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पीएसीएल ने भारतीय तंत्र को दिखाया ठेंगा, पाबंदी के बावजूद जमकर उगाही जारी

चिटफंड कंपनी पीएसीएल को हजारों करोड़ रुपये का फ्रॉड करने के कारण भले ही सरकारी सिस्टम चौतरफा शिकंजे में लिए हो लेकिन इस कंपनी की सेहत पर कोई असर पड़ता दिख नहीं रहा है. कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू के अघोषित आदेश के कारण पीएसीएल का पैसा उगाही अभियान जोरों पर जारी है. एक ताजे आंतरिक सर्वे में पता चला है कि इस कंपनी ने बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत भारत के बहुत बड़े हिस्से में निवेशकों को बरगलाकर पैसे जमा कराने का काम जारी रखा हुआ है.

(राजस्थान का कोटा शहर. यहां चिटफंड कंपनी पीएसीएल का चमचमाता बड़ा सा आफिस बीच शहर में जोर शोर से चालू है. यहां हर रोज लाखों रुपये निवेशकों का जमा कराया जाता है. पीएसीएल के एजेंट स्थानीय लोगों को लंबे चौड़े सपने दिखाकर पैसे जमा कराते हैं और खुद भारी भरकम कमीशन खाते हैं. यह खेल पूरे देश में जारी है. हालांकि सेबी, सुप्रीम कोर्ट समेत कई एजेंसियों संस्थाओं ने इस कंपनी पर पाबंदी लगाकर निवेशकों से पैसे जमा कराने पर रोक लगा दी है और पहले जमा कराए गए पैसे लौटाने को कहा है. पर पीएसीएल के कर्ताधर्ता भारतीय तंत्र को धता बताकर अपना धंधा जारी रखे हुए हैं.)

चिटफंड कंपनी पीएसीएल को हजारों करोड़ रुपये का फ्रॉड करने के कारण भले ही सरकारी सिस्टम चौतरफा शिकंजे में लिए हो लेकिन इस कंपनी की सेहत पर कोई असर पड़ता दिख नहीं रहा है. कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू के अघोषित आदेश के कारण पीएसीएल का पैसा उगाही अभियान जोरों पर जारी है. एक ताजे आंतरिक सर्वे में पता चला है कि इस कंपनी ने बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत भारत के बहुत बड़े हिस्से में निवेशकों को बरगलाकर पैसे जमा कराने का काम जारी रखा हुआ है.

(राजस्थान का कोटा शहर. यहां चिटफंड कंपनी पीएसीएल का चमचमाता बड़ा सा आफिस बीच शहर में जोर शोर से चालू है. यहां हर रोज लाखों रुपये निवेशकों का जमा कराया जाता है. पीएसीएल के एजेंट स्थानीय लोगों को लंबे चौड़े सपने दिखाकर पैसे जमा कराते हैं और खुद भारी भरकम कमीशन खाते हैं. यह खेल पूरे देश में जारी है. हालांकि सेबी, सुप्रीम कोर्ट समेत कई एजेंसियों संस्थाओं ने इस कंपनी पर पाबंदी लगाकर निवेशकों से पैसे जमा कराने पर रोक लगा दी है और पहले जमा कराए गए पैसे लौटाने को कहा है. पर पीएसीएल के कर्ताधर्ता भारतीय तंत्र को धता बताकर अपना धंधा जारी रखे हुए हैं.)

उधर, जो निवेशक परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद पैसे मांगने कंपनी के आफिस आ रहे हैं तो उन्हें हर हाल में बिना पैसे दिए टरका दिया जा रहा है. इन लोगों को उनका पैसा किसी अन्य स्कीम में डालने का प्रलोभन दिया जा रहा है ताकि पैसा कंपनी से बाहर न जाए. ऐसे हजारों लोगों ने पिछले दिनों पीएसीएल के मालिकों के घरों के सामने प्रदर्शन किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. कंपनी प्रबंधन अब भी भारतीय सिस्टम को पटाने और खरीदने में जुटा हुआ है. चर्चा है कि इसी कारण अभी तक भंगू गिरफ्तार नहीं हो पा रहा है.

एक चर्चा यह भी है कि भंगू ने सारी संपत्ति देश से बाहर ले जाकर दूसरे देशों में धंधा जमा लिया है. इसने भारत में अपनी कंपनियों में खुद की पोजीशन ऐसी कर ली है कि मालिक के रूप में दूसरे लोग फंसेंगे, वह खुद को बेदाग निकाल लेने में सफल रहेगा. मास्टर माइंड निर्मल सिंह भंगू के इस खेल पर से आंतरिक सर्वे एजेंसी ने परदा उठाया है.

पर्ल्स और पीएसीएल के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू और उनके रिश्तेदारों का पीएसीएल लिमिटेड की तीन में से दो मातृ कंपनियों पर नियंत्रण है. ये ब्योरा 61 वर्षीय भंगू के उस दावे के बाद सामने आ रहा है जिसमें उन्होंने खुद को कंपनी का ‘सलाहकार’ होने का दावा किया. जिन दिनों बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल लि. से 5.85 करोड़ निवेशकों से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपये लौटाने के लिए कहा था तब भंगू ने सेबी को बताया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस गलत भेजा गया है.

पीएसीएल की वार्षिक रिपोर्ट में उसके शीर्ष शेयरधारकों में तीन कारोबारी इकाइयों के नामों का उल्लेख है. ये सिंह एंड सिंह एंड सिंह टाउनशिप डेवलपर्स लिमिटेड याशिका फिनलीज लि. और अलार्मिंग फिनवेस्ट लि. थीं, जिनके पास पीएसीएल की कुल 20 फीसदी हिस्सेदारी थी. निर्मल सिंह भंगू के पास याशिका फिनलीज की 8.84 फीसदी हिस्सेदारी है. निर्मल सिंह भंगू के रिश्तेदार हरविंदर सिंह भंगू की याशिका में 9.55 फीसदी हिस्सेदारी है. शेयर बाजारों को दी गई जानकारियों में इस शख्स और भंगू के बीच संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया. इसमें हरविंदर को दिल्ली के पश्चिम विहार का निवासी बताया गया है और पिता / पति के कॉलम में ‘निर्मल सिंह भंगू’ लिखा था. इस प्रकार यह भंगू का बेटे हो सकता है. परिवार के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भंगू के बेटे का नाम हरविंदर था, जो कुछ साल पहले गुजर गया. उनकी दो बेटियां ऑस्ट्रेलिया में कारोबार का प्रबंधन करती हैं. याशिका की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी.

ऐसे तमाम खेल, गणित, तिकड़मों के जरिए भंगू खुद बचा लेने का मंसूबा पाले हुए है. देखना है कि भारतीय न्याय प्रणाली, भारतीय जांच व्यवस्था भारत के इस सबसे बड़े चारसौबीस को सीखचों के पीछे पहुंचाने और निवेशकों को उनका वाजिब धन दलाने में में कामयाब हो पाती है या फिर सबको चकमा देकर भंगू भारत से भागकर विदेशों में ऐश का जीवन बसर करता रहेगा व भारत के करोड़ों निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई के लिए खून के आंसू रोते रहेंगे.

भड़ास4मीडिया के स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) के हेड सुजीत कुमार सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क: 09170257971

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