मुस्लिम लड़के से प्यार में धोखा खाई तो मरने के पहले पूरे कौम को कमीना बता गई (पढ़ें पत्र)

Sanjay Tiwari : वह दलित होकर भी वेमुला नहीं थी। न ही अखलाक हो पायी थी। आनंदी होती तो टीवी रोता। सोशल मीडिया भी निंदा ही करता लेकिन उसका दुर्भाग्य यह था कि वह न रोहित थी, न टीवी की आनंदी, इसलिए बिहार के एक जिले में सिंगल कॉलम की खबर बनकर रह गयी। लेकिन पूनम भारती की मौत का एक संदेश है। उसी तरह का संदेश जैसे रोहित वेमुला की मौत में एक संदेश था। पूनम भारती एक ऐसे झूठे फरेब का शिकार हुई जिससे वह प्यार के आवेग में बच नहीं पायी।

क्या गूगल, क्या माइक्रोसॉफ्ट और क्या फेसबुक… आप सबके लिए मोहरे हैं…

Sanjay Tiwari : इंटरनेट पर आजादी की दुहाई के दिन फिर से लौट आये हैं। फेसबुक अगर नयी तैयारी से मुफ्त सेवा देने के लिए कमर कसकर दोबारा लौटा है तो उसी फेसबुक पर उसकी इस मुफ्त सेवा का मुखर विरोध भी शुरू हो गया है। अच्छा है। जनता के हक हित और आजादी की मांग तो होनी ही चाहिए लेकिन आजादी की यह दुहाई थोड़ी बचकानी है। जिन दिनों फेसबुक मैदान में उतरा ही था उन दिनों भी कहा गया था कि यह प्राइवेसी में बहुत बड़ी सेंध लग रही है। लेकिन सेंध क्या? फेसबुक ने तो पूरा पनारा ही खोल दिया। क्या हुआ प्राइवेसी का? यह जानते हुए कि आपकी प्राइवेसी को सचमुच खतरा है फिर भी क्या बिना फेसबुक एकाउण्ट बनाये रह सकते हैं आप?

रजत अमरनाथ को दुबारा हार्ट अटैक, संजय तिवारी की हालत स्थिर

दो पत्रकार साथियों के स्वास्थ्य को लेकर सूचनाएं आ रही हैं. वरिष्ठ पत्रकार रजत अमरनाथ को दुबारा हार्ट अटैक हुआ. उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी एंजियोग्राफी की गई. आपरेशन सफल रहा. फिलहाल वह बेड रेस्ट पर हैं. रजत अमरनाथ को मई माह के शुरुआत में ही एक बार हार्ट अटैक हुआ था. बाद में मई आखिरी सप्ताह से पहला दुबारा और तगड़ा हार्ट अटैक आया. डाक्टरों ने ब्लाकेज ज्यादा देखकर तुरंत एंजियोग्राफी करने का फैसला लिया और उनके हार्ट में ब्लाकेज हटाकर वहां छल्ला डाला गया. रजत अमरनाथ को खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह डाक्टरों ने दी है.

एबीपी न्यूज के पत्रकार का अनुवाद, जी न्यूज के एंकर का आत्मविश्वास, इंडिया टीवी और आईबीएन7 के एंकरों की निर्दयी आवाज!

Sanjay Tiwari : आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबट अपने बयान में टेररिस्ट कहने की बजाय पोलिटिकली मोटिवेटेड पर्पेट्रेटर शब्द का इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन एबीपी न्यूज अपने स्क्रीन पर “पर्पेट्रेटर” शब्द का अनुवाद “आतंकवादी” कर रहा था. आखिर हमारे चैनलों को “आतंकवाद” फैलाने की इतनी जल्दी क्यों रहती है?

हरियाणा में आर्यसमाजियों की सरकार है, इसलिए संत रामपाल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गयी है

Sanjay Tiwari : झगड़ा आर्यसमाज बनाम कबीरपंथ का है। 2006 के जिस मर्डर केस में संत रामपाल आरोपी बनाये गये हैं, सतलोक आश्रम के बाहर वह झड़प आर्यसमाज के समर्थकों के साथ ही हुई थी। बाबा निजी तौर पर मर्डर में शामिल थे या नहीं, यह अदालत जाने लेकिन जो दुनिया जानती है वह यह कि आर्यसमाजवाले किसी भी कीमत पर कबीरपंथी संत रामपाल और उनके सतलोक आश्रम को बर्दाश्त नहीं कर रहे थे।

गांधी जी को जब बनारस के एक पंडे ने काफी भला-बुरा कहा था…

Sanjay Tiwari : एक बार गांधी जी भी काशी गये थे. तब जब वे देश के आंदोलन का हिस्सा नहीं हुए थे. इन दिनों वे दक्षिण अफ्रीका में गिरमिटिया आंदोलन को गति दे रहे थे और उसी सिलसिले में समर्थन जुटाने के लिए भारत भ्रमण कर रहे थे. इसी कड़ी में वे काशी भी पहुंचे थे. बाबा विश्वनाथ का आशिर्वाद लेने के बाद बाहर निकले तो एक पंडा आशिर्वाद देने पर अड़ गया. मोहनदास गांधी ने जेब से निकालकर एक आना पकड़ा दिया. पंडा जी को भला एक पैसे से कैसे संतोष होता? आशिर्वाद देने की जगह बुरा भला कहना शुरू कर दिया और पैसा उठाकर जमीन पर पटक दिया.

बाघा बार्डर पर जिस जुनदुल्लाह ने आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है वह तहरीके तालिबान से अलग हुआ धड़ा है

Sanjay Tiwari : विशेषज्ञ इसे भारत के लिए चिंता की बात बताएं, इससे पहले बता दें कि बाघा बार्डर पर जिस जुनदुल्लाह ने आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है वह तहरीके तालिबान से अलग हुआ धड़ा है. वही तहरीके तालिबान जिसके सफाये के लिए पाकिस्तान नये सिरे से वजीरीस्तान इलाके में सैन्य अभियान संचालित कर रहा है. पाकिस्तान में दो तरह के तालिबान हैं. वजीरिस्तान के तालिबान और पंजाब के तालिबान. अकेले पंजाब में करीब आधा दर्जन तालिबान हैं जबकि वजीरिस्तान में अमीबा की तर्ज पर एक तालिबान से दूसरा तालिबान पैदा होता रहता है. जो भी नया तालिबान पैदा होता है वह पंजाब के तालिबान को अपना दुश्मन नंबर एक मानता है फिर भले ही उनकी रहनुमाई सैन्य संपर्कों वाला हाफिज सईद ही क्यों न करता हो.

डा. सुब्रमण्यम स्वामी पर आंख मूंद कर भरोसा न करें, ये झूठ भी बोलते हैं, देखिए दो तस्वीरें

Sanjay Tiwari : पहला चित्र देखिए जिसमें एक यजीदी लड़की रोते हुए कह रही है कि कैसे आइसिस के मुस्लिम हत्यारों ने उसके साथ लगातार तीस बार बलात्कार किया और उसे खाना खाने तक की फुर्सत नहीं दी गई. अपने फेसबुक वॉल पर यह ‘शंखनाद’ करनेवाले कोई और नहीं बल्कि देश के ”महान हिन्दू राष्ट्रवादी नेता” डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी है. स्वामी जी के झूठ को सच मानने से पहले अब जरा दूसरी तस्वीर देख लीजिए.

कर्मचारियों का हक छीनकर अमीर होनेवाले कारोबारियों के लिए सावजी काका इस दीवाली सबसे बढ़िया तोहफा

Sanjay Tiwari : सावजी काका सत्तर के दशक में सूरत आये थे. खाली हाथ. काम की तलाश में. उधार लेकर हीरा कारोबार शुरू किया और आज 45 साल के कारोबारी संघर्ष के बाद 6000 करोड़ के श्रीकृष्णा इंटरप्राइज के मालिक हैं. कारोबार का यह कोई इतना बड़ा कारू का खजाना नहीं है कि उनका विशेष तौर पर जिक्र किया जाए लेकिन कल से वे इसलिए चर्चा में हैं कि उन्होंने अपने यहां काम करनेवाले 1200 कर्मचारियों को 50 करोड़ खर्च करके कार, घर और ज्वैलरी का दीपावली तोहफा दिया है. हालांकि कारोबार के ऐवज में बोनस की रकम भी इतनी बड़ी नहीं है कि सावजी काका को सिरमाथे पर बिठा लिया जाए.

सावजी काका


 

शाओमी एमआई3 का डाटा एक रिमोट सर्वर पर सेव होता है जिसके बारे में ग्राहक को पता नहीं होता!

Sanjay Tiwari : शाओमी एमआई 3. नाम सुनते ही खरीदने के लिए मन मचल जाए. शायद ही मोबाइल का कोई ऐसा मनचला हो जो 14 हजार रूपये वाले इस बेहतरीन फोन को खरीदने का ख्वाब न पाल बैठा हो. फ्लिपकार्ट पर तो ऐसी मारामारी मची है जैसी कभी आईफोन के लिए भी न हुई.

विस्फोट डाट काम के संपादक संजय तिवारी पर जानलेवा हमला, आरोपी अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर

विस्फोट डाट काम के संपादक और संस्थापक संजय तिवारी पर पिछले दिनों जानलेवा हमला हुआ. उनके दरियागंज स्थित आवास पर उनका एक पुराना जानकार अनूप शक्ति नामक बीस बाइस साल का युवक पहुंचा. वह पूरी तैयारी के साथ आया था. उसने बैग में रस्सी, क्लोरोफार्म, हथौड़ी, कैंची आदि लिया हुआ था. उसे देख और शुरुआती बातचीत के बाद जब संजय तिवारी कुछ ही देर के लिए घर से बाहर निकलने को दरवाजे की तरफ मुड़े तो उस अनूप शक्ति नामक युवक ने पीछे से सिर पर हथौड़े से वार कर दिया. संजय तिवारी चिल्लाते हुए गिर गए. आरोपी अनूप शक्ति इस बीच संजय तिवारी को घसीटकर पीछे के कमरे में ले जाने लगा. संभवतः वह मर्डर कर देने के इरादे से आया था और यही काम करने के लिए वह संजय को घसीटते हुए पीछे के कमरे में ले जाने लगा. पर संजय तिवारी की तेज-तेज चीख-चिल्लाहट के कारण मकान मालिक आ गए और अंदर से बंद कमरे को बाहर से जोर-जोर से खटखटाने लगे.

दिल्ली में रिलायंस की बिजली कंपनियां दंगाई हो गई हैं

Sanjay Tiwari : दिल्ली में रिलायंस की बिजली कंपनियां दंगाई हो गई हैं. जबसे यह नयी सरकार बनी है तबसे उनके हौसले कुछ ज्यादा ही बुलंद हैं. महीने के महीने बिल और दस दिन की देर हो जाए गुण्डे जैसे बिजली कर्मचारी दरवाजे पर. बिल भरो नहीं तो बिजली काट देंगे.