नवभारत अखबार के 47 कर्मचारियों ने लगा दिया मजीठिया वेज बोर्ड का क्लेम

महाराष्ट्र के प्रमुख हिंदी दैनिक नवभारत में माननीय सुप्रीमकोर्ट के 13 अक्टूबर यानि आज के आदेश का असर दिखने लगा है। यहां आज दिनांक 13 अक्टूबर को बांबे यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट संलग्न महाराष्ट्र मीडिया एंप्लाइज यूनियन से जुड़े नवभारत हिंदी दैनिक के 47 कर्मचारियों ने सामूहिक रुप से ठाणे लेबर कमिश्नर कार्यालय में मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाये का क्लेम फाइल किया।

इसी बीच खबर आयी कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि छह माह के अंदर श्रम विभाग और श्रम न्यायालय में मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित सभी मामलों का निपटारा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के ताजे आदेश की खबर और ठाणे लेबर कमिश्नर कार्यालय में क्लेम फाइल की खबर मिलते ही नवभारत कर्मियों ने खुशी का इजहार किया और वहीं प्रबंधन की सांस फूलने लगी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

मूल खबर…

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश- ‘मजीठिया वेज बोर्ड के सभी प्रकरण 6 महीने के भीतर निपटाएं’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अहम फैसला सुनाते हुए देश के सभी राज्यों के श्रम विभाग एवं श्रम अदालतों को निर्देश दिया कि वे अखबार कर्मचारियों के मजीठिया संबंधी बकाये सहित सभी मामलों को छह महीने के अंदर निपटाएं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति रंजन गोगोई एवं नवीन सिन्हा की पीठ ने ये निर्देश अभिषेक राजा बनाम संजय गुप्ता / दैनिक जागरण (केस नंबर 187/2017) मामले की सुनवाई करते हुए दिए।

गौरतलब है कि मजीठिया के अवमानना मामले में 19 जून 2017 के फैसले में इस बात का जिक्र नहीं था जिसे लेकर अभिषेक राजा ने सुप्रीम कोर्ट से इस पर स्पष्टीकरण की गुहार लगाई थी। हालांकि स्पष्टीकरण की याचिका जुलाई में ही दायर कर दी गई थी मगर इस पर फैसला आज आया जिससे मीडियाकर्मियों में एक बार फिर खुशी की लहर है।

आप सभी मीडियाकर्मियों से अपील है कि अपना बकाया हासिल करने के लिेए श्रम विभाग में क्लेम जरूर डालें अन्यथा आप इससे वंचित रह सकते हैं। अब अखबार मालिक किसी भी तरह से आनाकानी नहीं कर सकेंगे और मामले को लंबा नहीं खींच सकेंगे। अगर वे ऐसा करते हैं तो इस बार निश्चित रूप से विलफुल डिफेमेशन के दोषी करार दिए जाएंगे।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
संपर्क : 9322411335 , shashikantsingh2@gmail.com

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मजीठिया मामला : बीमार जागरणकर्मी के जम्मू तबादला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 13 अक्टूबर को सुनवाई

पंकज कुमार वर्सेज यूनियन आफ इंडिया रिट याचिका की सुनवाई जस्टिस रंजन गोगई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच करेगी… बिहार के गया जिले से जम्मू तबादला किये गए दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार के रिट याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर की टेनटेटिव तिथि निर्धारित की है. जस्टिस रंजन गोगई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच सुनवाई करेगी. बिहार के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नागेन्द्र राय सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता पंकज कुमार की ओर से अदालत में पक्ष रखेंगे.

क्या है मामला : पंकज कुमार दैनिक जागरण के गया कार्यालय में बतौर सब एडिटर कम रिपोर्टर के पद पर कार्यरत हैं. पिछले साल सितम्बर में पंकज कुमार को पेसमेकर लगाया गया. पूर्व में २००४ में भी पेसमेकर लगा था. पिछले साल अक्टूबर में एक अन्य आपरेशन हुआ. बीमारी व आर्थिक परेशानी से जूझ रहे पंकज ने मजीठिया वेज बोर्ड की मांग की. इसके बाद 21 दिन की वेतन कटौती मैनेजमेंट द्वारा कर दी गयी. मैनेजमेंट ने दबाव बनाने के लिए बीमार व अस्वस्थ पत्रकार पंकज को कार्यालय आकर बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने को बाध्य किया. पंकज कुमार लुंगी पहनकर असहनीय दर्द के बीच कार्यालय जाते रहे. उन्होंने अर्न लीव में 21 दिन की वेतन कटौती को एडजस्ट करने की गुहार लगाई लेकिन कंपनी ने कोई तवज्जो नहीं दिया. मजीठिया का भूत उतारने के लिए एक मार्च से पटना ट्रान्सफर का मौखिक आदेश दिया गया.

पंकज कुमार ने 25 मार्च को श्रम आयुक्त के यहाँ मजीठिया की मांग करते हुए आवेदन दिया. कंपनी ने बैकडेट में 20 मार्च की तिथि में जम्मू ट्रान्सफर कर दिया. एक मार्च को प्रेषित कंपनी का ट्रान्सफर आर्डर पंकज को तीन अप्रैल को मिला. कंपनी की तानाशाही के खिलाफ पंकज कुमार सुप्रीम कोर्ट की शरण में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे और दो याचिकाएं दाखिल की. 330/2017 रिट की सुनवाई 13 अक्टूबर को संभावित है.

इस बीच पंकज कुमार के ट्रान्सफर आर्डर के खिलाफ मगध प्रमंडल के सहायक उप श्रमआयुक्त विजय कुमार का 30 अगस्त का आदेश दैनिक जागरण के मुंह पर तमाचा है. उप श्रम आयुक्त विजय कुमार ने अपने आदेश में कहा है कि बीमार व अस्वस्थ पत्रकार पंकज कुमार को गया से जम्मू तबादला मजीठिया की मांग करने के कारण किया गया है. आदेश में साफ़ है कि प्रबंधन को ट्रान्सफर करने का अधिकार है. लेकिन अधिकार को कर्मचारी की जायज मांग मांगने के कारण उपयोग करना श्रम कानून के हित में नहीं है. उप श्रम आयुक्त विजय कुमार ने अपने आर्डर में साफ़ लिखा है कि पंकज कुमार का ट्रान्सफर आर्डर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है. साथ ही कंपनी के खिलाफ़ इस आरोप कि पुष्टि हो गयी कि पंकज कुमार को मजीठिया वेज की अनुसंशा का कोई लाभ देने का एक भी प्रमाण सुनवाई के दौरान देने में कंपनी सफल नहीं हो सकी.

पंकज ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में कंपनी को 32 लाख 90 हजार का डिमांड नोटिस अगस्त में भेजा. कंपनी की ओर से डिमांड नोटिस का कोई जबाव नहीं आया. इसके बाद पंकज ने श्रम सचिव से अनुरोध किया कि वे गया के कलेक्टर से दैनिक जागरण के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कराएं. पंकज कुमार की शिकायत पर जागरण कार्यालय पहुंचे जिला श्रम अधीक्षक जुबेर अहमद को मैनेजमेंट ने परिसर के अन्दर घुसने नहीं दिया. जागरण पर सर्विस बुक नहीं देने, ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा का लाभ न देने, गया यूनिट में मजीठिया वेज का अनुपालन न होने सहित कई आरोप हैं. बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा पिछले दो महीने से उप श्रम आयुक्त को आरोप की जाँच कर रिपोर्ट समर्पित करने को कह रहे हैं. लेकिन श्रम आयुक्त श्री मीणा के आर्डर का अनुपालन उप श्रम आयुक्त डॉ. अपर्णा के स्तर से अभी तक नहीं किया गया है.

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ अखबार ने अपने कर्मचारियों में मजीठिया वेज बोर्ड का का बकाया एरियर वितरित किया

देश के प्रमुख बिजनेस समाचार पत्र ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ से खबर आ रही है कि इस अखबार ने अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया लाखों रुपये का एरियर दे दिया है। कर्मचारियों को पांच से आठ लाख रुपये तक उनका बकाया एरियर देकर वेतन वृद्धि का भी काम प्रबंधन ने किया है। हालांकि ये लाखों रुपये का एरियर सिर्फ उन्हीं मीडिया कर्मियों को दिया गया है जिनका वेतन कम था।

जिनका वेतन ज्यादा था, उनको इसका लाभ नहीं मिला है। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए इस अखबार के 12 संस्करणों में कम वेतन पाने वाले मीडियाकर्मियों को पांच से आठ लाख रुपये का उनका बकाया दिया गया है। हालांकि मजीठिया के जानकार इस दिए गए एरियर को ऊंट के मुंह में जीरा बता रहे हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
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दूसरी बार भी मजीठिया सुनवाई में नहीं आया एचटी मैनेजमेंट

पटना : मजीठिया मामले में एक बार फिर हिन्दुस्तान टाइम्स मैनेजमेंट भाग खड़ा हुआ। कल 25 सितम्बर को श्रम विभाग के उप सचिव अमरेंद्र मिश्र के यहां सुनवाई आरंभ हुई। एचटी मैनेजमेंट की ओर से कोई नहीं आया। एक एडवोकेट आए मगर न तो उसके पास कंपनी की तरफ से दिया हुआ कोई वकालतनामा था और न ही कोई मांगी गई सूचना का कंपलायन्स। दूसरी बार लगातार प्रबंधन की अनुपस्थिति को उप सचिव अमरेंद्र मिश्र ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यहां कानून से बढ़कर कोई नहीं है।

राकेश गौतम खुद पहली बैठक में ही उप सचिव को सुनवाई के दौरान यह लिखित दिया है कि पटना संस्करण एक पृथक स्टेबलिशमेंट है और यह दिल्ली से अलग है। उनके इस दावे को कामगारों की ओर से अधिकृत नेता दिनेश सिंह ने चुनौती दी कि पटना जब दिल्ली से पृथक एक अलग स्टेबलिशमेंट है तो राकेश गौतम सुनवाई से बाहर निकलें। एडवोकेट भी इस मामले की आरोपी शोभना भरतिया की ओर से वकालतनामा लेकर आएं। यह पिछली बार हुआ था और पुनः दोबारा यही पूरा वाकया दुहराया गया।

उनके बयान ने मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने में हुए घपले का भी राज खुद खोल दिया। उनके खुलासे से यह स्पष्ट हुआ कि एचटी पटना जो अपने रेवेन्यू के चलते आरंभ से ही ग्रुप 1A में रहा है, उसे इस बार राकेश गौतम ने नम्बर तीन में रखा और वह भी महज गिने चुने लोग तक सीमित। कुल मिलाकर पटना में एचआर हेड कोर्ट से लेकर कार्यालय तक हंसी का पात्र बने हुए हैं।

पटना से दिनेश सिंह की रिपोर्ट.

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मजीठिया मामला : प्रभात खबर के खिलाफ मिथलेश कुमार के रिव्यू पिटीशन पर सुप्रीमकोर्ट में 5 को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर आ रही है। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार बनाम प्रभात खबर मामले में दायर रिव्यू पिटीशन पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। यह सुनवाई विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश नवीन सिन्हा द्वारा की जाएगी।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार का प्रबंधन ने तबादला कर दिया तो मिथिलेश कुमार ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपने एडवोकेट दिनेश तिवारी के जरिये गुहार लगा दी थी। इस मामले में मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और नागेश्वर राव की खंड पीठ ने मिथिलेश कुमार के पक्ष में कदम उठाते हुये उनके ट्रांसफर पर अंतरिम रोक लगा दिया था। मगर फिर भी प्रभात खबर प्रबंधन ने उन्हें ज्वाईन नहीं कराया।

इसके बाद यह मामला ३ मई २०१७ को मिथिलेश कुमार के अधिवक्ता दिनेश तिवारी ने सुप्रीमकोर्ट में न्यायाधीश रंजन गोगोई के सामने रखा था। 19 जून 2017 को जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड का जो निर्णय आया उस पर मिथलेश कुमार का कहना है कि मेरे मामले पर स्पष्ट पक्ष नहीं रखा गया। इसके बाद मिथलेश कुमार ने अपने एडवोकेट दिनेश तिवारी के जरिये सुप्रीमकोर्ट मे रिव्यू पिटीशन दायर किया। इस पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस सुनवाई पर देश भर के मीडियाकर्मियों की नजर होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
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महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने जारी किया मजीठिया मामले में प्रेस रिलीज

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय  द्वारा 19 जून 2017 को जारी आदेश को अनुपालन कराने के लिए महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त ने महाराष्ट्र के  सभी अखबारों को एक प्रेस रिलीज जारी किया है। इस प्रेस रिलीज की प्रति नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र की जनरल सेक्रेटरी शीतल करंनदेकर और नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट महाराष्ट्र के मजीठिया सेल समन्यवक शशिकांत सिंह को भी कामगार आयुक्त कार्यालय ने 22 सितंबर को उपलब्ध कराया। मराठी में लिखे इस प्रेस रिलीज का हिंदी अनुवाद इस तरह है…

महाराष्ट्र के सभी समाचारपत्र प्रतिष्ठानों के मालिक बंधुओं से आह्वान किया जा रहा है कि श्रमिक पत्रकार व पत्रकारेत्तर कर्मचारी (सेवा शर्त) की संकीर्ण तरदुति अधिनियम 1955 अंतर्गत मजीठिया वेतन आयोग को अमल में लाने बावत माननीय सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में दाखिल हुए अवमानना याचिका क्रमांक 411/2014 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 19 जून 2017 को आदेश जारी कर याचिका का निस्तारण किया है। इस आदेश की प्रति माननीय सर्वोच्च न्यायालय के www.sci.gov.in/supremecourt/2014/23540/23540 2014 judgement 19 -jun-2017.pdf  में उपलब्ध है। इस आदेश में मजीठिया वेतन आयोग को अमल में लाने में होने वाले मुद्दे जैसे कि क्लॉज 20 (जे), काँटेक्चुअल एम्प्लाइज, वेरीयेबल व संस्थान की आर्थिक परिस्थिति बावत स्पस्ट बताया गया है। उसी के अनुसार इस आयोग के प्रभाव को अमल में लाने बावत आदेश जारी किया गया है ।

कामगार आयुक्त कार्यालय मार्फत सभी समाचारपत्र प्रतिष्ठानों से विनती है और उनको सूचना दी जा रही है कि केंद्र सरकार द्वारा 11-11-2011 की अधिसूचना के द्वारा लागू किया गया वेतन आयोग की सिफारिशों  को अपने समाचारपत्र प्रतिष्ठानों के संबंधित कामगार /कर्मचारी के लिए इसे लागू कराएं। साथ ही मजीठिया वेतन आयोग की शिफारिश के अनुसार वेतन अदाकर पिछला अन्तर देखकर उसे अदा करने बावत कार्रवाई करें।जिससे माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन हो।

कामगार आयुक्त कार्यालय की तरफ से 14 सितंबर 2017 को महाराष्ट्र सरकार के माहिती एवं जनसंपर्क संचालनालय, मादाम कामा रोड, हुतात्मा राजगुरु चौक, मंत्रालय में भी ये प्रेस रिलीज भेजा गया है और निवेदन किया गया है कि इस प्रेस रिलीज को जो माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश से जुड़ा है, का प्रकाशन महाराष्ट्र के सभी समाचार के सभी संस्कारण में कराने बावत कार्रवाई करें।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
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मजीठिया मामला : प्रभात खबर प्रबंधन के झूठ की होगी जांच

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार बनाम प्रभात खबर मामले में सुनवाई के दौरान माननीय उप-श्रमायुक्त पटना के न्यायालय में प्रभात खबर प्रबंधन के प्रतिनिधि के रूप में शामिल महाप्रबंधक (फाइनेंस) कौशल कुमार अग्रवाल ने कहा कि प्रभात खबर द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतनमान सहित सारी सुविधाएं अपने शत प्रतिशत कर्मचारियों को दिया जा रहा है। अखबार प्रबंधन के इस तर्क का प्रभात खबर के आरा ब्यूरोचीफ मिथलेश कुमार ने कड़ा विरोध किया और कहा कि प्रबंधन झूठ बोल रहा है। इस अखबार के एक भी कर्मी को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ नहीं मिला है। इस पर उप-श्रमायुक्त वीरेंद्र कुमार ने कहा कि कर्मचारियों के पेमेंट से संबंधित बैंक स्टेटमेंट अगली तिथि को लेकर उप श्रमायुक्त कार्यालय में जमा करें।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे प्रभात खबर के आरा (बिहार) के ब्यूरो चीफ मिथिलेश कुमार का प्रबंधन ने तबादला कर दिया तो मिथिलेश कुमार ने सीधे सुप्रीमकोर्ट में अपने एडवोकेट दिनेश तिवारी के जरिये गुहार लगा दी थी। इस मामले में मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई और नागेश्वर राव की खंडपीठ ने मिथिलेश कुमार के पक्ष में कदम उठाते हुये उनके ट्रांसफर पर अंतरिम रोक लगा दिया था। मगर फिर भी प्रभात खबर प्रबंधन ने उन्हें ज्वाईन नहीं कराया। इसके बाद यह मामला ३ मई २०१७ को मिथिलेश कुमार के अधिवक्ता दिनेश तिवारी ने सुप्रीमकोर्ट में न्यायाधीश रंजन गोगोई के सामने रखा था। अब उपश्रमायुक्त पटना ने इस मामले में दशहरा के बाद की अगली तिथि दी है जिस पर प्रभात खबर प्रबंधन को अपने दस्तावेज के साथ आकर यह साबित करना पड़ेगा कि उसने अपने सभी अखबारकर्मियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दे दिया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
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जांच करने पहुंचे श्रम अधीक्षक को दैनिक जागरण के मैनेजर ने गेट के अंदर ही नहीं घुसने दिया

कानून और नियम को ठेंगे पर रखता है दैनिक जागरण प्रबन्धक… गया के श्रम अधीक्षक के साथ दैनिक जागरण प्रबंधक ने की गुंडागर्दी… नहीं करने दिया प्रेस की जांच… पंकज कुमार दैनिक जागरण गया के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. इन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड मांगा तो प्रबंधन ने इन्हें परेशान करना शुरू कर दिया… पंकज ने बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के यहां एक आवेदन दिनांक 26.07.2017 को दिया था.. इसमें पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि गया सहित दैनिक जागरण बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर मीडियाकर्मियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है. 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों एवं गैर-पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक समेत कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत ग्रेड की घोषणा भी नहीं की गई है.

श्रम आयुक्त गोपाल मीणा ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अपने ज्ञापांक 3/डी-96/2015 श्र० स० 4142 दिनांक 04-08-17 के माध्यम से दैनिक जागरण की नियमानुकूल आवश्यक जांच करने का आदेश निर्गत किया था तथा कृत कारवाई से संबंधित प्रतिवेदन विभाग को तुरंत उपलब्ध कराने का आदेश मगध प्रमंडल के उप श्रमायुक्त को दिया था.  श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के उक्त आदेश के अनुपालन हेतु कल दिनांक 19 सितम्बर को श्रम अधीक्षक, गया जुबेर अहमद दैनिक जागरण प्रेस की जांच करने के लिए गए थे. परन्तु उन्हें प्रेस के मुख्य द्वार के अंदर प्रवेश करने की ईजाजत दैनिक जागरण के प्रबन्धक द्वारा नहीं दी गई.

यह घटना प्रबन्धक की गुंडागर्दी और कानून की अवहेलना को दर्शाता है.  पंकज कुमार ने इसके पूर्व माननीय उच्चतम न्यायालय में अवमानना वाद दायर किया था. अपने गया से जम्मू तबादले को स्टे करने तथा मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के आलोक में वेतन सहित अन्य सुविधा की मांग की थी. माननीय उच्चतम न्यायालय ने सभी आवेदकों को श्रम आयुक्त के पास इंडस्ट्रियल डिस्पुट एक्ट के तहत आवेदन दायर करने का आदेश दिया है. पंकज कुमार द्वारा दायर अवमानना वाद की खबर भड़ास ने प्रमुखता से एक मई को प्रकाशित किया था.

बिहार से एडवोकेट मदन तिवारी की रिपोर्ट. संपर्क : tiwarygaya@gmail.com

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मजीठिया की जंग : दस दिन में भेजें नेशनल यूनियन की सदस्यता सूची

मजीठिया वेजबोर्ड को पूरी तरह लागू करवाने की जंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बनाई जा रही नेशनल यूनियन के गठन के लिए सभी राज्यों के मजीठिया क्रांतिकारियों से निवेदन है कि वे अपने क्षेत्र या राज्य में मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई  लड़ रहे या इसमें शामिल होने के इच्छुक साथियों की सूची नीचे दिए जा रहे फारमेट के अनुसार तैयार करके ए-4 कागज पर प्रिंट करने के बाद सदस्यों के हस्ताक्षर करवाकर दस दिनों के भीतर भिजवाने की व्यवस्था करवाने का कष्ट करें। इसके अलावा इसी फारमेट के अनुसार बनाई गई सूची की साफ्ट कापी में सदस्य के संस्थान और उसके पद की अतिरिक्त जानकारी भी भर कर मेल करने का भी कष्ट कीजिएगा। नीचे दिया गए फारमेट को ही प्रिंट करने के बजाय इसी तरह की डॉक्युमेंट फाइल बनवा कर टाइम या एरियल फांट में १० या १२ साइज में यह जानकारी टाइप करवाएं।

एक ही फाइल में सभी साथियों की जानकारी टाइप की जाए। सिर्फ सीरियल नंबर का कॉलम खाली रखा जाए, ताकि अगर जरूरत पड़ी तो इसे बाकी साथियों की सदस्यता सूची अनुसार नंबर डालकर पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सके। इससे सभी साथियों को एक जगह एकत्रित होने की असुविधा और खर्च से बचा जा सकेगा। जो साथी अपनी जानकारी गोपनीय तौर पर भिजवाना चाहते हैं, वे सिर्फ नीचे दी गई मेल आईडी के माध्यम से जानकारी भेज सकते हैं। इन्हें सदस्यता फार्म मेल के माध्यम से भेज दिया जाएगा। वहीं बाकी साथियों को भी सदस्यता फार्म भिजवाने की व्यवस्था बाद में की जाएगी।  

फिलहाल पहले पंजीकरण का कार्य करने के अलावा बैंक खाता खोलने और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही सदस्यता फार्म भरवाए जाएंगे और शुल्क इत्यादि की प्राप्ति के साथ ही सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को यूनियन के आईकार्ड भी जारी किए जाएंगे। पहले पंजीकरण के लिए गठित कार्यकारिणी के पदाधिकारी बाकी साथियों की सुविधानुसार सभी राज्यों का दौरा भी करेंगे। फिलहाल इस यूनियन के गठन का मकसद किसी अन्य यूनियन को नीचा दिखाना या इन्हें टक्कर देना नहीं है, बल्कि इनके सदस्यों व पदाधिकारियों को भी इसमें जुडऩे का निमंत्रण दिया जाता है, ताकि अखबारों में कार्यरत, निलंबित, निष्कासित या सेवानिवृत कर्मचारियों को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया जा सके।

फिलहाल यूनियन का प्रथम मकसद मजीठिया वेजबोर्ड को अक्षरश: लागू करवाना और अखबार कर्मियों के साथ की जा रही ज्यादतियों को रोकना रहेगा। इसके लिए मालिकों की संस्था से सीधे बात करने के अलावा इन्हें कटघरे में खड़ा करने के लिए एकजुट कोशिश की जाएगी। पिछली बार अलग-अलग गुटों में जंग लडऩे का नतीजा हम सब देख ही चुके हैं। लिहाजा एकजुट होकर सुनियोजित  तरीके से अपना हक लेने के लिए अब ऐसा कानूनी जाल बुना जाएगा, जिससे माननीय सर्वोच्च न्यायालय की आवमानना की परवाह किए बिना ज्यादतियां कर रहे अखबार मालिक बाहर ना निकल पाएं। वैसे भी किसी ने ठीक ही कहा है संघ यानि एकजुट होने में ही शक्ति निहित होती है।

लिहाजा सभी साथी चाहें वे मजीठिया वेजबोर्ड के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं या फिर किसी कारणवश जो लोग खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं, वे इस यूनियन का सदस्य बनकर एक बड़ी ताकत के साथ अपनी आवाज बुलंद करने का अंतिम अवसर अपने हाथ से जाने न दें। यह यूनियन सिर्फ पत्रकारों की नहीं बल्कि सभी अखबार कर्मियों की यूनियन है। चाहें वे नियमित हों या फिर अनुबंध पर, कार्यरत हैं या फिर निष्कासित, या फिर नवंबर 11 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी सभी निसंकोच इस यूनियन के साथ जुड़ कर अपना हक प्राप्त करने की ताकत पा सकते हैं। यूनियन सभी के लिए लेबर विभाग और लेबर कोर्ट में चल रहे मुकद्दमों से जुड़ी कानूनी जानकारी मुहैया करवाने से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक एकजुट होकर लड़ाई लडऩे की योजना पर काम करेगी। वहीं हाल ही में आए निर्णय के अनुसार नियमित और अनुबंध कर्मियों को भी उनका एरियार और नया वेतनमान दिलवाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों पर भी दबाव बनाने की रणनीति पर काम करेगी। अन्य कई योजनाएं दिमाग में हैं, फिलहाल शुरुआत तीन अक्टूबर के बाद दिल्ली से की जाएगी। फिर यह आंदोलन पूरे देश में फैलेगा।

कुछ साथियों को इस बात को लेकर असमंजस है कि वे तो पहले से मौजूद यूनियनों के सदस्य या पदाधिकारी हैं, तो इन्हें स्पष्ट किया जा रहा है कि यह अच्छी बात है कि वे किसी यूनियन के संरक्षण में हैं। फिलहाल वे इस यूनियन की सदस्याता जरूर लें, क्योंकि हम एक ऐसा राष्ट्रीय मंच तैयार करने जा रहे हैं जो बाकी सबसे हटकर हो और असरदार उपस्थिति के साथ सबको चकित करके रख दे। पहले से यूनियनों में शामिल साथियों के अनुभव का भी इस यूनियन को फायदा मिलेगा। कुछ नया करना है तो दूसरों की लकीर को काटने के बजाय एक बड़ी लकीर खिंचना ही बेहतर विकल्प होता है।

रविंद्र अग्रवाल
पता: वार्ड-8, कॉलेज रोड कांगड़ा, जिला कांगड़ा हिमाचल प्रदेश-176001
संपर्क नंबर: 9816103265, 9736003265, 9418394382
ईमेल आईडी:  ravi76agg@gmail.com

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मजीठिया मामले मे चल रही सुनवाई से भाग खड़ा हुआ एचटी मैनेजमेंट

एचटी ग्रुप मामले को लटकाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा

पटना : हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप में मजीठिया वेज बोर्ड लागू नहीं किए जाने तथा ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन मे भारी गड़बड़ी की शिकायत को लेकर पटना डीएलसी के यहां अलग-अलग दो चरणों मे सुनवाई हुई। 9 सितम्बर को सबसे पहले 11 बजे दिन से ग्रेच्यूटी को लेकर पहली सुनवाई थी मगर मैनेजमेंट भाग खड़ा हुआ। उसके अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने लिखित सूचना दी कि प्रबंधन ने इस मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में एक रिट दायर की है, इसलिए इस पर सुनवाई रोकी जाय।

11 पत्रकार और गैर पत्रकारों द्वारा दायर मुख्य शिकायतकर्ता होने के नाते मैं दिनेश कुमार सिंह ने जब प्रबंधन के एडवोकेट से पूछा कि अभी सुनवाई शुरू नहीं हुई और आपने कोई जवाब तक फाईल नही किया फिर किस आदेश के खिलाफ कोर्ट गये? कोर्ट का कोई स्टे आर्डर है? तब उन्होंने कहा- नहीं। प्रबंधन के एडवोकेट से यह पूछा गया कि आप किसके एडवोकेट हैं तो उन्होंने कहा कि प्रबंधन की ओर से। फिर पूछा गया कि वकालतनामा कहां है। यहां पार्टी एचटी के चेयरपर्सन शोभना भरतिया हैं, उनके हस्ताक्षर के साथ वकालतनामा के साथ आइए। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में वे शोभना भरतिया के वकालतनामा के साथ आएंगे, साथ ही कोर्ट का स्टे नहीं ला सके तो सुनवाई अगली तिथि 7 अक्टूबर को जवाब और उसके तमाम कंपलायन्स के साथ आएंगे।

यह विदित है की ग्रेच्यूटी के कैलकुलेशन के लिए उन्हें मजीठिया का फिटमेन्ट चार्ट देना होगा और इसमें गड़बड़ी और किसी तरह की हेराफेरी की सजा बहुत ही सख्त है। साफ है शोभना भरतिया को जेल जाना भी पड़ सकता है। उसी दिन दूसरी सुनवाई पुनः दो बजे से शुरू हुई और प्रबंधन ने यहीं से रटे हुए तोते की तरह बात शुरू की। प्रबंधन ने कहा कि यूनियन को हम नहीं मानते हैं। डीएलसी ने कहा कि इस मामले का निष्पादन हो चुका है, ऐसे में आप पुरानी बातों में समय जाया नहीं कर सकते।

पुनः वही सवाल उठा। शोभना भरतिया मुख्य आरोपी हैं इसलिए आरोपी के बचाव में यदि आप आते हैं तो उनका वकालतनामा साथ लाइए। प्रबंधन के एडवोकेट ने कहा कि वे शोभना भरतिया का वकालतनामा 20 सितम्बर तक जमा करा देंगे। उसके बाद सुनवाई की तिथि तय हो जाएगी। इस बार एचटी ग्रुप के बेतुके तर्क के लिए मशहूर एचआर निदेशक राकेश गौतम कहीं नजर नहीं आए।

पटना से दिनेश सिंह की रिपोर्ट.

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मजीठिया को लेकर प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों ने श्रम मंत्री को घेरा, नहीं देते बना जवाब

महिला पत्रकार के सवाल पर मंत्री जी लगे बगले झांकने

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले को लेकर झारखंड सरकार के श्रम मंत्री राज पालिवार को रांची में उन्हीं की पत्रकार वार्ता में पत्रकारों ने घेर लिया और लगे दनादन जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सवाल दागने। इस अप्रत्याशित सवाल से थोड़ी देर के लिये मंत्री महोदय भी घबड़ा गये। बताते हैं कि झारखंड के श्रम मंत्री राज पालिवार ने अपने विभाग और अपने किये गये कार्य का बखान करने के लिये रांची के सूचना भवन में एक प्रेस कांफ्रेस रखी।

मंत्री जी की इस प्रेस कांफ्रेस के लिये रांची के सभी पत्रकारों को बुलाया गया था। अपने लाव-लश्कर के साथ सूचना भवन पहुंचे मंत्री महोदय ने पहले तो अपने विभाग का गुणगान किया फिर पत्रकारों से कहा कि अब आप पूछ सकते हैं जो भी सवाल पूछना है। पत्रकारों की तरफ से पहला सवाल दागा गया कि आपकी सरकार और आपका विभाग पत्रकारों के अधिकार और वेतन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में क्या कर रहा है और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं करा पाया।

इस अप्रत्याशित सवाल से मंत्री महोदय बगले झांकने लगे। लगे हाथ एक और सवाल दाग दिया गया- झारखंड में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड से जुड़े १०३ मामले लंबित हैं, मजीठिया वेज बोर्ड मांगने वालों को काम से निकाल दिया जा रहा है, आपकी सरकार अब तक मौन क्यों है? मंत्री जी ने पत्रकारों को बेसिर-पैर का उत्तर दिया और कहा कि बिना मांगे तो मां भी बच्चे को दूध नहीं पिलाती। आप लोग क्लेम लगाईये। मजीठिया वेज बोर्ड की शिफारिश लागू कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

मंत्री जी के इस सवाल पर एक महिला पत्रकार ने पूछ लिया कि मंत्री जी आप बताईये क्या अगर बच्चा रोये नहीं तो मां का कर्तव्य नहीं है कि उसे समय पर दूध पिला दे और उसका ठीक से पालन पोषण करे? अब मंत्री जी को काटो तो खून नहीं। बेचारे पानी पानी हो गये। उन्होंने पत्रकारों को कहा कि आप लोग पांच लोगों की टीम बनाकर हमारे कार्यालय में आइये। इस मुद्दे पर हम गंभीरता से बात करेंगे और जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड जरुर लागू होगा।

इस दौरान सन्मार्ग अखबार के पत्रकार नवल किशोर सिंह के मामले को भी उठाया गया जिनको जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन मांगने पर कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। श्रम मंत्री राज पालिवार ने कहा कि जो अखबार भी लापरवाही करेंगे और कर्मचारियों का शोषण करेंगे उनको नोटिस भेजी जायेगी। सन्मार्ग अखबार मामले को उन्होंने गंभीरता से लिया और कहा कि ऐसे अखबारों पर सरकार शिकंजा कसेगी। इस दौरान कामगार सचिव अमिताभ कौशल और झारखंड के कामगार आयुक्त और संबंधित अधिकारी भी मौजूद थे। फिलहाल माना जारहा है कि झारखंड सरकार भी जल्द भी माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिये ठोस कदम उठायेगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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मजीठिया मामला : नवभारत के 47 मीडियाकर्मियों ने सौपा प्रबंधन को क्लेम डाटा

मुम्बई से एक बड़ी खबर आ रही है। पहली बार यहां किसी अखबार प्रबंधन को सीधे कर्मचारी यूनियन ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार 47 मीडियाकर्मियों का क्लेम का डाटा सौंप दिया है। गुरुवार 7 सितंबर 2017 को पूर्व निर्धारित नवभारत प्रबंधन और महाराष्ट्र मीडिया इंप्लाइज यूनियन नवभारत इकाई कार्यकारिणी की बैठक के दौरान यूनियन से जुड़े सभी 67 सदस्यों में से 47 सदस्यों का मजीठिया क्लेम का डाटाशीट नवभारत के प्रेसिडेंट श्रीनिवास जी को सौंप दी गई।

क्लेम फाइल करते समय महाराष्ट्र मीडिया इंप्लाइज यूनियन नवभारत इकाई के अध्यक्ष श्री केसर सिंह बिष्ट, सचिव श्री अरुण गुप्ता, कार्यकारिणी सदस्य श्री शेर सिंह, श्री राकेश पांडे, श्री सागर चौहान और श्री विष्णु मांजरेकर मौजूद थे। अब कंपनी प्रबंधन ने अगर निर्धारित समय तक इन कर्मचारियों का मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाया नहीं दिया तो ये कर्मचारी कामगार आयुक्त महाराष्ट्र सरकार के समक्ष अपना दावा पेश करेंगे।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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मजीठिया मामला : डीबी कॉर्प के 5 मीडियाकर्मियों के पक्ष में आरसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू

दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प के मराठी अखबार दैनिक दिव्य मराठी के महाराष्ट्र के अकोला एडिशन से खबर आ रही है कि यहां 5 मीडियाकर्मियों के पक्ष में आरसी जारी करने के लिए  अंतिम प्रक्रिया शुरू करने का सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने अपने विभाग को निर्देश दिया है। ये मीडियाकर्मी हैं इस मराठी अखबार के पेज मेकर दीपक वसंतराव मोहिते (रिकवरी राशि 13 लाख 35 हजार 252 रुपये), पेजमेकर राजू रमेश बोरकुटे (रिकवरी राशि 12 लाख 66 हजार 275), डिजाइनर मनोज रामदास वाकोडे (११ लाख 75 हजार 654 रुपये), पेजमेकर संतोष मलनन्ना पुटलागार (११ लाख 98 हजार 565 रुपये) और डिटीपी इंचार्ज रोशन अम्बादास पवार (6 लाख 17 हजार 308 रुपये)।

इसके लिए सहायक कामगार आयुक्त ने 18 अगस्त को एक नोटिस डी बी कॉर्प प्रबंधन को भेजा है जिसमें दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल, पूरा पता प्लाट नंबर 6, द्वारिका सदन, प्रेस काम्प्लेक्स, मध्य प्रदेश नगर भोपाल (मध्य प्रदेश), प्रबंध निदेशक सुधीर अग्रवाल (पता उपरोक्त), निशिकांत तायड़े स्टेट हेड, दैनिक दिव्य मराठी, डीबी कोर्प लिमिटेड अकोला, जिला अकोला को भी नोटिस की कॉपी भेजी गई है। इस नोटिस के बाद भी अगर डीबी कॉर्प कंपनी इन पांचों मीडियाकर्मियों को उनका बकाया नहीं देती है तो आरसी जारी कर कलेक्टर को भू राजस्व की भांति वसूली करके बकायेदारों को देने का निर्देश दिया जाएगा।

मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 9322411335

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‘हिंदुस्तान’ के पत्रकार ने पत्र लिखकर आशंका जताई- ‘प्रबंधन के लोग मुझे जान से मारने की साजिश रच रहे हैं!’

सेवा में,

श्री विकास यादव

रीजनल एच.आर. मैंनेजर

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि0

मेरठ

विषयः-  गैरकानूनी जांच के बहाने हत्या का षड्यंत्र रचते हुए अपने परिसर में बुलाने को बाध्य करने के सम्बन्ध में।

महोदय,

आपके द्वारा प्रेषित Email के क्रम में सादर ससम्मान अवगत कराना है कि आपके पत्र दिनांक 06.07.2017 के क्रम में 12.07.2017 को एक पत्र रजिस्टर्ड डाक से आपको प्रेषित किया गया था, उस पत्र के साथ संलग्नक-2 छुट्टी का वह पत्र था जो 03.03.2017 को बरेली यूनिट के सहायक प्रबन्धक एच.आर. श्री सत्येन्द्र अवस्थी को उप श्रमायुक्त बरेली के समक्ष प्राप्त कराया गया, जिसमें सभी चिकित्सा सम्बन्धी परचे अटैच थे। मैं सूचना देकर ही अस्वस्थता के चलते अवकाश पर हूं।

उप श्रमायुक्त बरेली के आदेश के वाबजूद मजीठिया बेज बोर्ड के अनुसार वेतन/भत्तों का एरियर धनराशि 3251135.75/-रू0 का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। आपने Email व रजिस्टर्ड डाक से भेजे गये पत्र दिनांक 24.08.2017 का बिन्दुवार उत्तर नहीं दिया है। सही तथ्यों को छुपाकर पुनः Email दिनांक 25.08.2017 को भेज दिया है। आरोपी होकर स्वयं मुझे बार-बार परिसर में आने के लिए आपका बाध्य करना यह प्रमाणित करता है कि आप मेरी हत्या की गहरी साजिश रचे हुए हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मुझे तलब करने वाले आप स्वयं (श्री विकास यादव) एवं आपके मातहतों ने मुझे फर्जी मुकदमे में फंसाने, जान से मरवाने की धमकी दी है जिसकी लिखित शिकायत 22.02.2017 को उप श्रमायुक्त बरेली को की गयी है और दिनांक 12.07.2017 को आपके पत्र के जवाब के साथ भी संलग्नक-3 के रूप में जिसकी फोटो प्रति लगायी गयी है। शक्तिशाली आरोपी (श्री विकास यादव) द्वारा मुझे अपने प्रभाव क्षेत्र के परिसर में आने को बाध्य किया जा रहा है जो कि प्रचलित भारतीय कानूनों के अनुसार किसी भी हालत में विधिसंगत, न्यायसंगत, तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता है। साथ ही भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अतः आपसे एक बार पुनः अनुरोध है कि मेरे पत्र दिनांक 24.08.2017 के क्रम में बिन्दुवार मुझे अवगत करायें एवं उसके उपरान्त ही मजिस्ट्रेट के समक्ष विधिक प्रावधानों के तहत बयान दर्ज कराने को तिथि नियत कराने की कृपा करें।

दिनांकः- 25.08.2017

भवदीय

(निर्मलकान्त शुक्ला)

वरिष्ठ उप संपादक

हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लि0,

बरेली यूनिट, बरेली ।

कोड-एम-77978

मो0-9411498700

प्रतिलिपिः-

1- उप श्रमायुक्त बरेली क्षेत्र बरेली को इस आशय से प्रेषित कि प्रकरण की जांच कराकर न्यायोचित कार्यवाही करने की कृपा करें ।

2- पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को इस आशय से प्रेषित कि विकास यादव व सत्येन्द्र अवस्थी के विरूद्ध आई.पी.सी. की सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के आदेश देने की कृपा करें।

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मजीठिया वेज बोर्ड हड़पने वाले ‘हिंदुस्तान’ प्रबंधन ने डोमेस्टिक इनक्वायरी के नाम पर मीडियाकर्मी की प्रताड़ना शुरू की

सेवा में,
श्री विकास यादव
रीजनल एच.आर. मैनेजर
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि.
मेरठ ।

विषयः-  NON-LEGAL CHARGE SHEET-CUM-INTIMATION OF DOMESTIC ENQUIRY

महोदय,

आपके पत्र दिनांक 21.08.2017, जिसके द्वारा मुझे दिनांक 26.08.2017 को हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. के बरेली कार्यालय में डोमेस्टिक इन्क्वायरी में तलब करने की बात कही गयी है, के क्रम में सादर निवेदन करना है कि हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. ने उप श्रमायुक्त बरेली के आदेश दिनांक 31.03.2017 के बाद भी मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन व भत्ते आदि के एरियर की बकाया धनराशि 3251135.75/-रू0 मय बयाज अदा नहीं की है। धनराशि 3251135.75/-रू0 को अदा करने के वजाय मुझे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से परेशान करने को कथित मनगढंत, विधि विरूद्ध जांच की बात की जा रही है।

आपके इस पत्र के क्रम में कहना है किः-

1- यह कि तथा कथित डोमेस्टिक इन्क्वायरी श्रमजीवी पत्रकार एवं समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955 के किस नियम व धारा के अन्तर्गत की जा रही है)।

2- यह कि दिनांक 06 जुलाई, 2017 व दिनांक 21 अगस्त, 2017 के पत्र में डोमेस्टिक इन्क्वायरी की बात कही है मगर आपने कथित आरोपों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है। कृपया बिन्दुवार कथित आरोप पत्र उपलब्ध करायें।

3- यह कि हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. को जांच कराने का अधिकार श्रम अधिनियम के किस नियम व प्रावधान के तहत प्राप्त हुआ है?

4- यह कि आपने प्रार्थी को हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि. का स्टैडिंग आर्डर (समझौता पत्र) जोकि श्रम अधिनियम के प्रावधान के तहत निजी क्षेत्र की किसी भी कंपनी/नियोक्ता वकर्मचारी के बीच होता है, बार-बार मांगने पर भी अब तक नहीं दिया है। श्रम विभाग से पंजीकृत स्टैडिंग आर्डर (समझौता पत्र) उपलब्ध कराया जाये, जिसका अध्ययन कर आपको कथित आरोपों का समुचित उत्तर दिया जा सके।

5- यह कि आपके द्वारा इस कपोल कल्पित प्रचलित भारतीय कानून के विपरीत की जा रही मनमानी जांच मुझे परेशान करने, उत्पीड़न कराने व मेरी हत्या की साजिश रचने का क्रम प्रतीत हो रही है। क्योंकि मैं आपके व बरेली यूनिट के एच.आर. प्रभारी श्री सत्येन्द्र अवस्थी के विरूद्ध जानमाल के नुकसान की धमकी देने की लिखित शिकायत दिनांक 22.02.2017 को उप श्रमायुक्त बरेली को पहले ही कर चुका हूं। भय व तनाव की वजह से ही अस्वस्थ चल रहा हूं और कार्यालय आने में असमर्थ बना हुआ हूं। यदि कोई निष्पक्ष जांच है, तो वह किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष ही विधिसंगत, न्यायसंगत और तर्कसंगत हो सकती है।

अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि व्यापक न्याय हित में मेरे इस पत्र में वर्णित उपरोक्त बिन्दुओं का स्पष्ट उत्तर तथा कथित आरोप पत्र देते हुए मजिस्ट्रेट के समक्ष विधिक प्रावधानों के तहत बयान करने के लिए तिथि नियत कराके अवगत कराने की कृपा करें।

दिनांकः- 24.08.2017

भवदीय

निर्मलकान्त शुक्ला

वरिष्ठ उप सम्पादक

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लि0
बरेली यूनिट, बरेली ।
कोड-एम-77978
मो0-9411498700

प्रतिलिपिः-
1-  एच.आर. प्रभारी, हिन्दुस्तान बरेली यूनिट बरेली।
2-  श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन।
3-  उप श्रमायुक्त बरेली क्षेत्र बरेली को इस आशय से प्रेषित कि प्रकरण की जांच कराके न्यायोचित कार्यवाही करने की कृपा करें।

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