जो बलात्कारी हैं उनको वामपंथ के नाम पर अबाध रक्षण और प्रतिरक्षण कब तक देंगे/देंगी कॉमरेड?

Swami Vyalok : बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से पाए…. वामपंथ के पाठ्यक्रम में है महिला-विरोध और प्रतारणा…. डिस्क्लेमरः मेरी 36 पार की अवस्था और इस महान आर्यावर्त की दशा ने मुझे अब आश्चर्य या दुख के परे कर दिया है, मैं मानता हूं कि इस देश में कुछ भी …मतलब, कुछ भी हो …

रोहित सरदाना और अंजना ओम कश्यप के इस ‘युद्ध’ से आपने कुछ सोचा-सीखा?

Dilip Khan : आजतक न्यूज़रूम का एक वीडियो देख रहा था। रोहित सरदाना और अंजना ओम कश्यप आपस में पद्मावती को लेकर भिड़े हुए थे। एक पक्ष, एक प्रतिपक्ष। दोनों एक-दूसरे को चित्त करने के अंदाज़ में मोहल्ले के गमछाधारी गैंग की तरह लड़ रहे थे। फिर याद आया कि टाइम्स ग्रुप ने एक नया चैनल शुरू किया है- मिरर नाऊ। आप एक ही मुद्दे पर टाइम्स नाऊ को देखिए और मिरर नाऊ को, तो काउंटर नैरेटिव बनता नज़र आएगा। मतलब एक खित्ते के लोग जो एक चैनल के कंटेंट से उखड़े हुए हैं, उन्हें उसी समूह का दूसरा चैनल हाजमोला की गोली खिलाकर पचाने में जुटा है।

राजस्थान पत्रिका और राजस्थान सरकार में कई साल से ठनी है, पढ़ें गुलाब कोठारी को जोरदार संपादकीय

Dilip Khan : राजस्थान पत्रिका और राजस्थान सरकार के बीच बीते कई साल से ठनी हुई है। पहले सबकुछ ठीक चल रहा था, फिर किसी बात से चिढ़कर सरकार ने विज्ञापन देना बंद कर दिया। गुलाब कोठारी ने उस वक़्त भी तीखा संपादकीय लिखा था। फिर सरकारी अनुदान से चल रहे गोशालों में दर्जनों गायों के मरने वाली ख़बर ने सरकार को और परेशान कर दिया। राजस्थान पत्रिका ने इस पर कई दिनों तक सीरीज चला दी।

पंकज सिंह मामले में चुप्पी साधे रहने वाली भाजपा जय शाह मामले में पहले ही दिन मैदान में उतर आई!

Dilip Khan : तुम्हें याद हो कि न याद हो… 2014 में एक ख़बर ख़ूब उड़ी थी कि राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह घूस लेकर पुलिस पोस्टिंग करवाते हैं और लोकसभा का टिकट बेचते हैं. ख़बर जब चौतरफ़ा फैल गई तो फॉलोअप ख़बर आई कि राजनाथ सिंह की मौजूदगी में नरेन्द्र मोदी ने पंकज सिंह को फटकार लगाई। बदनामी इससे भी हुई। लोगों का शक और गहरा हुआ।

‘रिपब-लिक टीवी’ मानें भाजपा की गुंडा वाहिनी, शेहला रशीद ने कुछ गलत नहीं किया!

Samar Anarya : अगर आपको लगता है कि रिपब-लिक टीवी वाले को भगा के शेहला रशीद डोरा ने कुछ गलत कर दिया है तो आप निहायक बेवकूफ हैं! क्या है कि नैतिकता और सिद्धांत दोनों उन पर लागू होते हैं जो खुद भी उन्हें मानते हों! और अगर आपको लगता है कि रिपब-लिक पत्रकारिता की नैतिकता मानता है, एक खबरिया चैनल है तो यह आपकी कम बुद्धि की दिक्कत है- हमारी नहीं!

मोदी को पता है 57 लोग देश का 85 हज़ार करोड़ डकारे हैं लेकिन इन्हें पकड़ने की हिम्मत नहीं

Dilip Khan : रिजर्व बैंक ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 57 लोगों ने बैंकों के 85 हज़ार करोड़ रुपए दबा रखा है। सरकार को इन 57 लोगों की गर्दन मरोड़नी चाहिए। हल्ला भी कम मचता। 30-40 हज़ार करोड़ रुपए के लिए हल्ला मचा दिया। दो नोटों को ख़त्म करके देश भर में लोगों को परेशान कर दिया। ब्लैक मनी ज़ब्त कीजिए। लेकिन जो कदम आसान था पहले वो उठाइए। आप इकोनॉमी को दुरुस्त करने के लिए काम कर रहे हैं कि हल्ला मचाने के लिए?