टाइम्स आफ इंडिया वालों ने चित्रा सिंह को लेकर इतना बड़ा झूठ क्यों छाप दिया!

खबर पढ़ाने के चक्कर में खबरों के साथ जो बलात्कार आजकल अखबार वाले कर रहे हैं, वह हृदय विदारक है. टाइम्स आफ इंडिया वालों ने छाप दिया कि सिंगर चित्रा सिंह ने 26 साल बाद का मौन तोड़ा और गाना गाया. टीओआई में सचित्र छपी इस खबर का असलियत ये है कि चित्रा सिंह ने कोई ग़ज़ल / भजन नहीं गया. उन्हें मंच पर बुलाकर सिर्फ सम्मानित किया गया था. लेकिन खबर चटखारेदार बनाने के लिए छाप दिया कि चित्रा ने गाना गाया.

पढ़िए आप भी टीओआई में छपी झूठी खबर….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

लाल किले से मोदी ने झूठ बोला! सच्चाई सुनिए पत्रकार विनय ओसवाल से

सरकार जनता से कैसे दूर हो जाती है और शासकों को अधिकारी योजनाओं की सफलता के मामले में कैसे गुमराह कर देते है, इसकी बानगी आज स्वतंत्रता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के बाद देखने को मिली। दरअसल पीएम ने अपने भाषण में यूपी के हाथरस जिले के गांव नगला फतेला का जिक्र किया। कहा कि दिल्ली से महज तीन घंटे की दूरी के इस गांव में बिजली आने में 70 साल लग गए। लेकिन यह हकीकत नही है। सच्चाई यह है कि इस गांव में बिजली की लाइन तो खिंच गयी है लेकिन एक साल से इस लाइन में करंट नही आया है।

हाथरस जिले की सासनी तहसील के गांव नगला फतेला में एक साल पहिले खिंची बिजली की इन लाइनों को देखिये। इन्ही लाइनों के बूते आज पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जिक्र किया कि दिल्ली से महज तीन घण्टे की दूरी के इस गांव में 70 साल बाद बिजली पँहुची है। गांव के लोगों ने भी उनकी यह बात सुनी तो सब हैरान रह गए। दरअसल पीएम ने जो कहा सचाई उसके विपरीत है। गांव में एक साल पहिले विद्युतीकरण हो गया था। लेकिन एक साल से इन लाइनों में करंट नही दौड़ा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के लिए उन्हें आज भी वही दिक्कतें झेलनी पड़ रही है जो कि वे आजादी के 70 साल से झेल रहे है। दरअसल इस गांव के ग्रामीण अपने ट्यूबवेलों की लाइन से १५० से २०० मीटर तक की केबिलें स्वयं खीचकर जैसे तैसे बिजली का इंतजाम करते है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को लिखकर दिया है फिर भी उनकी सुनवाई नही होती। इन ग्रामीणों को तो गांव में दो तीन घण्टे बिजली आने से भी परेशानी है।

आइए, गांव वालों की जुबानी बिजली की असल कहानी जानें… नीचे दिए यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/ZEVtLapuxBY

https://youtu.be/GczPEq1QC-s

https://youtu.be/_5B34eoQm0k

https://youtu.be/yrawZP-vUpg

हाथरस से वरिष्ठ पत्रकार विनय ओसवाल की रिपोर्ट. विनय ओसवाल लंबे समय तक नवभारत टाइम्स में कार्यरत रहे. इन दिनों सोशल मीडिया और भड़ास के जरिए अपनी बेबाक लेखनी को धार दे रहे हैं. उनसे संपर्क 9837061661 के जरिए किया जा सकता है.


इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा

भास्कर डाट काम की जिस खबर पर बवाल मचा है, उसके बारे में कुछ तथ्य साझा करना चाहता हूं. भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा था. जिसका डोभाल ने तत्काल  खंडन कर दिया लेकिन भास्कर बेशर्मी से इंटरव्यू को अभी तक चलाये जा रहा है. कोई भी हिंदी मीडिया को गंभीरता से नहीं लेता उसका ये फायदा उठाते हैं. अगर यह इंटरव्यू किसी अंग्रेजी अखबार की साइट पर होता तो अब तक बवाल मच गया होता.

हकीकत यह है कि डोभाल साहब से कुछ मिनट की अनौपचारिक बातचीत में इस संवाददाता रोहिताश्व मिश्र ने सहमे अंदाज के एक दो सवाल पूछे उसके बाद पूरा इंटरव्यू मनगढ़ंत लिख के चला दिया. डोभाल साहब ने इस पर कारर्वाई करने को कहा है. इससे पहले भी यह संवाददाता पाकिस्तान जाकर दाउद के घर से खबर करने का झूठा दावा कर चुका है जबकि यह आज तक इंडिया से बाहर नहीं गया.

उस वक्त उसने जो खबर की थी वह कई महीने पहले एक्सप्रेस व हिंदू में छप चुकी थी. इंटरव्यू पढ़कर देखिये. क्या एनएसए इस भाषा में बात करता है. यह दसवीं पास पत्रकार की भाषा है. इस पत्रकार से ज्यादा तरस तो इस अखबार के मालिकों व संपादकों पर आता है जो ऐसे चोर व फर्जी पत्रकारों को अपने यहां जगह दिये हैं. इतना ही नहीं, एनएसए के खंडन के बाद उसे गाड़ी व सुरक्षा भी भास्कर प्रबंधन ने मुहैया करायी है. जय हो.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भारत को अपना 21वीं सदी का सबसे बड़ा झुट्ठा और सबसे बड़ा झूठ मिल गया है!

Yashwant Singh :  भारत को अपना 21वीं सदी का सबसे बड़ा झुट्ठा मिल गया है. वह हैं माननीय नरेंद्र मोदी. जाहिर है, जब झुट्ठा मिल गया तो सबसे बड़ा झूठ भी खोज निकाला गया है. वह है- ‘अच्छे दिन आएंगे’ का नारा. नरेंद्र आम बजट में चंदा देने वाले खास लोगों को दी गयी 5% टैक्स की छूट… इसकी भरपाई वोट देने वाले आम लोगों से 2% सर्विस टैक्स बढा कर की जाएगी.. मोदी सरकार पर यूं ही नहीं लग रहा गरीब विरोधी और कारपोरेट परस्त होने के आरोप. खुद मोदी के कुकर्मों ने यह साबित किया है कि उनकी दशा-दिशा क्या है. इन तुलनात्मक आंकड़ों को कैसे झूठा करार दोगे भक्तों… अगर अब भी मोदी भक्ति से मोहभंग न हुआ तो समझ लो तुम्हारा एंटीना गड़बड़ है और तुम फिजूल के हिंदू मुस्लिम के चक्कर में मोदी भक्त बने हुए हो. तुम्हारी ये धर्मांधता जब तुम्हारे ही घर के चूल्हे एक दिन बुझा देगी शायद तब तुम्हें समझ में आए. कांग्रेस की मनमोहन सरकार से भी गई गुजरी मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का वक्त आ गया है… असल में संघ और भाजपा असल में हिंदुत्व की आड़ में धनिकों प्रभुओं एलीटों पूंजीपतियों कार्पोरेट्स कंपनियों मुनाफाखोरों की ही पार्टी है। धर्म से इनका इतना भर मतलब है कि जनता को अल्पसंख्यक बहुसंख्यक में बाँट कर इलेक्शन में बहुमत भर सीट्स हासिल कर सकें। दवा से लेकर मोबाइल इंटरनेट घर यात्रा तक महंगा कर देना कहाँ के अच्छे दिन हैं मोदी जी। कुछ तो अपने भासड़ों वादों का लिहाज करो मोदी जी। आप तो मनमोहन सोनिया राहुल से भी चिरकुट निकले मोदी जी।

Badal Saroj : Budget 2015… “ये जो तुम्हारे चेहरे पर लाली है सेठ जी, तुमने मेरे लहू से चुरा ली है सेठ जी।” जो पैसा कार्पोरेट्स और धन्ना सेठों के लिए छोड़ दिया गया उसका विवरण Via Sunand Sunand. (उपर दोनों ग्राफ बारीकी से देखें.) ध्यान रहे, यह इनके बाबा जी का माल नहीं था- जनता का पैसा था !! और यह खैरात जनता – बेहद बदहाल जनता – को मिलने वाली कल्याणकारी योजनाओं में कटौती करके बांटी गयी है।

Dinesh Choudhary जय हो! साहेब ने चुनावी चंदे की एक और किस्त चुका दी है। (Corporate taxes are taxes against profits earned by businesses during a given taxable period; reduced from 30 % to 25%)I और मध्यमवर्गीय भक्तगण चुप- चुप से क्यों हैं? पहले सरकारें जनपक्षीय होने का दिखावा करती थीं और इसीलिए थोड़ी रियायत भी। ये पहली बेशर्म सरकार है जो सरमायेदारों के गलबहियां लगकर कीमत अदा कर रही है। इस बजट में हालांकि साहित्य अकादमी और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, क्योंकि उनके बजट में क्रमश: 54 और 44 फीसदी की कटौती की गई है। साहित्या अकादमी का आवंटन 21.23 फीसदी से घटाकर 9.76 फीसदी कर दिया गया है और एनएसडी का आवंटन 43.03 फीसदी से घटाकर 13.45 फीसदी कर दिया गया है। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता योजना के लिए आवंटित धन में बहुत बड़ी कटौती की गई है। पहले इसका बजट 59.33 फीसदी था जो कि घटाकर 3.20 फीसदी कर दिया गया है।

Sheetal P Singh : दरअसल पहले दूसरे और तीसरे साल में सभी “लोकप्रिय सरकारें” अपने असल रंग में होती हैं। बाद के दो सालों में वे चुनाव की तैयारी में ग़रीब नवाज़ हो जाती हैं। यूपीए २ को याद करें। मोदी कुछ अलग नहीं कर रहे भक्तों ऽऽऽऽ। तेल के दाम बढ़ने से ख़फ़ा ख़फ़ा क्यूँ हो? अपनों के लिये जो भी कर गुज़रना है उसका वक़्त अभी ही है। टीवी चैनलों की डिबेट में गला फाड़ने के लिये जन धन स्वच्छ भारत दो लाख का बीमा आदि आदि आदि कितना तो किया है जेटली साब ने। लोग कुछ जादा नाशुक्रे हो चले हैं ……। मंहगाई न देखो उसके बढ़ने की दर देखो, कित्ती कम है ना ? देखो मुसलमानों की आबादी बढ़ी जा रही है, हिन्दू इसाई हुए जा रहे हैं , चीन चुमार में घुसने से रोक दिया गया है , पाक सीमा पर ५६” का सीना अड़ा दिया है । रामलला भी बुला रहे हैं । चार बच्चे ….नहीं छ: तो करो ही , मंहगाई की तुसी फ़िक्र ना करो । देखो देखो सामने आकाश में देखो … बिकासइ बिकास , टी वी में बिकास,अख़बार में बिकास बस सोशल मीडिया में ऐन्टी सोशलन के मारे कुछ गड्ड मड्ड चल रयो है । दो तीन साल तो यों बीतेंगे कि बस फुर्र…..

Mukesh Kumar : कार्पोरेट और अमीरों के लिए अच्छे दिन का बजट- सुपर बजट सुपर रिच के लिए। 10 में से 10 नंबर। कार्पोरेट को तमाम तरह की रियायतें। कार्पोरेट टैक्स में फिर से कमी। 10 में से 10 नंबर। इंडस्ट्री को तरह-तरह की राहते, रियायतें और नियामतें। 10 में से 9 नंबर। अपर मिडिल क्लास को भी कुछ हल्के-फुल्के तोहफे। 10 में से 5 नंबर। कृषि क्षेत्र के लिए कुछ नहीं। आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए कुछ नहीं। 10 में से 3 नंबर। बजट के साथ आए अच्छे दिन… पेट्रोल और डीज़ल दोनों की क़ीमतें एक झटके में लगभग तीन रुपए बीस पैसे बढ़ा दी गई है। फरवरी महीने में ही ये दूसरी बढोतरी है। ध्यान रहे अभी भी यूपीए सरकार के ज़माने के मुक़ाबले अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल की क़ीमतें आधे से भी कम हैं, तब ये आलम है। ये भी मत भूलिएगा कि दो दिन पहले रेलमंत्री ने मालभाड़े में दस फ़ीसदी की बढोतरी की थी। स्वागत कीजिए अच्छे दिनों में बढ़ती महँगाई के तोहफे का।

Punj Prakash : कला, कलाकार और संस्कृति विरोधी है यह बजट… यह बात केवल इसलिए नहीं कही जा रही है कि इस बजट में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के बजट में 44% और साहित्य अकादमी के बजट में 54% की कटौती की गई है बल्कि यह बात इसलिए कह रहा हूँ कि“अच्छे दिन” का वादा करके सत्ता में आई वर्तमान सरकार ने कला और संस्कृति को बढ़ावा देनेवाली बजट में क्रूरता पूर्ण कटौती करते हुए 59.33 करोड़ से घटाकर 3.20 करोड़ कर दिया है । मैं इस बात से भी भली-भांति परिचित हूँ कि कला और संस्कृति के नाम पर दिए जा रहे आर्थिक सहयोगों में घनघोर अराजकता है । यह अराजकता कलाकारों के नैतिक पतन की निशानी तो है लेकिन इससे ज़्यादा सरकारी महकमे की नाकामी भी है । जिसका उपाय उस अराजकता को ज़िम्मेदारी पुर्वक खत्म करके भी किया जा सकता था । समाज या सरकार का कोई अंग यदि बीमार हो जाता है तो उसका इलाज किया जाना चाहिए न कि उसकी निर्मम हत्या । इतिहास गवाह है कि बिना किसी आश्रय (जनता, सरकार व कारपोरेट आदि) के कला और कलाकार ज़्यादा समय तक ज़िंदा नहीं रह सकते । जो सरकार कला और संस्कृति के प्रति इतना निर्मम हो वह समाज के प्रति संवेदनशील होगी, इस बात पर मुझे संदेह है । सनद रहे, इस विषय पर कला संस्थानों और कलाकारों की यह शर्मनाक चुप्पी एक दिन कला और कलाकार दोनों के पतन का कारण बनेगीं । याद रखिए वो यह सब सोच समझकर, एक मुहीम के तहत कर रहें हैं, मासूमियत और अनजाने में नहीं।

Vikram Singh Chauhan : मैं सबसे ज्यादा लाचार, हताश और निराश इन दिनों मोदीभक्तों को देखता हूँ। ये चुपचाप कहीं दुबक गए है और कइयों ने अपनी आईडी डिलीट कर दिया है। ये साल भर पहले अपने नाम के आगे -पीछे नमो लिखते थे और हम लोगों को धमकाते थे। आज उनकी खुद की भी पहचान नहीं है। मोदी भी इन्हें व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते सो अडानी की तरह इनको कोई लाभ मिलने से रहा। मैं इन लोगों से लंबे समय तक लड़ा। कई लोग मुझे खुलेआम मारने की धमकी देते थे ,कुछ जाननेवाले लोग तो मोदी आलोचना से ऐसे गुस्से में थे मुझे ट्रैन से फेंक देंगे तक बोलते थे। नाईट में ऑफलाइन होने के बाद ये लोग कमेंट में माँ -बहन की गाली लिख देते थे। कभी -कभी रात 3 -4 बजे उठ मैं इस कमेंट को डिलीट करता था। पर मैं अपने रास्ते पर अडिग रहा और सच लिखता रहा। आख़िरकार आज इनको मोदी की असलियत पता चला। है तो ये लोग भी हमारी तरह आम इंसान। लेकिन विचारधारा दूसरा और ज़हरीला। आज ये लोग हमसे नज़र नहीं मिला पाते। चुपचाप अब मुझे फॉलो कर रहे है और सभी पोस्ट को लाइक। पर कुछ कह नहीं पा रहे है। मैं आज भी इन्हें माफ़ करने को तैयार हूँ।

Dayanand Pandey : जनता के अच्छे दिन तो नहीं ही आए, न आने के आसार हैं पर हां, नरेंद्र मोदी की बदनसीबी के दिन शुरू हो गए हैं। और तय मानिए मंहगाई जो ऐसे ही अबाध रूप से बढ़ती रही तो मनमोहन सिंह से भी ज्यादा दुर्गति नरेंद्र मोदी की होगी! होनी ही है! यह सर्विस टैक्स, यह टोल टैक्स, वैट आदि का नाम बदल कर सरकार को डाका टैक्स या जबराना टैक्स रख देना चाहिए!
   
Sandeep Verma : बजट में जूते इसलिए सस्ते किये गए है कि वित्त मंत्री चाहते है कि हर वोटर जरनैल सिंह बन सके. देश के हर गरीब -अमीर पर सर्विस टैक्स का डेढ़ प्रतिशत अधिक कर देने का भार सिर्फ इसलिए बढ़ाया गया है ताकि मोदी जी की सरकार कारपोरेट को टैक्स में पांच प्रतिशत की छूट दे सकें. वैसे मोदी जी की सरकार ने थोड़ी बेईमानी भी की है. डेढ़ प्रतिशत की इस बढ़ोत्तरी से वे कारपोरेट का पूरा ही कर माफ़ कर सकते थे. मगर उन्होंने नहीं किया. इसलिए मोदी की सरकार को पूरी तरह कारपोरेट के हाथों में खेलने वाला नहीं कहा जा सकता है.

Daya Sagar : रेल बजट के बाद आज आम बजट भी आ गया। अनुकूल जलवायु, अनुकूल अंतरराष्ट्रीय बाजार, मजबूत जनादेश से आए राजनीतिक स्‍थायित्व के बावजूद इतनी निराशा। तेजस्वी प्रधानमंत्री के भाषणों की चमक इस बजट में कहीं नहीं दिख रही। कारपोरेट जगत खुशी के पटाखे फोड़ रहा है। यकीन मानिए गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अच्छे दिन अभी बहुत दूर हैं।

Cartoonist Irfan : देश के सबसे खास दिन जब आम आदमी का अगले साल का जीना कैसा होगा, तय होता है. उस समय इस बार बार के बजट पर गंभीर चर्चा चल रही थी सभी न्यूज़ चैनलों पर. कि एंकर ने सभी विशेषज्ञों को रोक दिया कि बेर्किंग न्यूज़ आ रही है ‘भारत ने अभी-अभी शानदार जीत दर्ज की है यूएई पर. और सारा कार्यक्रम क्रिकर्ट पर शुरू हो गया। यह हर न्यूज़ चैनल का हाल था। जब देश इतनी गंभीर चर्चा हो रही हो तब क्या नीचे फलेश देकर ही इस ‘विशाल’ जीत का जश्न नहीं मनाया जा सकता थ. और वैसे भी रोज़ आप खेल पर अलग से कार्यक्रम करते ही हैं. क्या समझें कि देश के लिए दो वक्त की रोटी से बड़ा क्रिकेट है?

Suraj Sahu : लो जी सर्विस टैक्स 12.50% से बढ़ाकर 14%हुआ ।। लो जी आ गए अच्छे दिन ।। अब खाओ खाना होटल में । वाह आम बजट में आम आदमी को टैक्स में कोई छूट नही और कॉर्पोरेट कंपनियों को टैक्स में छूट… अबकी बार कॉर्पोरेट कंपनियों की सरकार

फेसबुक से.


आगे की कथा यहां पढ़ें…

बीजेपी के चंदे का काला धंधा देखिए… ऐसे में मोदी जी क्यों नहीं पूंजीपतियों के हित में काम करेंगे….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सच सामने आया : किरण बेदी नहीं, सुरजीत कौर आजाद भारत की पहली महिला आईपीएस अफसर

Sanjaya Kumar Singh : शीशे के घरों से चुनाव लड़ना… भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर पार्टी की ओर से दिल्ली की मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनना किरण बेदी के लिए काफी महंगा पड़ा। चुनाव अभी हुए नहीं है फिर भी उनके जीवन की दो प्रमुख कमाई इस चुनाव में खर्च हो गई। पहली कमाई थी इंदिरा गांधी की कार टो करने का श्रेय जो पिछले दिनों बुरी तरह खर्च हो गई। उनकी दूसरी कमाई थी – देश की पहली महिला आईपीएस होने का श्रेय। और अब यह कमाई भी खर्च होती दिखाई दे रही है।

एक पुराने अखबार के कतरन की यह तस्वीर बताती है कि देश की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर पंजाब कैडर की सुरजीत कौर (1956) थीं जिनका 1957 में एक कार दुर्घटना में निधन हो गया था। जबकि हम लोग अभी तक किरण बेदी को ही देश की पहली महिला आईपीएस अफसर जानते-मानते रहे हैं। सुरजीत कौर के आईपीएस के लिए चुने जाने के बाद जल्दी ही निधन हो जाने और इसके करीब 16 साल बाद 1972 में किरण बेदी के आईपीएस बनने पर हो सकता है उस समय किरण बेदी को पहली महिला आईपीएस अधिकारी कहा और मान लिया गया होगा। और उनकी यही छवि बनी रही। अब अगर यह खुलासा हो रहा है तो इसका श्रेय सूचना और संचार क्रांति के साथ भारतीय चुनावों को भी देना पड़ेगा। अभी तक तो यही कहा जाता था कि शीशे के घरों में रहने वालों को दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए। पर बुलेट प्रूफ शीशे के जमाने में इसमें संशोधन की आवश्यकता लग रही है। शीशे के घरों से चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।

किरण बेदी वाकई पहली महिला आईपीएस नहीं है वाले सच को छुपाए रखने के लिए कितने लोगों को दोषी माना जाए। जैसा कि नरेन्द्र मोदी ने कहा है कांग्रेस ने 67 साल कुछ नहीं किया – पर यह एक काम तो किया कि उनके (उनकी पार्टी) के लिए किरण बेदी तैयार करने में योगदान किया। खबर के मुताबिक दिल्ली में जाने-माने वेद मारवाह सुरजीत कौर के बैचमेट हैं, उन्होंने भी यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की तो क्या वेद मारवाह को इस काम में कांग्रेस पार्टी का सहयोगी माना जाए। इंदिरा गांधी की कार टो करने के जिस मामले से वे स्टार बनीं उस मामले में भी कांग्रेस ने सार्वजनिक तौर पर कुछ कहा हो ऐसा सुनने में नहीं आया। उसकी इस चुप्पी को क्या माना जाए।

यूपीएससी, जो लोगों के समान्य ज्ञान की परीक्षा लेकर आईएएस-आईपीएस चुनता बनाता है, इतने वर्षों तक इस जानकारी को छिपाए रहा या एक गलत सूचना को सही करने की जरूरत नहीं समझी। क्या उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। इतना जबरदस्त सहयोग मिलने के बाद भी किरण बेदी की पसंद कांग्रेस पार्टी नहीं रही। पहले तो अन्ना आंदोलन में भाग लेकर वे कांग्रेस सरकार का विरोध करती हैं और फिर प्रमुख विरोधी दल भाजपा में शामिल हो जाती हैं। कांग्रेस का विरोध तो आम आदमी पार्टी भी कर रही थी पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चुना। क्या इसलिए कि उन्हें लगता है कि उनके जैसे लोगों की शरणस्थली भाजपा है। बहुत सारे सवाल हैं और मीडिया की भूमिका भी। पर उसकी चर्चा फिजूल है। कटघरे में सिर्फ किरण बेदी नहीं – देश की राजनीति, राजनीतिक पार्टियां, समाज और संस्थाएं और कुछ दूसरे प्रमुख नागरिक भी हैं। सिर्फ किरण बेदी को दोषी मानना मुझे ठीक नहीं लग रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

इन्हें भी पढ़ें…

किरन बेदी का झूठ बोलना सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा, भाजपा को तगड़ा झटका

xxx

लाला लाजपत राय को भाजपाई पटका पहनाने के मामले में कोर्ट ने किरण बेदी के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा

xxx

दिल्ली चुनाव : भाजपा लगातार गल्तियां कर रही, ‘आप’ को 37 से 42 सीट मिलने के आसार

xxx

दिल्ली विस चुनाव में न्यूज चैनल खुल्लमखुल्ला ‘आप’ और ‘भाजपा’ के बीच बंट गए हैं

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पाठकों से खुलेआम चीटिंग : सीबीएसई का नाम लेकर एक निजी इंस्टीट्यूट की वेबसाइट को प्रमोट कर रहा है दैनिक जागरण

आदरणीय यशवंत जी, एक ओर दैनिक जागरण खुद को देश का नंबर एक अखबार होने का दावा करता है दूसरी ओर जागरण के संपादक व कार्यकारी अधिकारी समाचार पत्र को उतनी गंभीरता से नही लेते। इसकी बानगी 20 जनवरी 2015 के जागरण के बागपत संस्करण में देखने को मिली। हालाकि दी गई खबर मेरठ के एक पत्रकार ने लिखी है तो जाहिर है कि खबर मेरठ यूनिट के अन्य संस्करणों में भी गई होगी।

20 जनवरी के जागरण के बागपत संस्करण में पेज नंबर 6 पर प्रकाशित समाचार जिसका शीर्षक ‘सीबीएसई बनी है हर परीक्षार्थी की गाइड’ में बताया गया है कि सीबीएसई ने छात्रों की सुविधा के लिए एक वेबसाइट बनाई है (www.mycbseguide.com) जहां कक्षा 3 से 12 तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। यह पत्रकार अमित तिवारी की बाईलाइन खबर है। मुझे हैरानी तब हुई जब पता चला कि जिस वेबसाइट का समाचार में जिक्र किया जा रहा है उसका सीबीएसई से कोई संबंध नही। वेबसाइट पर दिया गया पता दिल्ली के द्वारका के सेक्टर आठ का है। जोकि एलपिस टैक्नोलॉजी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही है।

सवाल यह है कि क्या जागरण जैसे प्रसिद्ध बैनर अपने पाठकों को बिना पड़ताल किए ऐसे भ्रामक समाचार मुहैया कराता है। यह वास्तव में जागरण परिवार के लिए सोचनीय प्रश्न है।

भड़ास को भेजे गए एक पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

कुमार विश्वास के खिलाफ झूठ का ज़हर उगलते अमर उजाला के पत्रकार!

Dr Kumar Vishwas Passport Issue Wrongly reported by Amar Ujala

पत्रकारिता की गिरती साख के कई भागीदार हैं। लेकिन इस पेशे से जुड़े कई ऐसे लोग हैं, जो पत्रकारिता की अर्थी को कन्धा देने के लिए बहुत जल्दी में नज़र आते हैं। पिछले दिनों ‘अमर उजाला’ ने खबर छापी, कि कवि और आप नेता डा कुमार विश्वास का पासपोर्ट किसी विवाद के कारण गाज़ियाबाद स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय द्वारा जमा करवा लिया गया है। अगले ही दिन पासपोर्ट अधिकारी श्री यादव के हवाले से निर्देश आया, कि पूरा मामला साफ़ है। इसलिए पासपोर्ट वापस निर्गत कर दिया जाएगा। दिनांक 14 नवम्बर को डा कुमार विश्वास को पासपोर्ट निर्गत कर दिया गया।

इस पूरी प्रक्रिया की पाँच हज़ार रूपए की फीस होती है, जिसका भुगतान विश्वास द्वारा किया गया। इस खबर को दो प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों ने छापा।  दैनिक जागरण ने यथास्थिति बताई, और पूरे मामले की अक्षरशः सही जानकारी दी। वहीँ अमर उजाला ने इसी खबर को ऐसे प्रस्तुत किया है, जैसे विश्वास बहुत बड़े अपराधी साबित हुए हों और अदालत से उन्हें कोई सज़ा दे दी गई हो। आश्चर्य है, कि कैसे कोई पत्रकार व्यावसायिकता का इस तरह से मज़ाक उड़ा सकता है।

15 Nov Jagran Link…​

http://epaper.jagran.com/epaperimages/15112014/delhi/14gag-pg23-0.pdf

15 Nov Amar Ujala Link…

http://www.delhincr.amarujala.com/feature/ghaziabad-news-ncr/aap-leader-kumar-vishwas-get-penalty-hindi-news-jn/

जब इसके तह में जाने की कोशिश की गई, तो पता चला कि अमर उजाला के दो स्थानीय पत्रकार संजय शिसोदिया और सौरभ पिछले लम्बे समय से विश्वास के खिलाफ बिना ठोस आधार के रिपोर्टिंग करने के आदी हैं। विश्वास जिस कॉलेज (एल आर कॉलेज, साहिबाबाद) में पढ़ाते थे, वहाँ के कार्यवाहक प्राचार्य संजय दत्त कौशिक के खिलाफ कुमार शुरू से ही खुल कर बोलते थे। कॉलेज में चर्चा है, कि वहां कई वर्ष पूर्व ही प्राचार्य की बहाली हो चुकी है, लेकिन दत्त अब भी प्राचार्य का पद हथियाए हुए है। इसके अलावा संजय दत्त कौशिक के शैक्षणिक दस्तावेज़ भी फ़र्ज़ी होने की बात सामने आई है। इसके मुताल्लिक़ दस्तावेज भी कॉलेज के कई कर्मचारियों के पास हैं। विरोध करने की वजह से कार्यवाहक प्राचार्य ने समय समय पर विश्वास को विभागीय जाँच इत्यादि में फंसाया है। लेकिन हर जाँच के बाद उच्च जाँच समितियों ने संजय दत्त कौशिक को ही षड़यंत्र का दोषी माना, जिसके कागज़ात भी हैं। चूँकि कॉलेज एक बड़े कोंग्रेसी नेता का है, और संजय दत्त कौशिक उनके चहेते हैं, इन सारे षड्यंत्रों के बावजूद कौशिक पर चेतावनी के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच कौशिक ने स्थानीय पत्रकारों को अपने पक्ष में करने के गुर सीख लिए, और मनमाफ़िक खबरें छपवाने लगे।

जब विश्वास के पासपोर्ट की बात आई, तो NOC के बहाने संजय दत्त कौशिक ने फिर से विश्वास को फँसाने की कोशिश की। पासपोर्ट के लिए NOC जारी कर, बाद में स्वयं ही पासपोर्ट अधिकारी को सूचना दे दी, कि मैंने NOC नहीं दिया है। इसकी जाँच के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने विश्वास से पासपोर्ट जमा करने को कहा, जो उन्होंने अविलम्ब जमा करवा दिया। इस खबर को अमर उजाला ने ‘बड़ा खुलासा’, ‘फर्जीवाड़ा’ इत्यादि शब्दों से सजा कर ऐसे परोसा जैसे विश्वास अपराधी हों।

9 Nov Amar Ujala…

http://m.amarujala.com/delhincr/feature/ghaziabad-news-ncr/aap-leader-kumar-vishwas-charged-on-fraud-case-hindi-news-bm/?page=0

इस बीच दिनांक 1 सितम्बर से विश्वास का अपने पद से त्यागपत्र कॉलेज प्रबंधन द्वारा स्वीकृत हो गया था। अतः NOC की उपयोगिता को शून्य मानते हुए 14 Nov को विश्वास का पासपोर्ट निर्गत कर दिया और जाँच प्रक्रिया के लिए देय पाँच हज़ार रूपए उनसे लिए गए। इस खबर को अमर उजाला के इन क्रांतिवीर पत्रकारों ने झूठे तथ्यों का जामा पहना कर ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने की कोशिश की। थोड़ा और गहरे जाने पर पता चला कि पूर्व में भी इन पत्रकारों ने संजय दत्त कौशिक के कहने पर विश्वास के खिलाफ खबरें छापी थीं। एक बार तो यह लिख दिया,कि विश्वास कॉलेज में क्लास नहीं पढ़ा रहे, जबकि वो उस समय दो वर्ष के अवैतनिक अवकाश पर थे। ये तो भगवान ही जाने कि कौशिक से उन पत्रकारों को क्या मिलता है, लेकिन अंत में पत्रकारिता को बदनामी ही मिलती है।

भड़ास को मिले एक पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आज तक के स्ट्रिंगर शरद के खिलाफ डकैती का मुकदमा झूठा निकला

यशवंत भाई आदाब,  अभी कुछ समय पहले ‘भड़ास 4 मीडिया’ पर एक समाचार प्रकाशित हुआ था जिसका शीषर्क था- ‘आज तक के स्ट्रिंगर के खिलाफ डकैती का  मुकदमा दर्ज’.  ये खबर मुरादाबाद से आज तक के जिला संवादाता शरद गौतम के लिये उनके चाहने वालों ने भड़ास पर पोस्ट कराई थी और उनकी मंशा ये रही होगी कि इस खबर से आजतक समूह  शरद गौतम को बाहर का रास्ता दिखा देगा लेकिन हुआ इसका उलट. 14  oct 2014 को ये  मुकदमा संभल जनपद के चंदोसी कोतवाली में दर्ज हुआ और 18 OCT 2014 को जाँच अधिकारी ने मुकदमा झूठा पाया और एक्सपंज कर दिया.

जानकारी के मुताबिक़ संभल जनपद के कुछ प्रिंट के लोग जो फर्जी नामों से न्यूज़ चैनल के लिए भी काम करते हैं, शरद गौतम से खुन्नस रखते हैं. वो ये चाहते हैं कि शरद गौतम संभल जनपद की खबरें न कवर करें ताकि वो अपने हिसाब से खबरों को मैनज कर सकें और कुछ कमाई कर सकें. लेकिन ऐसे दलाल टाइप पत्रकार विफल हो गए हैं. मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि ऐसे टुच्चे पत्रकार मेरी पोस्ट पड़कर फर्जी नाम से टिप्पणी करेंगे वो इसलिये कि वो उनकी आदत में शामिल है. ऐसे घटिया लोगों ने मुरादाबाद में न जाने कितने पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा कर थूक कर चाटा है. और, अब ये ही काम जनपद संभल और मुरादाबाद के कुछ चुटिया टाइप पत्रकारों ने अंजाम दिया है.  शरद गौतम के खिलाफ दर्ज मुक़दमे में एक्सपंज रिपोर्ट की छायप्रति भी पोस्ट कर रहा हूं जिसको जहां जरूररत हो इस्तेमाल कर सकता है.

अब्दुल वाजिद

मुरादाबाद

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: