‘नेशन लाइव’ न्यूज चैनल के नाम पर ठगी का धंधा जोरों पर, कइयों के पैसे फंसे

Avnish Jain : राजेश तिवारी, जो ठीक से चल भी नहीं सकते हैं, दिव्यांग हैं, को पत्रकार बनाने के सपने दिखाये. चैनल डिपोजिट के नाम पर 10,000 लिए. ऊंचे सपने दिखाये. मगर Nation live के बंटी और बबली ने सारी मानव संवेदना को ताक पर रखकर एक दिव्यांग के साथ ठगी कर ली. 10,000 मे सिर्फ एक identity card दिया गया. हद कर दी दानवता की. ऐसे लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.

Kumar Amitesh से मगध ब्यूरो बनाए जाने के नाम पर ठगी. Amit Singh से बिहार ब्यूरो बनाने के नाम पर ठगी. Vikas Aggarwal से मथुरा ब्यूरो के नाम पर ठगी. बंटी और बबली कब तक ठगी करेंगे. Mib के लोग कब करेंगे Nation live news channel के खिलाफ कार्रवाई..

अवनीश जैन की एफबी वॉल से.

Kumar Amitesh : Nation Live News channel के बिहार cordinetor राजीव रंजन ने बीते माह अमित सिंह को बिहार ब्यूरो दिलवाया, channel लेट चालू होने के कारण हमारे कुछ ज़िले के पत्रकार बंधु से पैसे की मांग की. राजीव रंजन ने ब्यूरो को पैसा देने को कहा. हमने चार ज़िले से पैसा दिलवा दिया. आज channel ने मुझे बाहर का रास्ता दिखाया. लेकिन आज चार ज़िले के पत्रकारों को भी इन लोगों ने हटा दिया. आज मुझे बेगुनाह होते हुये भी जान से मारने व अपहरण करने की धमकी मिल रही है. राजीव रंजन ने मेरी कोई मदद करने से इनकार कर दिया है… राजीव रंजन ने मुझे बुरी तरह से फंसाया है… क्या यही है लोकतंत्र का चोथा स्तंभ…

कुमार अमितेश की एफबी वॉल से.

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नापतोल.कॉम के फर्जी मैनेजर ने वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत अस्थाना की पत्नी को ठगने की कोशिश की

Shrikant Asthana : वेब खरीददारी भी आपको ठगों के जाल में फंसा सकती है। विभिन्न साइटों पर खरीदारी करने में दिया गया फोन नंबर ठगी के रैकेटों के हाथ पड़ जाते हैं और वे आपको फोन करके बताते हैं कि आपका यह इनाम निकला है। इसे हासिल करने के लिए आप अमुक खाते में इतनी रकम जमा करायें तो ईनाम आपको भेजा जाए। ऐसे ही एक ठग ने आज सुबह श्रीमती सुष्मिता को नापतोल.कॉम का मैनेजर बताते हुए किया।

अपना नाम उमेश वर्मा बताने वाले इस व्यक्ति ने 07631994793 से काल करते हुए इनकी एक खरीदारी का जिक्र करते हुए लकी ड्रा में 12,80,000 मूल्य की कार निकलने और उसे पाने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस के 6500 रुपये स्टेट बैंक के खाते में जमा कराने की बात कही।

श्रीमती सुष्मिता ने इस फोन के बाद नापतोल.कॉम पर बात की तो पता चला न ऐसा कोई व्यक्ति वहां है न ही कोई ऐसा ड्रा हुआ है। बाद में ठग को फोन कर और जानकारी चाही गई और सवाल किए गये तो वह गाली-गलौज पर उतर आया। इस घटना की जानकारी मेरठ पुलिस के साइबर सेल को दे दी गई है। ठगी के ऐसे प्रयास पर पुलिस कार्रवाई का अब इंतजार है।

मेरठ में रहने वाले और कई अखबारों में संपादक के तौर पर कार्य कर चुके वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत अस्थाना की एफबी वॉल से.

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संपादक पर ठगी के विज्ञापन का दायित्व क्यों न हो?

Vishnu Rajgadia : संपादक पर ठगी के विज्ञापन का दायित्व क्यों न हो? किसी राज्य में भूख से किसी एक इंसान की मौत होने पर राज्य के मुख्य सचिव को जवाबदेह माना गया है। जबकि मुख्य सचिव का इसमें कोई प्रत्यक्ष दोष नहीं। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने सीधे मुख्य सचिव पर दायित्व सौंपा है ताकि राज्य की मशीनरी दुरुस्त रहे।

इसी तरह, अख़बार में विज्ञापन छपवाकर कोई ठगी की जा रही हो, तो इसकी जाँच करके इसे रोकने का पहला दायित्व उस अख़बार के संपादक पर है। ध्यान रहे कि उसी ठगी के पैसे से विज्ञापन की राशि का भुगतान होता है। यानी ठगी से अर्जित लाभ का शेयर अख़बार को भी मिलता है। ठगी के शिकार बेरोजगार अगर अख़बार से विज्ञापन की राशि की वसूली की मांग करें, तो क्या इज्जत रह जायेगी अख़बार की?

झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार विष्णु राजगढ़िया की एफबी वॉल से. कुछ प्रमुख कमेंट्स यूं हैं :

Krishna Mohan आज का संपादक बेबस और लाचार होता है। वह किसी भी विज्ञापन पर रोक नहीं लगा सकता। यदि विज्ञापन पर रोक लगाने की कोशिश करेगा तो उसी समय उसकी छुट्टी हो जायगी। पहले संपादक ने नाम पर अखबार बिकता था। संपादक अखबार का स्टैंडर्ड बनाए रखता था ।विज्ञापन के लिए वह अपने हिसाब से जगह दिया करता था। अब वैसी बात नहीं है। अब यदि संपादक की वजह से विज्ञापन छूट जाएगा तो उस पर कार्रवाई हो जायगी। संपादक हमेशा अपनी नौकरी बचाने के ही चक्कर में लगा रहता है। यही कारण है कि जैकेट टाइप का विज्ञापन प्रचलन में आया है। ऐसी स्थिति में विज्ञापन के लिए सीधे तौर पर प्रबंधक को दोषी माना जाए किसी संपादक को नहीं।

Vishnu Rajgadia : Krishna Mohan jee, संपादक अगर किसी विज्ञापन को रोक नहीं सकता, तब भी वह उस ठगी के विज्ञापन की असलियत बताने वाली खबर तो छाप सकता है न! आखिर उसकी भी कोई सामाजिक जिम्मेवारी है।

शैलेंद्र शांत : प्रबंधक या प्रकाशक पर

Vishnu Rajgadia शैलेन्द्र शांत जी, प्रबंधक और प्रकाशक तो धंधे के लिये ही बैठे हैं। लेकिन संपादक तो नैतिकता और देश हित की बात करता है न!

शैलेंद्र शांत : अब आप तो ऐसा न कहें, सम्पादक खबरों-सम्पादकीय सामग्री के लिये जिम्मेदार होता है। अगर सम्पादक मालिक भी हो तो वह तय कर सकता है।

Vishnu Rajgadia अख़बार में छपे हर शब्द की जिम्मेवारी संपादक पर है। विज्ञापन की भी। यह तो कानूनी बात है। कोई केस कर दे समझ जाएंगे संपादक जी।

शैलेंद्र शांत : इसी से बचने के लिये डिस्कलेमर छापा जाने लगा है !

Vishnu Rajgadia जैसे होटल में खाना में जहर डालकर दे दे और बिल में लिखा हो कि पानी की जाँच आप खुद कर लें?

Anami Sharan Babal एड में क्या छप रहा है इससे मेरे ख्याल से संपादक का कोई लेना देना नहीं होना जरूरी है क्या छप रहा हैयह सरकार का अधिकार है। यहीं पर से तो पत्रकारिता चालू होती है यदि सरकार कोई भी झूठ छपवाने के लिए आजाद है तो संपादक भी अपने रिपोर्टरों को एक निर्देश दे कि हमें इस एड की असलीयत पर खबर चाहिए । यह काम कोई रिपोर्टर स्वत विवेत से या संपादक क्यों नहीं करते । संपादक अपना धर्म अदा करे सब काम सरकार और कोर्ट पर नहीं एक पत्रकार का काम यही तो है कि झूठ को बेपर्दा करे तो करे कौन रोक रहा है। पर यहां पर तो सरकार के खिलाफ लिखते पेशाब आने लगती है कि कहीं एड ना बंद हो जाए तो क्या खाक खाकर लिखएंगे

Bips Ranchi अखबार सिर्फ विज्ञापन पेज पर यह लिखना छोड़ दे कि ”छापे गये विज्ञापन की जाँच कर लें, अखबार की किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं” तब देखिये

Vishnu Rajgadia इस लिखने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर किसी विज्ञापन के कारण ठगी का शिकार व्यक्ति चाहे तो ठग गिरोह के खिलाफ केस करते हुए विज्ञापन की राशि में से अपनी राशि की वसूली की मांग कर सकता है।

Bips Ranchi गुरु जी मेरा कहना है की “जाँच” रीडर क्यू करे? वो तो अखबार के भरोसे उस विज्ञापन पर भरोसा कर बैठता है. अगर जिमेदार सम्पादक / अखबार नही तो सर्वेयर से सर्ये क्यू करवाते है की कौन अखबार पढ़ते या बूकिँग करवाना चाहते है. स्तर गिर रहा है गुरु जी सभी अखबार है. जैसे की वो बोला जाता है ना… दारोगा का मतलब क्या होता है ? दा रो गा : रो के दा या गा के दा. देना तो होगा. वोही हाल सभी अखबार का है. विज्ञापन चाहे कोई भी हो सिर्फ पैसा आना चाहिये.

Suraj Khanna आपने बिलकुल सही पकड़ा है मेरे ख्याल से अख़बार हम खरीद कर पढ़ते है यानि अखबार एक वस्तु है जिसे मूल्य देकर ख़रीदा गया यानी खरीददार एक उपभोक्ता है अतः उसके द्वारा ख़रीदे गए अखबार के भ्रामक विज्ञापन से कोई ठगा जाता है तो उसे अखबार के विरुद्ध उपभोक्ता फोरम में शिकायत करनी चाहिए साथ ही अख़बार के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज करानी चाहिए।

Vishnu Rajgadia यह भी सही है।

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सावधान… RBI अधिकारी बनकर बैंक डिटेल मांग रहे ठग

3 जनवरी दोपहर के 3 बजे, मेरे नम्बर पर 07371008871 से कॉल आया। चूंकि मैं अननोन नम्बर रिसीव नहीं करता लेकिन ट्रू कॉलर पर नम्बर की डिटेल “चूतया” नाम से शो होता देख मेरा इंट्रेस्ट जागा। मुझे अच्छी तरह पता है कि फर्जी कॉल करके लोगों से ठगी करने वाले ऐसे नम्बरों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिये मैंने कॉल रिसीव किया और जो हमारी बातचीत हुई उसके अंश पढ़िये…

हैलो…कौन बोल रहा है?

जवाब आया सर… मैं RBI के हेड ऑफिस से बोल रहा हूं। हमारे बॉस मिस्टर राहुल हैं। और हम आपके ATM कार्ड और एकाउंट के बारे में बताना चाहते हैं।

मैंने बोला बताइये क्या बताना है?

जवाब आया सर… आपके कार्ड पेमेंट में प्रॉब्लम तो नहीं हो रही? क्योंकि हमारे सिस्टम के मुताबिक आपके कार्ड में कुछ प्रॉब्लम है।

इतना सुनते ही मुझे यकीं हो गया कि यह फेक कॉल ही है और सामने वाला अधिकारी बनकर मुझे डराकर मेरे एकाउंट और कार्ड की डिटेल पता करना चाहता है। फिर मैंने उससे पूछा कि RBI का बॉस (गवर्नर) कौन है? जवाब आया सर… राहुल जी हैं मैंने आपको पहले ही बताया।

फिर मैंने पूछा अच्छा यह बताइये RBI का डायरेक्टर कौन है? अब मजा देखिये मेरे हर सवाल का जवाब “राहुल” था। जबकि RBI में कोई व्यक्ति विशेष डायरेक्टर नहीं होता। लेकिन इतनी जानकारी इन ठगों को नहीं होती। अब जानिए इस नम्बर की हकीकत।

यूनिक पैटर्न का यह नम्बर फर्जी है। यानी यह नम्बर ट्रेस हो सके इसकी गुंजाईश कम ही है। बहरहाल नम्बर चूतया यानी “चूतिया”, मुर्ख, बेवकूफ शब्द से सेव है। नम्बर की लोकेशन “बिहार” दर्शा रहा है। इससे पहले मैं और कोई डिटेल पूछता सामने वाले ने फोन काट दिया। तो अभी तक यह पता था कि यह चोर-लुटेरे बैंक कर्मचारी बनकर ठगी करते थे लेकिन अब यह RBI वाले बनकर फोन करने लगे हैं यह भी जान लीजिये।

आशीष कुमार चौकसे
पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और ब्लॉगर
ashishchouksey0019@gmail.com

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कथित पत्रकार ने ‘इंडिया टीवी’ के नाम पर आधा दर्जन सरपंचों से लाखों रुपये की ठगी कर ली

अपने आपको पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति ने इंडिया टीवी के नाम पर आधा दर्जन सरपंचों को ठग लिया. छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा से खबर है कि अपने आपको इंडिया टीवी का पत्रकार बताते हुए शातिर ठग ने पहले सचिवों तथा सरपंचों से उनके गांव के विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली. फिर कुछ दिनों बाद वो वापस पहुंचकर समाचार के बदले पन्द्रह पंद्रह सौ रुपए की मांग करने लगा. पन्द्रह सौ रुपए का चेक दिए जाने पर उस शातिर ठग ने उसमें कूटरचना कर आधा दर्जन सरपंचों से लाखों रूपए ठग लिए. निर्माण कार्यों के लिए राशि निकलवाने बैंक पहुंचने पर सरपंचों को खाते में राशि नहीं होने पर ठगे जाने का अहसास हुआ जिसके बाद सरपंचों ने मामले की शिकायत जांजगीर थाने में की है.

ग्राम पंचायत हरदी हरि के सरपंच नारदप्रसाद कश्यप पिता लल्लूराम कश्यप ने बताया कि एक माह पूर्व एक व्यक्ति खुद को इंडिया टीवी का पत्रकार बताते हुए आया और गांव में हुए विकास कार्यों के बारे में इंटरव्यू लिया. फिर वहा सरपंच श्रीमती सुकबाई के पास पहुंचा तथा उससे भी गांव में हुए विकास कार्यों के संबंध में इंटरव्यू लिया. जाते समय समाचार चलने पर शुल्क लगने की बात कही. दो दिन बाद उसने समाचार के एवज में पन्द्रह सौ रूपए की मांग की. उस समय पैसा नहीं दिए जाने पर बाद में आने की बात कहकर वह चला गया.

20 जून 2016 को फिर आने पर सरपंच एवं सचिव ने अपने हस्ताक्षर कर उसे ग्रामीण बैंक शाखा जांजगीर का एक हजार पांच सौ रूपए का चेक क्रमांक 786269 पंचायत प्रस्ताव की कापी के साथ दे दिया. दो दिन बाद वापस गांव पहुंचकर ठग ने उस पंचायत प्रस्ताव के आधार पर बैंक से राशि नहीं निकलने की बात कहते हुए अपने हाथ से लिखकर लाए गए पंचायत प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जिस पर सरपंच एवं सचिव ने हस्ताक्षर कर दिए. 16 जुलाई को सांसद मद से ग्राम पंचायत हरदी हरि में बनवाए गए सीसी रोड का पैसा निकलवाने के लिए सरपंच एवं सचिव जब ग्रामीण बैंक की जांजगीर शाखा पहुंचे तो उन्हें अपने खाते में राशि नहीं होने और 6 लाख 1 हजार पांच सौ रूपए निकलवाए जाने की जानकारी हुई.

नवागढ़ सचिव संघ के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह गहलौत ने बताया कि अपने आपको इंडिया टीवी का रिपोर्टर बताने वाले उस ठग के शिकार नवागढ़ ब्लाक के ही आधा दर्जन पंचायत के सरपंच हुए हैं. शातिर ठग ने सभी से 1 हजार 5 सौ रूपए का चेक लिया था जिसमें कूटरचना कर ग्राम पंचायत जगमहंत के खाते से 3 लाख 1 हजार 5 सौ, हरदी हरि के खाते से 6 लाख 1 हजार 5 सौ, पचेड़ा के खाते से 2 लाख 1 हजार 5 सौ, ग्राम पंचायत गौद के खाते से 91 हजार 5 सौ तथा दो अन्य पंचायतों के खाते से भी लाखों रुपये निकाल लिए.

इंडिया टीवी के नाम से जो बिल ठग ने सरपंचों को दी है उसे देखते ही उसके फर्जी होने का अहसास हो रहा है. बिल में इंडिया टीवी का मोनो अथवा लेटर पेट के स्थान पर सामान्य रूप से ही इंडिया टीवी लिखा है तथा उसके कार्यालय के रूप में भारत टाकीज, जुब्लेरी बिल्डिंग इन्द्रपुरी भोपाल मध्यप्रदेश का पता तथा प्रधान कार्यालय शाप नं.9, शिवाजी नगर, एलएमरोड, बोरीबली वेष्ट, लैन्डमार्क माउस प्रोयसर चर्च मुम्बई 400103 भारत लिखा हुआ है. बिल में दिए ईमेल एड्रेस सहित इसके नियम और शर्ते इसे संदेहास्पद बनाते हैं जिसमें कंपनी के नाम पर चेक बनाए जाने की जगह चेक अथवा ड्राफ्ट प्रतिनिधि या ब्यूरो चीफ के नाम से ही बनाए जाने की बातें लिखी है वहीं संवाददाता के नाम के स्थान पर आशीष तिवारी लिखा गया है. थाना प्रभारी जांजगीर बी.एस. खूंटिया ने बताया कि सरपंचों द्वारा ठगी का शिकार होने की लिखित शिकायत की गई है. मामले की जांच के बाद उचित कार्यवाही की जावेगी.

नीचे दी गई तस्वीर में थाने में शिकायत करने पहुंचे ठगी के शिकार सरंपच और सचिव दिख रहे हैं.

छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के संपादक राजेश सिंह क्षत्री की रिपोर्ट.

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साधना न्यूज (एमपी-सीजी) के ठग संचालकों से बच कर रहिए, पढ़िए एक पीड़ित स्ट्रिंगर की दास्तान

संपादक
भड़ास4मीडिया
महोदय

मुझसे साधना न्यूज (मध्यप्रदेश छत्तीसगढ) के नाम पर 8 माह पूर्व विनोद राय के निजी खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए थे. इस रकम को खुद मैंने अपने खाते से भेजा था. परन्तु साधना न्यूज ने एक माह बाद ही किसी दूसरे को नियुक्त कर दिया. विनोद राय (इन्दौर, डायरेक्टर, साधना न्यूज) से रुपये वापस मांगने पर वे नये नये तरीके से टालते रहते हैं और आज कल करके कई प्रकार के बहाने से मुझे राशि लौटने से इनकार कर रहे हैं. मैं इसके लिए कई बार इन्दौर का चक्कर काट चुका हूं.

इस विषय में आदित्य तिवारी और एमके तिवारी को सूचित कर चुका हूं जो कि लोकायत पत्रिका एवं साधना न्यूज़ मध्य प्रदेश छत्तीसग़ढ के संचालक हैं. परन्तु मुझे राशि नहीं लौटाई जा रही है. मेरे द्वारा मोबाइल से फोन किए जाने पर फोन नहीं उठाया जाता और अब मेरा नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया है. इसके पहले शिवराज सिंह के भोपाल कार्यक्रम के लिए मैंने 80 हजार रुपये साधना न्यूज में दिया था, वह भी मैंने विज्ञापनदाता को वापस किया था, उसका भी कुछ निर्णय नहीं हो रहा.

विनोद राय के कहे अनुसार मैंने किसी को चेक दे दिया था परन्तु अब मेरे उपर वह व्यापारी चेक बाउन्स का केस कर देगा. बडी मुश्किल से शुक्रवार को विनोद राय से मेरी बात हुई थी  जिसमें उन्होंने सोमवार को राशि डालने का वादा किया था परन्तु आज भी समय निकल गया है. फोन नम्बर रिजेक्शन लिस्ट में डाल दिया है. मेरे पास तमाम सबूत हैं जिसके सहारे मैं इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने जा रहा हू. साथ ही पूरे मामले की जानकारी मीडिया जगत को भड़ास4मीडिया के माध्यम से देने जा रहा हूं.

धन्यवाद
आपका
राजेंद्र अग्रवाल
छिन्दवाडा, मध्य प्रदेश
मोबाइल नंबर : 9479906598, 810972555 , मेल : raj.agrawal011@gmail.com


ठगी का सुबूत यह आडियो है जिसमें विनोद राय पैसे लौटाने की बात तो करता है लेकिन लौटाता नहीं है… इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करके सुनिए… https://www.youtube.com/watch?v=BoTbx28diNg

ये हैं कुछ चैट जिससे साफ पता चलता है कि विनोद राय पैसे हड़पने का आरोपी है और पैसे लौटाने से इनकार कर रहा है….

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Flipkart पर कुछ भी ऑर्डर करने से पहले मेरी कहानी सुनिए

31 अगस्त 2015 का दिन. मेरे दिल में एक स्मार्टफोन लेने का विचार आया. मैं इंटरनेट पत्रकार हूं तो ये मेरे लिए काफी ज़रूरी भी था. मेरा पुराना स्मार्टफोन मेरी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा था और काम काफी प्रभावित हो रहा था. जो स्मार्टफोन मेरे बजट में था वह Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध था. मैंने Flipkart को एक मोटो-ई सेकेंड जेनरेशन फोन ऑर्डर कर दिया. मेरी परेशानी की शुरुआत यहीं से हुई.

 

जब हम बाजार जाते हैं तो पहले माल लेते हैं और फिर पैसा देते हैं, Flipkart पर भी ये सुविधा मौजूद है, लेकिन मैंने जैसे ही अपना पता गाजियाबाद दिखाया Flipkart ने मुझे कैश ऑन डिलीवरी का कोई ऑप्शन नहीं दिया. मुझे फोन की बेहद ज़रूरत थी तो मैंने उन्हें पैसा एडवांस दे दिया. मेरे एक दोस्त जिसके Flipkart अकाऊंट से मैंने ऑर्डर किया उसने भी मुझे आश्वस्त किया कि कोई बात नहीं ये अच्छी कंपनी है और सामान टाइम से दे देगी. Flipkart ने वादा किया कि वह मुझे 7 सितंबर तक फोन दे देगी लेकिन जब मुझे 7 तारीख तक फोन नहीं मिला तो मैंने Flipkart के फेसबुक अकाऊंट पर अपनी परेशानी बताई.

फेसबुक अकाऊंट पर इसलिए क्योंकि जो नंबर उन्होंने अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है उसने आधे-आधे घंटे फोन होल्ड पर रखने के बाद काट दिया, बिना किसी से बात कराए. तो मुझे थक कर सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा. मैंने जब अपनी परेशानी उनके फेसबुक अकाऊंट पर लिखी तो मुझे Flipkart की ओर से मेरे स्टेटस पर रिप्लाई आया कि हमारा लॉजिस्टिक पार्टनर 5000 रुपये से अधिक के मोबाइल डिलीवर करने में सक्षम नहीं है.

मेरा सवाल ये कि जब Flipkart ऐसा करने में सक्षम नहीं थी तो ऑर्डर लिया ही क्यों? और यदि ले लिया था तो उन्हें ये कब पता चला कि वे मुझे मोबाइल पहुंचाने में सक्षम नहीं हैं? क्या मेरे द्वारा सवाल पूछे जाने के बाद? और जब पता चल गया तो क्या उसी वक्त मेरा पैसा नहीं लौटाया जा सकता था?

मैंने Flipkart के रिप्लाई पर जवाब दिया कि आप लोग मेरा पैसा वापस कर दें. उनका रिप्लाई आया कि ‘हम मामले को देख रहे हैं, जल्द ही आपको अपडेट करेंगे.’ जब उन्होंने ऐसा कहा तो तारीख थी 8 सितंबर और वक्त था रात के 9 बजकर 29 मिनट. अगले दिन मुझे Flipkart की सोशल मीडिया टीम की ओर से फोन आया. उसने मुझे आश्वासन दिया कि जल्द ही मेरे पैसे लौटा दिए जाएंगे.

उसके आश्वासन पर मैंने और एक हफ्ता इंतजार किया लेकिन पैसा नहीं मिला. मतलब ये कि कंपनी ने ऑर्डर लिया, माल नहीं दिया और पैसा भी वापस करने में आनाकानी!! जो मैसेज Flipkart ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है वह ये है कि ‘जब हमें माल वापस मिल जाएगा तब रिफंड की प्रक्रिया शुरु की जाएगी’.

अब सवाल ये कि माल मुझे मिला नहीं, Flipkart के मुताबिक उसके पास भी नहीं है तो गया कहां? और इसमें मेरी गलती कहां है? अब Flipkart की किसी गलती या चूक की सजा मुझे क्यों? या तो मुझे स्मार्टफोन दे देते या फिर पैसा वापस लेकिन Flipkart ने ऐसा कुछ भी नहीं किया और 16 दिन गुजर गए.  एक डिजिटल पत्रकार का जीवन बिना स्मार्टफोन के कैसा होगा आप समझ सकते हैं. मैं इतना अमीर तो नहीं हूं कि एक जगह पैसा फंसाकर दूसरी जगह फिर से फोन ऑर्डर करूं, इसीलिए इंतजार कर रहा हूं कि Flipkart मेरा पैसा वापस कर दे तो मैं नया फोन ले सकूं.

Varun Kumar
digitalindian85@gmail.com

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सहारा वालों ने बिहार के सीएम के गांव की बूढ़ी लाचार महिला का सवा तीन लाख रुपये हड़पा

Regarding SAHARA maturity not paid to investor

Yashwant Sir,

Editor, www.Bhadas4Media.com

My mother Saroj Singh 70 years old is illeterate. Her SAHARA a/c control no- 20719201775, date 15-12-2003 maturity amount Rs 320000/-. Without her permission by keeping her in dark maturity amoung fixed in other scheme Receipt no-034005534023-43, Date 19-09-2014, Amount Rs 320000/-. This is the case of Bihar CM village Harnauth branch code (2071). branch Manager Mr Vijay Singh-09939205612, 09471004666.

Regarding this when I contact Mr Rajesh Singh Media Head TV, Noida on his Mobile no 09811170008 on 05-04-2015 at 9 am with my wife and friend he says “SAHARA main humse puch kar paisa jama karaye the, Main kuch nahi kar sakta. Main para banking main nahi hoon. paise lene ke liye sidhe tareke se baat karoo” After that his mobile switch off.

Yashwant g please help so that I may get back hard earned money without interest.

Regard,
Saroj Singh
Mother of Dinkar Prasad Singh
09891136359
dinkarprasadsingh@gmail.com

दिनकर प्रसाद सिंह द्वारा भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित.

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ग्वालियर में मीडिया और पुलिस का कथित गठजोड़, 2 करोड़ की खुली बंदरबांट!

खबर ग्वालियर से है। पुलिस, पत्रकारों, कुछ प्रादेशिक चैनल के ब्यूरो हैड और क्राईम ब्राँच के पुलिस कर्मचारियों, अधिकारीयों के गठजोड़ के बीच 2 करोड़ रुपये की बंदरबांट की गई है. चर्चा के मुताबिक एक प्रादेशिक चैनल के ब्यूरो हेड ने 3 अन्य प्रादेशिक चैनल के कारिंदो और लोकल चैनल व लोकल अख़बार के कुछ पत्रकारों एवं क्राइम ब्राँच के कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से 2 करोड़ रुपये हज़म किये हैं.

ग्वालियर में एक किसान की 40 करोड़ की पैतृक जमीन और सम्पत्ति दिल्ली के किसी बिल्डर ने 32 करोड़ में फाईनल कर सौदा कर लिया. बिल्डर सम्पत्ति खरीद रवाना हो गया, लेकिन जिस किसान को 32 करोड़ मिले उसे शहर के ब्लैकमेलर पत्रकारों ने इनकम टैक्स की रेड कराने सहित कई तरह से डरा धमकाकर 2 करोड़ रूपये वसूल लिए. 

चर्चा के मुताबिक पत्रकारों और पुलिस के बीच दो करोड़ का बंटवारा बराबर बराबर नहीं हो सका. चैनल के ब्यूरो हेड ने करीब डेढ़ करोड़ खुद के पास रख लिए और 50 लाख में बाकी सभी का मुंह बंद कराने की कोशिश की. बस इसी कारण ब्लैकमेलिंग का चिट्ठा खुल गया और बात बिगड़ गई. खबर अखबारों में भी छपी लेकिन पुलिस-प्रेस के गठजोड़ में सभी चोर चोर मौसेरे भाई मुँह में गुड़ रखकर एक दूसरे को कोस रहे हैं और चुप्पी साधे हैं.

अंदर की खबर तो ये भी है कि कुछ नामचीन प्रादेशिक चैनल के पत्रकारों ने राजधानी में बैठे अपने आकाओं तक कमाई का हिस्सा पहुंचा कर कर्सी सुरक्षित कर ली है और कुछ अभी अपने-अपने संस्थानों से फरार चल रहे हैं.  अख़बार की सुर्खियां बनीं कतरन उपर हाजिर है.

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यह ठगी है तो इस देश में कोई है जो इसे रोक सके!

Vishnu Rajgadia : यह ठगी है तो इस देश में कोई है जो इसे रोके? भारत सरकार द्वारा निर्मल भारत अभियान और स्वास्थ्य अभियान चलाये जाते हैं। अमर उजाला में चार जनवरी को एक विज्ञापन आया है। कोई ”अभियान फाउंडेशन” है जो यूपी में इन योजनाओं के लिए दसवीं बारहवीं पास बेरोजगारों को 11000 तक की नौकरी देगा। कुल 33072 पद हैं। अगर वाकई नियुक्ति हुई तो हर महीने सिर्फ वेतन में 30 करोड़ खर्च होगा। साल में लगभग 350 करोड़। केंद्र या राज्य सरकार के पास ऐसी कौन सी योजना है? या कि इस ”अभियान फाउंडेशन” को सीधे कुबेर का खजाना हाथ लग गया? मजे की बात यह है कि नौकरी लगेगी यूपी में, और आवेदन जमा होगा रांची जीपीओ के पोस्ट बाॅक्स नंबर 97 में।

एक और हिसाब देखिये। 33072 पद हैं। आवेदन के साथ 300 रुपये जमा करने हैं। एक पद के लिए औसत 25 आवेदन आये तो लगभग आठ लाख आवेदन आ सकते हैं। इससे 25 करोड़ से भी ज्यादा की रकम आ सकती है। पैरवी के नाम पर कुछ बेरोजगार अपनी जमीन या जेवर भी बेच डालेंगे। यह वास्तविक नियुक्ति है या ठगी? ऐसे विज्ञापन छापने वाले अखबार का कोई दायित्व है या नहीं?

जीपीओ के पोस्ट बाॅक्स क्या ठगी का माध्यम हैं? यूपी और झारखंड की सरकारें अगर ऐसी साफ दिखने वाली ठगी को रोकने लायक नहीं तो किसी आतंकी गिरोह का मुकाबला कैसे करेगी? क्या भारत सरकार के पास ऐसा कोई इंतजाम है जो केंद्र की योजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी को रोके? उन दसवीं-बारहवीं पास बेरोजगारों की सोचिये, जो बरसों से नौकरी की आस लगाये बैठे हैं और इस विज्ञापन से फिर एक झूठी आस लगाकर चार-पांच सौ रुपये गंवायेंगे, और कई महीनों इंतजार करेंगे। जिस समाज में शिक्षित और अग्रणी लोग ऐसी ठगी का साथ देते हों, या उसे देखकर भी अंधे बने रहते हों, वैसे समाज को धिक्कार।

वरिष्ठ पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट विष्णु राजगढ़िया के फेसबुक वॉल से.

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मनोरंजन टीवी के फर्जीवाड़ा ‘चेहरा पहचानो इनाम जीतो’ का एक शिकार मैं भी हूं

विषय : Fraud of Manoranjan TV

निदेशक
मनोरंजन टीवी
आदरणीय सर

आपके चैनल Manoranjan TV पर आने वाले ‘चेहरा पहचानो इनाम जीतो’ विज्ञापन के जरिए लोगों को पागल बनाने का काम किया जाता है. इसका एक शिकार मैं भी हुआ हूं. मेरे पास आज दिनांक 09 दिसंबर को फोन आया कि आपको 12 लाख 50 हजार रुपए इनाम में मिलने वाला है. इसे पाने के लिए मेरे से अभी तक इनाम देने वालों ने 86 हजार रुपए तक वसूल लिए हैं.

जब मैंने पैसे वापस करने के लिए कहा तो भी इन्होंने कहा कि इसके लिए 14 हजार रुपए और एकाउंट में डाल दो. आपसे निवेदन है कि आप इस संदर्भ में मदद करने की कृपया करें ताकि मुझ गरीब को न्याय मिल सके. मैं आपको वह मोबाइल नंबर दे रहा हूं जिसके जरिए मुझे लगातार फोन किया गया और पैसे मांगे गए. वह नंबर 08969362566 है.

सतीश चन्द शर्मा
कोटपूतली जयपुर राजस्थान
M. 09314090617
satishsharma.pa@gmail.com

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