प्रभासाक्षी.कॉम के ईपेपर का शुभारंभ, नया पोर्टल और मोबाइल एप जल्द ही आएगा

भारत के प्रमुख हिंदी समाचार विचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम का ईपेपर भी आज से (epaper.prabhasakshi.com) पर उपलब्ध है। जल्द ही पोर्टल भी अत्याधुनिक स्वरूप में पाठकों के सामने होगा। भारत के प्रमुख हिंदी समाचार विचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम का ईपेपर आज से पाठकों के लिए (epaper.prabhasakshi.com) पर उपलब्ध है। प्रभासाक्षी के सहयोगी संपादक नीरज कुमार दुबे ने बताया कि जल्द ही पोर्टल भी अत्याधुनिक स्वरूप में पाठकों के सामने होगा। प्रभासाक्षी का आगामी पोर्टल और मोबाइल एप तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक तथा भारतीयता की सशक्त छवि प्रदर्शित करने वाले होंगे।

मीडिया में दिलचस्पी रखने वाले हर शख्स, पत्रकार, स्टूडेंट को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए

“द बोस्टन ग्लोब”। कई पुलित्जर पुरस्कारों से सम्मानित। पुलित्ज़र जो पत्रकारिता के क्षेत्र का शीर्ष पुरस्कार है। ”द बोस्टन ग्लोब” में 1970 में ”स्पॉटलाइट” नाम की एक इनवेस्टिगेटिव टीम की रचना की गई। ये नया प्रयोग था। इसमें चार-पांच लोगों की टीम एक विषय पर महीनों काम करती थी। कभी-कभी साल भर एक ही खबर में लगा देते। 45 साल में स्पॉटलाइट ने 102 खोजी रिपोर्ट कीं।

पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए एनयूजे प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिला

: मीडिया कमीशन और मीडिया काउंसिल के गठन की भी मांग : नई दिल्ली। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने, मीडिया कमीशन व मीडिया काउंसिल के गठन और पत्रकारों की अन्य समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। एनयूजे के अध्यक्ष रास बिहारी की अगुवाई में आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से भारत में पत्रकारों की तमाम समस्याओं पर चर्चा भी की।

पूर्वोत्तर भारत की हिंदी पत्रिका ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ की तरफ से अमरावती सृजन-पुरस्कार एवं सम्मान समारोह में कई सम्मानित

सिलीगुड़ी से प्रकाशित पूर्वोत्तर भारत की चर्चित हिंदी मासिक पत्रिका ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ की तरफ से 28 फरवरी को सिलीगुड़ी के बर्द्धवान रोड स्थित ऋषि भवन में अमरावती सृजन पुरस्कार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसमें शहर के अलावा बाहर से आये लेखक कवियों ने भागीदारी की। ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ के प्रधान संपादक डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने अमरावती सृजन-पुरस्कार व सम्मानों की भूमिका रखते हुए देश में पुरस्कार वितरण के बारे में कहा कि पूर्वोत्तर की एक मात्र हिंदी मासिक पत्रिका आपका तिस्ता-हिमालय की ओर से दिये जा रहे इन पुरस्कार एवं सम्मानों के बारे में हम यहां साफतौर पर बताना आवश्यक समझते हैं कि यह पहल हमने विशेष प्रयोजन से शुरू की है। आप जानते हैं कि आजकल पुरस्कार व सम्मान देने का एक मंतव्य प्रेरित चलन प्रारंभ हुआ है। सत्ता एवं पूंजी के भ्रमजाल तथा प्रायोजित सम्मानों के बरक्स तिस्ता-हिमालय द्वारा दिये जा रहे ये सम्मान इससे बिल्कुल इतर जन-सामाजिक सरोकारों तथा जन-संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध साहित्यकर्मी एवं नागरिक दायित्व के निष्ठापूर्ण निर्वाहन के लिए हैं जिसे हम बखूबी कर पा रहे हैं। ऐसे सम्मान उन्हीं लोगों को दिया जाना चाहिए जो देश व समाज की बेहतरी प्रतिबद्ध हैं।

यूपी में राजस्थान पत्रिका की वेबसाइट से कई लोग जुड़े

राजस्थान पत्रिका अपना पांव उत्तर प्रदेश में तेजी से फैलाने में लगा है। लखनउ, आगरा, नोएडा, बनारस को सेंटर मानकर ब्यूरो कार्यालय तेजी से खोलने लगा है। पत्रिका का पूर्वांचल पर विशेष जोर है। बनारस में पूरी यूनिट काम कर रही है। बनारस के हेड अभिषेक श्रीवास्तव के अलावा आवेश तिवारी, अमर उजाला के सिटी इंचार्ज रहे डा. अजय कृष्ण त्रिपाठी, देवेश सिंह सहित एक दर्जन रिपोर्टर काम कर रहे।

पत्रकार सुरेश गांधी समेत विभिन्न क्षेत्रों के मेधावियों को किया गया राष्ट्र गौरव अलंकरण सम्मान से सम्मानित

वाराणसी। बदलाव के इस दौर में ‘जाके पैर न फटे बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई’ का जुमला उछालकर पत्रकार और पत्रकारिता के स्वरूप और दायित्वों को समेटना बेमानी है। ‘मिशन’ से ‘प्रोफेशन’ के दौर में पहुंची पत्रकारिता के इस दौर में तमाम झंझावतों को झेलने के बाद भी सुरेश गांधी जैसे पत्रकार अपनी बेबाकी व निर्भिकता के जरिए पत्रकारिता की साख को बचाएं रखे है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। जब न्यायपालिका को छोड़कर लोकतंत्र के बाकी स्तंभ भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो ऐसे समय पत्रकारिता की सामाजिक जिम्मेदारी कहीं अधिक बढ़ जाती है। यह बाते सपा के नगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल ने कहीं। वह रविवार को शहर के जगतगंज स्थित भाग्यश्री गेस्टहाउस में राष्ट्रीय हिदी दैनिक समाचार पत्र वाराणसी की आवाज के वार्षिकोत्सव पर आयोजित राष्ट्र गौरव रत्न अलंकरण सम्मान-पत्र समारोह को संबोधित कर रहे थे।

बिना सुनवाई के संतोष सितोले को ‘दबंग दुनिया’ ने निकाला!

इंदौर के ‘दबंग दुनिया’ में जो न हो कम है। ये अखबार कम अखबार मालिक और गुटखा किंग किशोर वाधवानी की सनक का अड्डा ज्यादा बन गया है। पत्रकारों के काम और उनके सम्मान का यहाँ जरा भी ख्याल नहीं रखा जाता। कुछ दिनों पहले क्राइम रिपोर्टर संतोष सितोले को वाधवानी ने सिर्फ इसलिए निकाल दिया कि उसे सुबह एक खबर अखबार में दिखाई नहीं दी! वाधवानी ने ये जानने की भी जहमत नहीं उठाई कि खबर न छपने का कारण क्राइम रिपोर्टर की लापरवाही थी या संपादक पंकज दीक्षित की नासमझी!

पत्रकारों और जीवदया प्रेमियों का सम्मान

रतलाम। विश्व प्रसिद्ध मोहनखेड़ा तीर्थ में रविवार को ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोशिएसन (आईजा) की मप्र शाखा के तत्वावधान में प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह हुआ। इसमें 20 पत्रकारों और 10 जीवदया प्रेमियों को सम्मानित किया गया। समारोह में मप्र वित्त आयोग के अध्यक्ष हिम्मत कोठारी, आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया, इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लुणावत अतिथि थे।

दिल्ली विधानसभा के केबल टीवी और यूट्यूब चैनल के लिए कर्मचारियों की भर्ती शुरू

दिल्ली विधानसभा अब निजी केबल टीवी और यूट्यूब के जरिए अपनी कार्यवाही और दूसरे कार्यक्रमों के प्रसारण की योजना बना रही है. केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से अपने लिए अलग टीवी चैनल स्थापित करने से जुड़े प्रस्ताव पर केंद्र से जवाब ना मिलने के बाद यह फैसला किया है. दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि सदन ने इसे लेकर सलाहकार रखने शुरू कर दिए हैं और दूसरे कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है. गोयल ने कहा, ‘पिछले साल नवंबर में मैंने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर लोक सभा टीवी और राज्य सभा टीवी की तर्ज पर दिल्ली विधानसभा का खुद का टीवी चैनल स्थापित करने के लिए उनके मंत्रालय की मंजूरी मांगी थी.’

अखिलेश यादव ने ईटीवी की जमकर तारीफ की, कई पत्रकारों को किया सम्मानित

ईटीवी उत्तर प्रदेश के रिपोर्टस, स्ट्रिंगर्स और इन्फारमर्स मीट कान्क्लेव 2016 का आयोजन हुआ। इसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहां जमकर ईटीवी की तारिफ की वहीं ईटीवी के रिपोर्टरों को पत्रकारिता के क्षेत्र में बेस्ट रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया। राजधानी लखनउ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ईटीवी मीट कान्क्लेव में जहां पूरे प्रदेश के 600 से अधिक आये रिपोर्टर्स, स्ट्रिंगर्स और इन्फारमर्स ने भाग लिया वहीं चैनल हेड जगदीश चन्द्रा और सीनियर एडिटर यूपी हेड बृजेश मिश्र भी मौजूद रहे।

क्या फर्जी है बिहार विधान सभा की प्रेस सलाहकार समिति!

बिहार विधान सभा की प्रेस सलाहकार समिति के औचित्य को लेकर आज विधान मंडल के गलियारे में चर्चा तेज रही। इसकी वैधता को लेकर भी सवाल उठा। क्योंकि सलाहकार समिति के गठन के पूर्व विधान सभा सचिवालय ने किसी भी अखबार या समाचार संस्था‍न से समिति के लिए प्रतिनिधि के नाम की मांग नहीं की थी। अपनी मनमर्जी से नामों का एलान कर दिया। जो विहित प्रक्रिया का उल्लंघन है। यही कारण है कि संस्थान छोड़ चुके या सेवानिवृत्त हो चुके पत्रकारों का भी पूर्व संस्थानों के साथ नाम अंकित है।

पत्रिका समूह ने शोमा को बैठक करने से भी रोका, पढ़िए शोमा के पत्र का हिंदी अनुवाद

पत्रिका समूह द्वारा संचालित समाचार वेबसाइट कैच न्यूज़ डॉट कॉम की एडिटर-इन-चीफ़ शोमा चौधरी को प्रबंधन ने बिना कारण बरखास्त तो किया ही, संपादकीय स्टाफ के साथ अंतिम मुलाकात को भी रोक दिया. शोमा को 27 फरवरी को जयपुर मुख्यालय तलब किया गया था और 29 फरवरी से दफ्तर आना बंद करने को कहा गया था. शोमा ने जयपुर से लौटने के बाद कर्मियों को एक आंतरिक मेल भेज कर प्रबंधन के कदम को ”नाइंसाफी” करार दिया और संपादकीय टीम की सोमवार शाम चार बजे बैठक बुलाया. अंग्रेज़ी और हिंदी कैच टीम के तमाम सदस्य शाम 4 बजे जब दिल्ली के कुतुब इंस्टिट्यूशनल एरिया स्थित दफ्तर पहुंचे तो पता चला बैठक नहीं होगी क्योंकि शोमा को इसके लिए मना किया गया है.

राजस्थान पत्रिका समूह ने अपनी वेबसाइट के प्रधान संपादक पद से शोमा चौधरी को हटाया, पढ़िए शोमा का कर्मियों को लिखा गया पत्र

राजस्थान पत्रिका वाले अंग्रेजी और हिंदी में एक न्यूज वेबसाइट चलाते हैं. कैच न्यूज डॉट कॉम नाम से. इसे लांच हुए साल भर भी नहीं हुआ. इसका प्रधान संपादक शोमा चौधरी को बनाया गया. अब राजस्थान पत्रिका के मालिकों को शोमा चौधरी पच नहीं रही हैं. शोमा को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा गया.

Who is Vipin Dhulia in IFWJ? शर्म करो, पुलिस न हुई घर की खेती हो गई जिसे चाहा जेल भिजवा दिया

IFWJ National Council Member Shabahat Vijeta letter against Talibani Farmaan of Vipin Dhulia

अध्यक्ष
आई.एफ.डब्ल्यू.जे.
और
समस्त कार्यकारिणी

शक्ति संगठन में होती है. टूटन में नहीं. मैं तो हमेशा से संगठन का पक्षधर रहा हूँ. राजनीति क्योंकि मेरा पेशा नहीं है इसलिए राजनीति की वह बारीकियां नहीं जानता हूँ जिनसे पिछले कुछ दिनों से दो-चार हो रहा हूँ. मैं पत्रकार हूँ और अपने पेशे को ईमानदारी से निभाता हूँ. अपनी पत्रकारिता के 23 सालों में पत्रकारिता के संघर्षों को बहुत करीब से देखा और समझा है. मुझे अच्छी तरह से पता है कि ऐसा कोई संगठन नहीं है जो दस-दस बरस तक संवादसूत्री करने वाले के दर्द को समझ सके. कोई ऐसा संगठन नहीं है जो आठ-आठ महीने काम के बावजूद वेतन न पाने वाले पत्रकार को वेतन दिला सके.