उत्तर प्रदेश में जंगलराज का आलम ये है कि अब खुद नेताजी यानि मुलायम सिंह यादव एक आईपीएस अफसर को धमका रहे हैं. अखिलेश यादव भले मुख्यमंत्री हों उत्तर प्रदेश के लेकिन असली राजा तो मुलायम सिंह यादव ही हैं. उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार, अनाचार और जंगल राज का जो आलम है, उसमें प्रदेश की जनता पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के खिलाफ हो गई है. बजाय जनता के बीच छवि ठीक करने और कानून व्यवस्था सुधारने के, समाजवादी पार्टी के नेता उन एक्टिविस्ट अफसरों को धमका रहे हैं जो शासन की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने में लगे हैं.
इसी क्रम में आज आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के पास मुलायम सिंह यादव का फोन आया और पिटने-मारने जैसी बातों का उल्लेख करते हुए सुधर जाने की धमकी दे डाली. अमिताभ ठाकुर को मुलायम सिंह यादव ने क्या क्या कहा, इस टेप में है, क्लिक करक सुनिए…
अगर आप टेप सुन नहीं पा रहे हों तो इस लिंक पर क्लिक करके टेप सुनें या डाउनलोड कर लें: Mulayam Singh threatens IPS audio tape download
आप इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करके भी मुलायम-अमिताभ बातचीत सुन सकते हैं: https://www.youtube.com/watch?v=qks3tJxKNsI
इन्हें भी पढ़ें:
मुलायम सिंह यादव ने फोन कर आईपीएस अमिताभ ठाकुर को धमकाया!
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मुलायम सिंह ने आईपीएस को कहा- सुधर जाओ, नहीं तो….!
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Anupam
July 11, 2015 at 6:44 am
This is a routine chit chat. Nothing sensational. IPS is like yes sir, yes sir
@यायावर
July 11, 2015 at 11:27 am
😮 ?
sunil kumar
July 14, 2015 at 4:32 am
खाकी वर्दी के नीचे खाकी नेकर पहने है अमिताभ ठाकुर :
————————————————————–
जिस कथित धमकी पे सपा प्रमुख नेता जी को आरोपी मानकर मीडिया और सो कॉल्ड बुद्धिजीवी चिल पों ( हाय तौबा) मचाये हुए है उस धमकी की ऑडियो क्लिप अर्थात रिकॉर्डिंग आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की बेगम साहिबा नूतन ठाकुर द्वारा जारी की गयी है! सबको इस बात से आपत्ति है कि एक मुख्यमंत्री का काम मुख्यमंत्री का पिता कैसे कर सकता है? सबको इस सवाल का उत्तर चाहिए कि हिदायत और आदेश देने या सुधर जाओ जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री के पिता कैसे कर सकते है लेकिन इस बात का उत्तर किसी के पास नहीं है कि आखिर एक आईपीएस अफसर के सरकारी मोबाइल की रिकॉर्डिंग नूतन ठाकुर पे कैसे पहुंची ? और किस अधिकार से उन्होंने उस ऑडियो को शोशल मीडिया पे शेयर कर दिया? अमर सिंह टेप मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने ये व्यवस्था दी थी कि किसी भी व्यक्ति की निजी बातचीत की ऑडियो या वीडियो आप बिना न्यायलय की मर्ज़ी के सार्वजनिक नहीं कर सकते..न्यूज़ चेनल्स को भी माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने हिदायत दी थी कि किसी भी ऑडियो या वीडियो को बजाने या दिखाने के लिए याचिका दायर करके अदालती अनुमति की ज़रूरत लाजमी है अन्यथा ये अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा! नूतन ठाकुर एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी होने के साथ साथ आर टी आई एक्टिविस्ट भी है उनको इस बात का ख्याल होना चाहिए था कि किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियो की निजी ऑडियो या वीडियो को जारी करने का अधिकार उन न्यूज़ चेनल्स के पास भी नहीं है जो प्रसारण के लिए अधिकृत है फिर नूतन ठाकुर ने कैसे नेता जी और अमिताभ ठाकुर की रिकॉर्डिंग को जारी कर दिया? “सईंया भये कोतवाल अब डर काहे का ” की तर्ज़ पे नूतन ठाकुर को इतना भी याद नहीं रहा कि इस प्रकार वीडियो या ऑडियो सार्वजनिक करना माननीय सर्वोच्च न्यायलय का घोर अपमान है तथा कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट की श्रेणी में आता है! नूतन ठाकुर क्या खुद को माननीय सर्वोच्च न्यायलय की खाला जान समझ बैठी है या फिर 100 क़त्ल माफ़ होने का भरम पाल लिया गया है मन में? लोगो को परहेज है कि मुख्यमंत्री तो धमकी हिदायत दे सकते है नेता जी को अधिकार किसने दिया? लोग बताएँगे कि आईपीएस अधिकारी के सीयुजी नंबर से रिकॉर्डिंग निकालने का अधिकार नूतन ठाकुर को किसने दिया? पत्नी होने का मतलब ये तो नहीं कि एक आईपीएस की फ़ाइल या नंबर की सारी गोपनीयता ऑफिस से निकल के औरत के किचेन में समा जाए और कोई जुबान तक न खोले! पहली बात तो इस तरह से किसी रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेशो की धज्जियाँ उड़ाकर आप ऐसा कर भी बैठे तो आपको ये जवाब देना होगा कि आपने ये रिकॉर्डिंग हासिल कहाँ से की? यदि ये आपने अपने पति के मोबाईल से बिना उनकी अनुमति के निकाली है तो बेगम साहिबा ये चोरी की श्रेणी में आता है और यदि ये रिकॉर्डिंग खुद आपको आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने दी है तो फिर गोपनीयता भंग करने के अपराधी अमिताभ ठाकुर भी है! एक सिपाही को भी भर्ती करते समय सरकार पद की गरिमा नियमावली और गोपनीयता का पालन करने की शपथ दिलाती है आईपीएस अफसर होने के नाते अमिताभ ठाकुर जी को इस बात का बेतहर ज्ञान होगा कि आप अपने विभाग की या सी यू जी नंबर की किसी भी कॉल की गोपनीयता किसी भी सूरत में किसी से साझा नहीं कर सकते ! भले ही फिर वह आपकी औलाद या पत्नी ही क्यों न हो! यदि आईजी जैसे महत्वपूर्ण पद पे आसीन आईपीएस अफसर के मोबाइल की जानकारी उसकी पत्नी पे जा सकती है तो फिर सरकारी दस्तावेज , चार्जशीट, केसडायरी या मालखाने में बंद साक्ष्य भी नूतन ठाकुर तक जा सकते है..पत्नी से फ्रेंडली होने का मतलब ये तो कतई नहीं हो सकता कि आप उसको विभाग या सरकार के कॉल्स सुनाओ या मेल पढ़ाओ ! यदि आईपीएस के मोबाइल की रिकॉर्डिंग नूतन ठाकुर ले सकती है तो उनके लिए उस आईपीएस के अंडर में चल रहे किसी भी गोपनीय मामले को या फ़ाइल को हासिल करना पल भर का काम है और यदि ऐसा है तो फिर उनको आरटी आई का नाटक करने की कोई ज़रूरत ही क्या है? सैंया आईजी है तो पूरा जॉन ही अपना हुआ ! अब बात करते है कॉल रिकॉर्ड करने की..टेपिंग की! किसी भी सांसद, विधायक या मंत्री का कॉल टेप या रिकॉर्ड करना गैरकानूनी है और कानून के बड़े पद पर बैठे आईपीएस अमिताभ तो मालूम होना चाहिए कि कोई सर्विलांस टीम को भी.. टीम तो छोडो सरकार को भी किसी मंत्री संसद विधायक का कॉल टेप करने या रिकॉर्डिंग करने के लिए माननीय उच्च न्यायलय या सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति की ज़रूरत होती है ! अमिताभ ठाकुर जवाब देंगे इस बात का कि बिना किसी अदालती या सरकारी अनुमति के उन्होंने कैसे उस व्यक्ति की आवाज टेप करने का दुस्साहस किया जो जेड सेक्यूरिटी प्रोटेक्टिड है, तथा रक्षा मंत
Jai Hind
July 15, 2015 at 7:42 am
Han sahi kah rhe hain Sunil Kumar ji aap…..jab tak Amitabh Thakur ki Dead body nhi mile tak chupchap bethna chahiye unki wife ko…….Gopniyata Gopniayata chilla rhe ho aap…..Gopniya tarike se aapko utha lia jaye and dhamki di jaye to apko isko gopniya hi rakhna padega…..hai na……. Bus karo yar Neta ji ki Gulami….. Neta ji na ho gye….UP ke Baap Ho gye…..!!
Riyansh
July 15, 2015 at 9:01 am
[quote name=”sunil kumar”]खाकी वर्दी के नीचे खाकी नेकर पहने है अमिताभ ठाकुर :
————————————————————–
जिस कथित धमकी पे सपा प्रमुख नेता जी को आरोपी मानकर मीडिया और सो कॉल्ड बुद्धिजीवी चिल पों ( हाय तौबा) मचाये हुए है उस धमकी की ऑडियो क्लिप अर्थात रिकॉर्डिंग आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की बेगम साहिबा नूतन ठाकुर द्वारा जारी की गयी है! सबको इस बात से आपत्ति है कि एक मुख्यमंत्री का काम मुख्यमंत्री का पिता कैसे कर सकता है? सबको इस सवाल का उत्तर चाहिए कि हिदायत और आदेश देने या सुधर जाओ जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री के पिता कैसे कर सकते है लेकिन इस बात का उत्तर किसी के पास नहीं है कि आखिर एक आईपीएस अफसर के सरकारी मोबाइल की रिकॉर्डिंग नूतन ठाकुर पे कैसे पहुंची ? और किस अधिकार से उन्होंने उस ऑडियो को शोशल मीडिया पे शेयर कर दिया? अमर सिंह टेप मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने ये व्यवस्था दी थी कि किसी भी व्यक्ति की निजी बातचीत की ऑडियो या वीडियो आप बिना न्यायलय की मर्ज़ी के सार्वजनिक नहीं कर सकते..न्यूज़ चेनल्स को भी माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने हिदायत दी थी कि किसी भी ऑडियो या वीडियो को बजाने या दिखाने के लिए याचिका दायर करके अदालती अनुमति की ज़रूरत लाजमी है अन्यथा ये अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा! नूतन ठाकुर एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी होने के साथ साथ आर टी आई एक्टिविस्ट भी है उनको इस बात का ख्याल होना चाहिए था कि किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियो की निजी ऑडियो या वीडियो को जारी करने का अधिकार उन न्यूज़ चेनल्स के पास भी नहीं है जो प्रसारण के लिए अधिकृत है फिर नूतन ठाकुर ने कैसे नेता जी और अमिताभ ठाकुर की रिकॉर्डिंग को जारी कर दिया? “सईंया भये कोतवाल अब डर काहे का ” की तर्ज़ पे नूतन ठाकुर को इतना भी याद नहीं रहा कि इस प्रकार वीडियो या ऑडियो सार्वजनिक करना माननीय सर्वोच्च न्यायलय का घोर अपमान है तथा कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट की श्रेणी में आता है! नूतन ठाकुर क्या खुद को माननीय सर्वोच्च न्यायलय की खाला जान समझ बैठी है या फिर 100 क़त्ल माफ़ होने का भरम पाल लिया गया है मन में? लोगो को परहेज है कि मुख्यमंत्री तो धमकी हिदायत दे सकते है नेता जी को अधिकार किसने दिया? लोग बताएँगे कि आईपीएस अधिकारी के सीयुजी नंबर से रिकॉर्डिंग निकालने का अधिकार नूतन ठाकुर को किसने दिया? पत्नी होने का मतलब ये तो नहीं कि एक आईपीएस की फ़ाइल या नंबर की सारी गोपनीयता ऑफिस से निकल के औरत के किचेन में समा जाए और कोई जुबान तक न खोले! पहली बात तो इस तरह से किसी रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेशो की धज्जियाँ उड़ाकर आप ऐसा कर भी बैठे तो आपको ये जवाब देना होगा कि आपने ये रिकॉर्डिंग हासिल कहाँ से की? यदि ये आपने अपने पति के मोबाईल से बिना उनकी अनुमति के निकाली है तो बेगम साहिबा ये चोरी की श्रेणी में आता है और यदि ये रिकॉर्डिंग खुद आपको आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने दी है तो फिर गोपनीयता भंग करने के अपराधी अमिताभ ठाकुर भी है! एक सिपाही को भी भर्ती करते समय सरकार पद की गरिमा नियमावली और गोपनीयता का पालन करने की शपथ दिलाती है आईपीएस अफसर होने के नाते अमिताभ ठाकुर जी को इस बात का बेतहर ज्ञान होगा कि आप अपने विभाग की या सी यू जी नंबर की किसी भी कॉल की गोपनीयता किसी भी सूरत में किसी से साझा नहीं कर सकते ! भले ही फिर वह आपकी औलाद या पत्नी ही क्यों न हो! यदि आईजी जैसे महत्वपूर्ण पद पे आसीन आईपीएस अफसर के मोबाइल की जानकारी उसकी पत्नी पे जा सकती है तो फिर सरकारी दस्तावेज , चार्जशीट, केसडायरी या मालखाने में बंद साक्ष्य भी नूतन ठाकुर तक जा सकते है..पत्नी से फ्रेंडली होने का मतलब ये तो कतई नहीं हो सकता कि आप उसको विभाग या सरकार के कॉल्स सुनाओ या मेल पढ़ाओ ! यदि आईपीएस के मोबाइल की रिकॉर्डिंग नूतन ठाकुर ले सकती है तो उनके लिए उस आईपीएस के अंडर में चल रहे किसी भी गोपनीय मामले को या फ़ाइल को हासिल करना पल भर का काम है और यदि ऐसा है तो फिर उनको आरटी आई का नाटक करने की कोई ज़रूरत ही क्या है? सैंया आईजी है तो पूरा जॉन ही अपना हुआ ! अब बात करते है कॉल रिकॉर्ड करने की..टेपिंग की! किसी भी सांसद, विधायक या मंत्री का कॉल टेप या रिकॉर्ड करना गैरकानूनी है और कानून के बड़े पद पर बैठे आईपीएस अमिताभ तो मालूम होना चाहिए कि कोई सर्विलांस टीम को भी.. टीम तो छोडो सरकार को भी किसी मंत्री संसद विधायक का कॉल टेप करने या रिकॉर्डिंग करने के लिए माननीय उच्च न्यायलय या सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति की ज़रूरत होती है ! अमिताभ ठाकुर जवाब देंगे इस बात का कि बिना किसी अदालती या सरकारी अनुमति के उन्होंने कैसे उस व्यक्ति की आवाज टेप करने का दुस्साहस किया जो जेड सेक्यूरिटी प्रोटेक्टिड है, तथा रक्षा मंत[/quote]
[quote name=”sunil kumar”]खाकी वर्दी के नीचे खाकी नेकर पहने है अमिताभ ठाकुर :
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जिस कथित धमकी पे सपा प्रमुख नेता जी को आरोपी मानकर मीडिया और सो कॉल्ड बुद्धिजीवी चिल पों ( हाय तौबा) मचाये हुए है उस धमकी की ऑडियो क्लिप अर्थात रिकॉर्डिंग आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की बेगम साहिबा नूतन ठाकुर द्वारा जारी की गयी है! सबको इस बात से आपत्ति है कि एक मुख्यमंत्री का काम मुख्यमंत्री का पिता कैसे कर सकता है? सबको इस सवाल का उत्तर चाहिए कि हिदायत और आदेश देने या सुधर जाओ जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री के पिता कैसे कर सकते है लेकिन इस बात का उत्तर किसी के पास नहीं है कि आखिर एक आईपीएस अफसर के सरकारी मोबाइल की रिकॉर्डिंग नूतन ठाकुर पे कैसे पहुंची ? और किस अधिकार से उन्होंने उस ऑडियो को शोशल मीडिया पे शेयर कर दिया? अमर सिंह टेप मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने ये व्यवस्था दी थी कि किसी भी व्यक्ति की निजी बातचीत की ऑडियो या वीडियो आप बिना न्यायलय की मर्ज़ी के सार्वजनिक नहीं कर सकते..न्यूज़ चेनल्स को भी माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने हिदायत दी थी कि किसी भी ऑडियो या वीडियो को बजाने या दिखाने के लिए याचिका दायर करके अदालती अनुमति की ज़रूरत लाजमी है अन्यथा ये अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा! नूतन ठाकुर एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी होने के साथ साथ आर टी आई एक्टिविस्ट भी है उनको इस बात का ख्याल होना चाहिए था कि किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियो की निजी ऑडियो या वीडियो को जारी करने का अधिकार उन न्यूज़ चेनल्स के पास भी नहीं है जो प्रसारण के लिए अधिकृत है फिर नूतन ठाकुर ने कैसे नेता जी और अमिताभ ठाकुर की रिकॉर्डिंग को जारी कर दिया? “सईंया भये कोतवाल अब डर काहे का ” की तर्ज़ पे नूतन ठाकुर को इतना भी याद नहीं रहा कि इस प्रकार वीडियो या ऑडियो सार्वजनिक करना माननीय सर्वोच्च न्यायलय का घोर अपमान है तथा कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट की श्रेणी में आता है! नूतन ठाकुर क्या खुद को माननीय सर्वोच्च न्यायलय की खाला जान समझ बैठी है या फिर 100 क़त्ल माफ़ होने का भरम पाल लिया गया है मन में? लोगो को परहेज है कि मुख्यमंत्री तो धमकी हिदायत दे सकते है नेता जी को अधिकार किसने दिया? लोग बताएँगे कि आईपीएस अधिकारी के सीयुजी नंबर से रिकॉर्डिंग निकालने का अधिकार नूतन ठाकुर को किसने दिया? पत्नी होने का मतलब ये तो नहीं कि एक आईपीएस की फ़ाइल या नंबर की सारी गोपनीयता ऑफिस से निकल के औरत के किचेन में समा जाए और कोई जुबान तक न खोले! पहली बात तो इस तरह से किसी रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेशो की धज्जियाँ उड़ाकर आप ऐसा कर भी बैठे तो आपको ये जवाब देना होगा कि आपने ये रिकॉर्डिंग हासिल कहाँ से की? यदि ये आपने अपने पति के मोबाईल से बिना उनकी अनुमति के निकाली है तो बेगम साहिबा ये चोरी की श्रेणी में आता है और यदि ये रिकॉर्डिंग खुद आपको आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने दी है तो फिर गोपनीयता भंग करने के अपराधी अमिताभ ठाकुर भी है! एक सिपाही को भी भर्ती करते समय सरकार पद की गरिमा नियमावली और गोपनीयता का पालन करने की शपथ दिलाती है आईपीएस अफसर होने के नाते अमिताभ ठाकुर जी को इस बात का बेतहर ज्ञान होगा कि आप अपने विभाग की या सी यू जी नंबर की किसी भी कॉल की गोपनीयता किसी भी सूरत में किसी से साझा नहीं कर सकते ! भले ही फिर वह आपकी औलाद या पत्नी ही क्यों न हो! यदि आईजी जैसे महत्वपूर्ण पद पे आसीन आईपीएस अफसर के मोबाइल की जानकारी उसकी पत्नी पे जा सकती है तो फिर सरकारी दस्तावेज , चार्जशीट, केसडायरी या मालखाने में बंद साक्ष्य भी नूतन ठाकुर तक जा सकते है..पत्नी से फ्रेंडली होने का मतलब ये तो कतई नहीं हो सकता कि आप उसको विभाग या सरकार के कॉल्स सुनाओ या मेल पढ़ाओ ! यदि आईपीएस के मोबाइल की रिकॉर्डिंग नूतन ठाकुर ले सकती है तो उनके लिए उस आईपीएस के अंडर में चल रहे किसी भी गोपनीय मामले को या फ़ाइल को हासिल करना पल भर का काम है और यदि ऐसा है तो फिर उनको आरटी आई का नाटक करने की कोई ज़रूरत ही क्या है? सैंया आईजी है तो पूरा जॉन ही अपना हुआ ! अब बात करते है कॉल रिकॉर्ड करने की..टेपिंग की! किसी भी सांसद, विधायक या मंत्री का कॉल टेप या रिकॉर्ड करना गैरकानूनी है और कानून के बड़े पद पर बैठे आईपीएस अमिताभ तो मालूम होना चाहिए कि कोई सर्विलांस टीम को भी.. टीम तो छोडो सरकार को भी किसी मंत्री संसद विधायक का कॉल टेप करने या रिकॉर्डिंग करने के लिए माननीय उच्च न्यायलय या सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति की ज़रूरत होती है ! अमिताभ ठाकुर जवाब देंगे इस बात का कि बिना किसी अदालती या सरकारी अनुमति के उन्होंने कैसे उस व्यक्ति की आवाज टेप करने का दुस्साहस किया जो जेड सेक्यूरिटी प्रोटेक्टिड है, तथा रक्षा मंत[/quote]
सुनील तुम एक मूर्खों के स्वर्ग में रह रहे हो। तुम जैसे लोग ही उत्तर प्रदेश में इस ‘गुंडा राज’ के मुख्य कारण हैं। तुम आजकल उत्तर प्रदेश के हर कोने, और हर चौराहे पर, बदहाल कानून-व्यवस्था का नंगा नाच देख सकते हो. यह मामला भी उसी गुंडागर्दी का एक जीता जागता सबूत है, जिसे मिटने की नाकाम कोशिश, तुम सब नालायक मिलके कर रहे हो.
अखिलेश जिस भद्दे और बचकाने अंदाज़ में बेशर्मी से, प्रदेश की कानून और व्यवस्था के गंभीर मुद्दों पर प्रति प्रतिक्रिया देता है, वो साफ़ दिखता है की इसको देश, समाज और नागरिकों की कोई परवाह नहीं है. इसकी ओछी हरकतें देख कर, किसी भी शरीफ आदमी का खून खौल जाता है.
यह बेवकूफ मुखयमंत्री की जिम्मेदारी नहीं संभल सकता, ये मुलायम, आजम खान और अन्य गुंडा पात्रों के हाथों की कठपुतली है, जो सिर्फ अपने दोनों बाप (मुलायम और आज़म) के तलवे चाट सकता है. सुनील यार कुछ तो शर्म करो यार, ऑंखें खोलो और इसका इनकी नीच हरकतों को छुपाने के बजाय, सच को उजागर करो. यक़ीन मानो सुनील, अगर ऐसे ही चलता रहा, तो ये लुच्चे एक दिन तुम्हारी माँ बहन को भी नहीं छोड़ेंगे एक दिन.
NAVEEN KUMAR
September 30, 2015 at 11:36 pm
We can see said cases in every day but we silent……..why………. we should take some action against corruption which is increase day by day……and we should a best leader in U.P like
आईपीएस अमिताभ ठाकुर……… Jai Hind……..