लखनऊ वाले गांधी और हरिद्वार वाले बाबा के आगे मीडिया क्यों लाचार है…

Naved Shikoh

लखनऊ में सीएमएस वाले गांधी और देशभर में बाबा रामदेव के आगे मीडिया के हाथ क्यों बंधे हैं! सुना है देशभर के कार्पोरेट घरानों के लिए काम करने वाली पीआर कंपनियां गांधी और रामदेव के मीडिया मैनेजमेंट पर रिसर्च कर रही हैं। कई इंस्टीट्यूट मास कम्युनिकेशन के पीआर क्लासेस के लिए रामदेव और गांधी को अतिथि प्रवक्ता के तौर पर आमंत्रित करने पर विचार कर रहे हैं। ताकि इनसे मीडिया मैनेजमेंट के गुण सीखकर बच्चे पत्रकारिता का शोक़ त्यागें और पत्रकारों को उंगलियों पर नचाने का हुनर सीख सकें। Continue reading

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सवाल पूछने भर से संतत्व काफूर हो रहा है तो योगत्व की प्रभावकारिता समझना आसान है…

पुण्य प्रसून और रामदेव विवाद : जब संत व्यापारी हो जाए तो सवाल उठेंगे ही… योग गुरू बाबा रामदेव जी पर मेरी गहरी आस्था है इसलिए नहीं कि वे हिन्दू संत हैं, गोया कि देश-दुनिया में भारतीय योग और स्वदेशी का ब्राण्ड बन चुके हैं. बाजार पतंजलि के उत्पादों से इस कदर भर गया है कि हिंदुस्तान लीवर जैसी कंपनियों के छक्के छूट गए हैं। बाबा की आलोचना को भी मैं दरकिनार करता आया हूं तो इसीलिए क्योंकि दुनिया की नजरों से तो भगवान भी नहीं बच सके थे, बाबा रामदेव तो महज एक इंसान हैं।

लेकिन इस भरोसे पर तब कुठाराघात हुआ जब खबर आई कि योग गुरु से महज एक सवाल पूछने के आरोप में देश के ख्यातलब्ध पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी की नौकरी चली गई. हो सकता है यह महज कयास भर हो. क्योंकि प्रसूनजी ने अपने इस्तीफे में ऐसी कोई वजह नहीं लिखी और न ही उनके मीडिया हाउस ने कोई स्पष्टीकरण दिया है. पर कुहांसे के जो बादल देश के आम मन में कुछ सालों से घिर आए हैं, उसी के मुताबिक इंटरव्यू में बाबा रामदेव से यह सवाल हुआ कि आपने टैक्स बचाने के लिए ट्रस्ट बना लिया..? सवाल सही था इसलिए वैसे ही जवाब की उम्मीद भी थी लेकिन जब प्रसूनजी ने सवाल के साथ यह जोड़ दिया कि स्वदेशी की बात करने वाले बाबा महंगी कार और चार्टर प्लेन में घूमते हैं, तब योग-गुरु उखड गए, फिर भी पतंजलि ग्रुप के जनक ने ऐसी लम्बी सफाई दी कि आरोप बेसिर-पैर का लगने लगा!

हालांकि प्रसून जी ने वही सवाल उठाया था जो बाबा के लाखों प्रशंसक या आलोचकों के मन में यदा-कदा घुमडता रहता है. किसी संत का आश्रम जब कार्पोरेट घराने में तब्दील हो जाए या 11 हजार करोड़ चैरिटी में खर्च कर रहा हो, उससे इसकी सफाई मांगने या देने में क्या हर्ज होना चाहिए भला. वैसे योग गुरु ने जो सफाई दी, उसने ऐसे आरोप की धज्जियां उड़ाकर रख दी। लेकिन बात बिगड़ती चली गई. दरअसल पत्रकारिता को बाजार के अधीन करने या मान लेने का जो षड्यंत्र पैर पसार रहा है, ताज़ा विवाद भी इसी की उपज है.

प्रसूनजी तो आज के शिकार हैं, नवभारत रायपुर के संपादक स्वर्गीय बबन प्रसाद मिश्र को महज इसलिए इस्तीफा देना पडा था क्योंकि उन्होंने फ्रण्ट पेज पर ब्राम्ही आंवल केश तेल का विज्ञापन देने का विरोध किया था. तब मैं ट्रेनी हुआ करता था। मिश्रजी का मानना था कि पहले पेज पर खबरों का अधिकार बनता है, विज्ञापन का बाद में. सबसे तेज चैनल होने का दावा करने वाले न्यूज चैनल आजतक को पतंजलि ग्रुप करोड़ों के विज्ञापन देता है इसलिए दबाव तो आना ही था. प्रबंधन ने पहले प्रसूनजी के प्राइम टाइम बुलेटिन ’10तक’ को छोटा किया और उसके बाद बाजपेईजी ने सीधे इस्तीफा ही सौंप दिया. सुना है कि शवासन करने से मन चित्त और शांत रहता है, गुस्सा नही आता, फिर बाबा रामदेव दुर्वासा श्रृषि क्यों बन गए. संत तो बड़े उदार दिल के होते हैं. सिर्फ एक सवाल पूछनेभर से यदि संतत्व काफूर हो रहा है तो यह समझना आसान है कि योगत्व कितना प्रभावकारी होता है..!

रवीश कुमार जी ने कभी कहा था कि जिस लोकतंत्र में सवाल पूछना मना हो जाए, वह मरने लगता है. यहां मैं एनडीटीवी मीडिया हाउस के दृष्टिकोण की तारीफ करना चाहूंगा जिसने सरकारी—तोप से डरे बगैर, टीआरपी में सबसे नीचे गिर जाने के बावजूद रवीशजी की नौकरी नही खाई और उन पर भरोसा बनाये रखा हुआ है. एनडीटीवी से मेरे वैचारिक मतभेद हैं, बावजूद इसके मुझे यह चैनल सबसे ज्यादा पसंद है क्योंकि यहां सवाल उठाने की आजादी है, जनसरोकारों से जुडा चैनल लगता है.

एक दौर 1975 में इमरजेंसी का था. मीडिया घरानों में सरकारी अफसर पत्रकार बनकर बैठे हुए थे. तब बीबीसी का एक इंटरव्यू प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ तय हुआ. यह पहला मौका था जब ‘गूंगी गुडिया’, लोहिया जी ने इंदिरा गांधी को यही नाम दिया था, मीडिया के सवालों का जवाब देने आ रही थीं. पीएम निवास पर बीबीसी की टीम तैयार थी. अचानक इंदिराजी आईं और गुस्से में बोलीं, आपको यहां किसने बुलाया..आप जा सकते हैं.! बाद में मार्क टुली ने अपनी एक पुस्तक में खुलासा किया कि इंदिराजी बीबीसी के कई सवाल खड़े करने से नाराज थीं लेकिन हमने सिर्फ अपना फर्ज अता किया था क्योंकि देश उनसे कई सवालों के जवाब मांग रहा था.

तो चाहे मार्क टुली रहे हों, चाहे वो रवीश जी हों, प्रसून जी हों या बस्तर के सांई रेड्डी, सवाल आज भी जिंदा हैं और उसे पूछने वाले पत्रकार भी. सत्ता के सामने जो झुके हैं या रेंग रहे हैं, वे पत्रकार नही हैं. कल शाम को ही मैं सरकार के एक कैबिनेट स्तर के नेता के साथ था. फोन पर एक पत्रकार से बतिया रहे थे. पत्रकार एक ही सवाल बार-बार पूछ रहा था. अंततः नेता जी ने भद्दी सी गाली देते हुए फोन काट दिया. फिर मेरी ओर मुखातिब होते हुए बोले, अब आप जैसे लोग मीडिया छोड़ेंगे तो ऐसे ही चिरकुट राज करेंगे. बात अंदर तक हिला गई थी लेकिन मन खदबदा रहा है कि सवाल पूछना इतना बुरा क्यों लगता है..!

लेखक अनिल द्विवेदी छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09826550374 के जरिए किया जा सकता है.

पुण्य प्रसून द्वारा रामदेव से किए गए सवाल से संबंधित वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

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…जब रामदेव को उल्टे पांव भागना पड़ा! (देखें वीडियो)

बाबा रामदेव बीते मंगलवार को जोधपुर हवाई अड्डे पर पहुंचे. उन्हें जोधपुर के चौपासनी इलाके के एक होटल में पतंजलि उत्पादों पर एक निजी कार्यक्रम में शामिल होना था. बाबा रामदेव जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचे तो स्वागत करने वालों की भीड़ में काफी संख्या में कांग्रेसी आ गए थे. कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बाबा का भारी विरोध किया. नारे लगाए. कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बाबा रामदेव को देखकर काले धन को वापस लाने सहित कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठाए.

रामदेव अचानक सामने आए इस दृश्य से सकते थे. उन्होंने मुस्करा कर भीड़ को हैंडल करने की कोशिश. जब वह प्रदर्शनकारियों के पास गए तो हंगामा बढ़ गया. कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री, बाबा रामदेव और भाजपा को लेकर हाय-हाय के नारे लगाने शुरू कर दिए. हंगामा बढ़ता देख पुलिस के जवानों ने जब बीच-बचाव किया, तो कांग्रेस कार्यकर्ता जवानों से भी उलझ गए. मामला बढ़ता देख बाबा ने मौके से निकल जाना ही उचित समझा.

कहा जा रहा है कि उसी दिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी भी यहां आने वाले थे. ऐसे में पहले से ही कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता और डूडी समर्थक मौजूद थे. ये लोग डूडी के स्वागत के लिए यहां इकट्ठा हुए थे. उन्होंने जैसे ही योग गुरू बाबा को देखा तो काला धन सहित मुदों को लेकर बाबा के सामने नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस प्रदर्शन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया जा रहा है. देखें आप भी वीडियो…

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प्रियंका की किताब का खुलासा, बाबा रामदेव इन तीन हत्याओं के कारण बन पाए टाइकून!

Surya Pratap Singh :  एक बाबा के ‘फ़र्श से अर्श’ तक की कहानी के पीछे तीन हत्याओं / मौत के हादसे क्या कहते हैं? अमेरिका में पढ़ी-लिखी प्रसिद्ध लेखिका प्रियंका पाठक-नारायण ने आज देश के प्रसिद्ध योगगुरु व अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति, बाबा रामदेव की साइकिल से चवनप्रास बेचने से आज के एक व्यावसायिक योगगुरु बनने तक की कथा अपनी किताब में Crisp facts / प्रमाणों सहित लिखी है। इस पुस्तक में बाबा की आलोचना ही नहीं लिखी अपितु सभी उपलब्धियों के पहलुओं को भी Investigative Biography के रूप में लिखा है।

इस पुस्तक में सभी तथ्य बड़े सशक्त ढंग से लिखे है , कुछ भी ऐसा नहीं लगता जिसे बकवास कहकर दरकिनार कर दिया जाए, प्रथम धृष्टता ऐसा भी नहीं लगता कि यह किसी मल्टीनैशनल द्वारा प्रायोजित किताब है। वैसे बाबा रामदेव ने कोर्ट के injunction order से प्रकाशक को यह स्थगन दिलवाया हुआ है कि अब इस पुस्तक की कोई नई कॉपी न छापी जाए। ज़रूरी नहीं कि इस पुस्तक में सभी बातों पर विश्वास किया जाए, लेकिन सार्वजनिक जीवन में बाबा रामदेव का क़द बहुत बड़ा है और राजनीतिक/ सामाजिक रसूक़ भी बहुत बड़ा है, अतः जनमानस को उनके बारे में जानने की उत्सुकता होना स्वाभाविक है। प्रियंका पाठक नारायण की किताब का नाम है- “Godman to Tycoon : The Untold Story of Baba Ramdev”

इस किताब में तीन हत्याओँ/ मौतों का विस्तार से परिस्थितियों व शंकाओं का प्रमाण सहित ज़िक्र किया है:

१- बाबा रामदेव के ७७ वर्षीय गुरु शंकरदेव का ग़ायब होने से पूर्व बाबा रामदेव का एक माह तक विदेश में चले जाना। दिव्य योगपीठ ट्रस्ट की सभी सम्पत्ति शंकरदेव के नाम थी, जी अब बाबा रामदेव के पास है। (CBI की जाँच अत्यंत मद्धम गति से जारी है)

२- बाबा रामदेव को आयुर्वेद दवाओं का लाइसेंस देने वाले स्वामी योगानंद की वर्ष २००५ में रहस्मयी हत्या।

३- बाबा रामदेव के स्वदेशी आंदोलन के पथ प्रदर्शक राजीव दीक्षित की वर्ष २०१० में संदिग्ध मौत।

मैं इस किताब का प्रचार नहीं कर रहा… लेकिन इसको पढ़कर आपको कुछ शंकाओं का निराकरण तो अवश्य होगा कि कैसे योग ने राम कृष्ण यादव को बना दिया बाबा रामदेव… धर्म के नाम पर तेज़ी बढ़े बाबा के व्यापार पर ED/IMCOME TAX की भी नज़र है।

गुरु शंकरदेव की रहस्यमयी गुमशुदी के साथ-अन्य दो हत्याओं/मौतों को भी CBI के दायरे में लाना उपयुक्त होगा ….. राम रहीम पर आए कोर्ट के निर्णय से आम लोगों को अन्य ढोंगी बाबाओं पर भी सिकंजा कसने का विश्वास जगा है। CBI को उक्त जाँच में भी शीघ्रता कर दूध का दूध व पानी का पानी अवश्य करना चाहिए … वैसे उ.प्र. मी भी नॉएडा/यमुना इक्स्प्रेस्वे में बाबा को 455 एकड़ भूमि अखिलेश यादव ने दी थी, उसकी जाँच भी ज़रूरी है।

नोट: कुछ लोगों ने मुझे फ़ोन कर यह आगाह किया है / चेतावनी दी है कि बाबा रामदेव के बारे में और न लिखें, क्यों कि इनके पास धनबल के साथ अन्य सभी बल हैं। सभी बड़ी मीडिया कम्पनीओँ को इतने विज्ञापन/ धन बाबा रामदेव से मिलते हैं कि कोई उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं करता।

यूपी के चर्चित आईएएस अधिकारी रहे सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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बाबा रामदेव ने ‘वैदिक’ चैनल लांच किया

बाबा रामदेव ने ने ‘वैदिक’ चैनल लांच किया है. इसे टाटा स्काई पर 1078 नंबर पर देखा जा सकता है. बाबा रामदेव का कहना है कि इस आध्यात्मिक चैनल का मकसद वेद, दर्शन, उपनिषद, रामायण, महाभारत और गीता को घर-घर तक पहुंचाना है.

रामदेव ने एक ट्वीट कर चैनल लांच किए जाने की जानकारी दी, जो इस प्रकार है-

Swami Ramdev @yogrishiramdev

Launched Vedic channel on Tata Sky #1078 and others to spread Vedas, Darshan, Upnishadas, Ramayana, Mahabharata & Geeta to every home.

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नेपाल में बाबा रामदेव के छह प्रोडक्ट लैब टेस्ट में फेल, हटाने के निर्देश

बाबा से व्यापारी बने रामदेव की दिव्य फार्मेसी के 6 उत्पादों को नेपाल सरकार ने बाजार से हटा लेने के निर्देश जारी किये हैं. इस बाबत बाकायदा अख़बारों में नोटिस निकालकर इन्हें बेचने पर रोक लगाई गई है. वज़ह है इन प्रोडक्ट्स का जीवाणु टेस्ट में असफल होना. इससे पहले भारत में भारतीय सेना के लैब टेस्ट में रामदेव के प्रोडक्ट फेल होने से सेना ने अपनी कैंटीन से प्रोडक्ट्स हटा लिए थे और बिक्री पर रोक लगा दी थी.

ये है नेपाल के अखबार में प्रकाशित नोटिस…

फेसबुक यूजर दिनेश कुमार चमोली का कहना है कि फार्मा कंपनियों का एनालिसिस प्रोटोकॉल स्टैण्डर्ड नॉर्म्स पर होता है. फिर ये प्रोडक्ट कभी भारत में फेल क्यों नहीं हुए? ये सोचने की बात है. एक अन्य फेसबुक यूजर Kamal Kant का कहना है- ”रामदेव एक पूंजीपति से भी ज्यादा लूट रहा है, क्योंकि इसने तो धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर भी अपना उल्लू सीधा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इसके द्वारा संचालित अवैज्ञानिक चालें अपराध की श्रेणी में आती हैं.”

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बाबा रामदेव द्वारा सेना को घटिया आंवला जूस सप्लाई करने की खबर को न्यूज चैनलों ने दबा दिया

पतंजलि और बाबा रामदेव के अरबों-खरबों के विज्ञापन तले दबे मीडिया हाउसेज ने एक बड़ी खबर को दबा दिया. भारतीय सेना ने बाबा रामदेव द्वारा सप्लाई किए जा रहे आंवला को घटिया पाया है और इसकी बिक्री पर फौरन रोक लगा दी है. यह खबर दो दिन पुरानी है लेकिन इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल में कोई चीखमचिल्ली नहीं है. सब बड़े आराम से चूं चूं के मुरब्बा की तरह इस बड़ी खबर को पी गए और देश को बांटने वाले विषयों पर हो-हल्ला जारी रखे हुए हैं.

असल में बाबा रामदेव का पतंजलि ग्रुप आंवला जूस भारतीय सेना को सप्लाई करता है. भारतीय सेना कोई भी प्रोडक्ट अपने यहां आने पर उसका अपने लैब में परीक्षण करती है. इस परीक्षण में बाबा रामदेव का आंवला घटिया पाया गया. यानि जो पैरामीटर भारतीय सेना ने बनाए हैं, उस पर यह प्रोडक्ट खरा नहीं उतरा. इसके फौरन बाद सेना ने इस प्रोडेक्ट को न सिर्फ कैंटीन से हटवा दिया बल्कि आगे से ऐसे प्रोडक्ट्स को लाने पर पाबंदी लगा दी है.

ये तो रही मूल खबर. अब यहां से शुरू होती है मीडिया वालों के हरामीपने की खबर. दिन रात न्यूज चैनलों पर बाबा रामदेव और उनके प्रोडेक्टस का हरिकीर्तन चलता रहता है. जाहिर है सबकी जेबें इस विज्ञापन की रकम से भरी जा रही है. अरुण पुरी हो या रजत शर्मा, सुभाष चंद्रा हो या अवीक सरकार, मुकेश अंबानी के न्यूज चैनल हों या विनोद शर्मा का मीडिया हाउस, सब के सब रामदेव के नोटों के तले दबे हैं. सो इन्हें तो इस खबर को दबा ही देना था. लेकिन क्या इस खबर को एनडीटीवी पर भी नहीं दिखाया गया? बताया जा रहा है कि एनडीटीवी भी बाबाजी के रुपयों रुपी आशीर्वाद तले दबा है, सो प्रणय राय ने भी खबर पर आंख मूंद लेने का फरमान अपने यहां जारी कर दिया.

मतलब कि बाबा रामदेव के एक घटिया प्रोडक्ट ने भारतीय मीडिया के घटिया और घृणित चेहरे का भी पर्दाफाश कर दिया. अखबार हों या न्यूज चैनल, जबसे इनका कारपोरेटीकरण हुआ है, तबसे इनने शीर्ष लेवल के घपले घोटाले दिखाने छापने बंद कर दिए हैं क्योंकि इन घोटालों में या तो इनका कोई करीबी शामिल होता है या फिर इनके मीडिया हाउसों का बड़ा विज्ञापनदाता. हुआ यह भी है कि ये मीडिया हाउसेज सत्ता से लंबी चौड़ी डील कर पैसे उगाह लेते हैं और फिर सत्ता के खिलाफ भी खबरें नहीं दिखाते, जैसा कि आजकल मोदी राज में हो रहा है. दिन रात मोदी और योगी कीर्तन चल रहा है. इसके पहले यूपी की अखिलेश सरकार ने अरबों रुपये लुटाकर को मीडिया को मैनेज कर रखा था.

बंगाल की पब्लिक हेल्थ लैब में आंवला जूस के फेल हो जाने के बाद आर्मी कैंटीन द्वारा इसकी बिक्री पर रोक लगा देने की खबर पर किसी न्यूज चैनल में प्राइम टाइम पर डिबेट न होना शर्मनाक है. नैतिकता का दिन-रात पाठ पढ़ाने वाले मीडिया हाउसों के संपादकों और एंकरों को एक दिन के लिए अपने मुंह पर कालिख पोत कर स्क्रीन के सामने बैठना चाहिए ताकि जनता जान सके कि इनने एक बड़ी खबर विज्ञापनदाता के दबाव में न सिर्फ दबा लिया बल्कि राष्ट्रहित और भारतीय सेना से जुड़े इस मसले पर जनहित में खबर न दिखाकर राष्ट्रद्रोह किया है.

पतंजलि के प्रोडक्ट आंवला जूस पर सेना की कैंटीन में बिक्री पर रोक लगाने की खबर को अपने चैनल पर न दिखाए जाने को लेकर न तो अजीत अंजुम ने कोई ट्वीट या एफबी पोस्ट जारी किया होगा और न ही सुधीर चौधरी इस बड़े विषय पर अपने दर्शकों का ज्ञान सोशल मीडिया पर बढ़ाते पाए गए होंगे.

रक्षा मंत्रालय ने आयुर्वेद पतंजलि को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. इस मामले में रक्षा मंत्रालय ने बाबा रामदेव की कंपनी से जल्द से जल्द जवाब भी मांगा है. लेकिन हमारे महान एंकर और संपादक लोग सो रहे हैं. हमारे महान मीडिया मालिक इस मामले में सेना और राष्ट्र का हवाला देकर छाती बिलकुल नहीं कूट रहे हैं.

खबरों के मुताबिक पतंजलि के इस आंवाल जूस की जांच कोलकाता की सेंट्रल फूड लैबरेटरी में भी जांच कराई गई और वहां भी इसे खाने के लिए ठीक नहीं पाया गया. इसके बाद ही पतंजलि को आर्मी की सभी कैंटीनों से आंवला जूस वापस लेने का निर्देश दिया गया और पतंजलि ने चुपचाप अपना प्रोडक्ट वापस मंगा भी लिया है.

इस पूरे मामले में वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह का कहना है- ”देशभक्ति यही है क्या? फौज को नकली आंवला जूस बेचने के अपराधी रामदेव पर किसी भक्त को अब कुछ नहीं कहना है, क्यों? अब कहां गया राष्ट्र और कहां गया सेना का अभिमान? तीन दिन हो गये किसी चैनल पर सांस तक नहीं आई. गूगल करें. दस स्रोत हैं इस खबर के. तीन दिन से प्रिंट मीडिया में ख़बर है. लेकिन चैनल वाले अभी हिंदू मुस्लिम और केजरीवाल में उलझे हैं.”

वरिष्ठ पत्रकार Jaishankar Gupta का साफ कहना है कि सब के सब मीडिया हाउस पतंजलि के विज्ञापनों के बोझ तले दबे हैं. पत्रकार Kumar Narendra Singh कहते हैं- ”यदि आपके पैसा और पॉवर हो, तो आपका हर कुकर्म देशभक्ति है। लेकिन यदि आप गांठ के पूरे नहीं हैं, तो आप देशभक्त नहीं हो सकते।”

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. यशवंत से संपर्क ह्वाट्सअप नंबर 9999330099 के जरिए किया जा सकता है.

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न्यूज चैनल और अखबार वाले रामदेव की धोखेबाज कंपनी पतंजलि पर जुर्माने की खबर पी गए

Samar Anarya : हरिद्वार की अदालत ने सेठ रामदेव की पतन-जलि आयुर्भेद पर भ्रामक विज्ञापनों के लिए 11 लाख का जुर्माना। 2012 में पतन-जलि के सरसों तेल, नमक, अनानास जैम, बेसन और शहद के घटिया स्तर का पाए जाने पर ज़िला खाद्य सुरक्षा विभाग ने दर्ज किया था मामला!

Seth Ramdev’s Patan-Jali Ayurveda fined Rs 11 lakh for misleading advts and substandard products by Haridwar court. District Food Safety Department had lodged the case in 2012 after Patan-Jali’s samples of mustard oil, salt, pineapple jam, besan and honey had failed quality tests!

पूरी खबर ये है :

रामदेव की पतंजलि पर 11 लाख का जुर्माना, भ्रामक प्रचार करने का आरोप

हरिद्वार : योग गुरू बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड’ एक बार फिर विवादों में है। बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को कोर्ट ने प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग और प्रचार के मामले में फर्जीवाड़ा करने का दोषी पाया है। कहीं और बने उत्पाद को पतंजलि ब्रांड के नाम से बेचने के केस में कोर्ट ने बाबा रामदेव की कंपनी पर 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

सरसों, नमक, बेसन पर लगाया गया लाखों का जुर्माना : ए.डी.एम. हरिद्वार ने लगाया पतंजलि पर जुर्माना एडीएम एलएन मिश्रा की अदालत ने पतंजलि को पांच प्रोडक्ट्स की फर्जी ब्रांडिंग करने का दोषी पाया है और इसकी सजा के तौर पर 11 लाख बतौर जुर्माना चुकाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरसों की गलत ब्रांडिंग करने पर 2.5 लाख, नमक के लिए 2.5 लाख, पाइन एप्पल जैम के लिए 2.5 लाख, बेसन के लिए 1.5 लाख और शहद को पतंजलि का बताकर बेचने के लिए 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि जांच में यह पाया गया है कि इन उत्पादों को पतंजलि ने नहीं बनाया था।

स्टोर से 2012 में लिए थे सैंपल : खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेंद्र पांडे ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि हरिद्वार में 2012 में दिव्य योग मंदिर के पतंजलि स्टोर से सरसों तेल, नमक, बेसन, पाइन एप्पल जैम और शहद के सैंपल लिए गए थे। इन सैंपल्स को रुद्रपुर लेबोरेटरी में टेस्ट किया गया। टेस्ट में पतंजलि के सैंपल फेल हो गए। उस जांच रिपोर्ट के आधार पर एडीएम कोर्ट में केस दायर किया गया था और पतंजलि पर मिसब्रांडिंग और गलत प्रचार का चार्ज लगाया गया था। यह केस चार साल तक चला।

ग्राहकों को दिया धोखा : इस मामले में एडीएम कोर्ट ने 1 दिसंबर को फैसला सुना दिया था जो अब जाकर सार्वजनिक किया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेंद्र पांडे ने बताया कि जिन प्रोडक्टस पर जुर्माना लगाया है, इनकी जांच में पता चला कि ये पतंजलि की यूनिटों में नहीं बनाए जा रहे थे। पांडे ने कहा, ‘इसे किसी और फैक्ट्री में बनाया गया था जबकि इसे पतंजलि कंपनी अपना एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट बताकर बेच रही थी। इस तरह से यह कस्टमर्स को पतंजलि के नाम पर धोखा दे रही थी।’

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय उर्फ समर अनार्या की एफबी वॉल से.

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रामदेव समर्थकों ने बनारस के राजघाट स्थित गांधी विद्या संस्थान परिसर पर कब्जे की कोशिश की

इसी गाड़ी पर सवार होकर अवैध कब्जा करने आए रामदेव समर्थक. वीडियो बना रहा यह कथित बाबा भी कब्जा करने आए लोगों के साथ था.

2 सप्ताह पहले अवैध कब्जाधारियों को हटाने का दिया था कमिश्नर ने आदेश…   बाबा रामदेव के पातंजली योग पीठ के प्रभारी और उनकी टीम ने सर्व सेवा संघ के परिसर में घुसपैठ करने की कोशिश की. कल सुबह रामदेव के लोग परिसर में स्थित गेस्ट हाउस में साफ़ सफाई के नाम पर घुस आये. बिना अनुमति अंदर घुसने का विरोध कर उन्हें बाहर निकाला गया. उसके उपरांत शाम को 5 बजे पतंजली योग पीठ के प्रांतीय प्रभारी अपने लोगों को गाड़ी में भर कर दुबारा आये और परिसर में पुनः प्रवेश करने की जबरन कोशिश की.

चौकीदार द्वारा पूछने पर उन लोगों ने कहा कि हमें यहाँ रहने के लिए बाबा रामदेव जी (पतंजलि योगपीठ) द्वारा भेजा गया है और यहाँ हमें रहने की अनुमति कुसुम लता केडिया ने दिया है. ये लोग परिसर में कुसुम लता केडिया द्वारा कब्जाए मकान के बाहर गाड़ी में जमे हुए हुये हैं. उनको प्रशासन द्वारा भेजे गये एक सिपाही ने रोक कर उप जिलाधिकारी से बात करने को कहा लेकिन वो लोग जबरन डायरेक्टर निवास में जाने की कोशिश में जुटे रहे.

ज्ञात हो कि संस्थान को प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे से मुक्त कराने का आदेश मिले हुए भी आज 15 दिन से ज्यादा हो गये लेकिन रामदेव के दबाव में अब तक आदेश का क्रियान्वयन नहीं हुआ है. सर्व सेवा संघ एवं गाँधी विद्या संस्थान संघर्ष समिति के लोगों ने परिसर में इस तरह अवैध कब्ज़ा की हर कोशिश के विरोध करने का निर्णय लिया है. पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित कर दिया गया है. गांधी विद्या संस्थान संघर्ष समिति एवं परिसर की ओर से डॉ आनंद तिवारी, डॉ अनूप श्रमिक, जागृति राही, मुनिजा जी, सुशील सिंह, अनूप आचार्य, संजय सिंह, संध्या, बबलू आदि ने इस तरह के कुकृत्य की भर्त्सना की.

लैटेस्ट अपडेट….

संस्थान से आज प्रशासन द्वारा अवैध कब्जा हटा दिया गया. अनेक प्रशासनिक अधिकारियों और शासन द्वारा नियुक्त सचिव उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी केके तिवारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल आज पूर्वाह्न अवैध कब्जा हटवाने परिसर पहुंचा. कब्जाधारियों को खेदेड कर बाहर किया गया. इसके बाद जेपी गेस्ट हाउस, मुख्य भवन, निदेशक आवास, मुख्य गेट पर प्रशासन का ताला लगाया गया. अन्य आवासीय भवन भी खाली कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है. शुक्रवार की रात्रि को परिसर में अनधिकृत तरीके से प्रवेश किये हुए तथाकथित पतंजलि योग पीठ के प्रभारी और अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने बाहर खदेड़ दिया. कब्जा खाली करने की कार्यवाही के बाद जिलाधिकारी विजय किरण आनंद सर्व सेवा संघ परिसर पहुंचे.

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रामदेव की दवाएं और सामान न खरीदने के लिए तर्क दे रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा

Rajiv Nayan Bahuguna : क्यों न खाएं रामदेव की दवा… मैं कोई रसायन शास्त्री अथवा कीमियागर नहीं हूँ, अतः अपने सामान्य बुद्धि विवेक का प्रयोग कर मित्रों को सलाह देता हूँ कि रामदेव के किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल न करें, अपितु बहिष्कार करें।

1:- रामदेव का व्यक्तित्व संदिग्ध है। किसी संदिग्ध व्यक्ति से असन्दिग्ध और शुद्ध उत्पाद की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

2:- भगवा बाना पहनने वाला व्यक्ति यदि राजनीति, विज्ञापन, प्रचार, विमान, अकूत धन सम्पदा के फेर में पड़े, तो वह स्वतः ही कोई ठग, मायावी अथवा बुरी नीयत वाला व्यक्ति है। साधुवेश में सीता हरण करने वाले रावण का प्रतीक ग्रहण करें।

3:- एक सन्यासी अग्नि वर्ण के चीवर पहनने से पहले स्वयं ही अपना श्राद्ध करता है। अर्थात हर प्रकार के बन्धनों से मुक्त हो जाता है। भगवा वस्त्र छोड़ कर स्वप्न में भी सन्यासी कोई अन्य वस्त्र धारण करे, तो वह स्वतः ही सन्यास च्युत हो जाता है, यह आद्य शंकराचार्य की देशणा है। सन्यासी माइनस 30 डिग्री तापमान में भी कोई अन्य वस्त्र नहीं पहनते, चाहे जान चली जाए। लेकिन व्यर्थ के प्राण भय से ग्रसित हो रामदेव ने दिल्ली के रामलीला मैदान में क्या किया था, सभी जानते हैं।

4:- झूठ बोलना कलयुग में मानव स्वभाव है। हम सभी बोलते हैं। लेकिन सन्यासी झूठ बोलने लगे तो धर्म का कौन हवाल। इन दोनों ने बाल किसन की फ़र्ज़ी डिग्री को लेकर साफ़ झूठ बोला।

5:- मेरे मित्र और टिहरी बाँध आंदोलन में साथी रहे राजीव दीक्षित दुर्योग से रामदेव के फेर में पड़ गए। बीमार हुए तो मैंने उन्हें राम देव की नीम हकीमी छोड़ उचित उपचार की सलाह दी। नहीं माने। मर गए।

6:- धर्म निरपेक्षता, लोकतन्त्र और समतावाद के मूल्यों में विश्वास करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए रामदेव की दवा ज़हर के समान है। गांधी अंग्रेजी दवा को छूते तक नहीं थे, क्योंकि अंग्रेजी सभ्यता के विरुद्ध थे।

यह पोस्ट सिर्फ विवेक शील मनुष्यों के लिए है, भक्तों के लिए नहीं। भक्त गण मज़े से रामदेव की दवा खाकर अनुलोम विलोम करें। अपने खाते में आ चुके 15 लाख रोकड़े का प्रबन्धन करें। इस पोस्ट पर मुझसे फ़ालतू हुज़्ज़त न करें।

अब बात थोड़ी पहाड़ की और गर्मियों में आने वाले मैदानी भाइयों के लिए…. जब गर्मी सताये, तो कम्प्यूटर पर बैठ बर्फ़ के चित्र देखो। बार बार पहाड़ न जाओ। जब जाओ तो वहां तमीज़ से रहो। धमाल न मचाओ। प्लास्टिक, पॉलीथिन और अपने मन की गन्दगी वहां न छोडो। गर्म कपड़े वहीं के स्थानीय अभिक्रम से निर्मित खरीदो, और भोजन भी स्थानीय करो। चाउमिन न खाओ। बिसलेरी न पीओ। पहाड़ के हर झरने का पानी मिनरल वाटर है। रामदेव के झांसे में आकर उसकी चीजें मत खरीदो। जब पहाड़ भी गर्म और कलुषित हो जाएंगे, तो कहाँ जाओगे।

जहाँ तक सम्भव हो कार की बजाय बस से जाओ। गाड़ी तेज़ न हांको। हॉर्न कम बजाओ। पहाड़ी नदी में गहरे न उतरो। सेल्फ़ी लेते वक़्त बन्दर और चिंपैंजी जैसी शक़्ल न बनाओ। वहां के लोक देवताओं का सम्मान करो। ये गैर साम्प्रदायिक और सरल होते हैं। इनका सांस्कृतिक महत्व भी है। मसूरी, नैनीताल की अपेक्षा ग्वालदम, गैरसैण, सोमेश्र्वर, जगेश्र्वर, चोपता, पंवाली जाओ। मसूरी-नैनीताल में ठग्गू का समोसा बिकता है, छोटी जगहों पर प्यार और सम्मान मिलेगा। निन्देह यहां लड़कियां छेड़ोगे और नंगा नाच करोगे, तो बुरे पिटोगे। भागने का कोई रास्ता नहीं रहता। जिस रास्ते से आये हो, उसी से जाना भी पड़ता है। हरिद्वार या देहरादून अथवा हल्द्वानी में कभी नाइट स्टे मत करो। कुछ आगे बढ़ कर ही छोटी, लेकिन सौम्य बस्तियां मिलेंगी।

और अंत में पुनः नेक सलाह। राम देव का उत्पाद कभी न खरीदना। वह विज्ञापन का मायावी है, और कुछ नहीं।

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा के फेसबुक वॉल से.

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टीवी पर सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाले उद्योगपति बने बाबा रामदेव

नई दिल्ली। योगगुरु बाबा रामदेव योग के मामले में तो आगे हैं ही, अब चैनल्स को सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाले विज्ञापनदाता भी बन गए हैं। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) की रिपोर्ट के अनुसार की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड सबसे बडी एफएमसीजी एडवर्टाइजिंग कंपनी बन गई है। काउंसिल की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पतंजलि ब्रांड ने 23 से 29 जनवरी के बीच कैडबरी (16 हजार कमर्शियल्स) को पीछे छोड़ते हुए 17000 से भी अधिक बार टीवी कमर्शियल्स प्रसारित। पतंजलि ब्रांड के अंतर्गत आने वाले प्रॉडक्ट्स के टीवी कमर्शियल्स की संख्या कैडबरी, पार्ले और पॉन्ड्स जैसे दिग्गज ब्रैंड्स के विज्ञापनों से भी ज्यादा रही।

बीएआरसी टीवी विज्ञापनों के आंकड़ों का प्रकाशन करती है और इसके लिए बीएआरसी करीब 450 चैनल्स पर निगरानी करती है। ये विज्ञापन देश के विभिन्न क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चैनलों पर प्रसारित किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि पतंजलि की यह बढ़त आगे भी बनी रह सकती है। इन आंकड़ों के जारी होने से महज एक हफ्ते पहले ही पतंजलि इस मामले में छठे नंबर पर थी, जबकि नवंबर से पहले टॉप 10 में भी पतंजलि की नाम नहीं था।

पतंजलि करीब 7 प्रॉडक्ट्स की दमदार मार्केटिंग कर रही है, जिसमें घी, बिस्किट, नूडल्स, शहद, टूथपेस्ट, शैंपू और क्रीम शामिल हैं। गौरतलब है कि योगगुरु रामदेव ने दावा किया था कि अगले 5 साल के भीतर उनकी कंपनी देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बन जाएगी। बाबा रामदेव के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने बताया कि हमने अपने सात प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों के जरिए टीवी पर पहली रैंक हासिल कर ली है। हम 7 और प्रॉडक्ट्स लेकर आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पतंजलि ने इन विज्ञापनों पर कम से कम 300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इस अनुमान का खंडन पतंजलि ने भी नहीं किया है। तिजारावाला कहते हैं कि ये विज्ञापन न्यूज चैनल्स को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं, लिहाजा उन्हें कम कीमत में ही तैयार कर लिया गया और उनके प्रसारण की फ्रिक्वेंसी भी इतनी अधिक है

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सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही बाबा रामदेव और बालकृष्ण की ये तस्वीर, जानें क्यों…

 

जब तक कांग्रेस की सरकार केंद्र में थी, बाबा रामदेव रोज काला धन की हुंकार भरते थे. काला धन का हिसाब अपने भक्तों और देशवासियों को बताते थे कि अगर वो काला धन आ गया तो देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी. काला धन के मुद्दे को नरेंद्र मोदी ने भी लपका और बाबा रामदेव की मुहिम को समर्थन किया. माना जाने लगा कि रामदेव और नरेंद्र मोदी की जोड़ी अगर जीतकर केंद्र में सरकार बनाने में सफल हो गई तो यह तो तय है कि देश में काला धन वापस आ जाएगा. लेकिन जोड़ी के जीतने और सरकार बनाने के बावजूद काला धन देश वापस नहीं आया.

मोदी के आदमियों ने तो अपने वोटरों को औकात बताने के लिए यहां तक कह दिया कि काला धन वाला नारा केवल नारा था यानि जुमला था, जनता को भरमाने, वोट खींचने के लिए. खैर, बेचारी जनता, वो तो अब पांच साल के लिए झेलने को मजबूर है. पर बाबा रामदेव ने गजब की चुप्पी साध रखी है. कुछ बोलते ही नहीं. काला धन को लेकर उनका अभियान भी शांत हो गया है.

इसी बीच सोशल मीडिया पर ढेर सारे लोग बाबा रामदेव से सवाल करने लगे कि आखिर वे काला धन के मसले पर केंद्र सरकार को घेरते क्यों नहीं, काला धन के लिए अब वो अभियान चलाते क्यों नहीं. वे काला धन पर अब कुछ बोलते क्यों नहीं? इसी बीच, कुछ लोगों ने बाबा रामदेव और उनके प्रधान शिष्य बालकृष्ण की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर यह कहते हुए शेयर कर दी कि देखिए, बाबा और उनके चेले काला धन खोजने में लगे हैं. इस मजेदार तस्वीर को काला धन खोज से जोड़ देने के बाद लोगों की हंसी रोके नहीं रुक रही है. जो भी इसे देख रहा है, अपने वाल पर शेयर कर रहा है.

तस्वीर में बाबा रामदेव और बालकृष्ण एक टीले नुमा पहाड़ी या पहाड़ी नुमा टीले, जो कह लीजिए, पर कुछ तलाश रहे हैं. जाहिर है, वह कोई जड़ी बूटी तलाश रहे होंगे, लेकिन काला धन तलाशने का जो जुमला सोशल मीडिया वालों ने इस तस्वीर के कैप्शन के रूप में फिट किया है, वह खूब हिट जा रहा है. लोग बाबा रामदेव से उम्मीद तो करते ही हैं कि संत होने के नाते वो अपनी चुप्पी का राज सच सच बताएंगे.

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India Tv Blunder : Rajat Sharma put very light questions to Baba Ramdev

New Delhi : The discussion between Baba Ramdev & Rajya Sabha MP K C Tyagi on 1st of May was remarkable. That was the top discussion issue in the media of the day in spite of the fact that the Parliament is in session. All the channels covered the issue on its Erie & given full chance to both opposing personalities to explain their views. Aajtak, Zee News, IBN7, ABP & other leading channels covered this event of debating that issue with the them on equal basis & giving equal weight age to both. 

But the role of Rajat Sharma & India TV was highly critical. Rajat sharma in his programme at 9 pm invited only Baba Ramdev in his programme Aaj Ki Baat to highlight his points. Rajat Sharma put very light questions to Baba Ramdev. During Lok  Sabha poll similarly Narendra Modi was called in Rajat Sharma’s SAP Ki Adaalat programs & put very light questions. Q W Naqvi, the then News Director, resigned following that Modi’s interview as being reported by some media reports. 

Since Baba Ramdev, Rajat Sharma & Narendra Modi are in the same league so Rajat Sharma projected only Baba Ramdev. Rajat Sharma has not not such talent t conduct debate between any two opposing amps in any circumstance. So after the question/answer session with Ramdev, Rajat Sharma should give chance to K C Tyagi too.

  After anointment of Modi, Rajat Sharma is getting largesse on a big level. He is being awarded Padma Bhushan. Rajat Sharma was also being included in national committee to commemorate 125th birth anniversary of first prime minister Jawaharlal Nehru.

So this kind of conduct is not any surprise from Rajat Sharma Saheb.

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क्या एबीपी न्यूज अपनी चलाई सनसनियों पर एक बार भी नजर डालने को तैयार है?

Sheetal P Singh : लम्बे समय तक पेड मीडिया और चिबिल्ले चैनल इस कथित बाबा की गप्पों को UPA2 की हैसियत बिगाड़ने के लिये राष्ट्रीय ख़बर बनाते रहे। अब कोई अपनी ही चलाई सनसनियों पर एक बार भी नज़र डालने को तैयार नहीं है… और यह ढोंगी बाबा तो खैर टैक्सपेयर की कमाई से Zplus कैटगरी का हो ही गया!

Sanjeev : बाबा रामदेव को ऐसा क्या मिल गया, जो अपनी ही कही बातों को भूल गए…

Kunal k Verma : एबीपी न्यूज को जरूर एक बार बाबा रामदेव से पूछना चाहिए कि अब उनका इन मुद्दों पर क्या रिएक्शन है… उन दिनों तो एबीपी न्यूज ने रामदेव के कथन को ऐसे चलाया जैसे बाबा कोई बड़ी ब्रेकिंग न्यूज दे रहे हों… कम से कम इन न्यूज चैनलों को अपनी चलाई खबरों का कभी-कभार तो फालोअप कर लेना चाहिए… पर ये पेड और कार्पोरेट न्यूज चैनल ऐसा कहां करने वाले… इन्हें तो अपना टर्नओवर बढ़ाने से फुर्सत नहीं… अगर एबीपी न्यूज में थोड़ी भी शरम हया बाकी है तो वह बाबा रामदेव की इन मुद्दों पर चुप्पी की असलियत उजागर करेगा…

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट संजीव व कुणाल के फेसबुक वॉल से.

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हर दिन लाखों का विज्ञापन चैनलों पर देने वाले खरबपति बाबा की सुरक्षा पर जनता का धन खर्च होगा

Anil Singh : नेताओं को ही नहीं, कलियुगी साधुओं और बाबाओ को भी सुरक्षा की तगड़ी ज़रूरत है तो बाबा रामदेव को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने Z सुरक्षा देने का फैसला कर लिया है। राजनाथ सिंह ने मन ही मन सोचा – खर्च तो जनधन ही होगा, अपना या अपने पूत का क्या जाता है! कांग्रेस ने बड़ी चोरी की तो भाजपा ने छोटी चोरी की, इसमें क्या बुराई…. इस किस्म के तर्क दे रहे हैं कुछ लोग। मित्र, संत को कभी राजाश्रय या सुरक्षा की ज़रूरत नहीं होती। इसका एक अर्थ तो यही है कि यह बाबा संत नहीं, कुसंत है। दूसरे खरबों की संपत्ति वाला बाबा हर दिन लाखों का विज्ञापन न्यूज़ चैनलों पर दे सकता है तो अपनी सुरक्षा का इंतज़ाम खुद क्यों नहीं कर सकता? आखिर क्यों उस पर हमारा यानी करदाताओं का धन लुटाया जा रहा है?

Yashwant Singh : कांग्रेस ने दामाद जी को जेड प्लस सुरक्षा दिया तो भाजपा ने बाबा जी को जेड प्लस थमा दिया. गजब जमाना है. साधु संन्यासी टाइप लोगों को भी डर लगने लगा है. अगर ये रामदेव अभी तक डर से मुक्त नहीं हो सका है तो फिर कैसा साधु और कैसा संन्यासी? रामदेव जैसा बनिया जो अकूत दौलत कूट रहा है, उसकी सुरक्षा पर अब करोड़ों रुपये जनता का पैसा खर्च होगा. जिस रामदेव के प्रोडक्ट्स का विज्ञापन हर न्यूज चैनल पर चलता हो, (ये भी पेड न्यूज का फार्मेट है ताकि मीडिया वाले मुंह बंद रखें और रामदेव को बख्शे रहें) यानि अरबों रुपये अपने सामानों के विज्ञापन के नाम पर मीडिया को बांटता हो, वह भला अपने पैसे से अपनी सुरक्षा क्यों नहीं कर सकता…. खैर, कुछ बोलने कहने का दौर नहीं है क्योंकि बोलेगा तो वो सब बोलेगा कि देखो ये बोलता है….

मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह और भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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