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उत्तर प्रदेश

योगी सरकार की सख्ती के बाद भी कालाबाजारियों-जमाखोरों के हौसले पस्त नहीं

अजय कुमार, लखनऊ

लखनऊ। एक तरफ कोरोना वायरस के चलते मानवता पर संकट गहरा रहा है। वहीं कुछ लोग इसमें भी फायदा तलाशने में लगे हैं। बात जमाखोरों और मंहगे दाम पर राशन-फल, सब्जी आदि रोजमर्रा के सामान बेचने वालों की मुनाफाखोरी की हो रही है। इसी तरह से नकली स्नेटाइजर और मास्क की भी भरमार आ गई है। 21 दिन के लाकडाउन का अभी चौथा दिन है, लेकिन इन चार दिनों में ही राशन-पानी के दामों में बेतहाशा वृ़द्धि ने आमजन के साथ-साथ केन्द्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार को भी मुसीबत में डाल दिया है।

फुटकर में फल और सब्जी मंडी से दुगने दाम पर बेचा जा रहा है। दुकादार आम लोगों से जरूरत की चीजों के मनमाने दाम वसूल रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि जमाखोरी और ज्यादा दाम वसूलने पर रोक लगाने के लिए लखनऊ सहित तमाम जिलों के स्थाीनय प्रशासन से सब्जी से लेकर अनाज और फलों तक की कीमतें तय कर दी हैं। इससे ज्यादा मूल्य लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब हो, पीएम नरेंद्र मोदी ने जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा की पूरे प्रदेश में सब्जियों सहित आम जरूरत के तमाम सामान मंहगे हो गए थे। हरी मिर्च, आलू और कटहल के दाम तक दोगुने हो गए। लोगों का आरोप है कि दुकानदारों ने कालाबाजारी के कारण दाम बढ़ा दिए। सब्जी के थोक कारोबारियों की दलील है कि लॉकडाउन के कारण आसपास के किसान सब्जियां नहीं ला रहे। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट पर भी काफी असर पड़ा है। इसी की आड़ में फुटकर विक्रेताओं द्वारा भी आम जरूरतों के तमाम सामान के दाम भी बढ़ दिए गए हैं।

हालांकि पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है,फिर भी जमाखोरों और मुनाफाखोरों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। यह स्थिति तब है जबकि मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने कहा है कि जमाखोरों व कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाए जाने तक की बात कही है।

मुख्यमंत्री के कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति भोजन के बगैर न रहे, इसके लिए 14000 से ज्यादा वाहन वालंटियर सहित सभी क्षेत्रों में भेज दिए गए हैं। ये वालंटियर डोर-टू-डोर यानि घर-घर दूध, सब्जी, दवा, खाद्यान्न पहुंचा रहे हैं। वालंटियर इस बात का ध्यान रखें कि भीड़ न जमा हो और लोगों के घरों तक खाद्य सामग्री समय से पहुंचती रहे। सीएम ने कहा कि निराश्रित लोगों के लिए, श्रमिकों के लिए, बुजुर्गों के लिए, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के लिए, किसी भी तरह के आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों के लिए और हॉस्टलों में रहने वाले लोगों के लिए कम्युनिटी किचेन स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जनपदों को निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश के भीतर जो भी व्यक्ति आश्रय स्थल, रैनबसेरों आदि स्थानों पर पहुंच गए हैं उनके भोजन और शुद्ध जल की व्यवस्था वहीं तत्काल की जाए।

खैर, यह सिक्के का एक पहलू है। दूसरी तरफ मुसीबत के इस दौर में कुछ लोग भगवान-मसीहा या अल्लाह की शक्ल में भी दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ डाक्टर,पुलिस और सफाई कर्मचारियों के साथ-साथ तमाम लोग देशहित में इमरजेंसी सेवाएं दे रहे हैं तो दूसरी तरफ तमाम ऐसे लोग उन लोगों के लिए आगे आए हैं जिनको दो क्या एक वक्त की भी रोटी नसीब नहीं हो पा रही है। तमाम समाजेवी संगठनों, दानवीरों ने अपनी तिजोरियां खोल दी हैं। वह स्थानीय प्रशासन की मदद से जरूरतमंदों की हर संभव सहायता कर रहे हैं।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार का विश्लेषण.

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