माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

…सहारा का होटल न खरीद पाने वाले चेन्नई के एक वरिष्ठ पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी मान कर आनन-फानन में जेल भेज दिया… यह वरिष्ठ पत्रकार गिड़गिड़ाता रहा लेकिन जज नहीं पसीजे… पर मीडिया मालिक तो खुद एक बार सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित तक नहीं हुए और कोर्ट को चकरघिन्नी की तरह हिलाडुला कर, कोर्ट से समय पर समय लेकर अघोषित रूप से ललकारने में लगे हैं कि जेल भेज सको तो जरा भेज कर दिखाओ….

सवाल है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अवमानना पर अवमानना कर रहे मीडिया मालिकों के सिर पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कर रखी है अच्छी खासी कृपा… आखिर इन्हें जेल भेजने के लिए क्यों नहीं निकल पा रहा शुभ मुहुर्त और क्यों नहीं जग पा रहे सुप्रीम कोर्ट के जज साहिब लोग… एक वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना के मामले में लालची आदि बताते हुए जितनी तेजी से जेल भेजा गया, उतनी तेजी आखिर महा लालची मीडिया मालिकों के प्रकरण में क्यों नहीं दिखती… सवाल तो अब उठेंगे सुप्रीम कोर्ट पर भी क्योंकि पीड़ित मीडियाकर्मियों के सिर से उपर पानी बहने लगा है… 

पहले जानिए वरिष्ठ पत्रकार का प्रकरण जिसे सहारा के न्यूयार्क स्थित होटल को खरीदने के वादे से मुकरने पर जजों ने लानत-मलानत करते हुए आनन-फानन में जेल भेज दिया, उस पत्रकार के लाख गिड़गिड़ाने, कांपने, रोने और दस लाख रुपये तक जुर्माना भरने की अपील के बावजूद…

पढ़ने हेतु अगले पेज पर जाने के लिए नीचे क्लिक करें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अखबारों-मैग्जीनों में काम कर रहे / काम कर चुके मीडियाकर्मियों के लिए जरूरी संदेश

Yashwant Singh : दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, अमर उजाला, प्रभात खबर, हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, लोकमत, टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, राष्ट्रीय सहारा… जैसे दर्जनों छोटे बड़े अखबारों-पत्रिकाओं में कार्यरत / पूर्व कार्यरत मीडियाकर्मियों के ध्यानार्थ…

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से लाखों रुपये बकाया एरियर और सेलरी इकट्ठा पाने के लिए दावा करने का आखिरी सुनहरा मौका सामने है. इस संबंध में 30 अप्रैल को दिल्ली में एक वर्कशाप का आयोजन किया जा रहा है. इस वर्कशाप में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा एक ही जगह पर पूरा क्लेम तैयार कराया जाएगा.

अगर आप प्रिंट मीडियाकर्मी हैं या रहे हैं तो मजीठिया वेज बोर्ड पाने के हकदार हैं… इसलिए ये वर्कशाप आपके लिए है. आपने मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस किया हो या नहीं किया हो, इससे कोई फरक नहीं पड़ता. अब आप अगर एरियर व सेलरी की उचित गणना करके लेबर डिपार्टमेंट में क्लेम फाइल कर देते हैं तो समझिए आपको अपना हक जरूर मिलेगा क्योंकि लेबर डिपार्टमेंट को सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना है कि जिन जिन ने क्लेम फाइल किया, उन उन को हक मिला या नहीं. इसलिए लेबर डिपार्टमेंट को क्लेम यानि दावा ठोंकने वालों को पेमेंट दिलाना ही है.. क्लेम तैयार करने और इसे लेबर डिपार्टमेंट में फाइल करने के झंझटों को एक जगह पर सुलटाने के लिए ही यह वर्कशाप आयोजित है.

बाकी सारे डिटेल नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके जान सकते हैं….

https://www.bhadas4media.com/print/9385-maji-29-april

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वर्कशाप में शामिल होने के लिए 29 अप्रैल तक कर सकते हैं आवेदन

मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपना हक पाने (एरियर और सेलरी) के लिए सुप्रीम कोर्ट के ताजे आदेश के तहत श्रम विभाग में क्लेम फाइल कराने के लिए दिल्ली में 30 अप्रैल को एक पेड वर्कशाप का आयोजन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा के एकाउंट में 1100 रुपये जमा करके आप इस वर्कशाप में हिस्सा ले सकते हैं और अपना क्लेम फाइल करने संबंधी सारी तैयारी यहां कर सकते हैं.

अगर आपने सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया पाने के लिए केस लगाया है, छुपकर या खुलकर, तो भी आपको लेबर डिपार्टमेंट में अपना क्लेम दायर करना पड़ेगा. अगर आप दायर नहीं करते हैं तो फिर आप कैसे दावा करेंगे कि आपको अपना हक नहीं दिया जा रहा है. बेशर्म प्रिंट मीडिया मालिकों को सुप्रीम कोर्ट तो देर सबेर सबक सिखाएगा लेकिन इससे आपका पैसा तो नहीं मिल जाएगा. पैसा पाने के लिए आपको क्लेम फाइल करना ही पड़ेगा. लेकिन ढेर सारे साथियों को यह नहीं पता कि उनके अखबार किस कैटगरी में आते हैं, उनका जो पद है, वह किस श्रेणी में आता है, उनका बकाया कुल कितना बनता है, उनकी प्रजेंट सेलरी कितनी होनी चाहिए, उनका एरियर कितना बनता है. ऐसी ढेरों समस्याएं मीडियाकर्मियों के सामने खड़ी हैं.

इन सभी समस्याओं का निदान बताने के लिए Bhadas4Media और Fylfot Group of Advocates की तरफ से 30 अप्रैल को दिल्ली में एक वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है. इस क्लोज डोर वर्कशाप में देश भर के वे मीडियाकर्मी आमंत्रित हैं जिन्हें मजीठिया वेज बोर्ड पाना है, क्लेम करना है, केस करना है. अगर आपने सुप्रीम कोर्ट में केस किया हुआ है, तो भी आपको इस वर्कशाप में आना पड़ेगा. अगर आपने सुप्रीम कोर्ट में केस नहीं किया है तो भी इस वर्कशाप में आइए. कुल मिलाकर यह वर्कशाप एक ऐसा रास्ता है जिसके जरिए आप बैठे बैठे अपना क्लेम तैयार कर लेबर डिपार्टमेंट में दाखिल कर सकते हैं.

वर्कशॉप में एक ही जगह आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा. साथ ही यहीं वर्कशाप में ही आप पहले से बने फारमेट पर सब कुछ तैयार करके अपना क्लेम दाखिल कर सकते हैं. इस वर्कशॉप के लिए नाम मात्र की फीस रखी गई है जो 1100 रुपये है. वर्कशाप में एंट्री उन्हीं लोगों को दी जाएगी जो 1100 रुपये जमा करेंगे. यह पैसा वर्कशाप के आयोजन पर आने वाले खर्चे आदि के लिए है. समय और स्थान नोट करिए-

दिनांक : 30 अप्रैल दिन शनिवार
समय : दिन में एक बजे
स्थान : हाल नंबर 2
प्लेनरी हॉल, ग्राउंड फ्लोर
इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट
सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के सामने
नई दिल्ली (नियरेस्ट मेट्रो स्टेशन प्रगति मैदान और मंडी हाउस हैं. इन दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच में पड़ेगा इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट)

-वर्कशाप के लिए आप नीचे दिए एकाउंट नंबर में 1100 रुपये जमा करा के onlineindianlawyer@gmail.com मेल आईडी पर जमा रसीद की स्कैन कॉपी के साथ मेल करें.
Name of the bank : HDFC
Branch : Ground Floor, DCM Building, Barakhamba Road, New Delhi-110001.
Account No. : 07081840000060.
Name of account holder : Umesh Sharma
MICR No. : 110240096
IFSC Code : HDFC0000708
-वर्कशाप में अभी 100 मीडियाकर्मी ही शामिल हो सकते हैं क्योंकि जो हॉल बुक कराया गया है, वो 100 सीटों वाला है. रजिस्ट्रेशन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ही किया जाएगा. जमा रसीद की स्कैन कापी को अटैच कर मेल करने के दौरान अपना नाम, उम्र, मोबाइल नंबर, शहर, अखबार, पद, कार्य की स्थिति (कार्यरत या इस्तीफा या रिटायर या निलंबित या अवकाश) और वो सवाल जो आप वर्कशाप में जानना चाहते हैं, उसका विवरण मेल आईडी onlineindianlawyer@gmail.com पर भेजें. रजिस्ट्रेशन कराने की आखिरी तारीख 29 अप्रैल है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मीडिया मालिकों ने मुख्यमंत्री से लगायत अदालत तक को ख़रीद रखा है, सुप्रीम कोर्ट तक इससे बरी नहीं है

Dayanand Pandey : आज की तारीख़ में लगभग सभी मीडिया संस्थानों में ज़्यादातर पत्रकार या तो अनुबंध पर हैं या बाऊचर पेमेंट पर। कोई दस लाख, बीस लाख महीना पा रहा है तो कोई तीन हज़ार, पांच हज़ार, बीस हज़ार, पचास हज़ार भी। जैसा जो बार्गेन कर ले। बिना किसी पारिश्रमिक के भी काम करने वालों की लंबी कतार है। लेकिन बाकायदा नियुक्ति पत्र अब लगभग नदारद है, जिस पर मजीठिया सिफ़ारिश की वैधानिक दावेदारी बने। फिर भी कुछ भाई लोग सोशल साईट से लगायत सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे हैं। जाने किसके लिए।

देश में श्रम क़ानून का कहीं अता पता नहीं है। मीडिया हाऊसों में भी नहीं। वैसे भी श्रम विभाग अब नियोक्ताओं के पेरोल पर होते हैं। ट्रेड युनियन पहले दलाल बनीं फिर समाप्त हो गईं। अब उनका कोई नामलेवा नहीं है। इंकलाब जिंदाबाद अब सपना है। मीडिया मालिकों ने मुख्यमंत्री से लगायत अदालत तक को ख़रीद रखा है। सुप्रीम कोर्ट तक इस से बरी नहीं है। मंहगे वकील और तारीख़ देने की नौटंकी अलग है। दुनिया भर को ज्ञान बांटने वाले पत्रकार ख़ुद को ज्ञान देना भूल गए हैं। सच देखना भूल गए हैं। वैसे भी अब तकरीबन नब्बे प्रतिशत पत्रकार दलाली में अभ्यस्त हैं। अजीठिया मजीठिया की उन को कोई परवाह नहीं। मजीठिया पर लड़ाई फिर भी जारी है। हंसी आती है यह लड़ाई देख कर और नीरज के दो शेर याद आते हैं…

हम को उस वैद्य की विद्या पर तरस आता है
जो भूखे नंगों को सेहत की दवा देता है

चील कौवों की अदालत में है मुजरिम कोयल
देखिए वक्त भला क्या फ़ैसला देता है

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.

इसे भी पढ़ें….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महाराष्ट्र के श्रम मंत्री के पास पत्रकारों से मीटिंग का टाइम नहीं, मजीठिया मामले में दूसरी बैठक भी स्थगित

भड़ास के जरिये क्लेम फाइल करना ही एकमात्र विकल्प

मजीठिया मामले में महाराष्ट्र में लगता है पत्रकारों के अच्छे दिन नहीं आने वाले हैं। महाराष्ट्र के श्रम मंत्री प्रकाश मेहता को अपने ही राज्य के पत्रकारों से गुरेज हो गया है। राज्य के श्रम मंत्री प्रकाश मेहता ने पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन और सुविधाओ से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड को अमल में लाने के मामले में चुप्पी साध ली थी। विपक्ष ने जब इस मामले को विधान सभा में उठाया तो मंत्री महोदय ने आनन फानन में पत्रकारों और प्रबंधन तथा कामगार विभाग की 20 अप्रैल को बैठक बुलाने का एलान किया।

पत्रकार यूनियनों को बाकायदे एक आमंत्रण पत्र भी भेजा गया। पत्रकार खुश हो गए। मीटिंग की तैयारी होने लगी। मीटिंग का एजेण्डा बनाया गया। मगर अचानक कामगार विभाग से पता चला मीटिंग 20 को नहीं बल्कि 21 अप्रैल को हॉगी। साथ में चाय और नाश्ता भी मिलेगा। पत्रकार बेचारे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन पाने के लिए नागपुर औरंगाबाद और पुणे तथा राज्य के दूसरे हिस्सों से धक्का खाते हुए होटल में रुके। नहाकर मीटिंग में जाने की तैयारी ही कर रहे थे तभी पता चला की श्रम मंत्री प्रकाश मेहता जी को कोई जरूरी काम आ गया इसलिए आज की पत्रकारो की मीटिंग कैंसिल है। यानि पत्रकारो से मीटिंग मंत्री जी की नजर में जरूरी काम नहीं था। साफ़ साफ़ कहूँ तो हम सुप्रीम कोर्ट में केस जीत चुके हैं लेकिन इन मंत्रियों के भरोसे रह कर केस हारने वाले हैं।

दोस्तों अब एक मात्र विकल्प यही बचा है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता उमेश शर्मा जी और भड़ास के यशवंत जी द्वारा आयोजित 30 अप्रैल के दिल्ली के सेमीनार में भाग लें और अपना क्लेम फ़ाइल तैयार कराएं। याद कीजिये जब किसी यूनियन ने आपका साथ नहीं दिया था तब सामने यही लोग आये थे और हम केस जीते भी। अब एरियर पाने के लिए भी भड़ास पर भरोसा करना पड़ेगा। अभी नहीं तो कभी नहीं।

सेमिनार में आने और वर्कशाप संबंधी अन्य डिटेल जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.bhadas4media.com/print/9275-workshop-4-majithia

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेज बोर्ड से जुड़े प्रमोशन मामले की मुंबई में २५ को सुनवाई

मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा में गड़बड़ झाला कर माननीय सुप्रीम कोर्ट की आंखों में धूल झोकते हुये फर्जी रिपोर्ट भेजे जाने के मामले से जुड़े मुंबई के श्रम आयुक्त के यहां दायर एक आरटीआई का गोलमोल जवाब देना खुद श्रम आयुक्त मुंबई को भारी पड़ने वाला है। मुंबई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट शशिकांत सिंह ने आरटीआई से प्राप्त प्रमोशन मामले से जुड़े एक सूचना पर असंतुष्ट होकर श्रम आयुक्त कार्यालय में अपील दायर कर पूछा है कि अगर आपके पास मजीठिया मामले के लिये महत्वपूर्ण प्रमोशन लिस्ट नहीं है तो आपके विभाग द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट को किस आधार पर मजिठिया वेज बोर्ड के क्रियान्यवयन की रिपोर्ट भेजी गयी है। इस अपील को स्वीकार कर लिया गया है और इस पर २५ अप्रैल को दोपहर मेंश्रम आयुक्त कार्यालय मुंबई शहर के प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष सुनवाई होनी है।

भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 11 नवम्बर 2011 को भारत के राजपत्र में अधिसूचना संख्या 2532 (अ) में अधिसूचित्त आदेश दिया है जिसके मुताबिक 10 वर्ष की सेवा संतोषजनक करने पर पदोन्नति का प्रावधान है। यानि अगर आप दस साल से ज्यादा समय से एक ही समाचार पत्र प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं तो आपको एक प्रमोशन मिलना चाहिए था। इसी आदेश में पूरे सेवाकाल में तीन प्रमोशन की बात है। यानी अगर आप 20 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं एक ही समाचार पत्र या उस प्रतिष्ठान में तो आपको दो प्रमोशन मिलना चाहिए था जो कि समाचार पत्र प्रबंधन ने नहीं दिया है। इस बारे में मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय के पास भी इस बाबत कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। मुम्बई के निर्भीक पत्रकारऔर आरटीआई एक्टीविस्ट  शशिकांत सिंह ने मुम्बई शहर के श्रम आयुक्त कार्यालय के जन माहिती अधिकारी से ये जानकारी माँगा कि मुम्बई के कौन कौन से समाचार पत्रों ने मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक अपने उन समाचार पत्र कर्मियों और पत्रकारों को जो दस साल से अधिक समय से एक ही समाचार पत्र प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं, को प्रमोशन दिया है।

पूरी सूची शशिकांत सिंह ने एक मार्च को माँगा था जिस पर श्रम आयुक्त कार्यालय ने 9 मार्च 2016 को तीन लाइन का एक जवाब भेजा था कि ये जानकारी हमारे कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। जबकि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भारत सरकार ने इसे राजपत्र में अधिसूचित किया है और उसमे प्रमोशन की भी चर्चा है। अब सवाल ये उठता है कि अगर श्रम आयुक्त कार्यालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है तो फिर माननीय सुप्रीम कोर्ट को किस आधार पर रिपोर्ट सौपी गयी है। आरटीआई से प्राप्त इस जानकारी से मुंबई के निभीक पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट  शशिकांत सिंह ने असहमति जतायी और इस मामले पर अपील दायर कर दिया। इस अपील को स्वीकार कर लिया गया है और इस पर २५ अप्रैल को दोपहर मेंश्रम आयुक्त कार्यालय मुंबई शहर के प्रथम अपील अधिकारी के समक्ष सुनवाई होगी। अब देखना है कि इस रिर्पोट के फर्जीवाड़े पर श्रम आयुक्त कार्यालय अपना क्या पक्ष रखता है।

मुंबई के पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट शशिकांत सिंह से संपर्क ९३२२४११३३५ के द्वारा किया जा सकता है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेज बोर्ड पर बोले सीएम अखिलेश- जल्द फाइल होगी मजीठिया को लेकर स्टेट्स रिपोर्ट

लखनऊ : मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू किए जाने के संबंध उत्तर प्रदेश के समाचार पत्रों की स्थिति और अब तक हुयी प्रगति को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अब तक सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट न पेश किए जाने पर इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) का एक प्रतिनिमंडल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी के नेतृत्व में सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार सुबह इस मामले को लेकर मुख्य सचिव आलोक रंजन से भी मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।

मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट पर अब तक उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मजीठिया को लेकर हलफनामा न सौंपे जाने को लेकर चिंता जतायी और प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार इस मामले में जल्द कारवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मजीठिया वेजबोर्ड के मुताबिक मीडिया कर्मियों को वेतनमान दिलाने को लेकर उनकी सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। इससे पहले हेमंत तिवारी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ कलहंस, राष्ट्रीय पार्षद उत्कर्ष सिन्हा, मो. कामरान, राजेश मिश्रा, शबाहत हुसैन विजेता, आईएफडब्लूजे उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेता टीबी सिंह, भास्कर दुबे, नवेद शिकोह व ईटीवी के वीरेंद्र सिंह सोमवार की सुबह मुख्य सचिव आलोक रंजन से मजीठिया को लेकर उनके कक्ष मिले और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव श्रम को इस संदर्भ में निर्देशित किया कि मजीठिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार उत्तर प्रदेश में समाचार पत्रों की दशा को लेकर रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपी जाए। ज्ञापन में आईएफडब्लूजे ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक वेतनमान दिए जाने के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश के कतिपय बड़े समाचार पत्र हीलाहवाली कर रहे हैं और साम दाम दंड भेद की नीति अपना कर मीडियाकर्मियों के सर्विस रिकार्ड व कंपनी के मूल नाम में हेराफेरी कर रहे हैं। आईएफडब्लूजे उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने बताया कि सु्पीम कोर्ट के निर्देशों को मुताबिक राज्यों को अपने यहां के समाचार पत्रों में वेतन बोर्ड की सिफारिशों लागू किए जाने संबंधी स्टेट्स रिपोर्ट सौंपनी है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों को बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गयी है।

ज्ञापन सौंपने संबंधी तस्वीरें देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

Pics

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

May Day call for newspaper and news agency employees in Maharashtra

LEADING organisations of Journalist and non-Journalist newspaper and news agency employees as well as prominent institutions of media persons in Maharashtra have formed a Joint Action Committee (JAC) to press for the implementation of the Justice Majithia Wage Boards Awards, as mandated by the Supreme Court of India. The JAC has decided to hold a May Day open interactive session on Sunday, 1st of May 2016 at either the Mumbai Press Club Hall or the Mumbai Marathi Patrakar Sangh Hall from 12 noon onwards. Efforts are underway to invite Maharashtra Government representatives to address the session.

In a preparatory meet held at the Brihanmumbai Union of Journalists (BUJ) Hall, various teams were set up to handle different tasks. The teams are:

Legal Team: C P Jha, Shashi Srivastava, Alex D’Souza, Abhay Joshi, Mahesh Rajput, Rennie Abraham and Shashikant Singh.

Liaison Team: Indra Kumar Jain, Prakash Sawant, Khanduraj Gaikwad, Ghanashyam Bhadekar, Mrityunjay Bose and Kiran Naik.

Accounts and Finance Team: Suresh Nandi, Indra Kumar Jain, Shashi Srivastava, Jayesh Madhav

RTI Team: Shashikant Singh, Narayan Uchil and Vinod Jaiswal.

Participating organisations in the JAC include: Brihanmumbai Union of Journalists (BUJ), Mumbai Press Club, Marathi Patrakar Parishad, Mumbai Marathi Patrakar Sangh, UNI Employees’ Federation , Maharashtra Media Employees’ Union (MMEU), Indian National Press Group Employees’ Union ( INPGEU) , The Times and Allied Publications Employees’ Union, Maharashtra Mantralaya Vidhimandal Patrakar Sangh, Nagpur Shramik Patrakar Sangh, Pune Patrakar Sangh, Hindi Patrakar Sangh and Gujarati Patrakar Sangh.

The next meeting of the JAC will be held in the BUJ Hall on 18  April 2016 at 2 p.m.

इसे भी जरूर पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेज बोर्ड के वेतन, भत्ता और प्रमोशन के लिये अपने कार्मिक प्रबंधन को पत्र लिखकर ये दस्तावेज जरूर मांगें

मजीठिया वेज बोर्ड के वेतन, भत्ता और प्रमोशन के लिये कार्मिक प्रबंधन को पत्र लिखकर ये दस्तावेज जरूर मांगें। देखें सारा राज खुल जायेगा। प्रबंधन की धोखाधड़ी जानने के लिए यह पत्र रजिस्टर्ड डाक से भेजें तो बेहतर होगा।

१- वर्ष २००७-८, २००८-९ और २००९-१० का मूल (यहां कंपनी का नाम डाले) और उसकी सभी सहायक कंपनियों का आयकर विभाग में उसी वर्ष जमा कराये गये टर्नओवर का विवरण जिसमें सभी कंपनियों का सकल राजस्व दशार्या गया हो।

२ उन सभी कर्मचारियों और पत्रकारों की सूची जो मूल कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों में पिछले दस साल से काम करते हैं और उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक प्रमोशन दिया गया है। सभी कर्मचारियों की प्रमोशन पत्र और नियुक्ती पत्र की प्रति भी उपलब्ध करायें। प्रमोशन और नियुक्ती पत्र की वह प्रति जो पत्रकारों और गैर पत्रकारों को देते समय उनसे हस्ताक्षर युक्त रिसीव कापी लिया गया था, उसे मुझे उपलब्ध करायें।

३ किन कर्मचारियों को कितना कितना एरियर दिया गया और कितने कितने तारीख को दिया गया और क्या उसमें किसी तरह का ब्याज भी सम्मलित है, यह पूरा विवरण दें। साथ ही उनका पीएफ कितना कटता है, उन्हें और क्या सुविधायें दी जाती हैं, यह भी बतायें, और डीए का विवरण दें।

४ सभी पत्रकारों और गैर पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक दिये गये अंतरिम राहत और अवकाश तथा उनके पूरे वेतन का विवरण भी दें।

५ मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू होने के बाद कितने पत्रकारों और गैर पत्रकारों से अब तक रात्रि पाली में काम कराया गया और क्या उन्हें नाईट शिफ्ट अलाउंस दिया गया? अगर हां तो उन पत्रकारों और गैर पत्रकारों का नाम तथा तथा उन्हें मिले नाईट शिफ्ट अलाउंस में कितनी कितनी राशि दी गयी, वह भी पूरा विवरण दें।

६ मजीठिया मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज भी दें। साथ ही उन कर्मचारियों की भी पूरी सूची दें जो कांट्रेक्ट पर काम करते हैं आपके यहां, जिनमें पत्रकार भी शामिल हों, वह सूची दें।

प्रति
१-श्रम आयुक्त, श्रम आयुक्त कार्यालय मुंबई
२- सहायक कामगार आयुक्त, मुंबई शहर
३-रजिस्ट्रार कार्यालय. माननीय सुप्रीम कोर्ट


शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्त्ता
मुंबई

इसे जरूर पढ़ें….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया मामले में महाराष्ट्र के श्रम मंत्रालय, समाचार पत्र प्रबंधन और पत्रकार यूनियनों की संयुक्त बैठक २० को मंत्रालय में

मुंबई : पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन, सुविधाओं तथा भत्ते से जुड़े मामले पर महाराष्ट्र सरकार के कामगार मंत्री प्रकाश मेहता ने २० अप्रैल को दोपहर दो बजे से मंत्रालय के दलान क्रमांक ६०७ में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया है।

इस बैठक में महाराष्ट्र विधानसभा में विरोधी पक्ष नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल, विधानसभा सदस्य जयंत पाटिल, आशिष शेलार, अतुल भातलकर, प्रधान सचिव (कामगार), मुंबई के कामगार आयुक्त, श्रमिक पत्रकार संघ के पदाधिकारी, समाचार पत्र प्रबंधन के प्रतिनिधि, संबंधित व्यक्ति और संघटन भी उपस्थित रहेंगे। यह जानकारी कामगार मंत्री के निजी सहायक संदेश शंखे ने दी है।

इससे पूर्व १८ अप्रैल को बैठक की रणनीति तैयार करने के लिये बीयूजे के फोर्ट स्थित कार्यालय में दोपहर २ बजे से पत्रकारों और विभिन्न पत्रकार संघटनों की एक महत्वपूर्ण बैठक भी बुलायी गयी है। यह जानकारी पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता शशिकांत सिंह ने दी है।

इन्हें भी पढ़ें…

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Maha Govt to call meeting over Majithia wage board

Mumbai, Apr 13 : Maharashtra government will hold a meeting with newspaper managements within a wwage board for journalists and non-journalists, the State Assembly was informed here today.

“We will hold a meeting with newspaper managements within a week, to ensure the recommendations are implemented, Labour Minister Prakash Mehta said.

He was replying to a debate on a calling attention notice by leader of opposition Radhakrishna Vikhe Patil, in the Lower House.

A Supreme Court bench had last year, upheld the recommendations of Majithia wage board for journalists and non-journalists on their pay structure and directed that the revised salaries be granted to the employees.

NCP MLA Jayant Patil said the government should direct newspaper establishments who were yet to implement the wageboard recommendations

Mehta said the wageboard recommendations are binding on newspaper establishments.

The government will take action which will ensure that the wage board recommendations are implemented, the minister said.

BJP MLA Ashish Shelar said occupancy certificate should not be given to buildings constructed at BKC in Mumbai by owners of newspapers who have failed to implement the wageboard recommendations.

Mehta said the government will take a call on the certificate issue, after the meeting with newspaper managements.

साभार- PTI

इसे भी पढ़ें…

xxx

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजी पत्रकार हित की आवाज, अखबार मालिकों को मजीठिया देने के लिए किया जाएगा मजबूर

मुंबई : सालों से चल रहे मीडिया समूहों के पत्रकारों के अधिकार और उनके वेतन तथा भत्ते को लेकर आज महाराष्ट्र विधानसभा से जोर-शोर से आवाज बुलंद की गई। पत्रकारों को मजीठिया आयोग के तहत वेतन और भत्ते दिये जायें इसके लिए सभी दलों के नेताओं ने अपनी सहमति दर्ज कराई। करीब आधा घंटे चले विचार-विमर्श के बाद राज्य के श्रम मंत्री प्रकाश मेहता ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही एक बड़ी बैठक बुलाएंगे और उसमें पत्रकारों के हितों को लेकर उचित निर्णय लिया जाएगा।

विदित हो कि विपक्ष नेता राधाकृष्ण पाटिल ने विस में पत्रकारों से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया, जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। विदित हो कि सत्ता पक्ष के मंत्री प्रकाश मेहता ने बताया कि महाराष्ट्र शासन में ऐसा पहली बार हुआ है, जब पत्रकारों के हित और उन पर हो रहे शोषण का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। इसके अलावा विधानसभा में भी यह भी माना गया कि बड़े मीडिया समूहों द्वारा पत्रकारों का मांसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है। विस में सत्ता पक्ष समेत विपक्ष ने भी माना कि कोई भी मीडिया हाउस पत्रकारों को उचित वेतन नहीं दे रहा है। इसके लिए प्रकाश मेहता  ने कहा कि वे एक सप्ताह के अंदर एक उच्च स्तरीय मीटिंग बुलाएंगे, जिसमें मीडिया समूहों के मालिक और मंत्री व अधिकारीगण मौजूद रहेंगे और उस दौरान पत्रकारों से जुड़े वेतन आयोग पर निर्णय लिया जाएगा और अखबार मालिकों को पत्रकारों का अधिकार देने के लिए मजबूर किया जाएगा।

साथ ही सरकार को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आज भी पत्रकारों को मजीठिया आयोग के तहत सेलरी वितरित नहीं की जा रही है। साथ ही इस मामले में श्रम विभाग भी गलत जानकारी उपलब्ध करा रहा है। पाटिल ने विस को बताया कि राज्य में करीब छोटे-बड़े 900 अखबार हैं, जिनमें से लगभग 44 समाचार पत्रों ने तो अपने यहां वेतन बोर्ड लागू किया, लेकिन पूरी तरह से लागू कर पाने में सक्षम नहीं रहे। इसके अलावा अन्य अखबारों ने तो मजीठिया आयोग  की सिफारिश लागू तक नहीं किया। प्रकाश  मेहता ने बताया क़ि ये बैठक एक सप्ताह के अंदर होगी। इसके अलावा मुंबई स्थित बांद्रा में आईएनएस को दिए गए प्लॉट को लेकर बहस की गई तो पता चला कि उसकी ओसी रोक ली जाए। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने मान लिया है कि वे लोग पत्रकारों के साथ अन्याय करते हैं, इसलिए आईएनएस को एलॉट किए गए प्लॉट पर एक्शन लिया जाए।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई
कार्यकर्त्ता
मुंबई

इन्हें भी पढ़ें….

xxx

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

महाराष्ट्र विधानसभा में मजीठिया वेतन आयोग पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत चर्चा होगी

बंधुओं, आज महाराष्ट्र विधानसभा में मजीठिया वेतन आयोग पर अब तक अमल न होने के विषय पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत चर्चा होगी। सभी पत्रकारों से अनुरोध है क़ि इससे जुड़े मुद्दे विभिन्न पार्टियों के विधायकों को बताएं ताकि अखबार मालिकों और सरकार के लेबर विभाग की मिलीभगत सामने आ सके। मुख्य मुद्दे इस प्रकार हैं..

1- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन 90 प्रतिशत से ज्यादा अखबार मालिकों ने नहीं किया।
2- श्रम विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को झूठी रिपोर्ट भेजी।
3- सभी अखबारों की 3 साल की बैलेंस शीट के आधार पर वर्गीकरण नहीं किया।
4- अब हर अखबार के आफिस में जाकर देखना होगा क़ि क्या वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार arrears और वेतन दिए जा रहे हैं या नहीं।
5- ज्यादातर पत्रकारो और गैर पत्रकारों को आधे से कम वेतन दिया जाता है।

इन्हें भी पढ़ें…

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद श्रम आयुक्त कार्यालय मध्यप्रदेश ने मजीठिया मामले में जारी किया सर्कुलर

पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मजीठिया मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद मध्यप्रदेश के श्रम आयुक्त कार्यालय ने एक सर्कुलर सभी सहायक श्रम आयुक्तों को और संभागीय श्रम कार्यालय को तथा श्रम निरीक्षकों और जिला श्रम कार्यालय को जारी कर तत्काल इस पर कदम उठाने का निर्देश दिया है। केसी गुप्ता श्रम आयुक्त मध्य प्रदेश इंदौर ने 30 मार्च 2016 को ये सर्कुलर जारी किया है जिसमें लिखा है कि भारत सरकार और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश के बावजूद मजीठिया वेतनमान न लागू किए जाने की अनेक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

पत्रकारों एवं अन्य कर्मचारियों को अनुचित तरीके से सेवा से पृथक किया जा रहा है। इन पर मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को मान्य नहीं किये जाने के बारे में दबाव दिया जा रहा है। अतः इस सम्बन्ध में राज्यों के श्रम आयुक्तों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस आदेश के अनुक्रम उक्ताशय की शिकायत प्राप्त होने पर उनका समुचित परीक्षण करें तथा इस सम्बन्ध में प्रतिवेदन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 12 जुलाई 2016 या उसके पूर्व प्रस्तुत करें। अब देखना है कि मध्य प्रदेश की तरह दूसरे राज्यों के श्रम आयुक्त ऐसा सर्कुलर कब जारी करते हैं, करते भी हैं या नहीं।

मुंबई के पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्त्ता शशिकांत सिंह की रिपोर्ट.

छह पन्ने के सरकुलर में पहला पन्ना तो श्रम आयुक्त का आदेश है, बाकी पांच पन्नों में सुप्रीम कोर्ट के ताजे फैसले की कापी है. इसे पूरा पढ़ने देखने के लिए अगले पेज पर जाने हेतु नीचे क्लिक करें : 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेज बोर्ड का हक चाहिए तो आपको इस वर्कशॉप में आना पड़ेगा, याद रखिए- 30 अप्रैल, दोपहर एक बजे, दिल्ली

अखबार और मैग्जीन मालिकों ने जब संविधान, कानून और न्यायपालिका को ठेंगा दिखाने का इरादा बना लिया है तो ऐसे में इन्हें उन्हीं के हथियार यानि संविधान, कानून और न्यायपालिका के जरिए ही सबक सिखाना / मात देना जरूरी हो गया है. मजीठिया वेज बोर्ड पाने की लड़ाई अब आखिरी चरण में पहुंच चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक प्रदेश के लेबर कमिश्नर को आदेश दे दिया है कि वे पांच जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट को बताएं कि जिन जिन मीडियाकर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी बकाया पाने के लिए क्लेम श्रम विभाग में दायर किया है, उनको उनका हक मिला या नहीं.

इस आदेश के बाद गेंद अब मीडियाकर्मियों के पाले में आ गई है. अगर आपने सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया पाने के लिए केस लगाया है, छुपकर या खुलकर, तो भी आपको लेबर डिपार्टमेंट में अपना क्लेम दायर करना पड़ेगा. अगर आप दायर नहीं करते हैं तो फिर आप कैसे दावा करेंगे कि आपको अपना हक नहीं दिया जा रहा है. बेशर्म प्रिंट मीडिया मालिकों को सुप्रीम कोर्ट तो देर सबेर सबक सिखाएगा लेकिन इससे आपका पैसा तो नहीं मिल जाएगा. पैसा पाने के लिए आपको क्लेम फाइल करना ही पड़ेगा. लेकिन ढेर सारे साथियों को यह नहीं पता कि उनके अखबार किस कैटगरी में आते हैं, उनका जो पद है, वह किस श्रेणी में आता है, उनका बकाया कुल कितना बनता है, उनकी प्रजेंट सेलरी कितनी होनी चाहिए, उनका एरियर कितना बनता है. ऐसी ढेरों समस्याएं मीडियाकर्मियों के सामने खड़ी हैं.

इन सभी समस्याओं का निदान बताने के लिए Bhadas4Media और Fylfot Group of Advocates की तरफ से 30 अप्रैल को दिल्ली में एक वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है. इस क्लोज डोर वर्कशाप में देश भर के वे मीडियाकर्मी आमंत्रित हैं जिन्हें मजीठिया वेज बोर्ड पाना है, क्लेम करना है, केस करना है. अगर आपने सुप्रीम कोर्ट में केस किया हुआ है, तो भी आपको इस वर्कशाप में आना पड़ेगा. अगर आपने सुप्रीम कोर्ट में केस नहीं किया है तो भी इस वर्कशाप में आइए. कुल मिलाकर यह वर्कशाप एक ऐसा रास्ता है जिसके जरिए आप बैठे बैठे अपना क्लेम तैयार कर लेबर डिपार्टमेंट में दाखिल कर सकते हैं.

वर्कशॉप में चार्टर्ड एकाउंटेंट, वकील, मजीठिया वेज बोर्ड एक्सपर्ट मीडियाकर्मी, लेबर डिपार्टमेंट के अधिकारी आदि मौजूद रहेंगे और एक ही जगह आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा. साथ ही यहीं वर्कशाप में ही आप पहले से बने फारमेट पर सब कुछ तैयार करके अपना क्लेम दाखिल कर सकते हैं. इस वर्कशॉप के लिए नाम मात्र की फीस रखी गई है जो 1100 रुपये है. वर्कशाप में एंट्री उन्हीं लोगों को दी जाएगी जो 1100 रुपये जमा करेंगे. यह पैसा वर्कशाप के आयोजन पर आने वाले खर्चे आदि के लिए है. आपको दिल्ली आना, रुकना, खाना, जाना सब कुछ अपने खर्चे पर करना होगा. समय और स्थान नोट करिए-

दिनांक : 30 अप्रैल दिन शनिवार
समय : दिन में एक बजे
स्थान : हाल नंबर 2
प्लेनरी हॉल, ग्राउंड फ्लोर
इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट
सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के सामने
नई दिल्ली
नोट : नियरेस्ट मेट्रो स्टेशन प्रगति मैदान और मंडी हाउस हैं. इन दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच में पड़ेगा इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट.

कृपया इस सूचना को प्रिंट मीडिया के सभी विभागों के सभी कर्मियों तक पहुंचाइए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो सकें. ध्यान रखें, अगर आप वर्ष 2011 या 2012 से या 2013 या 2014 से अखबारों या मैग्जीन में कार्यरत हैं तो आपको मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से लाखों रुपये एरियर मिलना चाहिए. यह तभी मिल पाएगा जब आप लेबर डिपार्टमेंट में क्लेम दायर करेंगे. क्लेम दायर करने से पहले आपको ठीक ठीक पता होना चाहिए कि आपका अखबार, आपकी कंपनी किस कैटगरी में है, आप किस पद पर हैं, आपका पद कितने परसेंट ग्रोथ के काबिल है, आपका एरियर इस हिसाब से कितना बनता है… आदि. यह सब सही सही गणना करके ही क्लेम फाइल करें ताकि आपके क्लेम पर आपका प्रतिष्ठान / प्रबंधन कोई उंगली न उठा सके. इसी मकसद से यह वर्कशाप आयोजित की जा रही है ताकि एक जगह सारा गुणा भाग गणित कागज पत्तर तैयार कर हर एक के क्लेम को फाइनल किया जा सके. वर्कशाप में शामिल लोग अपने अपने शहरों में जाकर क्लेम फाइल करेंगे. बाद में इन लोगों के क्लेम के केस के बारे में स्टेटस आदि की जानकारी के लिए एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी ताकि लेबर अफसर अपने स्तर पर कोई कोताही न बरत सकें.

कुछ जरूरी बातें :

-इस वर्कशाप का आयोजन Bhadas4Media के यशवंत सिंह और Fylfot Group of Advocates के उमेश शर्मा की तरफ से किया जा रहा है.

-वर्कशाप में अभी 100 मीडियाकर्मी ही शामिल हो सकते हैं क्योंकि जो हॉल बुक कराया गया है, वो 100 सीटों वाला है.

-वर्कशाप में शामिल होने की गारंटी करने के लिए आप नीचे दिए एकाउंट नंबर में 1100 रुपये जमा करा के onlineindianlawyer@gmail.com मेल आईडी पर जमा रसीद की स्कैन कॉपी के साथ मेल करें.

Name of the bank : HDFC
Branch : Ground Floor, DCM Building, Barakhamba Road, New Delhi-110001.
Account No. : 07081840000060.
Name of account holder : Umesh Sharma
MICR No. : 110240096
IFSC Code : HDFC0000708

-जमा रसीद की स्कैन कापी को अटैच करके मेल भेजने वालों को रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा जिसके आधार पर उन्हें कार्यक्रम स्थल पर आईडी कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा.

-जमा रसीद की स्कैन कापी को अटैच कर मेल करने के दौरान अपना नाम, उम्र, मोबाइल नंबर, शहर, अखबार, पद, कार्य की स्थिति (कार्यरत या इस्तीफा या रिटायर या निलंबित या अवकाश) और वो सवाल जो आप वर्कशाप में जानना चाहते हैं, उसका विवरण भेजें. 

-इस क्लोज डोर वर्कशाप में कोई भी बिना आईडी कार्ड के नहीं शामिल हो सकता. इसका एक बड़ा कारण प्रबंधन के जासूसों को वर्कशाप से दूर रखना है और हर एक की पहचान सुनिश्चित करना है.

-कार्यक्रम स्थल पर पैसा जमा करके आईडी कार्ड देने की कोई व्यवस्था नहीं रहेगी. ऐसा अफरातफरी से बचने के लिए और बिना पहचान वालों को वर्कशाप में शामिल होने से रोकने के मकसद से किया जा रहा है.

-वर्कशाप में शामिल होने के लिए आनलाइन पत्राचार हेतु सिर्फ उपरोक्त एकमात्र मेल आईडी onlineindianlawyer@gmail.com पर ही संपर्क करें. दूसरी किसी मेल पर भेजे गए मेल को संज्ञान नहीं लिया जाएगा.

-अगर आप उपरोक्त बैंक एकाउंट में आनलाइन पैसे ट्रांसफर करते हैं तो स्क्रीनशाट लेकर उसे अटैच करके उपरोक्त मेल आईडी पर अपने विवरण के साथ भेजें.

-अगर आपने जमा रसीद भेज दिया है और आपको रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला है तो इसके लिए आप भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह या सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा से निजी फोन या निजी मेल पर संपर्क कर सकते हैं.

-रजिस्ट्रेशन कराने की आखिरी तारीख 25 अप्रैल है. इसके बाद कोई रजिस्ट्रेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

-फिलहाल केवल 100 मीडियाकर्मियों का ही रजिस्ट्रेशन संभव है, इसलिए रजिस्ट्रेशन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ही किया जाएगा. सोर्स, सिफारिश, उधार, बाद में जैसी बातों से बचें.

सबसे आखिर में, सबसे महत्वपूर्ण बात :

सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हुई पिछली सुनवाई में जज साहब ने साफ-साफ कहा है कि यहां सुप्रीम कोर्ट में मीडियाकर्मियों के क्लेम के इतने ज्यादा संख्या में मामले आ गए हैं कि इन्हें सुप्रीम कोर्ट हैंडल नहीं कर पाएगा. इसलिए सभी लोग लेबर डिपार्टमेंट जाएं. सुप्रीम कोर्ट प्रत्येक राज्य के लेबर कमिश्नर से पांच जुलाई को हिसाब लेगा कि जिन जिन लोगों ने क्लेम लगाया है, उन्हें क्लेम मिला या नहीं. तो, अब मजीठिया वेज बोर्ड का अपना हक पाने का एकमात्र सही तरीका लेबर डिपार्टमेंट में क्लेम फाइल करना ही है. इसलिए वर्कशॉप को हर हाल में अटेंड करें.


इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: