यशवंत सिंह-

ये आदमी शोध का विषय है. आज इनके पिचहत्तर बरस पूरे हुए. कभी नहीं देखा कि इन्हें कोई दुख है. दुखी भी हुए तो बहुत क्षणिक. दुख ये आया वो गया… और विनय श्रीकर खिलखिला कर हंस पड़े!
वे दुखी कम होते हैं, दुख का माहौल ज्यादा बनाते हैं.
डिप्रेशन इनसे मीलों दूर भागता है.
हंसते-खिलखिलाते बतियाते गपियाते हरदम मिले.
एक शब्द में कहें तो- मस्तमौला.
दो बोल मीठे कोई बोल दे तो खुश. ना बोले तो खुश.
खुश हर हाल में रहना है, ये इनका फंडा है.
इतना पाजिटिव आदमी मैंने जीवन में नहीं देखा.
ढेर सारी मुश्किलों के बावजूद वे हरदम सकारात्मक रहते हैं. पीने-पिलाने के शौकीन. खाने-खिलाने के शौकीन. बतियाने-गपियाने के शौकीन.
शराबखोरी ने इन्हें जीवन के हर रंग दिखाए लेकिन इस आदमी पर तो एक ही रंग सदा चढ़ा रहा- फकीरी का रंग!
जो कुछ है फूंक ताप बराबर.
छोटी छोटी खुशियों को जीने वाले इस आदमी ने जब आज फोन पर बताया कि यशवंत पिचहत्तर पार हो गया मेरा…. तो इधर मुंह से बस इतना निकला… यमराज का रथ आपने मोड़ दिया है गुरु… वे धरती लोक पहुंचने से ठीक पहले वापस गए मृत्यु लोक के लिए. अब आप निर्विघ्न शतक मारेंगे.
ये अकेले भी खुश रहते हैं. सोसाइटी का गार्ड मिल जाए तो उसके साथ खुश हो जाते हैं. सोसाइटी में कोई टहलता हुआ अननोन परसन दिख जाए तो उससे बतिया कर दोस्ती गांठ कर खुश हो जाएंगे.
दैनिक जागरण, अमर उजाला समेत कई मीडिया संस्थानों में उच्च पदों पर रहे वरिष्ठ पत्रकार आदरणीय विनय श्रीकर जी को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं.
विनय जी अदभुत अनुवादक हैं. उनकी याददाश्त ग़ज़ब की है. वे कितने सारे फील्ड के विशेषज्ञ हैं, उन्हें खुद नहीं मालूम. हमने उनके साथ कई दफे दारूबाजी की है. शानदार स्मृतियां हैं. वे दारू खरीदने ठेके पर गए और ठेके वाले से दोस्ती कर ली. ठेके वाला ऐसा मुरीद हुआ कि विनय जी के पास कभी पैसे न हों तो तुरंत उधार दे देता है. इसके पहले ठेका वालों को कभी उधार देते न देखा था.
विनय जी में ऐसा चुंबक है कि वे किसी की भी बुद्धि हर लें! विनय जी में ऐसी सहजता है कि वे किसी के भी दिल में उतर जाएं. विनय जी के भीतर एक ऐसा निर्दोष बच्चा है कि उसका दिल कभी कभी एक पव्वे के लिए मचल जाता है.
वे यारों के यार हैं. अगर आप उनसे जुड़ गए तो भले ही आप भाग जाएं, वे आपको कतई नहीं छोड़ने वाले. 🙂
मैंने विनय श्रीकर जी के नाम पर हर रोज दस मिनट रखा हुआ है. इनका फोन कभी भी आ सकता है. मैं दस मिनट इन्हें सुनता हूं. इनकी हां में हां मिलाता हूं. बुजुर्ग लोग आखिर अपनी भड़ास कहां निकालें, किसे सुनाएं. बुजुर्गों के लिए टाइम निकालना चाहिए हमें. उन्हें सुन लेना भी उनके लिए बड़ी राहत की बात होती है.
विनय जी जब सत्तर बरस के हुए थे तब वो नोएडा में थे. उनका जन्मदिन मैंने अपने घर में मनाया था. पी के हम दोनों टाइट हो गए थे. केक कटा. बहुत प्रसन्न थे दादा. देखें वीडियो-
लखनऊ आने वाला हूं. मेरी तरफ से एक जोरदार पार्टी दी जाएगी दादा, आपके इस 75वें बड्डे के नाम पर.
आप ऐसे ही मस्त रहें, खुश रहें. ऐसे ही हम लोगों को जीना सिखाते रहें. 😍👌
लखनऊ से आया आज वाला वीडियो देखें, इस लिंक पर क्लिक करके-
https://www.facebook.com/yashwantbhadas/videos/354704314054963

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