श्रम अफसरों के धमकाने के मामले से नई दुनिया प्रबंधन के होश उड़े

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित प्रसिद्ध अखबार नई दुनिया में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन हासिल करने के लिए यहां कार्यरत सभी पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। इसके लिए वे न्यायपालिका से लेकर सरकारी तंत्र के हर उस पुर्जे को आजमाने में मशगूल हैं जो उनकी इस मांग को पूरा कराने में निर्णायक सहायता कर सके। या कहें कि उन्हें मजीठिया दिलवा सके। इस जीवनदायी महान काम के लिए कर्मचारियों ने श्रम विभाग का भी दरवाजा खटखटाया है। खुशी की बात यह है कि श्रम महकमा खुलकर उनकी मदद में उतर आया है।

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई, भविष्य की रणनीति और लड़ने का आखिरी मौका… (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : सुप्रीम कोर्ट से अभी लौटा हूं. जीवन में पहली दफे सुप्रीम कोर्ट के अंदर जाने का मौका मिला. गेट पर वकील के मुहर लगा फार्म भरना पड़ा जिसमें अपना परिचय, केस नंबर आदि लिखने के बाद अपने फोटो आईडी की फोटोकापी को नत्थीकर रिसेप्शन पर दिया. वहां रिसेप्शन वाली लड़की ने मेरा फोटो खींचकर व कुछ बातें पूछ कर एक फोटो इंट्री पास बनाया. पास पर एक होलोग्राम चिपकाने के बाद मुझे दिया. जब तक कोर्ट नंबर आठ पहुंचता, केस की सुनवाई समाप्त होने को थी.

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में ‘नवदुनिया’ के सभी कर्मचारी लामबंद, 110 ने लगाई सुप्रीम कोर्ट में याचिका

भोपाल : मजीठिया वेतनमान को लेने के लिए देशभर के मीडियाकर्मियों ने संख्या में एकजुट कोकर सुप्रीमकोर्ट में अवमानना के खिलाफ याचिकाएं लगा रखीं हैं। पिछले एक साल से सुप्रीमकोर्ट द्वारा मजीठिया वेतनमान को लागू करने के सुनाए गए फैसले की प्रिंट मीडिया मालिक लगातार अवहेलना कर रहे हैं। भारतवर्ष में मीडिया को चौथे स्तंभ का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इससे अधिक दुर्भाग्य की बात क्या होगी कि समाज के गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की आवाज को उठाने वाले इन मीडियाकर्मियों को अपना ही हक लेने के लिए अपने ही मालिकों से लगातार लड़ाई लड़नी पड़ रही है। मामले पर एक वर्ष से लगातार चली सुनवाई के बाद अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी मालिकों को अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम और आखिरी तारीख 28 अप्रैल 2015 सुनिश्चित की है। 

नईदुनिया में इन दिनों पौरस के हाथी की भूमिका कौन निभा रहा है?

नईदुनिया, इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने नईदुनिया को अलविदा कहने के बाद अपने त्यागपत्र के साथ उन्होंने जो पत्र अपने साथियों को वाट्सएप के माध्यम से भेजा है, वह नीचे दिया जा रहा है. अरविंद दो साल से वरिष्ठ विशेष संवाददाता थे. एक साल से सिटी हेड की भूमिका निभा रहे थे.

‘नईदुनिया’ से अरविंद तिवारी और विनोद पुरोहित गए

‘नईदुनिया’ के इंदौर एडीशन में एक बार फिर उठा-पटक का दौर शुरू हो गया है। ताजा खबर के मुताबिक स्थानीय संपादक विनोद पुरोहित और सिटी हेड अरविंद तिवारी ने ‘नईदुनिया’ से इस्तीफ़ा दे दिया। विनोद पुरोहित ने 5 दिन पहले इस्तीफ़ा दिया, जबकि अरविंद तिवारी ने रविवार को इस्तीफ़ा दिया! स्थानीय संपादक की कुर्सी कौन संभालेगा, अभी तय नहीं हुआ!

आनंद पांडे ने ‘नईदुनिया’ ज्वाइन किया

‘भड़ास’ ने 17 नवंबर को खबर दी थी कि ‘आनंद पांडे संभालेंगे नईदुनिया को’. ये बात सही निकली. 24 नवंबर को आनंद पांडे ने बतौर चीफ एडीटर ‘नईदुनिया’ ज्वाइन कर लिया. आनंद पांडे के फिर ‘नईदुनिया’ में प्रवेश के पीछे विनय छजलानी का हाथ माना जाता है. ये संभावना इसलिए जाहिर की जा रही है क्योंकि ‘नईदुनिया’ में भले ही जागरण ग्रुप की मिल्कियत है, पर अभी भी विनय छजलानी के पास कुछ हिस्सेदारी है.

प्रशासन ने अभय छजलानी से जमीन छीनी

‘नईदुनिया’ के मालिक होने के कारण जिस अभय छजलानी (उर्फ़ अब्बूजी’) की इंदौर और मध्यप्रदेश में तूती बोलती थी, अब वे ही नई-नई परेशानियों में घिरते जा रहे हैं. इंदौर जिला प्रशासन ने अभय छजलानी की मिल्कियत वाले टेबल टेनिस ट्रस्ट के ‘अभय खेल प्रशाल’ को जमीन नपती में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का दोषी पाया और करीब आधा एकड़ से ज्यादा जमीन छीन ली.

मजीठिया वेज बोर्ड देने से पहले नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा नई दुनिया प्रबंधन!

श्रवण गर्ग के नई दुनिया से विदा होने के बाद पत्रकारों पर बिजनेस लाने के लिए दबाव दिया जाने लगा है. पिछले माह 17 सितंबर को जबलपुर मुख्यालय में ब्यूरो की मीटिंग की गई. मीटिंग में इंदौर से भी कुछ लोग आए थे. मीटिंग में पत्रकारों से कहा गया कि अब आपको न्यूज के साथ बिजनस और सर्कुलेशन भी देखना है. इसके बाद इसी माह 15 नंवबर को एक बार फिर मीटिंग का आयोजन जबलपुर कार्यालय में किया गया. इस मीटिंग में सभी ब्यूरो को अलग अलग बुलाकर डांट पिलाई गई. निकाले जाने की धमकी भी दी गई. मीटिंग के बाद से देखने में आ रहा है कि न सिर्फ बिजनेस बल्कि न्यूज में भी डेस्क प्रभारियों के रंग बदल गए हैं.

जागरण प्रबंधन से अपील, श्रवण गर्ग के बाद नई दुनिया के संपदाकीय पृष्ठ को भी मुक्ति दिलाये

Awadhesh Kumar : आजकल मैं यह देखकर आश्चर्य में पड़ रहा हूं कि आखिर नई दुनिया में जागरण के छपे लेख क्यों छप रहे हैं। जागरण इस समय देश का सबसे बड़ा अखबार है। उसका अपना राष्ट्रीय संस्करण भी है। जागरण प्रबंधन ने नई दुनिया को जबसे अपने हाथों में लिया उसका भी एक राष्ट्रीय संस्करण निकाला जो रणनीति की दृष्टि से अच्छा निर्णय था। पर उस अखबार को जागरण से अलग दिखना चाहिए।

‘नईदुनिया’ से विदा हुए श्रवण गर्ग अब दिल्ली में लांच कराएंगे ‘दबंग दुनिया’

भड़ास की खबर अंततः सही साबित हुई. नईदुनिया’ के प्रधान सम्पादक की कुर्सी से श्रवण गर्ग 31 अक्टूबर को विदा हो गए. इस आशय की खबर ‘भड़ास’ ने 18 सितम्बर को दी थी. जागरण मैनेजमेंट ने श्रवण गर्ग को दिल्ली बुलाकर उन्हें हटाए जाने की जानकारी दी. इसके बाद ही वे इंदौर लौटे और एडिटोरियल के सीनियर्स को बुलाकर बता दिया कि वे ‘नईदुनिया’ से जा रहे हैं, आज उनका आखरी दिन है.