दैनिक जागरण नोएडा के प्रबंधकों ने गायब कराया डेढ़ लाख रुपये का सामान!

मजीठिया मंच : दैनिक जागरण में चमचागीरी का आसान सा तरीका है मजीठिया वेतनमान का विरोध करो। इसी तरीके को अपना कर कई चमचे प्रबंधन के खास बन गए हैं और दैनिक जागरण को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। प्रबंधन उन्‍हें ऐसा करने के लिए मौन सहमति दे रहा है। ताजा मामले की बात करें, तो हाल ही में प्रसार व्‍यवस्‍थापक कप्‍तान ने अखबार वेंडरों को बांटने के लिए डेढ़ लाख रुपये का सामान एक वाहन में लोड करके सोनीपत भेज दिया।

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने बताई पंकज श्रीवास्तव टाइप क्रांतिकारियों की असलियत, आप भी पढ़ें….

(अभिषेक उपाध्याय)


Abhishek Upadhyay : बहुत शानदार काम किया। Well done Sumit Awasthi! Well done! सालों से सत्ता की चाटुकारिता करके नौकरी बचाने वाले नाकाबिल, अकर्मण्यों को आखिर रास्ता दिखा ही दिया। उस दिन की दोपहर मैं आईबीएन 7 के दफ्तर के बाहर ही था जब एक एक करके करीब 365 या उससे भी अधिक लोगों को आईबीएन नेटवर्क से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। चैनल के अंबानी के हाथों में चले जाने के बावजूद बेहद ही मोटी सैलरी लेकर चैनल का खूंटा पकड़कर जमे हुए उस वक्त के क्रांतिकारी मैनेजिंग एडिटर खुद अपने कर कमलों से इस काम को अंजाम दे रहे थे। एक एक को लिफाफे पकड़ाए जा रहे थे।

मित्ररंजन भाई, आपने पागुरप्रेमी पंकज परवेज का पुख्ता बचाव किया है

: पंकज परवेज का विलाप और किसी की जीत के जश्न का सवाल : किसी मित्ररंजन भाई ने अपने मित्र पंकज परवेज मामले पर जोरदार बचाव किया है। बचाव में घिसे हुए वामपंथी रेटॉरिक और शाप देने वाले अंदाज में परवेज भाई के चेहरे से नकाब खींचने वालों की लानत मलामत की गई है। लेकिन परवेज भाई की पवित्र और पाक क्षवि पर सवाल उठाने वाले लोगों को भाजपाई और संघी कहने का उनका अंदाज उस लिथड़ी हुई रजाई की तरह हो गया है जिसकी रुई की कई सालों से धुनाई नही की गई है। पार्टी और संगठन में असहमति और आलोचना पर संघी होने का ठप्पा लगा देने की रवायत बहुत पुरानी रही है। लेकिन दुर्वासा शैली में कोसने और गरियाने के बावजूद इस संगठन और पीछे की पार्टी का स्वास्थ्य दिनोंदिन खराब होता जा रहा है। लेकिन कॉमरेड लोग हैं कि मुट्ठी तानने / मारने में मशगूल हैं।

पंकज श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी के जरिए भड़ास के खिलाफ मोर्चा खुलवाया

Manisha Srivastava : यशवंत और उसकी भड़ास ! बरदाश्त की भी एक सीमा होती है। भड़ास का मॉडरेटर यशवंतसिंह जिस तरह मेरे पति पंकज श्रीवास्तव के खिलाफ घृणित अभियान चला रहा है, उसके बाद मेरे लिए चुप रहना मुश्किल है। हाँलाकि पंकज उसके ख़िलाफ एक शब्द न बोल रहे हैं और न ही लिख रहे हैं, पर चूंकि यशवंत ने उन्हें परेशान न करने का अपना वादा तोड़ दिया है, इसलिए उसे आईना दिखाना ज़रूरी है। खासतौर पर जब पंकज पूंजी की पत्रकारिता पर पड़े नकाब को नोचने में जुटे हैं और इसकी कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं।

“सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा”

“सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा” ये बात जाहिर होती है पत्रकारिता बचाने के नाम पर लड़ाई करने वालों के सोशल मीडिया स्वांग से| अभी हाल का ही मामला ले लीजिये एक भड़ास4मीडिया के यशवंत सिंह हैं ने आईबीएन 7 के पंकज श्रीवास्तव मामले में जिस बचपने का परिचय दिया है उससे तो यही लगता है कि चैनलों और दूसरे मीडिया संस्थानों के भीतर की खबरों को भड़ास पर दिखा के यशवंत मीडिया के नामचीन मठाधीशों में शामिल तो हो गए लेकिन भड़ास से सिर्फ उनके व्यक्तिगत संबंधों और संपर्कों के सिवा और कुछ नहीं निकला| लेकिन अगर ये अनुमान लगाया जाए कि इससे देश दुनिया समाज और खुद पत्रकारिता पर फर्क क्या पड़ा तो नतीजा ढ़ाक के तीन पात ही नज़र आता है|

पंकज जी की बर्खास्तगी का उत्सव मनाने वाले भाइयों, गुजारिश है कि साथ में भाजपाई एजेंडों की जीत का जश्न भी मनाते जाइए!

: आईबीएन सेवन से पंकज श्रीवास्तव की बर्खास्तगी को लेकर मीडिया में चल रही बतकही के बीच :  ”बंद हैं तो और भी खोजेंगे हम, रास्ते हैं कम नहीं तादाद में” …ये पंक्तियाँ ही कहीं गूँज रही थीं पंकज भाई की बर्खास्तगी की खबर के बाद। … बनारस आने के बाद न जाने कितनी बार उनके साथ इन पंक्तियों को दुहराया होगा। …”हम लोग कोरस वाले थे दरअसल” .… इरफ़ान भाई के ब्लॉग पर आज उसी आवाज को फिर से सुनना बढ़िया लगा. कल प्रेस क्लब में थोड़ी देर के लिए मुलाकात भी हुई कई लोगों से.…

एसएमएस, इस्तीफा, सोशल मीडिया, प्रेस कांफ्रेंस और प्रेस रिलीज… हिप्पोक्रेसी जारी आहे….

आईबीएन7 में एसोसिएट एडिटर रहे पंकज श्रीवास्तव वर्षों से इस चैनल में काम करते हुए चुप रहे. सैकड़ों लोग निकाले गए. चुप रहे. कई बार फिल्म सिटी में जुलूस निकले. चुप रहे. फिल्म सिटी में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे, न्यूज रूम में कब्जा करके. चुप रहे. दर्जनों कार्यक्रमों, सेमिनारों, संगोष्ठियों में बुलाया गया. चुप रहे. पर जब छंटनी की लाठी उनके सिर पर पड़ने ही वाली थी कि बोल पड़े. यूं ही नहीं, अचानक नहीं, प्लानिंग के साथ बोल पड़े. समझदार क्रांतिकारी प्लानिंग के साथ बोलता है, या फिर लगातार चुप रहता है. लाभ जिस तरीके से मिलता हो लो, ये फंडा होता है ऐसे क्रांतिकारियों का.

पंकज श्रीवास्तव की प्रेस कांफ्रेंस के लिए केजरीवाल ने जुटा दी मीडिया वालों की भीड़!

अगर फिक्सिंग होती है तो हर कदम पर दिखने लगती है. नाकारापन और अकर्मण्यता के आरोपों में आईबीएन7 से निकाले गए पंकज श्रीवास्तव ने तयशुदा रणनीति के तहत अपने संपादक को एक मैसेज भेजा. उस मैसेज का स्क्रीनशाट लिया. उसे क्रांतिकारी भाषण के साथ फेसबुक पर लगा दिया. ‘आप’ वालों ने फेसबुक और ट्विटर पर पंकज को शहीद बताते हुए उनके मसले को वायरल करना शुरू किया. ‘आप’ नेता आशुतोष, जो कभी आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं, ने पंकज के मसले को जोरशोर से सोशल मीडिया पर उठाया.

तब पंकज श्रीवास्तव की तनी हुई मुट्ठियां लाखों के पैकेज में विश्राम कर रही थीं!

(दयानंद पांडेय)


Dayanand Pandey : पत्रकारिता में गीदड़ों और रंगे सियारों की जैसे भरमार है। एक ढूंढो हज़ार मिलते हैं। जब लोगों की नौकरियां जाती हैं या ये खा जाते हैं तब तक तो ठीक रहता है। लोगों के पेट पर लात पड़ती रहती है और इन की कामरेडशिप जैसे रजाई में सो रही होती है। लेकिन प्रबंधन जब इन की ही पिछाड़ी पर जूता मारता है तो इन का राणा प्रताप जैसे जाग जाता है।

पेंदी रहित पंकज परवेज उर्फ पंकज श्रीवास्तव के विलाप के पीछे की कुछ कहानियां

साथ मिलेगा…भरपूर मिलेगा पंकज श्रीवास्तव उर्फ ‘पंकज परवेज’। आप बस जाकर मुट्ठी ताने रहिए मुट्ठीगंज में….सॉरी कर्नलगंज में। सुना है आप सीपीआई-एमएल (लिबरेशन) में होल टाइमर थे। कब थे ये तो नहीं पता लेकिन “लाल फरेरे तेरी कसम, इस जुल्म का बदला हम लेंगे”…। लेकिन परवेज भाई अभी तो कुछ ही महीनों पहले आपने फेसबुक पर अपना नाम बदल लिया था, पंकज श्रीवास्तव से ‘श्रीवास्तव’ हटाकर ‘परवेज’ रख लिया था। आज देख रहा हूं कि बर्खास्तगी विलाप में आप ‘परवेज’ नाम को हटाकर दोबारा ‘वास्तव में श्री’ हो गए हैं। खैर मजाक छोड़िए अब तो हम आपको परवेज भाई ही कहेंगे।

आशुतोष से फिक्सिंग के बाद ‘बागी’ बने पंकज श्रीवास्तव, 2017 में ‘आप’ के टिकट से यूपी में लड़ेंगे चुनाव!

एसोसिएट एडिटर पंकज श्रीवास्तव को नान-परफारमेंस में खुद की बर्खास्तगी का एहसास पहले से था. इसी कारण उन्होंने कभी आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर रहे और आजकल ‘आप’ के खास नेता बने घूम रहे आशुतोष से संपर्क साधा. आशुतोष के जमाने में ही पंकज श्रीवास्तव की भर्ती हुई थी. आशुतोष और पंकज की डील हुई. इसी डील के तहत यह तय हुआ कि ऐन चरम चुनावी प्रक्रिया के बीच पंकज श्रीवास्तव अपने नए मैनेजिंग एडिटर सुमित अवस्थी को ‘आप’ और केजरीवाल को लेकर एक मैसेज करेंगे. सबको पता है कि टीवी में इस तरह के आंतरिक मैसेज का अंजाम क्या होता है. पंकज श्रीवास्तव को समय से पहले यानि चुनाव बाद तय बर्खास्तगी से पहले ही बर्खास्त कर दिया गया.

आईबीएन7 में कचरा हटाओ अभियान जारी, अबकी पंकज श्रीवास्तव हुए बर्खास्त

आईबीएन7 न्यूज चैनल में कचरा हटाओ अभियान जोरों से जारी है. कई सालों से लाखों रुपये की सेलरी लेकर कुंडली मारे बैठे पत्रकार पंकज श्रीवास्तव को प्रबंधन ने बर्खास्त कर दिया है. पंकज श्रीवास्तव को संजीव पालीवाल की टीम का प्रमुख सदस्य बताया जाता है. चैनल का प्रबंधन नए हाथों में आने के बाद पुरानी टीम के लोगों को परफार्म करने के लिए छह महीने का वक्त दिया गया लेकिन पुराने लोगों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे चैनल की साख छवि रेटिंग सुधर सके. इस कारण सबसे पहले संजीव पालीवाल पर गाज गिराई गई. उसके बाद से ही कयास लगाया जा रहा था कि पंकज श्रीवास्तव भी जल्द नपेंगे. इस बारे में भड़ास ने पहले ही इशारों इशारों में संभावना जता दी थी.