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राम बहादुर राय ही नहीं, सैकड़ों पत्रकारों की सदस्यता इस साल सत्ताधारी पैनल ने खत्म कर दी, मीडियाकर्मियों में आक्रोश

Yashwant Singh : कल राम बहादुर राय जी की सदस्यता प्रेस क्लब से खत्म किए जाने की सूचाना थी। आज पता चल रहा है कि सैकड़ों पत्रकारों की सदस्यता खत्म की गई है। प्रिंट और टीवी के पत्रकार महेंद्र श्रीवास्तव की भी सदस्यता खत्म की जा चुकी है। इसी तरह सैकड़ों लोगों की सदस्यता बकाया जमा न करने के नाम पर खत्म कर दी गई। कल होने वाले चुनाव में सैकड़ों पुराने पत्रकारों को वोट नहीं डालने दिया जाएगा, सदस्यता खत्म होने का हवाला देकर। ये सिलसिला नया नहीं है।

Yashwant Singh : कल राम बहादुर राय जी की सदस्यता प्रेस क्लब से खत्म किए जाने की सूचाना थी। आज पता चल रहा है कि सैकड़ों पत्रकारों की सदस्यता खत्म की गई है। प्रिंट और टीवी के पत्रकार महेंद्र श्रीवास्तव की भी सदस्यता खत्म की जा चुकी है। इसी तरह सैकड़ों लोगों की सदस्यता बकाया जमा न करने के नाम पर खत्म कर दी गई। कल होने वाले चुनाव में सैकड़ों पुराने पत्रकारों को वोट नहीं डालने दिया जाएगा, सदस्यता खत्म होने का हवाला देकर। ये सिलसिला नया नहीं है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जो लोग सात साल से सत्ता में हैं, उन्होंने तीन साल पहले इसलिए एक पत्रकार की सदस्यता निलंबित कर दी थी क्योंकि उनकी सदस्यता सात साल पहले वाले पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के कार्यकाल में हुई थी। सदस्यता निलंबित करने के पहले उनसे सक्रिय पत्रकार होने का प्रमाण मांगा गया। उन्होंने सन 86 से 2014 तक की कटिंग्स भेजीं। वे वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनका नाम सम्मानित है। उन्होंने पत्रकारिता और लेखन के फील्ड में काफी काम किया है और उनका अच्छा खासा नाम है। सस्पेंड होने से दुखी होकर वो आज तक प्रेस क्लब की तरफ ही नहीं गए।

एक अन्य पत्रकार साथी Chandan Yadav की क्लब की सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई क्योंकि इन्होंने इन कर्ताधर्ताओं के भ्रष्टाचार पर सवाल खड़ा कर दिया था। बिना कोई नोटिस दिए सीधे एक्सपेल कर दिया। अब राम बहादुर राय की सदस्यता छीन ली गई। इस तरह इन्होंने जता दिया है कि प्रेस क्लब उनकी निजी जागीर है, पत्रकारों के इस क्लब में अब वरिष्ठ पत्रकारों की ही कोई औकात नहीं है। सत्ताधारी पैनल के लोगों ने अपने इसी कार्यकाल में रामबहादुर राय, महेंद्र श्रीवास्तव समेत सैकड़ों लोगों की सदस्यता निगल ली है। यह सरासर बदतमीजी है। वरिष्ठ और आम मीडियाकर्मियों का अपमान है। इसका बदला लेना ही होगा वरना कल आपकी बारी आ जाएगी। मैं अब अपने साथ हुए एक बुरे अनुभव के बारे में बताना चाहूंगा। इससे सत्ताधारी पैनल की मंशा, नीयत, तानाशाही और थानेदारी दिख जाएगी।

प्रेस क्लब में मेरे पर हमला करने वालों की सदस्यता आज तक सुरक्षित है, लिखित शिकायत के बावजूद। जांच तक न की गयी घटना की। cctv फुटेज तक गायब। लंबी डील हो गयी होगी शायद। आजकल के थानेदार ऐसे ही कमाते हैं। मेरे चुनाव लड़ने का कारण भी वही दुख है। इतनी नाइंसाफी! शर्म करो यार। किस मुंह से खुद को वामपंथी / लोकतांत्रिक / प्रगतिशील कहते हो? कलंक हो तुम लोग। वामपंथ लोकतंत्र प्रगतिशीलता का नाम दागदार करते हो। तुम जैसों के दोहरे दोगले शातिर चरित्र के कारण ही देश में वामपंथ थंउस गया है। सही कहा जाए तो तुम लोग प्रतिक्रियावादी ताकतें हो जो वामपंथ का लबादा ओढ़कर नंगा नाच करते हुए अराजकता फैलाए हो और इस तरह वामपंथ का नाम भी बदनाम कर रहे हो।

आगे कहना ये है कि ये जो कथित वामपंथी सत्ताधारी पैनल है वो सिर से पांव तक गन्ध में डूबा हुआ है। वैसे ये पैनल वामपंथी है भी या नहीं, कहा नहीं जा सकता। इसमें गौर से देखेंगे तो कई सीधे सीधे राइटिस्ट दिखेंगे। कई जो कथित वामपंथी हैं, वो कदाचारी हैं, प्रेस क्लब के पापी हैं, आरोपी हैं। इनमें जो भी वामपंथी प्रत्याशी आपको लगे, उनसे पूछिए कि वो लोग प्रेस क्लब की बैलेंस शीट किस डर से और क्यों छुपाए हुए है। प्रेस क्लब मेम्बर्स की सालाना फीस डबल करने का प्रस्ताव क्यों ले आए हैं? आरोप है कि दारू की लाखों खाली बोतलों की बिक्री का पैसा भी ये सब खाए हैं। इन कदाचारियों के पास कहने के लिए कुछ नहीं हैं तो अपने पैनल में नए नवेले शामिल ‘मिस्टर भरोसेमंद क्रांतिकारी’ को भ्रमित कर चरित्र हनन और दुष्प्रचार पर उतारू हो गए हैं। बिना वर्जन लिए कुछ भी छाप रहे हैं और एजेंडा पत्रकारित के दलदल में गोते लगा रहे हैं। आप सबसे गुजारिश है कि प्रेस क्लब में चल रही बदलाव की बयार को और तेज करें। फ़र्ज़ी खबरों और दुष्प्रचारों से भ्रमित न हों। सत्य कभी एक पक्षीय नहीं होता। मैं वादा करता हूं, मेरे पैनल वाले भी अगर गलत निकले तो उनको बख्शून्गा नहीं। दबा कर वोट दीजिए, बदलाव के पक्ष में, बिना लेफ्ट राइट किए। अबसे प्रेस क्लब आम पत्रकारों का होगा। हम बताएंगे कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के असल मायनें क्या होते हैं।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

मूल खबर…

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1 Comment

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  1. rambihari pandey

    November 25, 2017 at 4:56 pm

    bahut sahi huaa

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