रोहन जगदाले हाजिर हों…

जिया नामक चैनल और मैग्जीन लांच करने वाले रोहन जगदाले लापता हैं. तभी तो वो मीडियाकर्मियों के बकाये को लेकर लेबर आफिस में चल रही लड़ाई में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं. मीडियाकर्मियों ने उदारता दिखाते हुए उन्हें खुद मेल और पत्र के जरिए सूचित किया है कि वे अगली तारीख पर नोएडा लेबर …

एसएन विनोद के कारण मीडियाकर्मी लड़ने को बाध्य हुए और जीते

एक छोटी लड़ाई तो हम जीत गए। ठीक एक माह पहले जब जिया इंडिया के कर्मियों ने तीन महीने का बकाया वेतन मांगा तो देश के महान अवसरवादी संपादक एसएन विनोद ने कहा था- ‘मैं एक पैसा नहीं दूंगा, तुम लोग कोर्ट में जाओ।’ उनका ये अति प्रेरक वाक्य सुन कर हम कोर्ट में चले गए. तब विनोद जी ने कुछ कर्मियों को फोन कर के ये कहा कि – ‘कई लोग क्लेम वापस ले रहे हैं, तुम भी ले लो तो कल ही तुम्हारा पेमेन्ट कर दिया जायेगा।’

‘जिया इंडिया’ का अंग्रेजी संस्करण जल्द

प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में भी ‘जिया न्यूज’ ने दस्तक दी है। पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अभिनव पल उस समय सामने आया जब केन्द्रीय परिवहन एवं जहाज रानी मंत्री नितिन गडकरी ने ‘जिया इंडिया’ पाक्षिक पत्रिका का दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन सभागार में विमोचन किया गया। इस अवसर पर पत्रकारिता, साहित्य, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों की तमाम बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। नेहरू सभागार में मौजूद विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों के बीच कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मीडिया को राजनीति के अतिरिक्त दूसरे विषयों पर भी अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया का पूरा फोकस राजनीति पर है जबकि सोशल और दूसरे सेक्टरों पर ध्यान देने की बेहद ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि राजनीति को सिर्फ 5 फीसदी ही पत्रकारिता में जगह मिलनी चाहिए और समय या स्थान के अभाव में  जो दूसरे जरूरी विषय जो छूट जाते हैं उन्हें प्रमुखता से शामिल करना चाहिए।

नहीं पहुंचे प्रमुख अतिथि, ‘जिया इंडिया’ मैग्जीन की लांचिंग फ्लॉप

रोहन जगदाले को अब समझ में आ रहा होगा कि मीडिया का क्षेत्र बाकी धंधों-बिजनेसों से अलग है और जो इसे धूर्तता, चालाकी, कपट, क्रूरता के साथ चलाना चाहता है उसे अंततः निराशा हाथ लगती है और करोड़ों गंवाकर हाथ जलाकर एक न एक दिन इस मीडिया क्षेत्र से बाहर निकलने को मजबूर हो जाना पड़ता है. यकीन न हो तो पर्ल ग्रुप के न्यूज चैनलों और मैग्जीनों का हाल देख लीजिए. पी7न्यूज, बिंदिया, मनी मंत्रा.. सबके सब इतिहास का हिस्सा बन गए. खरबों रुपये गंवाकर इसके मालिक को मीडिया से कुछ नहीं मिला. इसलिए क्योंकि मीडिया हाउस के शीर्ष पदों पर गलत लोगों को बिठाया गया और मीडिया हाउस खोलने का मकसद मूल कंपनी के छल-कपट को छिपाना-दबाना घोषित किया गया.

प्रबंधन के साथ मिलकर बुढ़ापा काटने की तैयारी में हैं स्वघोषित ईमानदार सम्पादक!

Mayank Saxena : साल 2008 की बात है, मीडिया में काम करने वालों और नए आने वालों के बीच एक नाम की बहुत चर्चा थी…नाम था Voice of India…यह एक नया आने वाला चैनल था, जो एक साथ कई सारे चैनल और एक मीडिया इंस्टीट्यूट ले कर आ रहा था। भोकाल ऐसा था कि बड़े-बड़े अखबारों में इश्तिहार छप रहे थे और कोई मित्तल बंधु थे, जो इसके कर्ता धर्ता थे। मीडिया पढ़ा कर इंस्टेंट पत्रकार बनाने वाले संस्थान के साथ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनल लांच होने थे और लोगो में शेर बना था। संस्थान के साथ मीडिया के तमाम नए पुराने बड़े चेहरे पहले ही जुड़ चुके थे, जिनमें आज तक के पूर्व कर्ता-धर्ताओं में से एक राम कृपाल सिंह (नवभारत टाइम्स वाले) के अलावा मुकेश कुमार, किशोर मालवीय, सुमैरा, अतुल अग्रवाल जैसे तमाम नाम शामिल थे। ज़ाहिर है कि इस चैनल से न केवल बड़े-बड़े संस्थान भी संशय में आ गए थे बल्कि मीडिया समुदाय के लिए ये एक अनोखी सी चीज़ थी।

कुलदीप नैयर, रामबहादुर राय, राहुल देव, एनके सिंह, पुण्य प्रसून किसके साथ खड़े हैं? हड़ताली मीडियाकर्मियों के संग या भ्रष्ट जिया प्रबंधन के साथ?

‘जिया न्यूज’ नामक चैनल में कार्यरत मीडियाकर्मी हड़ताल पर हैं. प्रबंधन एक झटके में इन्हें बेरोजगार करने का फरमान सुना गया है. पैसा न होने का हवाला दे रहा है. समुचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है. पर दूसरी तरफ जिया न्यूज के सीईओ और ‘जिया इंडिया’ नामक मैग्जीन लांच करने में जुटे इसके प्रधान संपादक एसएन विनोद न सिर्फ प्रबंधन के साथ खड़े हैं बल्कि लाखों रुपये फूंक कर जिया इंडिया मैग्जीन की लांचिंग का समारोह कराने की तैयारियों में सक्रिय हैं. इस समारोह का जो कार्ड बंटवाया गया है उससे पता चलता है कि मैग्जीन को लांच नितिन गडकरी करेंगे, जिनका करीबी होने का दावा एसएन विनोद करते रहते हैं.

‘जिया न्यूज’ चैनल में हड़ताल, एसएन विनोद बता रहे मालिक को महान

जिया न्यूज़ में पिछले काफी समय से बड़े संपादकों और मालिक के चाटुकारों ने इस चैनल से जमकर मलाई खाई… और निकल लिये… पर जब चैनल के नोएडा आफिस बंद कर कर्मचारियों की सेटलमेंट की बात आई तो उंट के मुंह में जीरा आया….. ये चैनल न्यूज चैनल कम, मज़ाक ज्यादा था… हर बार आए नए अधिकारियों ने इसे जमकर लूटा और बेचारे कर्मचारी हाथ मलते रह गये…. पहले जाय सेबस्टियन फिर एसएन विनोद फिर जेपी दीवान फिर एसएन विनोद और आखिर में चैनल का बंटाधार… बस यही कहानी है इस चैनल की….

”मैंने एसएन विनोद की गलत नीतियों से नाराज होकर ‘जिया इंडिया’ से खुद इस्तीफा दिया”

‘जिया न्यूज’ नामक न्यूज चैनल के बंटाधार होने के बाद अब ‘जिया इंडिया’ नामक मैग्जीन की बारी है. लांच होने से पहले ही यह मैग्जीन विवादों में आ गई है. मैग्जीन के संपादक पद से इस्तीफा देने वाले कृपाशंकर ने भड़ास4मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें मैग्जीन से हटाए जाने की जो बात सोशल मीडिया पर कही जा रही है, वह गलत है. कृपाशंकर के मुताबिक उन्होंने मैग्जीन के प्रधान संपादक एसएन विनोद की गलत नीतियों के विरोध में खुद इस्तीफा दिया और बाकायदा नोटिस पीरियड पूरा किया.

”जिया इंडिया” नाम की पत्रिका लांच होने से पहले ही संपादक कृपाशंकर को हटा दिया गया!

Abhishek Srivastava :  कल नोएडा के श्रमायुक्‍त के पास मैं काफी देर बैठा था। एक से एक कहानियां सुना रहे थे मीडिया संस्‍थानों में शोषण की। अधिकतर से तो हम परिचित ही थे। वे बोले कि टीवी पत्रकारों की हालत तो लेबर से भी खराब है क्‍योंकि वे वर्किंग जर्नलिस्‍ट ऐक्‍ट के दायरे में नहीं आते, लेकिन अपनी सच्‍चाई स्‍वीकारने के बजाय कुछ पत्रकार जो मालिकों को चूना लगाने में लगे रहते हैं, वे इंडस्‍ट्री को और बरबाद कर रहे हैं। जो नए श्रम सुधार आ रहे हैं, उसके बाद स्थिति भयावह होने वाली है। कई दुकानें बंद होने वाली हैं। उनसे बात कर के एक चीज़ यह समझ में आई कि समाचार-दुकानों को बंद करवाने में जितना मालिक का हाथ होता है, उससे कहीं ज्‍यादा मालिक की जेब पर गिद्ध निगाह गड़ाये संपादकों की करतूत काम करती है।