‘शुक्रवार’ मैग्जीन ने श्रवण गर्ग पर चापलूसी भरे लेख का प्रतिवाद नहीं छापा तो अनिल जैन ने एफबी पर किया सार्वजनिक

Anil Jain : ‘शुक्रवार’ पत्रिका ने अगस्त महीने के अपने प्रथम अंक में ‘कई बार, कई अखबार’ शीर्षक से एक लेख छापा था। यह लेख कई अखबारों में रिपोर्टर से लेकर संपादक के पद पर रह चुके श्रवण गर्ग पर केंद्रित था। अतिशय चापलूसी युक्त और तथ्यों से परे इस लेख पर प्रतिक्रियास्वरुप मैंने एक तथ्यपरक लेख ‘शुक्रवार’ के संपादक को भेजा था। उम्मीद थी कि स्वस्थ पत्रकारिता के तकाजों का सम्मान करते हुए वे मेरे लेख को भी अपनी पत्रिका में जगह देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चूंकि यह पेड न्यूज या कि प्रायोजित खबरों का दौर है जिसमें सूचना और विज्ञापन का भेद खत्म सा हो गया है। ‘शुक्रवार’ भी चूंकि एक व्यावसायिक पत्रिका है, लिहाजा उसके संपादक/मालिक की व्यवसायगत मजबूरी समझी जा सकती है। बहरहाल मैं अपना लेख यहां दे रहा हूँ। मित्रों की सुविधा के लिए भी प्रस्तुत है।

सत्तर बरस के नई दुनिया अखबार को अपना संपादकीय लेख बाहरी व्यक्ति से लिखवाना पड़ रहा है!

Anil Jain : नईदुनिया के सात दशक….. नईदुनिया आज 70 बरस का हो गया। बधाई। एक पाठक के नाते इस अखबार से अपना भी लगभग चार दशक पुराना नाता है। अपन ने दो पारियों में दो अलग-अलग प्रबंधन के तहत इस अखबार में दिल्ली में रहते हुए लगभग तीन साल तक काम भी किया है। मुझे गर्व है कि इस अखबार का जो महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित कॉलम (संपादकीय) एक जमाने में श्री राजेंद्र माथुर, श्री राहुल बारपुते और श्री रणवीर सक्सेना जैसे ज्येष्ठ और श्रेष्ठ चिंतक-पत्रकार लिखते थे, वही कॉलम मैंने भी वरिष्ठ पत्रकार श्री मधुसूदन आनंद और श्री आलोक मेहता के साथ कोई साढे तीन साल तक (तीन साल नईदुनिया की सेवा में और सात महीने तक नईदुनिया से बाहर रहते हुए) लिखा है और अधिकतम आजादी के साथ लिखा है।

श्रवण गर्ग की फ्री प्रेस से विदाई पर पत्रकार अनिल जैन ने फेसबुक पर लिखा एक विवादित पोस्ट

Anil Jain : श्रवण गर्ग की हकीकत… किसी भी व्यक्ति के नौकरी गंवाने की खबर से शायद ही किसी को सुकून मिलता हो! लेकिन श्रवण गर्ग की फ्री प्रेस से बिदाई की खबर जब परसों तीन मित्रों से एक के बाद एक करके मिली तो अपन को न तो जरा भी आश्चर्य हुआ और न ही कोई अफसोस। जिस बदमिजाज, बदजुबान, भ्रष्ट-निकृष्ट, न्यूनतम मानवीय गुणों से रहित और परम परपीडक व्यक्ति ने अपने पूरे करिअर के दौरान कई काबिल और ईमानदार लोगों की नौकरी खाई हो, दलालों-बेईमानों को प्रमोट किया हो, अपने सहकर्मियों के स्वाभिमान से खिलवाड करना जिसका प्रिय शगल रहा हो, जो महिला सहकर्मियों को बेहूदा टिप्पणियों से जलील करना अपनी शान समझता हो और जो अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी को भी नुकसान पहुंचाने में किसी भी हद तक गिरने को तत्पर रहता हो, ऐसे व्यक्ति की नौकरी जाने पर किसी को अफसोस होना भी क्यों चाहिए?

जब एक लेख पर चिदंबरम के आफिस से श्रवण गर्ग को बुलावा आया….

Abhishek Srivastava : बात 2010 की है। मैं दैनिक भास्‍कर में था। ‘समय’ नाम का एक पन्‍ना निकालता था जिसमें समकालीन विषयों पर लेख होते थे। एक दिन हमारे मित्र Navin Kumar ने एक लेख भेजा। मैंने लगा दिया। छप गया। दो दिन बाद सम्‍पादक श्रवण गर्ग ने मेरे वरिष्‍ठ विमल झा को और मुझे केबिन में बुलाया। माथे पर चुहचुहाता पसीना पोंछते हुए बोले, ”अब बताइए, मैं क्‍या जवाब दूं? चिदंबरम के ऑफिस से बुलावा आया है इस लेख पर…।” और ऐसा कहते हुए उन्‍होंने अखबार सामने पटक दिया।

इसी लेख पर श्रवण गर्ग को चिदंबरम के आफिस ने तलब किया था…


आनंद पांडे का ओहदा इसलिए सिकुड़ गया!

जब ‘नईदुनिया’ में आनंद पांडे की आमद हुई, तो समझा गया था (और यही सच भी था) कि वे श्रवण गर्ग की जगह लेंगे, यानी चीफ एडीटर होंगे और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के सभी 6 एडीशन संभालेंगे. लेकिन, बाद में आनंद पांडे को सिर्फ मध्यप्रदेश का ग्रुप एडीटर (वास्तव में स्टेट हेड) बनाया गया. अंदर की ख़बरों के मुताबिक ये फैसला ‘नईदुनिया’ रायपुर के एडीटर रुचिर गर्ग की आपत्ति के कारण किया गया.

आनंद पांडे ने ‘नईदुनिया’ ज्वाइन किया

‘भड़ास’ ने 17 नवंबर को खबर दी थी कि ‘आनंद पांडे संभालेंगे नईदुनिया को’. ये बात सही निकली. 24 नवंबर को आनंद पांडे ने बतौर चीफ एडीटर ‘नईदुनिया’ ज्वाइन कर लिया. आनंद पांडे के फिर ‘नईदुनिया’ में प्रवेश के पीछे विनय छजलानी का हाथ माना जाता है. ये संभावना इसलिए जाहिर की जा रही है क्योंकि ‘नईदुनिया’ में भले ही जागरण ग्रुप की मिल्कियत है, पर अभी भी विनय छजलानी के पास कुछ हिस्सेदारी है.

प्रशासन ने अभय छजलानी से जमीन छीनी

‘नईदुनिया’ के मालिक होने के कारण जिस अभय छजलानी (उर्फ़ अब्बूजी’) की इंदौर और मध्यप्रदेश में तूती बोलती थी, अब वे ही नई-नई परेशानियों में घिरते जा रहे हैं. इंदौर जिला प्रशासन ने अभय छजलानी की मिल्कियत वाले टेबल टेनिस ट्रस्ट के ‘अभय खेल प्रशाल’ को जमीन नपती में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का दोषी पाया और करीब आधा एकड़ से ज्यादा जमीन छीन ली.

मजीठिया वेज बोर्ड देने से पहले नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा नई दुनिया प्रबंधन!

श्रवण गर्ग के नई दुनिया से विदा होने के बाद पत्रकारों पर बिजनेस लाने के लिए दबाव दिया जाने लगा है. पिछले माह 17 सितंबर को जबलपुर मुख्यालय में ब्यूरो की मीटिंग की गई. मीटिंग में इंदौर से भी कुछ लोग आए थे. मीटिंग में पत्रकारों से कहा गया कि अब आपको न्यूज के साथ बिजनस और सर्कुलेशन भी देखना है. इसके बाद इसी माह 15 नंवबर को एक बार फिर मीटिंग का आयोजन जबलपुर कार्यालय में किया गया. इस मीटिंग में सभी ब्यूरो को अलग अलग बुलाकर डांट पिलाई गई. निकाले जाने की धमकी भी दी गई. मीटिंग के बाद से देखने में आ रहा है कि न सिर्फ बिजनेस बल्कि न्यूज में भी डेस्क प्रभारियों के रंग बदल गए हैं.

श्रवण गर्ग और नई दुनिया संबंधी मेरी अपील पर एक साथी इतनी तीखी प्रतिक्रिया देंगे, यह कल्पना न की थी : अवधेश कुमार

: यह पत्रकारिता के व्यापक हित के लिए लिखा गया : मेरी एक सार्थक और सकारात्मक अपील पर, जिसकी आम पत्रकारों ने और स्वयं जागरण एवं नई दुनिया के पत्रकारों ने स्वागत किया, हमारे एक साथी के अंदर इतनी तीखी प्रतिक्रिया पैदा हो जाएगी (जो भड़ास पर प्रकाशित है), यह मेरे कल्पना से परे था। लेकिन उनको अपनी प्रतिक्रिया देने की आजादी है। जीवंत समाज में इस तरह बहस होनी भी चाहिए।  पर यहां निजी स्तर की कोई बात न थीं, न है। यह पत्रकारिता के व्यापक हित को ध्यान में रखकर लिखा गया है। इसमें तो सभी खासकर हिन्दी और भाषायी पत्रकारों को प्रसन्न होना चाहिए था।

जागरण प्रबंधन से अपील, श्रवण गर्ग के बाद नई दुनिया के संपदाकीय पृष्ठ को भी मुक्ति दिलाये

Awadhesh Kumar : आजकल मैं यह देखकर आश्चर्य में पड़ रहा हूं कि आखिर नई दुनिया में जागरण के छपे लेख क्यों छप रहे हैं। जागरण इस समय देश का सबसे बड़ा अखबार है। उसका अपना राष्ट्रीय संस्करण भी है। जागरण प्रबंधन ने नई दुनिया को जबसे अपने हाथों में लिया उसका भी एक राष्ट्रीय संस्करण निकाला जो रणनीति की दृष्टि से अच्छा निर्णय था। पर उस अखबार को जागरण से अलग दिखना चाहिए।

‘नईदुनिया’ से विदा हुए श्रवण गर्ग अब दिल्ली में लांच कराएंगे ‘दबंग दुनिया’

भड़ास की खबर अंततः सही साबित हुई. नईदुनिया’ के प्रधान सम्पादक की कुर्सी से श्रवण गर्ग 31 अक्टूबर को विदा हो गए. इस आशय की खबर ‘भड़ास’ ने 18 सितम्बर को दी थी. जागरण मैनेजमेंट ने श्रवण गर्ग को दिल्ली बुलाकर उन्हें हटाए जाने की जानकारी दी. इसके बाद ही वे इंदौर लौटे और एडिटोरियल के सीनियर्स को बुलाकर बता दिया कि वे ‘नईदुनिया’ से जा रहे हैं, आज उनका आखरी दिन है.

‘नईदुनिया’ के गिरते आँकड़ों पर चिंतन

‘नईदुनिया’ का बाजार धीरे-धीरे किस तरह गिर रहा है, ये बातें मीडिया में अभी तक खुसुर-पुसुर  सीमित थी। लेकिन, अब ये बातें ‘नईदुनिया’ के सीनियर्स की मीटिंगों में भी गंभीरता से की जाने लगी है। 4 अगस्त को ‘नईदुनिया’ के इंदौर दफ़्तर में हुई मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 6 रेसीडेंट एडिटर्स और मार्केटिंग हेड्स की मीटिंग में अखबार में गिरावट को लेकर गंभीर चिंतन हुआ। ‘नईदुनिया’ के मार्केटिंग हेड सौरभ भटनागर ने सभी 6 एडीशंस के मार्केटिंग और सर्कुलेशन के गिरते आंकड़ों का ब्यौरा दिया! उन्होंने बताया कि बीते साल के दौरान ‘नईदुनिया’ के सभी सिटी और उपकन्ट्री के सर्कुलेशन और मार्केटिंग में 17% से 19% तक गिरावट आई है! सिर्फ रायपुर के सिटी एडीशन ने 2% की बढ़त दर्ज की है।