एम्स में पत्रकार ने सुसाइड नहीं किया, उसका मर्डर हुआ!

मौत से पहले पत्रकार ने जताई थी हत्या की आशंका. वाट्सऐप ग्रुप की चैटिंग में सामने आई बात. वरिष्ठों से मांगी थी मदद.

पत्रकार तरुण सिसोदिया कोरोना पॉजिटिव आने के चलते एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती थे. वे कोरोना संक्रमित से उबर रहे थे. स्वस्थ हो रहे थे. एक दिन पूर्व व्हाट्सएप ग्रुप में उन्होंने अपनी मर्डर की आशंका जताई थी. उन्होंने लिखा था- कुछ गड़बड़ लग रहा है….मर्डर हो सकता है.. Whatapp chat showing he feared his life!

तरुण ने अपनी जान ख़तरे में होने की आशंका पत्रकारों के एक Whatsapp ग्रुप में व्यक्त की थी. इसे समय रहते गम्भीरता से नहीं लिया गया. इसका भयावह परिणाम देखने को मिला. अगर यह आत्महत्या नहीं है तो फिर इस घटना के पीछे के कारण की पूरी जाँच अत्यंत ज़रूरी है.

पता चला है कि दैनिक भास्कर के रिपोर्टर तरुण सिसोदिया के इलाज में कोताही बरती जा रही थी.. उसने आवाज उठाई… मामला स्वास्थ्य मंत्रालय पहुचा… और फिर वहां से ट्रॉमा सेंटर को रिपोर्ट गयी.. ट्रामा सेंटर प्रशासन ने उसके फ़ोन को जब्त करने के लिए सिंपल प्लान चॉकआउट किया और वह था तरुण को ICU में शिफ्ट कर देना ताकि उससे उसका फोन अलग किया जा सके और वह आगे कोई कम्प्लेन न करे… अंदर की अव्यस्था की कहानी बाहर न जा सके…

वह अपने परिजनों मसलन पैरंट्स और बीवी से बातचीत की गुहार लगाता रहा लेकिन उसे बात नहीं करने दिया गया… और इसके ठीक बाद यह घटना सामने आती है..

दैनिक भास्कर के युवा साथी तरुण सिसोदिया के एम्स की चौथी मंजिल से कूद कर कथित आत्महत्या करने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं-

1- 5 दिन से उसे ऑक्सीजन की ज़रूरत नहीं थी. बिना ऑक्सीजन का वह आराम से था. फिर भी उसे ICU में क्यों रखा गया?

2- जब ICU में भर्ती थे तो चौथे फ्लोर पर कैसे पहुँचा और कैसे शीशा तोड़ कर कूदा?

3- ICU में 5 दिन से बच्चों और परजिनों से बातचीत करना चाह रहा पर बात नहीं कराई. क्यों? मोबाइल छीनकर कर रख लिया गया था.

4- इलाज को लेकर कई बार फोन करके शिकायत भी कर चुका था।

ये बहुत गंभीर मामला है। किसी के भी साथ ऐसा होना अमानवीय है। हमें आवाज उठानी चाहिए। जाँच की मांग करनी चाहिए। तरुण अपने पीछे पत्नी के इलावा दो नन्ही परी छोड़ गए हैं. एक ढाई साल की और एक दो माह की मासूम. इस समय तरुण की माँ अस्पताल में है और पूरा परिवार क्वारेंटाइन है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन जी को चाहिए कि पूरे मामले की मेजिस्ट्रेट जाँच करायें.
2 महीने पहले ही पिता बनने की खुशी सभी से साझा की थी. दुखों का जो पहाड़ तरुण के परिवार पर टूटा है, ईश्वर ही संभाल सकता है.

पत्रकार शिशिर सोनी व कुछ अन्य मीडियाकर्मियों की एफबी पोस्ट पर आधारित.

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अगर उसे आत्महत्या करना होता तो बार बार जान बचाने की गुहार क्यों लगाता?

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