केसर सिंह के घर के सामने पी7 के आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों का प्रदर्शन

चिटफंड कंपनी पीएसीएल द्वारा संचालित न्यूज चैनल पी7 न्यूज भले बंद हो गया हो लेकिन इसके कर्मियों की दिक्कतें लगातार जारी है. यहां काम करने वालों की एक बड़ी संख्या ऐसी है जिसे अभी तक पूरा भुगतान नहीं मिला है. ये सैकड़ों कर्मी अपने फुल एंड फाइनल पेमेंट के लिए लगातार आंदोलनरत हैं. पी7 के नोएडा स्थित दफ्तर से लेकर पी7 के डायरेक्टर केसर सिंह के घर तक ये कर्मी अपनी आवाज उठा रहे हैं.

खुश खबरी : पी7 न्यूज के हड़ताली और आंदोलनकारी कर्मियों का हुआ फुल एंड फाइनल सेटलमेंट

पी7 न्यूज चैनल के मीडियाकर्मियों ने अपने हक के लिए दो-दो बार आफिस पर कब्जा किया और लंबा व संगठित आंदोलन चलाया. इसका रिजल्ट उन्हें अब मिला. हर तरफ से दबावों के कारण झुके प्रबंधन ने अपने वादे के अनुरूप कर्मियों का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कर दिया. इसे कहते हैं जो लड़ेगा वो जीतेगा. जो डरेगा, झुकेगा वो हारेगा. पी7 न्यूज चैनल के करीब दो सौ कर्मचारियों को इस फाइनल सेटलमेंट का लाभ मिला है.

पी7 चैनल के कर्मियों के दूसरे राउंड वाले आंदोलन को समर्थन देने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय भी पहुंचे थे. साथ में हैं वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्द्धन त्रिपाठी.

आंदोलनकारी पत्रकारों के जिद और जुनून की हुई जीत, फिर झुका धोखेबाज पी7 प्रबंधन

पिछले कई दिनों से 24×7 आंदोलन कर रहे पी7 न्यूज चैनल के कर्मियों को बड़ी जीत हासिल हुई है. पी7 चैनल के आफिस पर कब्जा जमाए आंदोलनकारियों के दबावों और चौतरफा प्रयासों को नतीजा यह हुआ कि पुलिस, प्रशासन, लेबर डिपार्टमेंट के दबाव के आगे चैनल प्रबंधन ढेर हो गया और सारा बकाया चुकाने के लिए राजी हो गया, वह भी नियत समय पर. नवंबर महीने की सेलरी तुरंत मिल जाएगी सभी को. 15 जनवरी को फुल एंड फाइनल पेमेंट देने का जो पूर्व का वादा था, वह कायम रहेगा और उसी रोज सारा हिसाब कर सभी के एकाउंट में डिपोजिट करा दिया जाएगा. साथ ही फुल एंड फाइनल पेमेंट होने तक पी7 चैनल प्रबंधन चैनल से जुड़ी कोई भी संपत्ति नहीं बेच सकेगा.

ये संपादक लोग अपने चैनल के अंदर कर्मचारियों के चल रहे सतत् शोषण-उत्पीडऩ से अनजान क्यों बने रहते हैं

: मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट की नोटिस को चैनलों ने भी खबर आइटम बनाने की जहमत नहीं उठाई : ‘पी 7 चैनल के पत्रकार कर्मचारी लंबी लड़ाई के मूड में हैं।’ इस चैनल के पत्रकारों के जारी आंदोलन और उनकी तैयारियों की बाबत भड़ास पर प्रकाशित इस पंक्ति सरीखी अनेक पंक्तियों एवं फोटुओं-छवियों से पूरी तरह साफ हो जाता है कि इस चैनल के पत्रकार कर्मचारी अपने मालिक की बेईमानी, वादाखिलाफी, कर्मचारियों को उनका हक-पगार-सेलरी-बकाया-दूसरे लाभ देने के लिए किए गए समझौते के उलट आचरण-बर्ताव करने का दोटूक, फैसलाकुन, निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार-तत्पर-सक्रिय हो गए हैं। उनके रुख से साफ है कि वे किसी भी सूरत में झुकेंगे नहीं और अपना हक लेकर, अपनी मांगें पूरी करा कर रहेंगे।

इंडिया वांट्स टू नो, व्हाई मीडिया इज सो इनसेन्सिटिव अबाउट इट्स ओन पीपल! क्योंकि ‘सच ज़रूरी है’

‘सच ज़रूरी है’ की टैगलाइन के साथ ख़बरों के बाज़ार में कुछ सालों तक सच का कारोबार करने वाला न्यूज चैनल पी7 बंद हो गया। 400 से ज्यादा स्थाई कर्मचारी एक झटके में सड़क पर आ गए और आजकल वो अपने हक के लिए दफ्तर में धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। वो लोग जिन्होंने इस चैनल को एक मुकाम पर पहुंचाने के लिए जी-जान लगाकर काम किया वही लोग आज मालिकान के सामने अपनी सैलरी और बकाया रकम के भुगतान के लिए धरने पर बैठने को मजबूर हैं। अपने ही मेहनत की कमाई पाने के लिए उन्हें कानून का सहारा लेना पड़ रहा है।

पी7 के आंदोलनकारी पत्रकारों की इस छिपी प्रतिभा को देखिए

Yashwant Singh : आंदोलन अपने आप में एक बड़ा स्कूल होता है. इसमें शरीक होने वाले विभिन्न किस्म की ट्रेनिंग लर्निंग पाते हैं. सामूहिकता का एक महोत्सव-सा लगने लगता है आंदोलन. अलग-अलग घरों के लोग, अलग-अलग परिवेश के लोग कामन कॉज के तहत एकजुट एकसाथ होकर दिन-रात साथ-साथ गुजारते हैं और इस प्रक्रिया में बहुत कुछ नया सीखते सिखाते हैं. पी7 न्यूज चैनल के आफिस पर कब्जा जमाए युवा और प्रतिभावान मीडियाकर्मियों के धड़कते दिलों को देखना हो तो किसी दिन रात को बारह बजे के आसपास वहां पहुंच जाइए. संगीत का अखिल भारतीय कार्यक्रम शुरू मिलेगा.