वरिष्ठ पत्रकार अजय सेतिया बोले- प्रधानमंत्री मोदी ने ब्यूरोक्रेसी को बेलगाम कर दिया है

Ajay Setia : मैं इसे पत्रकारिता पर हमला मानता हूं। यूआइडीएआई ने जिस तरह आधार कार्ड का डाटा बेचे जाना का भंडा फोड़ करने वाली ट्रिब्यून की रिपोर्टर रचना खेरा पर केस दर्ज किया है, यह लोकतंत्र के चौथे खंभे को नोचने वाली घटना है। ब्यूरोक्रेसी ने नरेंद्र मोदी को यह बता रखा था कि यह डाटा एक दम सुरक्षित है, उसी भरोसे मोदी सरकार सुप्रीमकोर्ट में सुरक्षा की गारंटी दे रही थी। सुप्रीमकोर्ट के फैसले से ठीक पहले ट्रिब्यून की रिपोर्टर ने आधार कार्ड के गोरख धंधे की पोल खोल कर रख दी , तो अफसरों के रंग में भंग पड़ गया। वे तिलमिला उठे है और उन्होंने रिपोर्टर पर ही एफआईआर दर्ज करवा दी है। ऐसा नहीं है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे पर हमले के लिए सिर्फ अधिकारी जिम्मेदार हैं । जिम्मेदार वे सब भी हैं, जिन्होंने ब्यूरोक्रेसी को बेलगाम बना दिया है।

नोटबंदी, कैसलेश जैसी तमाम नादानियों के बाद भी नरेंद्र मोदी लोगों के दुलारे क्यों बने हुए हैं?

जिस दौर में राजनीति और राजनेताओं के प्रति अनास्था अपने चरम पर हो, उसमें नरेंद्र मोदी का उदय हमें आश्वस्त करता है। नोटबंदी, कैसलेश जैसी तमाम नादानियों के बाद भी नरेंद्र मोदी लोगों के दुलारे बने हुए हैं, तो यह मामला गंभीर हो जाता है। आखिर वे क्या कारण हैं जिसके चलते नरेंद्र मोदी अपनी सत्ता के तीन साल पूरे करने के बाद भी लोकप्रियता के चरम पर हैं। उनका जादू चुनाव दर चुनाव जारी है और वे हैं कि देश-विदेश को मथे जा रहे हैं। इस मंथन से कितना विष और कितना अमृत निकलेगा यह तो वक्त बताएगा, पर यह कहने में संकोच नहीं करना चाहिए वे उम्मीदों को जगाने वाले नेता साबित हुए हैं।

सच ये है कि मोदी अब एक ब्रैंड में बदल गए हैं : राणा यशवंत

उत्तर प्रदेश से जो जनादेश है उसका चाहे जितना पोस्टमार्टम कर लें, खुद बीजेपी के लिये भी ये समझ पाना मुश्किल है कि ऐसा हुआ कैसे! लेकिन सुनामी आई और इसने कई जकड़बंदियों, राजनीतिक रिवाजों, फरेब के हवाईकिलों और बेहूदगियों-बदज़ुबानियों को ध्वस्त कर दिया. सामाजिक न्याय के नाम पर जातियों को अपनी जागीर बनानेवाले नेताओं के लिये ये जनादेश एक सबक है. कानून-व्यवस्था और सड़क-बिजली जैसी बुनियादी जरुरतों की जगह एक्सप्रेस-वे और स्मार्ट फोन देने की राजनीति के लिये ये जनादेश एक सबक है.

अमेरिका से काटजू ने मोदी को लिखा पत्र- ‘न विकास हुआ, न अच्छे दिन आए’

To

The Hon’ble Shri Narendra Modi

Prime Minister of India

Dear Modiji,

I would have liked to personally deliver this letter to you, but unfortunately ( or fortunately ) I am presently in America, and likely to be here for some time. So I am posting it on fb, with the hope that someone will forward it to you.

पीएम मोदी के घर पर एसपीजी की महिलाएं रात में ड्यूटी क्यों नहीं करना चाहतीं?

Sanjaya Kumar Singh : प्रधानमंत्री के घर और निजता से संबंधित ये कैसी खबर? इस बार के “शुक्रवार” (24 फरवरी – 02 मार्च 2017) मैग्जीन में एक गंभीर खबर है। पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर का शीर्षक है, “फिर विवादों में घिरी एसपीजी” लेकिन यह प्रधानमंत्री निवास से संबंधित विवाद खड़ा कर रही है। खबर के मुताबिक एसपीजी की महिला सुरक्षा कर्मियों ने अपने आला अफसरों से गुहार लगाई है कि उन्हें रात की ड्यूटी पर न रखा जाए।