मजीठिया वेज बोर्ड : नयी दुनिया प्रबंधन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी

इंदौर से एक बड़ी खबर आ रही है. यहां नई दुनिया अखबार प्रबंधन के खिलाफ अदालत की अवमानना संबंधी नोटिस जारी की गयी है. पूरा मामला नयी दुनिया में एक्जीक्यूटिव विपणन पद पर कार्यरत दिव्या सेंगर के रायपुर में हुये ट्रांसफर पर सिवील कोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद भी नयी दुनिया प्रबंधन द्वारा उन्हें अब तक वापस पुराने स्थान पर ज्वाइन ना कराने से जुड़ा है। दिव्या सेंगर के अधिवक्ता मनीष पाल ने खुद इस खबर की पुष्टि की है। मनीष पाल के मुताबिक नई दुनिया समाचार पत्र के प्रधान संपादक, संपादक, कमलेश पांडेय, संजय शुक्ल आदि सभी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का वाद प्रस्तुत किया गया. इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सभी विपक्षीगण को नोटिस जारी कर दिया. ऐसे मामलों में जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

सत्तर बरस के नई दुनिया अखबार को अपना संपादकीय लेख बाहरी व्यक्ति से लिखवाना पड़ रहा है!

Anil Jain : नईदुनिया के सात दशक….. नईदुनिया आज 70 बरस का हो गया। बधाई। एक पाठक के नाते इस अखबार से अपना भी लगभग चार दशक पुराना नाता है। अपन ने दो पारियों में दो अलग-अलग प्रबंधन के तहत इस अखबार में दिल्ली में रहते हुए लगभग तीन साल तक काम भी किया है। मुझे गर्व है कि इस अखबार का जो महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित कॉलम (संपादकीय) एक जमाने में श्री राजेंद्र माथुर, श्री राहुल बारपुते और श्री रणवीर सक्सेना जैसे ज्येष्ठ और श्रेष्ठ चिंतक-पत्रकार लिखते थे, वही कॉलम मैंने भी वरिष्ठ पत्रकार श्री मधुसूदन आनंद और श्री आलोक मेहता के साथ कोई साढे तीन साल तक (तीन साल नईदुनिया की सेवा में और सात महीने तक नईदुनिया से बाहर रहते हुए) लिखा है और अधिकतम आजादी के साथ लिखा है।

श्रम अफसरों के धमकाने के मामले से नई दुनिया प्रबंधन के होश उड़े

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से प्रकाशित प्रसिद्ध अखबार नई दुनिया में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन हासिल करने के लिए यहां कार्यरत सभी पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। इसके लिए वे न्यायपालिका से लेकर सरकारी तंत्र के हर उस पुर्जे को आजमाने में मशगूल हैं जो उनकी इस मांग को पूरा कराने में निर्णायक सहायता कर सके। या कहें कि उन्हें मजीठिया दिलवा सके। इस जीवनदायी महान काम के लिए कर्मचारियों ने श्रम विभाग का भी दरवाजा खटखटाया है। खुशी की बात यह है कि श्रम महकमा खुलकर उनकी मदद में उतर आया है।

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई, भविष्य की रणनीति और लड़ने का आखिरी मौका… (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : सुप्रीम कोर्ट से अभी लौटा हूं. जीवन में पहली दफे सुप्रीम कोर्ट के अंदर जाने का मौका मिला. गेट पर वकील के मुहर लगा फार्म भरना पड़ा जिसमें अपना परिचय, केस नंबर आदि लिखने के बाद अपने फोटो आईडी की फोटोकापी को नत्थीकर रिसेप्शन पर दिया. वहां रिसेप्शन वाली लड़की ने मेरा फोटो खींचकर व कुछ बातें पूछ कर एक फोटो इंट्री पास बनाया. पास पर एक होलोग्राम चिपकाने के बाद मुझे दिया. जब तक कोर्ट नंबर आठ पहुंचता, केस की सुनवाई समाप्त होने को थी.

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में ‘नवदुनिया’ के सभी कर्मचारी लामबंद, 110 ने लगाई सुप्रीम कोर्ट में याचिका

भोपाल : मजीठिया वेतनमान को लेने के लिए देशभर के मीडियाकर्मियों ने संख्या में एकजुट कोकर सुप्रीमकोर्ट में अवमानना के खिलाफ याचिकाएं लगा रखीं हैं। पिछले एक साल से सुप्रीमकोर्ट द्वारा मजीठिया वेतनमान को लागू करने के सुनाए गए फैसले की प्रिंट मीडिया मालिक लगातार अवहेलना कर रहे हैं। भारतवर्ष में मीडिया को चौथे स्तंभ का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इससे अधिक दुर्भाग्य की बात क्या होगी कि समाज के गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों की आवाज को उठाने वाले इन मीडियाकर्मियों को अपना ही हक लेने के लिए अपने ही मालिकों से लगातार लड़ाई लड़नी पड़ रही है। मामले पर एक वर्ष से लगातार चली सुनवाई के बाद अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी मालिकों को अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम और आखिरी तारीख 28 अप्रैल 2015 सुनिश्चित की है। 

अब विज्ञापन के कूपन बेचेंगे नईदुनिया के ब्यूरो चीफ!

भले यह बात हैरत करने वाली लगे लेकिन यह भी सच है कि जागरण के आंचल में पलने वाली नई दुनिया अब ऐसे ऐसे हथकंडे अपना रही है कि माथा फोड़ने को जी चाहता है। नौ जनवरी को जबलपुर में ग्रांड समदड़िया होटल में आयोजित एक बैठक में बिजनेस बढ़ाने का एक नया हथकंडा सिखाया गया। इस बैठक में मनीष शर्मा इंदौर से खास तौर पर आए हुए थे। सारे ब्यूरो चीफ की इस बैठक में कमाल की बात यह थी कि एक भी एडीटोरियल का बंदा मौजूद नहीं था। दिन भर चली इस बैठक में मेरा चीज किसने उठाया… से प्रेरित एक कहानी सारे ब्यूरो चीफ को सुनाई गई और उन्हें प्रेरित किया गया कि हमें बिजनेस पर ज्यादा ध्यान देना है। कहानी कुछ यूं थी कि मिठाई की एक दुकान में रहने वाले दो चूहों को काफी मेहनत के बाद एक नई लड्डू की दुकान मिली। इसी तरह हमें काम कर ज्यादा बिजनेस देना है।

नईदुनिया में इन दिनों पौरस के हाथी की भूमिका कौन निभा रहा है?

नईदुनिया, इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने नईदुनिया को अलविदा कहने के बाद अपने त्यागपत्र के साथ उन्होंने जो पत्र अपने साथियों को वाट्सएप के माध्यम से भेजा है, वह नीचे दिया जा रहा है. अरविंद दो साल से वरिष्ठ विशेष संवाददाता थे. एक साल से सिटी हेड की भूमिका निभा रहे थे.

आनंद पांडे ने कहा सेल्फी मेरी जिद तो रिपोर्टर ने कहा- यह पकड़ो मेरा इस्तीफा

नईदुनिया के एमपी स्टेट हेट आनंद पांडे को एक रिपोर्टर ने आईना दिखा दिया। पांडे ने कुछ दिन पहले रिपोर्टरो को फरमान सुनाया कि वे जहां भी रिपोर्टिंग के लिए जाएं वहां से अपना सेल्फी नईदुनिया के संपादकीय टीम के आफिशियल वाट्सएप ग्रुप पर डालें। उनका यह फरमान सुनकर रिपोर्टर भौचक रह गए थे। पहले दो तीन दिन को कुछ रिपोर्टरों ने इसका पालन किया पर जब मीडिया जगत में इसकी खबर फैलने के बाद उनकी हंसी उड़ने लगी और यह कहा जाने लगा कि क्या आप लोगों पर संपादक को भरोसा नहीं है तो रिपोर्टरों ने सामूहिक रूप से फैसला लेकर सेल्फी डालना बंद कर दिया।

‘नईदुनिया’ से अरविंद तिवारी और विनोद पुरोहित गए

‘नईदुनिया’ के इंदौर एडीशन में एक बार फिर उठा-पटक का दौर शुरू हो गया है। ताजा खबर के मुताबिक स्थानीय संपादक विनोद पुरोहित और सिटी हेड अरविंद तिवारी ने ‘नईदुनिया’ से इस्तीफ़ा दे दिया। विनोद पुरोहित ने 5 दिन पहले इस्तीफ़ा दिया, जबकि अरविंद तिवारी ने रविवार को इस्तीफ़ा दिया! स्थानीय संपादक की कुर्सी कौन संभालेगा, अभी तय नहीं हुआ!

आनंद पांडे का ओहदा इसलिए सिकुड़ गया!

जब ‘नईदुनिया’ में आनंद पांडे की आमद हुई, तो समझा गया था (और यही सच भी था) कि वे श्रवण गर्ग की जगह लेंगे, यानी चीफ एडीटर होंगे और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के सभी 6 एडीशन संभालेंगे. लेकिन, बाद में आनंद पांडे को सिर्फ मध्यप्रदेश का ग्रुप एडीटर (वास्तव में स्टेट हेड) बनाया गया. अंदर की ख़बरों के मुताबिक ये फैसला ‘नईदुनिया’ रायपुर के एडीटर रुचिर गर्ग की आपत्ति के कारण किया गया.

आनंद पांडे ने ‘नईदुनिया’ ज्वाइन किया

‘भड़ास’ ने 17 नवंबर को खबर दी थी कि ‘आनंद पांडे संभालेंगे नईदुनिया को’. ये बात सही निकली. 24 नवंबर को आनंद पांडे ने बतौर चीफ एडीटर ‘नईदुनिया’ ज्वाइन कर लिया. आनंद पांडे के फिर ‘नईदुनिया’ में प्रवेश के पीछे विनय छजलानी का हाथ माना जाता है. ये संभावना इसलिए जाहिर की जा रही है क्योंकि ‘नईदुनिया’ में भले ही जागरण ग्रुप की मिल्कियत है, पर अभी भी विनय छजलानी के पास कुछ हिस्सेदारी है.

प्रशासन ने अभय छजलानी से जमीन छीनी

‘नईदुनिया’ के मालिक होने के कारण जिस अभय छजलानी (उर्फ़ अब्बूजी’) की इंदौर और मध्यप्रदेश में तूती बोलती थी, अब वे ही नई-नई परेशानियों में घिरते जा रहे हैं. इंदौर जिला प्रशासन ने अभय छजलानी की मिल्कियत वाले टेबल टेनिस ट्रस्ट के ‘अभय खेल प्रशाल’ को जमीन नपती में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का दोषी पाया और करीब आधा एकड़ से ज्यादा जमीन छीन ली.

मजीठिया वेज बोर्ड देने से पहले नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा नई दुनिया प्रबंधन!

श्रवण गर्ग के नई दुनिया से विदा होने के बाद पत्रकारों पर बिजनेस लाने के लिए दबाव दिया जाने लगा है. पिछले माह 17 सितंबर को जबलपुर मुख्यालय में ब्यूरो की मीटिंग की गई. मीटिंग में इंदौर से भी कुछ लोग आए थे. मीटिंग में पत्रकारों से कहा गया कि अब आपको न्यूज के साथ बिजनस और सर्कुलेशन भी देखना है. इसके बाद इसी माह 15 नंवबर को एक बार फिर मीटिंग का आयोजन जबलपुर कार्यालय में किया गया. इस मीटिंग में सभी ब्यूरो को अलग अलग बुलाकर डांट पिलाई गई. निकाले जाने की धमकी भी दी गई. मीटिंग के बाद से देखने में आ रहा है कि न सिर्फ बिजनेस बल्कि न्यूज में भी डेस्क प्रभारियों के रंग बदल गए हैं.

जागरण प्रबंधन से अपील, श्रवण गर्ग के बाद नई दुनिया के संपदाकीय पृष्ठ को भी मुक्ति दिलाये

Awadhesh Kumar : आजकल मैं यह देखकर आश्चर्य में पड़ रहा हूं कि आखिर नई दुनिया में जागरण के छपे लेख क्यों छप रहे हैं। जागरण इस समय देश का सबसे बड़ा अखबार है। उसका अपना राष्ट्रीय संस्करण भी है। जागरण प्रबंधन ने नई दुनिया को जबसे अपने हाथों में लिया उसका भी एक राष्ट्रीय संस्करण निकाला जो रणनीति की दृष्टि से अच्छा निर्णय था। पर उस अखबार को जागरण से अलग दिखना चाहिए।

‘नईदुनिया’ से विदा हुए श्रवण गर्ग अब दिल्ली में लांच कराएंगे ‘दबंग दुनिया’

भड़ास की खबर अंततः सही साबित हुई. नईदुनिया’ के प्रधान सम्पादक की कुर्सी से श्रवण गर्ग 31 अक्टूबर को विदा हो गए. इस आशय की खबर ‘भड़ास’ ने 18 सितम्बर को दी थी. जागरण मैनेजमेंट ने श्रवण गर्ग को दिल्ली बुलाकर उन्हें हटाए जाने की जानकारी दी. इसके बाद ही वे इंदौर लौटे और एडिटोरियल के सीनियर्स को बुलाकर बता दिया कि वे ‘नईदुनिया’ से जा रहे हैं, आज उनका आखरी दिन है.

‘नईदुनिया’ के गिरते आँकड़ों पर चिंतन

‘नईदुनिया’ का बाजार धीरे-धीरे किस तरह गिर रहा है, ये बातें मीडिया में अभी तक खुसुर-पुसुर  सीमित थी। लेकिन, अब ये बातें ‘नईदुनिया’ के सीनियर्स की मीटिंगों में भी गंभीरता से की जाने लगी है। 4 अगस्त को ‘नईदुनिया’ के इंदौर दफ़्तर में हुई मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 6 रेसीडेंट एडिटर्स और मार्केटिंग हेड्स की मीटिंग में अखबार में गिरावट को लेकर गंभीर चिंतन हुआ। ‘नईदुनिया’ के मार्केटिंग हेड सौरभ भटनागर ने सभी 6 एडीशंस के मार्केटिंग और सर्कुलेशन के गिरते आंकड़ों का ब्यौरा दिया! उन्होंने बताया कि बीते साल के दौरान ‘नईदुनिया’ के सभी सिटी और उपकन्ट्री के सर्कुलेशन और मार्केटिंग में 17% से 19% तक गिरावट आई है! सिर्फ रायपुर के सिटी एडीशन ने 2% की बढ़त दर्ज की है।