बरेली में महिला पत्रकार को कथित पत्रकार ने बंदूक लेकर दौड़ाया

बरेली। बुधबार को एक महिला पत्रकार पर चार व्यक्तियों द्वारा हमला किया गया। महिला पत्रकार शाहनाज फातिमा ने बताया कि वह बरेली पुलिस लाइन परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज कवरेज को गई थी। वहां पर अपने को ऑल इण्डिया रिपोर्टर एसोसिएशन का जिलाध्यक्ष बताने वाले कथित पत्रकार बी एस चंदेल उर्फ भगवान सिंह पुत्र राजेंद्र पाल सिंह निवासी चौपला प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया। उसने महिला पत्रकार से अश्लील इशारे करते हुए बदतमीजी करना शुरू कर दिया।

महिला पत्रकार ने इस का विरोध किया तो बीएस चंदेल आग बबूला हो प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले ही बाहर चला गया। बाहर जाकर उसने फोन कर अपने कुछ लोगों को बुलाया। इसमें एक महिला तथा कुछ अन्य लोग चौपला पुलिस लाइन के गेट पर पहुंचे जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। बी एस चंदेल का यह गैंग महिला पत्रकार के इंतज़ार में पुलिस लाइन के गेट पर खड़ा हो गया। महिला पत्रकार जैसे ही अपनी स्कूटी लेकर बाहर आई तो गेट से थोड़ा आगे बढ़ते ही एक महिला ने उसको आवाज दी। महिला पत्रकार वहाँ रुक गई। वह महिला अपने आप को चंदेल की पत्नी बताते हुए गाली गलौज करने लगी तथा जान से मरवाने की धमकी देने लगी।

उस महिला के साथ आए कुछ लोगों ने महिला पत्रकार से अभद्रता करना शुरू कर दिया। तब महिला पत्रकार अपनी स्कूटी लेकर आगे की तरफ निकल गयी। थोड़ी दूर पर दामोदर पार्क के पास बीएस चंदेल हाथ में बंदूक लिए महिला पत्रकार का इंतजार कर रहा था। जैसे ही उसने शहनाज फातिमा को स्कूटी से निकलते हुए देखा, आवाज देकर कहा कि आज तुझे जान से मार दूँगा। महिला पत्रकार अपनी स्कूटी की रफ्तार बढ़ाते हुए वहां से अपनी जान बचाती हुई भाग निकली। उसका बी एस चंदेल ने एक किलोमीटर की दूरी तक पीछा किया। महिला पत्रकार ने पास ही में बने थाना कोतवाली परिसर में घुस कर अपनी जान बचाई। वहां से बरेली एसएसपी के पीआरओ को फोन कर मामले से अवगत कराया। थाना कोतवाली में पीड़िता पत्रकार द्वारा लिखित प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। लेकिन पुलिस द्वारा जांच का आश्वासन देते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की गई। देर रात तक महिला पत्रकार थाना कोतवाली में ही मौजूद रहीं।

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One comment on “बरेली में महिला पत्रकार को कथित पत्रकार ने बंदूक लेकर दौड़ाया”

  • बरेली में मैनें उपनिदेशक सूचना के बतौर कई फ़र्ज़ी पत्रकारों से मोर्चा लिया था। वहां के शालीन, सक्रिय और अनुभवी असली पत्रकारों तक को भी दबा लेते हैं दबंग फ़र्ज़ी। असली पत्रकार एकजुट होते ही नहीं उनसे लड़ने को। एक पत्रकार मनोज शर्मा (कुछ समय पूर्व मर चुका) बहुत शातिर था वह बड़े पत्रकारों पर भी मुकदमे करा देता था।

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