गंगोत्री और केदारनाथ की यात्रा : एक संस्मरण

रासबिहारी पाण्डेय

बहुत दिनों से उत्तराखंड भ्रमण की इच्छा थी। वैसे तो उत्तराखंड को देवभूमि कहा गया है। यहाँ बहुतेरे तीर्थस्थल और ऐतिहासिक महत्त्व के दर्शनीय स्थल हैं लेकिन उन सबमें यमुनोत्री, गंगोत्री,  केदारनाथ और बदरीनाथ प्रमुख हैं। अक्सर ये यात्राएं लोग समूह में करते हैं, बसों से या छोटी गाड़ियाँ रिजर्व करके। ये बस और छोटी गाड़ियों वाले ड्राइवर यात्रियों को एक निश्चित समय देते हैं जिसके भीतर यात्रियों को लौटकर एक निश्चित स्थान पर आना होता है। मेरे एक मित्र ने बताया कि निश्चित समय होने की वजह से कभी कभी कई लोग बिना दर्शन लाभ लिए बीच रास्ते से ही लौटकर उक्त स्थान पर चले आते हैं ताकि अगली यात्रा के लिए प्रस्थान कर सकें।

केदारधाम के आस पास नरकंकाल का मिलना हरीश रावत के मुंह पर कालिख

बड़े दुःख और शर्म की बात है कि एक तरफ तो उत्तराखंड की मौजूदा सरकार और उसके मुखिया 2013 की केदार घाटी आपदा से बाखूबी निपटने के बड़े बड़े दावे करते नहीं अघाते वहीँ दूसरी तरफ तीन वर्ष पूर्व घटी सदी की सबसे भयानक त्रासदी के बाद राज्य सरकार और उसके भ्रष्ट बड़बोले अधिकारियों और नेताओं के अपनी पीठ ठोकने वाले तमाम दावों के बावजूद केदारनाथ के रास्तों में इस दर्दनाक हादसे में मौत को गले लगा चुके दुर्भाग्यजनक यात्रियों और क्षेत्रीय लोगों के करीब बासठ नरकंकाल मिले हैं जो सीधे सीधे उत्तराखंड के मौजूदा हुक्मरानों की झूट और काली करतूतों की पोल खोलता है.

तो क्या अब खबरिया चैनल तय करेंगे बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तारीख?

बृजेश सती / देहरादून
बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की हालांकि अभी कोई अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन देश के एक निजी चैनल ने बाकायदा दिन तय कर दिया है। विजयदशमी के दिन इस चैनल ने मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तारीख के एलान के साथ ही अगले साल मंदिर के कपाट खुलने का दिन भी घोषित कर दिया है। चैनल के इस कृत्य पर स्थानीय लोगों व तीर्थ पुरोहितों के साथ ही बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने भी नाराजगी जाहिर की है।

सृजन की विविधता ही हमारी ताकत है : केदारनाथ सिंह

नई दिल्ली : कमानी सभागार में आयोजित साहित्य अकादमी के छह दिवसीय साहित्य उत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह में प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि लेखक का प्रतिपक्ष लेखक नहीं, सत्ता होती है। सत्ता तो हर समय जनता और लेखक विरोधी होती है। प्रसिद्ध साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय साहित्य बीसवीं सदी के हैंगओवर से निकलकर नए रास्ते खोज रहा है। नए रास्ते का सूर्योदय पूर्वोत्तर से हो रहा है। सृजन की विविधता हमारी ताकत है।

दिल्ली में साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण समारोह को सम्बोधित करते प्रो.केदारनाथ सिंह