत किया है, जैसे विश्वास बहुत बड़े अपराधी साबित हुए हों और अदालत से उन्हें कोई सज़ा दे दी गई हो। आश्चर्य है, कि कैसे कोई पत्रकार व्यावसायिकता का इस तरह से मज़ाक उड़ा सकता है।

15 Nov Jagran Link…​

http://epaper.jagran.com/epaperimages/15112014/delhi/14gag-pg23-0.pdf

15 Nov Amar Ujala Link…

http://www.delhincr.amarujala.com/feature/ghaziabad-news-ncr/aap-leader-kumar-vishwas-get-penalty-hindi-news-jn/

जब इसके तह में जाने की कोशिश की गई, तो पता चला कि अमर उजाला के दो स्थानीय पत्रकार संजय शिसोदिया और सौरभ पिछले लम्बे समय से विश्वास के खिलाफ बिना ठोस आधार के रिपोर्टिंग करने के आदी हैं। विश्वास जिस कॉलेज (एल आर कॉलेज, साहिबाबाद) में पढ़ाते थे, वहाँ के कार्यवाहक प्राचार्य संजय दत्त कौशिक के खिलाफ कुमार शुरू से ही खुल कर बोलते थे। कॉलेज में चर्चा है, कि वहां कई वर्ष पूर्व ही प्राचार्य की बहाली हो चुकी है, लेकिन दत्त अब भी प्राचार्य का पद हथियाए हुए है। इसके अलावा संजय दत्त कौशिक के शैक्षणिक दस्तावेज़ भी फ़र्ज़ी होने की बात सामने आई है। इसके मुताल्लिक़ दस्तावेज भी कॉलेज के कई कर्मचारियों के पास हैं। विरोध करने की वजह से कार्यवाहक प्राचार्य ने समय समय पर विश्वास को विभागीय जाँच इत्यादि में फंसाया है। लेकिन हर जाँच के बाद उच्च जाँच समितियों ने संजय दत्त कौशिक को ही षड़यंत्र का दोषी माना, जिसके कागज़ात भी हैं। चूँकि कॉलेज एक बड़े कोंग्रेसी नेता का है, और संजय दत्त कौशिक उनके चहेते हैं, इन सारे षड्यंत्रों के बावजूद कौशिक पर चेतावनी के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच कौशिक ने स्थानीय पत्रकारों को अपने पक्ष में करने के गुर सीख लिए, और मनमाफ़िक खबरें छपवाने लगे।

जब विश्वास के पासपोर्ट की बात आई, तो NOC के बहाने संजय दत्त कौशिक ने फिर से विश्वास को फँसाने की कोशिश की। पासपोर्ट के लिए NOC जारी कर, बाद में स्वयं ही पासपोर्ट अधिकारी को सूचना दे दी, कि मैंने NOC नहीं दिया है। इसकी जाँच के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने विश्वास से पासपोर्ट जमा करने को कहा, जो उन्होंने अविलम्ब जमा करवा दिया। इस खबर को अमर उजाला ने ‘बड़ा खुलासा’, ‘फर्जीवाड़ा’ इत्यादि शब्दों से सजा कर ऐसे परोसा जैसे विश्वास अपराधी हों।

9 Nov Amar Ujala…

http://m.amarujala.com/delhincr/feature/ghaziabad-news-ncr/aap-leader-kumar-vishwas-charged-on-fraud-case-hindi-news-bm/?page=0

इस बीच दिनांक 1 सितम्बर से विश्वास का अपने पद से त्यागपत्र कॉलेज प्रबंधन द्वारा स्वीकृत हो गया था। अतः NOC की उपयोगिता को शून्य मानते हुए 14 Nov को विश्वास का पासपोर्ट निर्गत कर दिया और जाँच प्रक्रिया के लिए देय पाँच हज़ार रूपए उनसे लिए गए। इस खबर को अमर उजाला के इन क्रांतिवीर पत्रकारों ने झूठे तथ्यों का जामा पहना कर ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने की कोशिश की। थोड़ा और गहरे जाने पर पता चला कि पूर्व में भी इन पत्रकारों ने संजय दत्त कौशिक के कहने पर विश्वास के खिलाफ खबरें छापी थीं। एक बार तो यह लिख दिया,कि विश्वास कॉलेज में क्लास नहीं पढ़ा रहे, जबकि वो उस समय दो वर्ष के अवैतनिक अवकाश पर थे। ये तो भगवान ही जाने कि कौशिक से उन पत्रकारों को क्या मिलता है, लेकिन अंत में पत्रकारिता को बदनामी ही मिलती है।

भड़ास को मिले एक पत्र पर आधारित.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर साबित हुए झूठे, जीवित लोगों को मरा बता संवेदना भी जता दी

आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लेने की जो वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी थी वह गलत निकली है। प्रधानमंत्री ने जयापुर गांव में बोलते वक्त कहा था कि इस गांव को गोद लेने के मेरे फैसले के पीछे मीडिया ने कई मनगढ़ंत वजहें गिनायी थी। लेकिन इस गांव को गोद लेने की जो वजहें मीडिया ने बतायी वह सब गलत है। लेकिन बड़ी बात यह है कि जो वजह पीएम मोदी ने बतायी वह भी गलत निकली है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जयापुर गांव में बिजली हादसे की वजह से पांच लोगों की मौत हो गयी थी। इस वजह से उन्होंने बुरे वक्त से गुजर रहे इस गांव को गोद लेने का फैसला लिया था। पीएम ने अपने भाषण के दौरान इमोशनल अपील करते हुए कहा था कि बुरे वक्त में वो आपके साथ है। साथ ही उन परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त भी की थी।

जिन पांच लोगों को पीएम मोदी ने अपने भाषण में मृत घोषित किया था वो अभी जिंदा है। हादसे का शिकार हुई 20 वर्षीय डिम्पी उनमें से एक हैं और कहती हैं कि शायद मैं इसीलिए बच गई क्योंकि मुझे मोदीजी को काफी नजदीक से देखना था। इसी साल अप्रैल महीने में गांव से होकर गुजरने वाली एक हाई टेंशन बिजली लाइन लो टेंशन तार पर गिर गई, जिससे घरों में अचानक 11 हजार वोल्ट का करंट दौड़ने लगा। इसमें डिम्पी के साथ गांव के चार अन्य लोग बुरी तरह झुलस गए थे। हादसे में ‌सबसे ज्यादा झुलसी डिम्पी को कई दिनों तक अस्पताल में रखा गया, जबकि अन्य चार लोगों को फर्स्ट एड से ही राहत मिल गई और उन्हें ‌घर भेज दिया गया। कुछ दिनों बाद डिम्पी भी सही होकर घर पहुंच गई।

हादसे के बाद मोदी ने गांव की मुखिया को फोन करके मामले की जानकारी ली थी। यही नहीं हादसे की जानकारी लेने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली खुद जयापुर गए थे। इसके बाद ही बिजली विभाग ने गांव में ऐसे हादसों को रोकने के लिए जरूरी इंतजाम कर दिए थे। वहीं गांव की मुखिया दुर्गावती जो पीएम मोदी के साथ मंच पर मौजूद थीं का कहना है कि प्रधानमंत्रीजी को हादसे के बारे में जरूर गलत जानकारी दी गई होगी, वरना वो ऐसा कतई नहीं कहते। जैसे ही उन्होंने भाषण खत्म किया, हमने उन्हें बता दिया था कि हादसे में कोई मरा नहीं था।’ लेकिन तब तक प्रधानमंत्री मंच छोड़ चुके थे। वहीं कांग्रेस विधायक अजय राय जो मोदी के खिलाफ बुरी तरह से हार गये थे उन्होंने इस मामले में एक प्रेस कांफ्रेंस करके हादसे में घायल तीन लोगों को मीडिया के सामने खड़ा कर दिया। अजय राय ने कहा कि पीएम छूठ बोल रहे हैं। लेकिन इससब के बीच जयापुर गांव के लोगों में प्रधानमंत्री के गांव के दौरे से लोग बहुत खुश हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि चुनाव के बाद कोई सांसद उनके गांव आया हो।

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डा. सुब्रमण्यम स्वामी पर आंख मूंद कर भरोसा न करें, ये झूठ भी बोलते हैं, देखिए दो तस्वीरें

Sanjay Tiwari : पहला चित्र देखिए जिसमें एक यजीदी लड़की रोते हुए कह रही है कि कैसे आइसिस के मुस्लिम हत्यारों ने उसके साथ लगातार तीस बार बलात्कार किया और उसे खाना खाने तक की फुर्सत नहीं दी गई. अपने फेसबुक वॉल पर यह ‘शंखनाद’ करनेवाले कोई और नहीं बल्कि देश के ”महान हिन्दू राष्ट्रवादी नेता” डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी है. स्वामी जी के झूठ को सच मानने से पहले अब जरा दूसरी तस्वीर देख लीजिए.

स्वामी जी जिसे बलात्कार पीड़ित यजीदी लड़की बता रहे हैं वह लड़की न यजीदी है और न ही इराक में संजर उसका घर. यह एक फिलिस्तीनी मुस्लिम लड़की है जिसके पिता उसी इजरायल के हवाई हमले में मारे गये थे जिस इजरायल की स्वामी हिमायत करते हैं. वह स्वामी जी के “बलात्कार की पीड़ा” से नहीं बल्कि अपने पिता की मौत पर रो रही है. जुलाई के आखिरी हफ्ते में यह तस्वीर वाशिंगटन पोस्ट में ‘बेस्ट फोटो आफ द वीक’ शीर्षक से प्रकाशित हुई है.

वेब जर्नलिस्ट संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.

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