दैनिक जागरण में सरकारी विज्ञापन छापने पर लगी रोक

पेड न्यूज के मामले की जांच के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिया आदेश, केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद डीएवीपी ने जारी किया निलंबन का आदेश, दैनिक जागरण पर पेड न्यूज यानि पैसे लेकर खबर छापने का आरोप हुआ साबित
नई दिल्ली। मीडिया इंडस्ट्री से एक चौंकाने वाली ख़बर आ रही है। पेड न्यूज यानि पैसे लेकर खबर छापने के मामले में बड़ी  कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन पर रोक लगा दी है। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में डीएवीपी को निर्देशित करते हुए कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि कि दैनिक जागरण सहित 51 समाचार पत्र जिन्होंने पेड न्यूज छापा है उन्हें किसी भी तरह से सरकारी विज्ञापन ना जारी किया जाए। केंद्र सरकार ने यह कार्रवाई पत्रकार एवं पत्रकार संगठनों की सर्वोच्च संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश के बाद किया है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने ही दैनिक जागरण द्वारा पेड न्यूज छापने के मामले की जांच की। जांच में दैनिक जागरण अपने पक्ष में ठोस एवं पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाया।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण ने पैसे लेकर खबरों का प्रकाशन किया था। हालांकि पूर्व में भी दैनिक जागरण में इस तरह की खबरें प्रकाशित की जाती रही हैं लेकिन अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण द्वारा पैसे लेकर खबर छापने के मामले में उस समय भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में दैनिक जागरण के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुए थे। गाजियाबाद पुलिस ने उस समय दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता सहित उसके कई संपादकों को गिरफ्तार करने के लिए जागरण के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी एवं दबिश दी थी।

दबिश के दौरान संजय गुप्ता किसी तरह बच गए थे। लेकिन पुलिस ने jagran.com के संपादक शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था । दैनिक जागरण के संपादक शेखर त्रिपाठी को गाजियाबाद पुलिस ने कवि नगर थाने के लॉकअप में रात भर बंद रखा था। बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिली थी। शेखर त्रिपाठी ने कहा था कि यह न्यूज़ दैनिक जागरण मैनेजमेंट के कहने पर छापा गया था। खुद को फंसा हुआ देख और जेल जाने के डर से सहमे संजय गुप्ता ने पेड न्यूज छापने के लिए कंपनी के विज्ञापन विभाग को जिम्मेदार बताया  था। दैनिक जागरण के इस कुकृत्य कि मीडिया इंडस्ट्री में एवं पत्रकार बिरादरी में खूब थू – थू हुई थी।

The Hindu Hindustan Times Indian Express Jansatta सहित देश के सभी बड़े प्रमुख एवं सम्मानित राष्ट्रीय अखबारों ने दैनिक जागरण के इस कृत्य की निंदा करते हुए खबरें प्रकाशित की थी। पत्रकारिता के गिरते हुए स्तरं को बचाने एवं उसे फिर से सुधारने के लिए दैनिक जागरण को कसूरवार मानते हुए वरिष्ठ पत्रकारों ने कड़ी कार्रवाई की मांग प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से की थी। प्रसिद्ध पत्रकार एवं इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने इस मामले में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक के गिरफ्तारी की मांग की थी। रामबहादुर राय ने कहा था कि दैनिक जागरण के प्रधान संपादक एवं मालिक संजय गुप्ता हैं ऐसे में उन्हें हर हाल में गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पैसे लेकर खबर छापने के मामले में दैनिक जागरण की पहले भी किरकिरी हो चुकी है वर्ष 2009 में दैनिक जागरण में सभी चुनावी खबरें पैसे लेकर छापी गई थी।

दैनिक जागरण के मालिकों को कटघरे में रखते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने कहा था कि दैनिक जागरण में खबर छापने के बदले में उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं। लालजी टंडन ने कहा कि दैनिक जागरण के मालिक एहसान फरामोश एवं धोखेबाज हैं। दैनिक जागरण के मालिकों को भारतीय जनता पार्टी ने टिकट दिया एवं राज्यसभा मैं सांसद बनाया लेकिन वह लोग इस एहसान को भी भूल गए।

जनसत्ता अखबार के संपादक ओम थानवी ने भी संजय गुप्ता को प्रायश्चित करने की सलाह दी थी और पेड न्यूज के मामले में दैनिक जागरण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी। वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र सुरजन अरुण महेश्वरी उर्मिलेश सहित सभी नामी गिरामी पत्रकारों ने एवं संपादकों ने दैनिक जागरण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उस समय दैनिक जागरण के एक संपादक की गिरफ्तारी के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। लेकिन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए और इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दैनिक जागरण को दोषी करार दिया। सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा 13 सितंबर 2017 को जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि अगले 2 महीने तक दैनिक जागरण को मिलने वाले सरकारी विज्ञापन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। 2 महीना पूरा होने के बाद ही इस बारे में सोचा जाएगा कि क्या फिर से दैनिक जागरण को सरकारी विज्ञापन की मान्यता के दायरे में लाया जाए कि नहीं लाया जाए।

मूल खबर…

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संजय गुप्ता यानि स्वतंत्रता का दुश्मन

Shrikant Singh : देश के इस दुश्‍मन को अच्‍छी तरह पहचान लें… दोस्‍तो, देश के दुश्‍मनों से लड़ने से कहीं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण उन्‍हें पहचानना है। सीमापार के दुश्‍मनों से कहीं अधिक खतरनाक दुश्‍मन देश के अंदर हैं। आप उन्‍हें पहचान गए तो समझिए हमारी जीत पक्‍की। हम आपका ध्‍यान देश के एक ऐसे दुश्‍मन की ओर दिलाना चाहते हैं, जो पुलिस, प्रशासन, देश की न्‍यायपालिका और यहां तक कि देश की व्‍यवस्‍था तक को प्रभावित कर अपनी मुनाफाखोरी के जरिये इस देश को लूट रहा है। आप पहचान गए होंगे। हम दैनिक जागरण प्रबंधन की बात कर रहे हैं। आज 26 जनवरी है। गणतंत्र दिवस। इस दिन एक वाकया याद आ रहा है।

पहले दैनिक जागरण में स्‍वतंत्रता दिवस को सेलीब्रेट किया जाता था, लेकिन अब 26 जनवरी को सेलीब्रेट किया जाता है। इसके पीछे जन्‍मजात महान पत्रकार संजय गुप्‍ता ने तर्क दिया था कि अब इस देश को स्‍वतंत्रता की जरूरत नहीं है। अब जरूरत है तो नियमों पर चलने की। चूंकि 26 जनवरी को भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था, इसलिए उन्‍होंने इसे नियमों का दिवस मानकर सेलीब्रेट कराना शुरू करा दिया। अब इंसान हर चीज को अपने फायदे के लिए किस प्रकार परिभाषित कर लेता है, उसका उदाहरण संजय गुप्‍ता से बड़ा और कौन हो सकता है। उन्‍होंने स्‍वतंत्रता का अर्थ अपने कर्मचारियों की स्‍वतंत्रता से लगाया और अपने मैनेजर, संपादक से लेकर चपरासी तक की स्‍वतंत्रता छीननी शुरू कर दी।

नियमों का अर्थ उनकी नजर में संविधान के नियम नहीं, बल्कि दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से थोपे जाने वाले संविधान विरोधी नियम थे। अब अपने चापलूसों के साथ बैठकर वह जो नियम बना देते हैं, उसका पालन करना दैनिक जागरण परिवार के हर सदस्‍य की मजबूरी बन जाता है। जो इस मजबूरी को ढोने से तोबा करने को मजबूर हो जाता है, उसे बाहर का रास्‍ता दिखा दिया जाता है। इसके भुक्‍तभोगी दैनिक जागरण के तमाम कर्मचारी हैं, जिनमें से सैकड़ों संघर्ष के लिए सड़क पर उतर आए हैं। राहत की बात यह है कि कल उत्‍तर प्रदेश सरकार ने एक हेल्‍पलाइन जारी की, जहां शिकायत कर आप दैनिक जागरण प्रबंधन को यह बता सकते हैं कि साहब नियम यह नहीं यह है। मेरी इस देश के पाठकों, विज्ञापनदाताओं और अभिकर्ताओं से गुजारिश है कि देश के इस दुश्‍मन को जितनी जल्‍दी हो सके सबक सिखाएं। नहीं तो बहुत देर हो जाएगी और यह मुनाफाखोर इस देश को पूरी तरह से लूट चुका होगा। अपना खयाल रखें। आज का दिन आपके लिए शुभ हो। गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

दैनिक जागरण में मुख्य उपसंपादक पद पर कार्यरत क्रांतिकारी पत्रकार श्रीकांत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण कर्मियों ने अपने मालिक और संपादक संजय गुप्ता के आवास के बाहर प्रदर्शन कर अपना हक मांगा

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने बुधवार को अखबार के मालिक संजय गुप्ता के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने महारानी बाग से लेकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी तक जुलूस निकाला और संजय गुप्ता के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि दैनिक जागरण के मालिक माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। संजय गुप्ता पर माननीय न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चल रहा है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों को दैनिक जागरण की ओर से 350 से अधिक कर्मचारियों को अपना हक़ मांगने पर संस्थान से बाहर करने की भी जानकारी दी गई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष और तेज करेंगे। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने गुंडागर्दी करते हुए मजीठिया की मांग कर रहे 350 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित व बर्खास्त कर दिया है। कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर नोएडा की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपना हक़ लेकर रहेंगे और मालिकों और उनके चमचों को मेहनतकशों की बद्दुआएं जरूर लगेंगी।

अगली स्लाइड में पढ़ें>> दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने नोएडा में अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन, निकाला जुलूस” नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

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धर्मशाला जिला मुख्यालय में दैनिक जागरण के खिलाफ निकला जुलूस, लगे नारे (देखें तस्वीरें)

धर्मशाला, 15 अक्तूबर। मजीठिया वेज बोर्ड के तहत वेतनमान व एरियर की मांग करने पर दैनिक जागरण से सस्पेंड किए गए धर्मशाला यूनिट के कर्मियों ने आज जिला मुख्यालय में रैली निकाल कर दैनिक जागरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जगरण प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने पर सस्पेंड किए गए 18 कर्मियों ने पहले दैनिक जागरण की पठानकोट-मनाली एनएच किनारे शाहपुर के बनोई में स्थित प्रेस के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया था। वीरवार को वे जिला मुख्यालय में पहुंचे और यहां दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता और प्रबंधन के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की।

दैनिक जागरण कर्मी आज सुबह एजूकेशन बोर्ड के पास से नारेबाजी करते हुए कचहरी अड्डा में पहुंचे। यहां उन्होंने मिनी सचिवालय के आसपास रैली निकाली और नारेबाजी की। इसके बाद वे उपायुक्त कार्यालय गए। यहां कुछ देर तक धरना देते हुए नारेबाजी की गई। इसके बाद वे जिला न्यायालय परिसर से होते हुए जिला श्रम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कार्यालय के बाहर काफी देर तक प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए।

प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है, जबकि किसी अखबार के कर्मियों ने उसकी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की हो। अब तक बाकी कर्मचारियों व अन्य लोगों की रैलियों की कवरेज करने वाले जिला मुख्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों सहित यहां पहुंचे लोग एक अखबार के खिलाफ निकली रैली से काफी हैरान थे। जनता के हितैषी होने और उनके हक की आवाज उठाने का दावा करने वाली अखबारों के अंदर हो रहे शोषण व कर्मचारियों के दमन के बारे में सुन कर हर कोई अखबार मालिकों को कोसता नजर आया। हालांकि इस रैली से केवल दैनिक जागरण की ही इज्जत सरेआम नीलम हुई है। वह दिन दूर नहीं जब बाकी अखबारों के कर्मचारी भी अपने हक के लिए सड़कों पर नजर आएंगे।

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दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक और मार्केटिंग मैनेजर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज

मीडिया संस्थानों में गजब का खेल है। भले ही लोगों को बाहर से कुछ दिखता हो, लेकिन इसकी हालत आम कारोबार की तरह है। मुनाफा की होड़ में हर तरह के हथकंडे अख्तियार किए जा रहे हैं। देश का नम्बर वन अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण अखबार में भी तरह—तरह के खेल हैं। मामला कार्यस्थल पर सम्मान का है। फिलहाल इस अखबार में सीनियर मार्केटिंग एक्जक्यूटिव के पद पर कार्यरत पीड़ित महिला कर्मचारी ने गौतमबुद्ध नगर थाना में दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक नीतेन्द्र श्रीवास्तव, कार्मिक प्रबंधक देवानंद कुमार उर्फ मुन्ना और नोएडा के मार्केटिंग मैनेजर नकुल त्यागी पर भारतीय दंड विधान की धारा 354ए और 504बी के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। यह मुकदमा कांड संख्या 643/15 के अन्तर्गत दर्ज किया गया है।

दर्ज मुकदमे में पीड़िता ने कार्यस्थल पर लगातार शारीरिक और मानसिक तौर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। बहाना तो मार्केटिंग के टारगेट था, लेकिन उसके पीछे कुछ और चल रहा था। उसका दावा है कि वह मार्केटिंग के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में कामयाब रही है। दर्ज प्राथमिकी में यह आरोप लगाया है कि नोएडा के मार्केटिंग मैनेजर नकुल त्यागी का आचरण मर्यादा के विपरीत है। विरोध करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इतना ही नहीं कार्मिक विभाग के प्रबंधक ने भी यह नसीहत दी कि— ”नौकरी करनी है तो सबकुछ बर्दाश्त करना होगा।” जब इसकी शिकायत मुख्य महाप्रबंधक से की तो उन्होंने भी इन्हीं अधिकारियों का पक्ष ​​लिया।

24 अगस्त को उसे कार्यालय के गेट पर गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया। पूछने पर बताया गया कि कार्मिक विभाग के प्रबंधक के आदेश पर ऐसा किया गया है। इस संबध में जब उनसे इंटरकॉम पर बात की तो वे फिर अभद्रता पर उतर आए। मामला थाने में पहुंचने से पहले पीड़िता ने प्रबंधन के शीर्ष लोगों को भी मेल के माध्यम से वाफिक कराया। उधर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आने के कारण न्याय के लिये पुलिस के पास दस्तक दी है। पुलिस ने प्रबंधन के दबाव में दूसरा मुकदमा पहले ही दर्ज कर लिया है। प्रबंधन ने पीड़िता सहित संस्थान के चालीस लोगों के खिलाफ मुकदमा किया है। इस मुकदमें में आरोप है कि इन लोगों ने नौकरी से निकाले जाने के बाद जबरन संस्थान में घुसकर मुख्य महाप्रबंधक का घेराव किया। यह मुकदमा नोएडा फेजथ्री में दर्ज कराया गया है। सवाल यह उठता है कि यदि प्रबंधन के लोग यह कहते हैं कि इन्हें हटाया गया तो क्या उसके पहले की तमाम प्रक्रिया पूरी की थी।

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जब निशिकांत ठाकुर ने पहला शिकार रामजीवन गुप्ता को बनाने की चाल चली थी…

साथियों, मजीठिया वेजबोर्ड के संघर्ष में हम एकजुट होकर विरोधस्वरूप काली पट्टी बांधकर जागरण प्रबंध तंत्र की मजबूत नींव को हिलाने में कामयाब जरूर हुए लेकिन वर्तमान की एकता से घबराए प्रबंध तंत्र अंदर ही अंदर किसी भयानक षड्यंत्र को रचने से बाज नहीं आएंगे। 1991 की बात है। 8-10-1991 की मध्यरात्रि में हड़ताल का बिगुल बजने पर तात्कालिक सुपरवाइजर प्रदुमन उपाध्याय ने एफ-21, सेक्टर-8 (मशीन विभाग) में ले जाकर यूनियन से अलग होने और यूनियन का बहिष्कार करने के एवज में नकदी की पेशकश की थी।

साथियों, लालच को मैंने दरकिनार कर दिया था। मेरे अंदर यूनियन का एक नशा था, जुनून था, जज्बा था, ईमानदारी थी। गद्दारी ना करने की सोच थी। कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व करने के दौरान मैंने कभी अपने जमीर को शर्मसार नहीं होने दिया। 1991 में यूनियन के दबंग अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा की यादें ताजा हो आईं। उनके अंदर भी दैनिक जागरण के प्रति नफरत की चिंगारी ज्वलंत देखी थी। सोच अच्छी रहती किंतु निर्णायक मोड़ पर प्रश्नचिन्ह लग जाता। मैं यूनियन उपाध्यक्ष पद रहते हुए उनकी कुछ बातों से सहमत नहीं हो पाता था। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के तालमेल ना होने का नतीजा ही यूनियन टूटने का सबब बना। चंदमिनटों में बाजी पलट गई। नतीजा- जागरण मैनेजमेंट को भीख में जीत हासिल हो गई। स्व. नरेंद्र मोहन द्वारा जीत की खुशी में कुछ देने की मंशा पर झट से मैंने सर्वहित में परमानेंट लेटर मांग लिया। एकाएक स्तब्ध होकर सोचने को विवश नरेंद्र मोहन वचनबद्ध स्वरूप को तात्कालिक प्रबंधक अरूण महेश्वरी को आदेश देना पड़ा। यहां मेरा निर्णय सर्वहित में था।

साथियों, मा. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 2011 में मजीठिया वेजबोर्ड की सुगबुगाहट होते ही 1991 में छोटे ओहदे से शुरूआत कर महाप्रबंधक का सफर तय करने वाले निशिकांत ठाकुर ने पहला शिकार फिर मुझे यानि रामजीवन गुप्ता (पीटीएस, आईएनएस) को यह सोचकर बनाया कि 1991 में यह बंदा कभी शेर था, अब तो गीदड़ बन गया होगा, शिकार आसानी से हो जाएगा। 2012 में सुस्त पड़े शेर को जगाने की भूल करने वाले जागरण को अपनी संपत्ति समझने वाले महाप्रबंधक के साथ संलिप्त समस्त अधिकारीगण अब संस्थान से विदा हो गए। बाद में आए अधिकारीगण भी उत्पीड़न की कला में माहिर एक से बढ़कर एक शातिर चालों में पारंगत चापलूस टीम मालिकों को भ्रम में रखकर अपनी गोटियां सेंक रहे हैं। मालिक भी धृतराष्ट बने बैठे हैं। महाभारत होने का इंतजार कर रहे हैं। महाभारत का परिणाम पता है- केवल पतन। वही अब दैनिक जागरण का होने वाला है, ऐसा प्रतीत होता है।

दोस्तों, युद्ध होने में कुछ दिन बाकी हैं। सहयोगी रूपी यूनियन के पदाधिकारियों का कुछ कहना है। मैं भी इनका शिकार मई-2012 से बना हुआ हूं। वाद-विवाद के चलते मैं (रामजीवन गुप्ता, पीटीएस, आईएनएस) जीविकोपार्जन हेतु मोहताज हूं। बिछुड़े कर्मचारियों के बारे में वर्तमान यूनियन ने कोई जिक्र नहीं किया। केवल वर्तमान की आधारशिला पर किला फतेह करना आसान नहीं होगा। मेरी जंग आज भी धारदार है, किंतु भूखे पेट क्या खाक लड़ा जाएगा। यूनियन के पदाधिकारियों से गुजारिश है- जब भी मैनेजमेंट और वर्कर की बात आती है तो हम भी पलकें बिछाए बैठे हैं सनम आपकी राहों में, जरा इधर भी निगाहें करें। हम भी तो आपके ही सिपाही हैं। भले ही सीट छिन गई, पर दम तो बाकी है। यह बातें सब आपबीती हैं।

रामजीवन गुप्ता

पीटीएस

आईएनएस

rahulguptan9@gmail.com

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मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई, भविष्य की रणनीति और लड़ने का आखिरी मौका… (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : सुप्रीम कोर्ट से अभी लौटा हूं. जीवन में पहली दफे सुप्रीम कोर्ट के अंदर जाने का मौका मिला. गेट पर वकील के मुहर लगा फार्म भरना पड़ा जिसमें अपना परिचय, केस नंबर आदि लिखने के बाद अपने फोटो आईडी की फोटोकापी को नत्थीकर रिसेप्शन पर दिया. वहां रिसेप्शन वाली लड़की ने मेरा फोटो खींचकर व कुछ बातें पूछ कर एक फोटो इंट्री पास बनाया. पास पर एक होलोग्राम चिपकाने के बाद मुझे दिया. जब तक कोर्ट नंबर आठ पहुंचता, केस की सुनवाई समाप्त होने को थी.

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में भड़ास यानि Bhadas4Media.com की पहल पर दायर सैकड़ों याचिकाओं की सुनवाई आज थी. जो साथी छुपकर लड़ रहे हैं, उनको मैं रिप्रजेंट कर रहा हूं. कोर्ट नंबर आठ में आइटम नंबर तीन था. दूसरे कई पत्रकार साथी और उनके वकील भी आए हुए थे. मामले की सुनवाई शुरू होते ही टाइम्स आफ इंडिया की तरफ से आए एक वकील ने कहा कि उनके खिलाफ जिस कर्मचारी ने याचिका दायर की थी, उसने वापस लेने के लिए सहमति दे दी है. इस पर कर्मचारी के वकील ने विरोध किया और कहा कि ये झूठ है. इसको लेकर न्यायाधीश ने लड़-भिड़ रहे दोनों वकीलों को फटकार लगाई और इस प्रकरण को अपने पास रोक लिया. इसी तरह वकील परमानंद पांडेय के एक मामले में जब दूसरे पक्ष के वकील ने कहा कि मजीठिया मांगने वाला कर्मी इसके दायरे में आता ही नहीं तो न्यायाधीश ने परमानंद पांडेय से पूछ लिया कि क्या ये सही है. पांडेय जी फाइल देखने लगे. तुरंत जवाब न मिलने पर न्यायाधीश ने इस मामले को भी होल्ड करा लिया. बाकी सभी मामलों में  कोर्ट ने सभी मालिकों को नोटिस भेजने का आदेश दिया है. इस नोटिस में कहा गया है कि क्यों न अखबार मालिकों के खिलाफ अवमानना का मुकदमा शुरू किया जाए. मामले की सुनवाई की अगली तारीख 28 अप्रैल है.

दोस्तों, एक मदद चाहिए. सभी अखबारों की डीएवीपी में दिखाई जाने वाली प्रसार संख्या, आरएनआई में दायर किए जाने वाले रिटर्न का डिटेल और कंपनी बैलेंस शीट आदि के आंकड़े चाहिए. जो साथी इसे मुहैया करा सकता है वह मुझे yashwant@bhadas4media.com पर मेल करे. अखबार मालिक अपने बचाव के लिए जो नई चाल चल रहे हैं, उसका काउंटर करने के लिए ये आंकड़े मिलने बहुत जरूरी हैं ताकि आम पत्रकारों को उनका हक दिलाया जा सके. मालिकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख बहुत तल्ख है. आज की सुनवाई से यह लग रहा है कि 28 अप्रैल की डेट पर सुप्रीम कोर्ट अखबार मालिकों के खिलाफ कोई कड़ा आदेश जारी कर सकता है. अगली डेट पर मालिकों की तरफ से क्या क्या नई चाल चली जाने वाली है, इसके कुछ डिटेल हाथ लगे हैं. उसी के तहत आप से सभी अखबारों की डीएवीपी में दिखाई जाने वाली प्रसार संख्या, आरएनआई में दायर किए जाने वाले रिटर्न का डिटेल और कंपनी बैलेंस शीट आदि के आंकड़े मांगे जा रहे हैं. आप लोग जिन-जिन अखबारों में हो, उन उन अखबारों के उपरोक्त डिटेल पता लगाएं. मैं भी अपने स्तर पर इस काम में लगता हूं.

दोस्तों बस कुछ ही दिनों का खेल है. जी-जान से सबको लग जुट जाना है. ये नहीं देखना है कि उसका वकील कौन है मेरा वकील कौन है. जो भी हैं, सब अच्छे हैं और सब अपने हैं. जो साथी अब तक इस लड़ाई में छुपकर या खुलकर शरीक नहीं हो पाए हैं, उनके लिए अब कुछ दिन ही शेष हैं. आप सिर्फ सात हजार रुपये में सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से बनने वाली अपनी सेलरी व अपना एरियर का हक पाने के लिए एडवोकेट Umesh Sharma​ के मार्फत केस डाल सकते हैं. एडवोकेट उमेश शर्मा से उनकी मेल आईडी legalhelplineindia@gmail.com या उनके आफिस के फोन नंबर 011-2335 5388 या उनके निजी मोबाइल नंबर 09868235388 के जरिए संपर्क कर सकते हैं.

आज यानि 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर एडवोकेट उमेश शर्मा ने जो कुछ मुझे बताया, उसे मैंने अपने मोबाइल से रिकार्ड कर लिया ताकि आप लोग भी सुनें जानें और बूझें. क्लिक करें इस लिंक पर: https://www.youtube.com/watch?v=KTTDbkReQ1k

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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भड़ास की पहल पर दायर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार, 27 मार्च को होगी सुनवाई

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मजीठिया संघर्ष : जागरण प्रबंधन ने तबादला किया तो श्रीकांत ने मैनेजमेंट को भेजा नोटिस

दैनिक जागरण के नोएडा कार्यालय से जम्मू स्थानांतरित मुख्य उपसंपादक श्रीकांत सिंह ने जागरण प्रबंधन को दिया नोटिस. कार्मिक प्रबंधक रमेश कुमार कुमावत ने श्रम प्रवर्तन अध‍िकारी राधे श्याम सिंह को दिए थे भ्रामक, गुमराह करने वाले और अपूर्ण बयान. जागरण प्रबंधन की दुर्भावनापूर्ण नीतियों के कारण श्रीकांत सिंह को ड्यूटी करने में पहुंचाई जा रही है बाधा. प्रबंधन की हठधर्मिता के विरोध में श्रीकांत सिंह लेंगे अदालत की शरण. पढ़ें, नोटिस में क्या लिखा गया है… 

From: shrikant@jmu.jagran.com

To: rkumawat@nda.jagran.com

CC: sanjaygupta@jagran.com,  neetendra@jagran.com,  vishnu@jagran.com,  abhimanyu@jmu.jagran.com,  personnel@jmu.jagran.com,  prashant@jmu.jagran.com,  dilip@jmu.jagran.com,  sudhirjha@jmu.jagran.com,  om@jmu.jagran.com,  yogita@jmu.jagran.com,  rakesh@jmu.jagran.com,  akhilesh@jmu.jagran.com

Subject: Notice

श्री रमेश कुमार कुमावत जी

कार्मिक प्रबंधक, दैनिक जागरण

डी-210,11, सेक्टर-63, नोएडा।

मान्यवर,

दैनिक जागरण के नोएडा कार्यालय में आपके निर्देश पर मुझ पर हमला कराए जाने के संदर्भ में मुझे श्रम प्रवर्तन अधि‍कारी श्री राधेश्याम सिंह की जांच रिपोर्ट मिली है। उसमें आपके द्वारा दिए गए बयान भ्रामक और अपूर्ण हैं। आपने यह बताया ही नहीं है कि दैनिक जागरण के नोएडा कार्यालय में मेरे प्रवेश पर रोक किसने और क्यों लगाई है। आपने अधि‍कारी को बताया है कि मेरा तबादला दो वर्ष पूर्व किया गया और प्रतिष्ठान द्वारा स्थानांतरण रोके जाने संबंधी निर्देश से मैं आच्छादित नहीं हूं। आपका यह बयान भी असत्य, भ्रामक और गुमराह करने वाला है। मुझे तबादले का पत्र 28 दिसंबर 2013 को दिया गया, लेकिन आपकी लापरवाही, ढुलमुल रवैया और स्थानांतरण संबंधी डाटा समय पर जम्मू कार्यालय न भेजे जाने के कारण मैं वर्ष 2014 में जम्मू कार्यालय में ज्वाइन कर सका। इस आधार पर अभी मेरे तबादले के एक वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं। दूसरी बात यह कि प्रधान संपादक आदरणीय संजय गुप्त और महाप्रबंधक श्री नीतेंद्र श्रीवास्तव के निर्देशों का संदर्भ लें तो उससे यह कतई पुष्ट नहीं होता है कि मैं तबादला वापसी संबंधी निर्देशों से आच्छादित नहीं हूं। इस प्रकार आपके बयान मेरे प्रति आपकी दुर्भावना पुष्ट करते हैं।

पुन: बताना चाहता हूं किे जम्मू कार्यालय में मुझे तरह-तरह से प्रताडि़त किया गया और धमकाया गया, जिसके बारे में प्रबंधन को समय-समय पर अवगत कराता रहा हूं, लेकिन मेरी प्रताड़ना को रोकने के लिए प्रबंधन ने कोई कदम नहीं उठया। प्रताड़ना के कारण ही जम्मू में मेरा स्वास्थ्य बुरी तरह से खराब हो गया, जिसकी मेडिकल जांच रिपोर्ट मैंने दैनिक जागरण के नोएडा और जम्मू कार्यालय के प्रबंधन को उपलब्ध करा दी है। प्रबंधन की दुर्भावनापूर्ण नीतियों के कारण इस समय मैं ड्यूटी नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए यह मेल मिलने के 24 घंटों के भीतर मुझे मेरे सवालों का जवाब दें और नोएडा कार्यालय में मेरी ज्वाइनिंग संबंधी मेल जारी करें, नहीं तो मेरा एक भी दिन का वेतन काटा गया तो मैं संपूर्ण क्षतिपूर्ति हासिल करने के लिए अदालत की शरण लेने को मजबूर हो जाऊंगा।

भवदीय

श्रीकांत सिंह
मुख्य उपसंपादक
संपादकीय विभाग, दैनिक जागरण

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दैनिक जागरण नोएडा हड़ताल : देखिए और पढ़िए जीत के इस निशान को, सलाम करिए मीडियाकर्मियों की एकजुटता को

जो मालिक, जो प्रबंधन, जो प्रबंधक, जो संपादक आपको प्रताड़ित करता है, काम पर आने से रोकता है, तनख्वाह नहीं बढ़ाता है, बिना कारण ट्रांसफर करने से लेकर इस्तीफा लिखवा लेता है, वही मालिक प्रबंधन प्रबंधक संपादक जब आप एकजुट हो जाते हैं तो हारे हुए कुक्कुर की तरह पूंछ अपने पीछे घुसा लेता है और पराजित फौज की तरह कान पकड़कर गल्ती मानते हुए थूक कर चाटता है. जी हां. दैनिक जागरण नोएडा में पिछले दिनों हुई हड़ताल इसका प्रमाण है. कर्मचारियों की जबरदस्त एकजुटता, काम का बहिष्कार कर आफिस से बाहर निकल कर नारेबाजी करना और मैनेजरों के लालीपॉप को ठुकरा देना दैनिक जागरण के परम शोषक किस्म के मालिक संजय गुप्ता को मजबूर कर गया कि वह कर्मचारियों की हर मांग को मानें.

जब संजय गुप्ता ने लिखित तौर पर मांग मानने की बात कही, मजीठिया मांगने के कारण उत्पीड़ित करते हुए ट्रांसफर किए गए लोगों से भूल सुधार करते हुए ट्रांसफर रद करने की बात कही तो कर्मचारी शांत हुए व काम पर लौटे.

ये लेटर असल में मीडियाकर्मियों की एकजुट ताकत के भय से पैदा असर का प्रतीक है. आप अलग अलग रहोगे, अलग अलग अपना भविष्य तलाशोगे, अलग अलग अपना करियर बनाओगे तो आपको एक एक कर मालिकों मैनेजरों द्वारा मार दिया जाएगा, नष्ट कर दिया जाएगा. जब एकजुट रहोगे, एकजुट होकर अपनी ताकत के साथ अपने मुद्दों पर भिड़ोगे तो इन्हीं मैनेजरों-मालिकों को झुका पाओगे और अपनी शर्त के साथ नौकरी कर पाओगे.

ये मालिक और मैनेजर हम मीडियाकर्मियों को अपना गुलाम, अपना दास, अपना सेवक, अपना धंधेबाज, अपना बाडीगार्ड, अपना चेला, अपना चिंटू, अपना मेठ बनाकर रखना चाहते हैं. जबकि भारत की शासन व्यवस्था में मीडियाकर्मियों को कई अतिरिक्त अधिकारों से लैस किया गया है. ये मालिक उन अधिकारों को नहीं देना चाहते. ये नहीं चाहते कि हम आप समृद्ध हो सकें, तार्किक हो सकें, लोकतांत्रिक हो सकें. ये अपने पर निर्भर रखना चाहते हैं. इसी कारण कम से कम सेलरी देकर आपको मजबूर बनाए रखना चाहते हैं. भारत सरकार ने बहुत पहले से व्यवस्था की हुई है कि वेज बोर्डों के जरिए मीडियाकर्मियों की आजादी को बरकरार रखा जा सके. आप तभी आजाद रह पाएंगे जब आप आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों. लेकिन सैकड़ों करोड़ मुनाफा कमाने वाले मीडिया मालिक किसी भी दशा में वेज बोर्ड न देना चाहते हैं और न देने की मंशा रखते हैं. सुप्रीम कोर्ट तक से इन्हें डर नहीं लगता. अब गेंद हमारे आपके पाले में है. आपको हमको संगठित होना पड़ेगा और गुंडई करने वाले मालिकों मैनेजरों को सबक सिखाना पड़ेगा. कहीं किसी यूनिट में अगर किसी भी मीडियाकर्मी को मजीठिया वेज बोर्ड मांगने के कारण परेशान किया जाता है तो सभी को मिलकर काम ठपकर गेट से बाहर आ जाना चाहिए ताकि मालिकों मैनेजरों को औकात पर लाया जा सके. दैनिक जागरण नोएडा ने रास्ता दिखा दिया है. 

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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मीडियाकर्मियों को अपनी कमर कसकर रहना होगा, मालिकान के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का समय करीब आ रहा है…

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दैनिक जागरण, नोएडा के हड़ताल की आंच हिसार तक पहुंची

दैनिक जागरण, नोएडा में कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. प्रबंधन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ कर्मचारियों का सालों से दबा गुस्‍सा अब छलक कर बाहर आ गया है. मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एक संपादकीय कर्मचारी का तबादला किए जाने के बाद सारे विभागों के कर्मचारी एकजुट होकर हड़ताल पर चले गए हैं. मौके पर प्रबंधन के लोग भी पहुंच गए हैं, लेकिन कर्मचारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल को बुला लिया है, लेकिन प्रबंधन के शह पर सही गलत करने वाली नोएडा पुलिस की हिम्‍मत भी कर्मचारियों से उलझने की नहीं हो रही है. 

कई सौ कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन नहीं दिए जाने और कर्मचारियों को प्रताडि़त करने के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जाने से नाराज थे. प्रबंधन के कुछ एक खास लोगों को छोड़कर सभी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं. नोएडा की हड़ताल का असर हरियाणा की हिसार यूनिट तक भी पहुंच गया है. हिसार यूनिट के जागरण कर्मचारी भी प्रबंधन के खिलाफ हड़ताल पर उतर गए हैं. माना जा रहा है कि सूचना मिलने के साथ जागरण समूह के अन्‍य यूनिटों के कर्मचारी भी प्रबंधन की हरामखोरी के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएंगे. 

हड़ताल की सूचना मिलते ही दैनिक जागरण के मालिक और संपादक संजय गुप्ता के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी हैं. वे हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद सारे कार्यक्रम स्थगित कर किसी तरह हड़ताल तुड़वाने की कोशिशों में जुट गए हैं और कर्मचारियों में फूट डलवाने के लिए अपने चेले टाइप के मैनेजर नीतेंद्र को लगा दिया है. इस मैनेजर की सारी कोशिशें बेकार हो रही हैं. कर्मचारी प्रबंधन की कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. उनकी मांग है कि मजीठिया मांगने वालों का तबादला रद्द करने के साथ सभी को वेज बोर्ड के हिसाब से सैलरी देने की लिखित घो‍षणा की जाए. साथ ही कर्मचारियों को हटाने या अन्‍यत्र भेजे जाने की कोशिश ना की जाए. 

कर्मचारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनकी मेहनत से प्रबंधन अरबों रूपए कमाता है और जब उनका हक देने की बारी आती है तो उन्‍हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगता है. वैसे भी जागरण कर्मचारियों की सैलरी अन्‍य बड़े अखबारों की सैलरी से काफी कम है. संभावना जताई जा रही है कि कर्मचारी बिना अपनी मांगों के हड़ताल किसी भी कीमत पर खत्‍म नहीं करने वाले हैं. कई अन्य पत्रकार भी मौके पर मौजूद हैं. भड़ास के संपादक यशवंत सिंह समेत पत्रकार राजीव शर्मा, अभिषेक श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, प्रशांत टंडन आदि हड़ताली जागरण कर्मियों के समर्थन में मौके पर डटे हुए हैं.

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

अंत में क्या हुआ, जानने के लिए इसे पढ़ें…

संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

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दैनिक जागरण, नोएडा में हड़ताल, सैकड़ों मीडियाकर्मी काम बंद कर आफिस से बाहर निकले

मीडिया जगत की एक बहुत बड़ी खबर भड़ास के पास आई है. दैनिक जागरण नोएडा के करीब तीन सौ कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दिया है और आफिस से बाहर आ गए हैं. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन नहीं दिए जाने और सेलरी को लेकर दैनिक जागरण के मालिकों की मनमानी का विरोध कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक हड़ताल की शुरुआत मशीन यानि प्रिंटिंग विभाग से जुड़े लोगों ने की और धीरे-धीरे इसमें सारे विभागों के लोग शामिल होते गए. सिर्फ संपादक विष्णु त्रिपाठी और इनके शिष्यों को छोड़कर बाकी सारे लोग हड़ताल के हिस्से बन गए हैं.

हड़ताल की सूचना मिलते ही दैनिक जागरण के मालिक और संपादक संजय गुप्ता के पांव तले से जमीन खिसक गई. वह हांफते दौड़ते नोएडा आफिस पहुंच रहे हैं, ऐसी अपुष्ट सूचना है. उधर, दैनिक जागरण नोएडा के मैनेजर लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह गुस्साए हड़तालियों को टैकल कैसे करें. खबर है कि जागरण प्रबंधन ने हड़ताल को देखते हुए दिन के शिफ्ट के लोगों को काम करने के लिए आफिस बुलाया है.

प्रबंधन की कोशिश है कि किसी तरह अखबार छप जाए ताकि हड़ताल को फ्लॉप साबित किया जा सके. लेकिन हड़ताली कर्मियों ने अपने यहां के बाकी सभी कर्मियों को कह दिया है कि जो भी काम करेगा, वह अपने साथियों के स्वाभिमान से खिलवाड़ करेगा क्योंकि जागरण के मालिक हर तिमाही सैकड़ों करोड़ का मुनाफा कमाते हैं लेकिन जब नियम-कानून के हिसाब से कर्मियों को सेलरी देने की बारी आती है तो एक पैसा नहीं बढ़ाकर देते, उल्टे सादे कागज पर मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी मिलने और सेलरी से संतुष्ट होने की फर्जी बात लिखवा कर उस पर साइन करवा लेते हैं.

बताया जा रहा है कि हड़ताल की तात्कालिक वजह एक मीडियाकर्मी रतन भूषण का तबादला किया जाना है. तबादले के पीछे मकसद दंडात्मक कार्रवाई करना है. दैनिक जागरण नोएडा के सैकड़ों कर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है. जागरण प्रबंधन को जिन-जिन पर कोर्ट जाने का शक होता है, उन-उन को प्रताड़ित परेशान करता रहता है. इसी क्रम में कई लोगों का तबादला किया गया और कई लोगों को डराया-धमकाया गया. इसी के खिलाफ ये सारे मीडियाकर्मी गुस्से में काम बंद कर सड़क पर आ गए.

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

अंत में क्या हुआ, जानने के लिए इसे भी पढ़ें….

संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

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दैनिक जागरण मैनेजमेंट इस घटिया और अपमानजनक रिपोर्ट को अपने पोर्टल से तुरंत हटाए

Mohammad Anas : दैनिक जागरण के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कुंठित वेब टीम की खोज. इस अखबार के पोर्टल पर उन अभिनेत्रियों की तस्वीर दिखाई जा रही है जो शादी से पहले प्रेग्नेंट हो गईं. हिट्स और लगातार हाइप में बने रहने के लिए पोर्टल्स में जिस तेजी से गिरावट आ रही है वह चिंताजनक है. न्यूज़ चैनल्स और अखबार की दुनिया में पोर्टल्स एक क्रांतिकारी पहल है जो खबरों को सुलभ और सहजता से हम तक पहुंचाता है लेकिन इसकी आड़ में ‘सॉफ्ट पोर्न’ परोसने वाले लोग निजता और सम्मान के प्रति न तो जवाबदेह हैं और न ही गंभीर.

एक बेहतरीन साधन का इतना गलत उपयोग निसंदेह गंभीर मामला है. दैनिक जागरण के जिम्मेदारों को इस घटिया और अपमानजनक रिपोर्ट को तुरंत अपने पोर्टल से हटा लेना चाहिए.  ऐसी घटिया रिपोर्टों के जरिए किसी की निजता का हनन करना बिलकुल ठीक नहीं है.

पत्रकार और एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

आपको भी कुछ कहना-बताना है तो bhadas4media@gmail.com पर मेल करें.

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