मीडिया ने मेरे खिलाफ खूब खबरें छापी पर मैंने इसे अपनी सहज आलोचना माना : मुलायम सिंह यादव

लखनऊ : बदलते दौर में सोशल मीडिया की प्रासंगिकता बढ़ रही है। आज के दौर में इसे नजरअंदाज कर न तो राजनीति संभव है और न ही सरकार चलाना। पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने यह विचार इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) की ओर से ‘सोशल मीडिया-वरदान या अभिशाप’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में व्यक्त किए। राजनीति के शुरुआती दिनों को याद करते हुए श्री यादव ने कहा कि कई बार कहा कि मीडिया ने उनके खिलाफ खबरें छापी पर उन्होंने इसे अपनी सहज आलोचना के रूप में ही लिया।

उन्होंने कहा कि आज लोगों तक समाचारों की पहुंच आसान हुयी है। कुछ ही पलों में राजधानी में हो रही घटना से गांवों के लोग वाकिफ हो जाते हैं। पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि अखबारों के संपादकीय निष्पक्ष होते हैं और वो हर रोज इसे जरूर पढ़ते हैं। श्री यादव ने इस मौके पर आईएफडब्लूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष के विक्रम राव की वेबसाइट का विमोचन भी किया। वेबसाइट में श्री राव की 5 किताबें, 500 से अधिक लेख, परिचय और तस्वीरों का प्रस्तुतिकरण किया गया है।

परिसंवाद में बोलते हुए आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि मीडिया सरकारों को आईना दिखाने का काम करता है। उन्होंने कहा कि आज किसी भी सरकार के लिए मीडिया को नजरअंदाज करना आसान नहीं रह गया है। वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने सोशल मीडिया के बढ़ते हुए प्रभाव पर रोशनी डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया संचार का लगभग एक दशक पुराना माध्यम है. उन्होंने कहा की इसका प्रचलन तब तेजी में आया जब 2008 में फेसबुक नाम की सोशल वेबसाइट अस्तित्व में आई। उन्होंने कहा कि आज सोशल साईट पर तीन तरह की जमात देखने को मिल रही है। पहली वो जिनका उद्देश्य साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना है। दूसरी जमात उनकी जो साम्प्रदायिकता की विरोध में खड़े हैं। तीसरी जमात उस दलित चिन्तक वर्ग की है जो सदियों से मीडिया के एक वर्ग के लिए उपेक्षित रहा है। सोशल मीडिया ने ऐसे उपेक्षित वर्ग को एक प्लेटफार्म दिया जहाँ आकर वो अपनी बात रखते है. इसलिए सोशल मीडिया एक वरदान ही है।

इंडियन फेडरेषन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट के अध्यक्ष के. विक्रम राव ने अपनी 40 वर्ष के पत्रकारीय जीवन के अनुभव करते हुए कहा कि हमारे समय में सूचनाओं का संवहन बड़ा मुश्किल था. सोशल मीडिया जैसा कोई भी माध्यम मौजूद नहीं था. आज सूचनाओं का संवहन सुगम है. ख़बरें तेजी से इधर से उधर भेजी जा सकती हैं और ये इसलिए संभव है क्योंकि सोशल मीडिया पर आम आदमी की पहुंच है. उन्होंने कहा कि हालाँकि अभी सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की आवश्यकता है क्योकि जहाँ एक तरफ सकरात्मक उपयोग है वही इसका नकरात्मक उपयोग किया जा रहा है. श्रोताओं में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल थे. गोष्ठी में प्रमुख रूप से अधिवक्ता पदम कीर्ति, हिन्द मजदूर सभा के सचिव उमाशंकर मिश्र, यूनियन के पदाधिकारी हसीब सिद्धीकी, श्याम बाबू, विनीता रानी, उत्कर्ष सिन्हा ने सहभागिता करी एवं मंच का संचालन योगेश मिश्र ने किया।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *