हे टीवी संपादकों, तुम लोग ही इन हरामी बाबाओं को प्रमोट करते हो… प्रसाद में थप्पड़ मिला तो हल्ला क्यों?

Shaitan Singh Bishnoi : कल ये देख के मुझे बेहद ताज्जुब हुआ कि ओबी वैन जलाने पर और मीडिया कर्मियों की पिटाई पर प्रलाप मचा कर गुरमीत सिंह को फर्जी बाबा घोषित कर उन्हें अन्धविश्वास फैलाने का आरोपी ठहराने वाला एक चैनल मात्र आधे घण्टे के बाद “समुद्र में मायावी मंदिर” नामक कवर स्टोरी दिखा रहा था।

यह टेलीविजन पत्रकारिता का वीभत्स चेहरा है!

Anil Jain : यह टेलीविजन पत्रकारिता का वीभत्स चेहरा है! बाबा रामरहीम अपने काफिले के साथ निकल चुके हैं….बाबा कोर्ट में पहुंचने वाले हैं….बाबा कोर्ट परिसर में प्रवेश कर चुके हैं…! सुपारीबाज टीवी चैनलों के तमाम बेशर्म और मूर्ख एंकर/रिपोर्टर बलात्कार और हत्या के आरोपी एक लंपट बाबा को इसी तरह का संबोधन दे रहे हैं। इसी तरह का सम्मानजनक संबोधन चार दिन पहले मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी कर्नल पुरोहित को भी जमानत मिलने पर दिया जा रहा था।

संपादक कुछ समझ पाता, उसके पहले ही मालिक के केबिन से बुलावा आ गया…

Abhishek Srivastava : पत्रकारिता की आधुनिक कथा। संपादक ने मीटिंग ली। सबसे कहा आइडिया दो। आजकल आइडिया पर काम होता है, घटना पर नहीं। सबने आइडिया दिया। कोई बोला, सर महंगाई… मने टमाटर ईटीसी। धत्। पागल हो? नेक्‍स्‍ट। सर, इस बार छंटनी पर कर लेते हैं। आइटी कंपनियों में भयंकर संकट है। संपादक अस मुस्‍कराया जस बुद्ध क्‍या मुस्‍कराते। बोले- बच्‍चा, पूरा करियर विशेषांक बंगलोर पर टिका है, आइटी को तो छूना भी मत। राजनीतिक संपादक अब तक चुप थे। जब सारे लौंडों ने आइडिया दे दिया तो उन्‍होंने सिर उठाया- मेरी समझ से हमें आज़ादी के सत्‍तर साल पर एक विशेषांक की तैयारी करनी चाहिए। ओके… संपादक ने कहा… आगे बढि़ए। राजनीतिक संपादक बोलते गए, ”…कि हम क्‍या थे और क्‍या हो गए… जैसा माननीय ने कहा था अभी… कि चीन याद रखे भारत 1962 वाला भारत नहीं है। तो आ‍इडिया ऑफ इंडिया… इस पर कुछ कर लेते हैं।”

कुछ चैनलद्रोही बाथरूम में घण्टों से घुसे बैठे हैं ताकि कहीं कोई पैकेज न पकड़ा दे…

Arvind Mishra : नीतीश के इस्तीफे के बाद टीवी चैनलों का न्यूज़ रूम युद्ध क्षेत्र बन गया… जानिए ग्राउंड जीरो से सूरत-ए-हाल…

पत्रकारों की उम्र 55 साल होने पर सरकारें इन्हें सत्ता में एडजस्ट करें!

वर्तमान में पत्रकारिता की जो दशा है, उस हिसाब से सरकार को एक उम्र के बाद हर पत्रकार को शासन में एडजस्ट करना चाहिए। दरअसल, आज पत्रकारिता की राह में अनेक बाधाएं आ चुकी हैं। काम का बोझ, तनाव, समस्याएं, अपर्याप्त वेतन तो है ही इसके ऊपर हर वक्त सिर पर नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। मुख्य धारा का एक पत्रकार अपने जीवन में इतना परिश्रम और तनाव झेल जाता है कि 50-55 की उम्र के बाद वह किसी काम का नहीं रह जाता है। शायद यही कारण है कि इस उम्र के बाद आज अनेक पत्रकार अपनी लाइन बदलने का असफल प्रयास करते हैं।

”बकवास 7×24” चैनल, चीखू ऐंकर और एक गधे का लाइव इंटरव्यू

विनय श्रीकर

देश के सबसे लोकप्रिय खबरिया चैनल ”बकवास 7×24” का चीखू ऐंकर पर्दे पर आता है और इस खास कार्यक्रम के बारे में बताता है। ऐंकर– आज हम अपने दर्शकों को दिखाने जा रहे हैं एक ऐसा लाइव इंटरव्यू, जिसको देख कर वे हमारे चैनल के बारे में बरबस कह उठेंगे कि ऐसा कार्यक्रम तैयार करने का बूता किसी और चैनल में नहीं है। स्टूडियो में गधे का प्रवेश। माइक लेकर चैनल का पत्रकार गधे से मुखातिब होता है। इंटरव्यू शुरू होता है–

टीवी यानि वो सर्कस जो बड़े तंबू से निकल कर आपके घर में आ गया है!

Arun Maheshwari : आज के ‘टेलिग्राफ़’ में वरिष्ठ पत्रकार सुनन्दा के दत्ता राय ने अपने लेख ‘टीवी सर्कस ही है, यह गंभीर अख़बार का विकल्प नहीं’ में ब्रिटिश अभिनेता राबर्ट मोर्ले के टीवी के बारे में इस कथन को याद किया है कि यह ‘बिग टेंट’, स्थानीय भाषा में सर्कस है। “अब सर्कस बड़े तंबू में नहीं, आपके घर में आ गया है।”

पहले एक दूरदर्शन था, अब सारे ही चैनल सरकारी हो गए लगते हैं : प्रभात डबराल

Prabhat Dabral : कपिल मिश्रा अरविन्द केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं और पत्रकार बंधु फ़ौरन बी जे पी के नेताओं के पास उनकी प्रतिक्रिया लेने पहुँच जाते हैं. ठीक बात है, यही होना भी चाहिए. बी जे पी प्रवक्ता भी एक स्वर में कह देते हैं कि इन आरोपों के बाद केजरीवाल को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके. बी जे पी नेताओं की ये बात भी तर्कसंगत है. पत्रकार बंधु ये बाईट लेकर आते हैं और चैनल पर चला देते हैं. बी जे पी भी खुश पत्रकार भी खुश.तीन दिन से यही चल रहा है.

ये न्यूज़ चैनलों का आपातकाल है… खोजी पत्रकारिता वेंटिलेटर पर है… : रजत अमरनाथ

Rajat Amarnath

खोजी पत्रकारिता यानि INVESTIGATIVE JOURNALISM आज वेंटिलेटर पर है… अंतिम सांसें ले रहा है… कभी कभी उभारा लेता भी है तो सिर्फ INDIAN EXPRESS और THE HINDU जैसे अख़बारों की वजह से… टीवी के खोजी पत्रकारों और संपादकों की नज़र में खोजी पत्रकारिता का मतलब सिर्फ और सिर्फ स्टिंग है… आखिर ऐसा हो भी क्यों न जब मालिकान और संपादक ही अपना हित साधने के लिए सत्ता के चरणों में दंडवत हैं… मालिकों को राज्यसभा की सीट चाहिए तो संपादक को TRP के जरिए कमाई ताकि उसकी मठाधीशी कायम रह सके….

टीवी की बेमतलब की बहस से दूर रहें… जानिए क्यों…

एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है. बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है. दाँत ब्रश करता है. नहाता है. कपड़े पहनकर तैयार होता है. अखबार पढता है. नाश्ता करता है. घर से काम के लिए निकल जाता है. बाहर निकल कर रिक्शा करता है. फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है. वहाँ पूरा दिन काम करता है. साथियों के साथ चाय पीता है.

रवीश के इस प्राइम टाइम शो को हम सभी पत्रकारों को देखना चाहिए

एनडीटीवी इंडिया पर कल रात नौ बजे प्राइम टाइम शो के दौरान रवीश कुमार ने पत्रकारों की विश्वसनीयता को लेकर एक परिचर्चा आयोजित की. इस शो में पत्रकार राजेश प्रियदर्शी और प्रकाश के रे के साथ रवीश ने मीडिया और पत्रकार पर जमकर चर्चा की.

पुष्पेन्द्र वैद्य मामला : ऐसा लगता है कोई व्यक्तिगत दुश्मनी निकाल रहा है

हम पत्रकारों की जमात की सबसे बडी मुश्किल ये है कि हम आपस में एक दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि दुश्मन की भूमिका निभाते हैं और ये भूमिका निभाते निभाते सच्चाई को भी ताक पर रख देते हैं। संदर्भ इंदौर में इंडिया टीवी के एमपी सीजी के हेड पुष्पेन्द्र वैद्य पर एक मेडिकल कॉलेज माफिया …

दिल्ली की हड़ताल से न्यूज चैनलों को शर्म क्यों नहीं आती?

दिल्ली में MCD की हड़ताल को हर नेशनल न्यूज चैनल बढ़-चढ़ कर दिखा रहा है। पूरा पूरा दिन इसी पर चर्चा। बड़ा पैनल बिठाया जा रहा है। बड़े बड़े नेताओं के मुंह में बोल ठूंसे जा रहे हैं। लेकिन देश के पीठाधीश्वर बने इन नेशनल न्यूज चैनलों को क्या शर्म नहीं आती? शर्म इसलिए क्यूंकि दिल्ली MCD की हड़ताल सेलरी को लेकर है। न्यूज चैनल ये तो बार बार दिखा रहे हैं कि इन कर्मचारियों को मेहनताना नहीं मिल रहा| लेकिन न्यूज चैनल में काम करने बाले क्षेत्रीय पत्रकारों का तो इससे भी बुरा हाल है। उसको क्यों नहीं दिखाते?

न्यूज चैनलों में सच्चाई और हुनर की जगह नहीं… पढ़िए एक लड़की की पीड़ा

नमस्कार सर, मेरा नाम सलोनी है। मैं काफी समय से नौकरी तलाश रही हूँ लेकिन इस मीडिया जगत में कहीं नौकरी मिल ही नहीं रही। मेरे साथ एक बड़े न्यूज चैनल में जो हुआ वह मैं आपको बताना चाहती हूँ। इस साल जनवरी में मैं वहाँ इंटरव्यू देने के लिए गयी थी। वेब डिपार्टमेंट के हेड ने मेरा टेस्ट लिया और उन्होंने मुझे कहा कि रुको थोड़ी देर। मैंने थोड़ा वेट किया और वो वापस आये और बोले- ठीक है आप को काम आता है और हम HR को बोल देंगे, वो आपको फ़ोन कर लेंगे।

प्रबल प्रताप और संजीव पालीवाल ला रहे एक नया नेशनल न्यूज चैनल!

नोएडा के सेक्टर63 में जहां पर न्यूज एक्सप्रेस चैनल का आफिस हुआ करता था, उसके ठीक बगल वाली बिल्डिंग से एक नया चैनल अवतार लेने जा रहा है. चैनल का नाम वैसे तो फाइनली तय नहीं हुआ है लेकिन लोग कह रहे हैं कि यह ‘नेशन्स वायस’ नाम से लांच होगा. चैनल से अभी दो लोग जुड़ चुके हैं. प्रबल प्रताप सिंह और संजीव पालीवाल. प्रबल प्रताप के नेतृत्व में ही चैनल के सारे इक्विपमेंट्स, मशीनों आदि की खरीद-फरोख्त होने से लेकर इंस्टालेशन का काम चल रहा है. संजीव पालीवाल चैनल से सलाहकार की भूमिका में जुड़े हैं. भड़ास4मीडिया ने जब प्रबल से मैसेज कर इस चैनल से जुड़ने के बारे में पूछा तो उन्होंने पूरी तरह से इनकार किया. हालांकि सूत्र कहते हैं कि प्रबल प्रताप सिंह चैनल से न सिर्फ जुड़े हुए हैं बल्कि चैनल इंस्टालेशन का सारा काम उनकी अगुवाई में हो रहा है.

टीवी चैनलों को विज्ञापनों व कार्यक्रमों को लेकर ज्यादा सतर्क होने की जरूरत, अश्लीलता से सख्ती से निपटने के निर्देश

टेलीविजन चैनलों को विज्ञापनों और कार्यक्रमों को लेकर अब ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि अश्लील और अवांछित कार्यक्रम दिखाने वाले चैनलों पर कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरूण जेटली ने भी संबंधित अधिकारियों को ऐसे ही निर्देश दिए हैं. हालांकि अश्लील और अवांछित कार्यक्रमों से निपटने के लिए दिशानिर्देश मौजूद हैं और कार्रवाई की जाती है लेकिन अब भी इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन हो रहा है. हालांकि कई स्वनियामक व्यवस्थाओं के कारण इनमें कमी आई है लेकिन प्रधानमंत्री ने दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले चैनलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की वकालत की है.

टीवी पत्रकारिता में पच्चीस बरस पूरे करने पर उमेश उपाध्याय ने फेसबुक पर ये लिखा….

I have completed 25 years in active Television today. On exactly this day 25 years ago, 8/8/88, I had joined Doordarshan as an Assistant News Correspondent. I had left my PTI job but I never imagined that my journey will bring me to the point I am in my life today.