माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

हे माई लॉर्ड, आपका निर्णय अदभुत रहा, पर उससे बड़े मामले में आप ‘अन्याय’ क्यों कर रहे हैं?

देश भर के वो सभी सैकड़ों पत्रकार सुप्रीम कोर्ट से हाथ जोड़कर अनुरोध कर रहे हैं जिन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में पूरे दमखम के साथ अपने अपने नाम पहचान के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपने अपने लालची-स्वार्थी और कानून विरोधी मालिकों के खिलाफ अवमानना याचिका वर्षों से दायर कर रखे हैं कि—-

हे प्रभुओं, हे माई लॉर्डों, तनिक ऐसी ही तेजी मजीठिया मामले में दोषी दिख रहे मीडिया मालिकों के मामले में भी दिखाओ या फिर हम पीडित पत्रकारों को ही हक मांगने का दोषी मानते हुए तिहाड़ जेल भिजवाओ ताकि कम से कम वहां रोटी तो शांति से मिले. कबसे सुनते आ रहे हैं कि समय से न्याय न मिलना भी अन्याय होता है (बकौल ग़ालिब- कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक…) लेकिन यहां तो प्रकरण भी सैकड़ों लोगों को है, पूरे एक स्तंभ का है, जिसे चौथा खंभा कहा जाता है…

हे माई लार्डों, सहारा मामले में पत्रकार के साथ बिलकुल ठीक सुलूक आपने किया… कानून और न्याय का सम्मान ऐसे ही बचेगा… लेकिन दर्जनों मगरमच्छ मीडिया मालिक इससे बड़े अपराध को खुलेआम कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के मान-सम्मान की खिल्ली उड़ा रहे हैं… तनिक आंखें खोलों प्रभुओं… हम लोगों के देवता आप ही लोग हो… देवता से तनिक कम न हो… लेकिन कभी कभी देवताओं पर भी गुस्सा आने लगता है भक्तों को… अब देर न करो क्योंकि बहुत अंधेर हो चुकी है हम मीडियाकर्मियों के साथ…

मजीठिया वेज बोर्ड प्रकरण असल में इस लोकतंत्र का एक ऐसा आइटम है जिसे पूरा का पूरा एक नए ‘राग दरबारी’ उपन्यास का प्लॉट कह सकते हैं, इस आइटम के जरिए कोई एक खंभा / स्तंभ नहीं बल्कि मुकम्मल पूरा लोकतंत्र नंगा होता जा रहा है… ईश्वर करें, कुछ बचे खुचे चीथड़े पहनाकर लोकतंत्र की इज्जत ढंक रखने में कामयाबी मिल सके ताकि देश की जनता और हम सबका भरोसा इसमें कायम रखने के लिए प्रचुर बहाना मिल सके, बतर्ज ग़ालिब-दिल को खुश रखने को ग़ालिब ये खयाल अच्छा है… फिलहाल एक पुरानी पोस्ट, पिछले साल अगस्त की, यहां शेयर कर रहा हूं… नीचे क्लिक करें…

भड़ास के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ह्वाट्सअप नंबर 9999330099

मजीठिया वेज बोर्ड की पिछली कुछ पोस्ट्स के शीर्षक यहां डाले जा रहे हैं ताकि मन करे किसी का तो इसे भी पढ़ ले और पीड़ित सैकड़ों मीडियाकर्मियों के दुख को महसूस कर सके…

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

xxx

 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *