दैनिक जागरण, नोएडा में बड़े बदलाव की तैयारी

दैनिक जागरण प्रबंधन नोएडा स्थित मुख्यालय में बड़े बदलाव की तैयारी में है. चर्चा है कि दैनिक जागरण नोएडा में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी को बिहार भेजने की तैयारी है. प्रबंधन सालों से जमे पुराने लोगों को दूसरी जगह पर भेजने की पालिसी बना रहा है. पहले बिहार के लिए सेंट्रल डेस्क प्रभारी गंगेश मिश्रा के नाम की घोषणा हुई लेकिन उन्‍हें नहीं भेजा गया. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण प्रबंधन के खिलाफ एक्शन लेने / मुकदमा लिखने में यूपी के आईएएस-आईपीएस अफसरों के हाथ-पैर कांपते हैं!

कार्रवाई तो दूर, एसएसपी ऑफिस में गायब हो जाता है डीएम का पत्र!

नोएडा : डीएम ऑफिस से एसएसपी कैंप कार्यालय की दूरी कुल 10 कदम होगी। लेकिन इस दूरी तक डीएम की चिट्ठी पहुंचना तो दूर, दो बार गायब हो चुकी है। यह तो एक उदाहरण मात्र है। इसी प्रकार गौतमबुद्धनगर के न जाने कितने फरियादी आए दिन पुलिस से निराश हो रहे होंगे। इस उदाहरण से यह भी पता चलता है कि किस प्रकार पुलिस अधिकारी मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को फेल करने में लगे हैं।

दैनिक जागरण के मुख्‍य उपसंपादक श्रीकांत सिंह ने 24 फरवरी 2015 को नोएडा के सेक्‍टर-26 स्थित वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक के कैंप कार्यालय में दैनिक जागरण प्रबंधन के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉक्‍टर प्रीतेंद्र सिंह ने मामले की जांच का आदेश दिया था और उस समय के दैनिक जागरण के एचआर मैनेजर श्री रमेश कुमावत को बुलाकर पूछताछ की गई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्‍ते में चला गया।

तीन एसएसपी आए और गए, लेकिन मामला ठंडे बस्‍ते में ही पड़ा रहा। जबकि तत्कालीन दूसरे अधिकारी कहते रहे- ”दैनिक जागरण के खिलाफ कार्रवाई करने की मेरी औकात नहीं है। आप अदालत जाएं, तभी मामला दर्ज हो सकता है।” अंत में थक हारकर उन्‍होंने तत्कालीन जिलाधिकारी एनपी सिंह से मुलाकात की, जिन्‍होंने कार्रवाई का आदेश भी दिया। लेकिन एसएसपी आफिस में बताया गया कि वहां ऐसा कोई पत्र मिला ही नहीं है।

पिछले 21 अप्रैल को उन्‍होंने दोबारा जिलाधिकारी एनपी सिंह से मुलाकात की और उनसे फिर पत्र (डिस्‍पैच नंबर-3004/एचडी 4117-21-04-17) लिखवाया। इस बार उन्‍होंने पत्र की फोटो कॉपी भी ले ली। जैसी कि आशंका थी, जिलाधिकारी का पत्र न मिलने की बात दोबारा बता दी गई। उस पत्र को यहां अपलोड भी किया जा रहा है।

इससे पहले भी उन्‍होंने तत्कालीन मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव से मेल के जरिये संपर्क किया था, जिन्‍होंने कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन उस समय भी अधिकारियों ने आदेश को ठंडे बस्‍ते में डाल दिया था। इसके अलावा आरटीआई के जरिये भी उन्‍होंने एफआईआर की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसका गोलमोल जवाब दे दिया गया था।

अब हालत यह है कि गूगल करेंगे तो वहां आपको गौतमबुद्धनबर के एसएसपी का कोई फोन नंबर नहीं मिलेगा। इस हाल में आखिर अपराध पर नियंत्रण कैसे और क्‍यों हो पाएगा। पुलिस अधिकारी इसी तरह से अन्‍यायी दैनिक जागरण प्रबंधन के अपराधों को इग्‍नोर करेंगे तो वह माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश कैसे मानेगा और अपने कर्मचारियों को प्रताडि़त करने से कैसे बाज आएगा। इस मुद्दे पर जनमत तैयार न किया गया और उसे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के समक्ष न रखा गया तो आम जनता इसी प्रकार उत्‍पीड़न और अन्‍याय झेलने को बाध्‍य होगी।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण नोएडा मीडियाकर्मी आंदोलन : जिला प्रशासन मध्यस्थता को आगे आया

नोएडा। दैनिक जागरण अख़बार में तीन महीने से चल रहे कर्मचारियों के आंदोलन को कुचलने के लिए जागरण संस्थान द्वारा उठाये जा रहे श्रम विरोधी कदमों को गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने उप श्रमायुक्त के यहाँ चल रही वार्ता को अब अपनी निगरानी में ले लिया है। सिटी मजिस्ट्रेट श्री बच्चू सिंह अब खुद प्रबंधन और जागरण कर्मचारियों के बीच होने वाली वार्ता को संभालेंगे। एडीएम श्री के पी सिंह और पुलिस के अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जागरण प्रबंधन नियमों को ताक पे रखकर जाँच नहीं करेंगे। कर्मचारियों का उत्पीड़न सहन नहीं किया जायेगा। इस मसले पर जिला प्रशासन के कहने पर उपश्रमायुक्त ने जागरण प्रबंधन से भी फ़ोन पर बात की। वार्ता में हिसार, लुधियाना, जालंधर और धर्मशाला के कर्मचारियों के भी कर्मचारियों की भी बात हुई।

दरअसल, रविवार को जागरण के करीब 200 निलंबित व बर्खास्त कर्मचारी डीएम आवास पे धरना देने पहुंचे थे। छुट्टी का दिन होने के बावजूद सुबह से ही पूरे प्रशासन में इस बात से हड़कंप मचा हुआ था। ऐहतियातन वज्र वाहन समेत वह सभी मुक्कमल इंतजामात डीएम आवास के बाहर किये गए थे जो आमतौर पर किसी धरने या प्रदर्शन से निपटने के लिए किये जाते हैं।

डीएम श्री एन पी सिंह ने सुबह से ही इस मामले में मोर्चा संभाल लिया था। ए डी एम के पी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट बच्चू सिंह के साथ ही उपश्रमायुक्त बी के रॉय के अलावा स्थानीय पुलिस स्टेशन सेक्टर 20 इंचार्ज अमरनाथ यादव भी जागरण कर्मचारियों के साथ उनकी बात सुनने को मौजूद थे। इस अवसर पर जागरण कर्मचारियों ने अपनी मांगों से सम्बन्धित ज्ञापन भी जिला प्रशासन को सौंपा। जिस पर जिला प्रशासन ने आगामी 6 जनवरी को होने वाली वार्ता में इसके समाधान का भरोसा दिया। अब 6 जनवरी को देखते हैं कि समस्या का क्या समाधान निकलता है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दीवाली के बाद आंदोलन तेज करेंगे जागरण कर्मचारी

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने पूरी एकजुटता के साथ लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है। नोएडा के सेक्टर 62 स्थित पार्क में हुई बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि मजीठिया वेज बोर्ड के लिए चल रहे आंदोलन को और धार दी जायेगी। बैठक में लुधियाना, हिसार, जालंधर और धर्मशाला से आये कर्मचारियों ने भी कहा कि वे जागरण प्रबंधन के अत्याचार ले आगे कतई सिर नहीं झुकाएँगे।

बैठक में कर्मचारी नेता श्री रूपचंद ने कहा कि प्रबंधन मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का लाभ नहीं देना चाहता लेकिन हम इसे लेकर रहेंगे। उन्होंने अन्याय और जुल्म से लड़ने के लिए कर्मचारियों को बधाई दी और एकजुट रहने और धैर्य और साहस के साथ लड़ाई लड़ने का संकल्प दिलाया।

वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि प्रबंधन सारी चाल, हथकंडे अपनाकर देख चुका है लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष में वह एक भी कर्मचारी को नहीं तोड़ पाया। उन्होंने कहा कि हम दीवाली के बाद आंदोलन को और धार देंगे। दिल्ली और नोएडा में व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जायेगा। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रबंधन की साजिशों का मुहतोड़ जवाब देने की भी बात कही।

इधर, दैनिक जागरण प्रबंधन से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि आंदोलन की आड़ में कुछ लोगों ने लाखों के वारे न्यारे कर दिए हैं। ऐसे लोगों की कोशिश है कि इस आंदोलन को अधिक से अधिक खींचा जाये जिससे वे मालामाल होते रहें। ऐसे लोग अखबार के मालिकान को कर्मचारियों के बारे में पिछले डेढ़ वर्ष से गुमराह करते रहे हैं। इस कारण ही मुनाफा देने वाली नोएडा यूनिट आज रसातल में चली गयी है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल के एक माह हुए पूरे, कर्मचारियों ने कहा- डटे रहेंगे

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफरिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है। पिछले डेढ़ वर्ष से अपने हक़ और इंसाफ के लिए आंदोलित कर्मचारी बेहद अनुशासित ढंग से पूरे महीने दिल्ली और नोएडा में प्रदर्शन करते रहे लेकिन जागरण प्रबंधन उनके आंदोलन को कुचलने में अपनी सारी ताकत खर्च करता रहा।

गौरतलब है कि यह दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल है।

कर्मचारियों की हड़ताल को दिल्ली के पत्रकार संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि दैनिक जागरण के कर्मचारी इतिहास लिखने जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रिंट मीडिया के इतिहास में कभी ऐसी जबरदस्त हड़ताल नहीं हुई और इसके पीछे जागरण प्रबंधन में बैठे वे धूर्त लोग जिम्मेदार हैं जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी कर्मचारियों के हक़ पर डाका डाले बैठे हैं।

दैनिक जागरण के नोएडा प्रबंधन में बैठे कुछ लोग कर्मचारियों की बरसों की मेहनत से खड़ी की गई इस यूनिट को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। कर्मचारी अब और ज्यादा उत्साह और ताकत के साथ आंदोलन को तेज करने की रणनीति बना रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।

इन्हें भी पढ़ें>>

कंजूस-मक्खीचूस और संविधान-कानून विरोधी मालिकों के खिलाफ दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने नोएडा के फिल्म सिटी में किया जोरदार प्रदर्शन

xxx

जागरणकर्मियों ने किया जागरण के नोएडा दफ्तर के आगे प्रदर्शन, प्रबंधन हुआ चित्त

xxx

दूसरी तिमाही में जागरण के मालिकों ने 91 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ कमाया लेकिन कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड देने में नानी मर रही है

xxx

जागो कर्मचारियों, अखबारमालिक किसी के सगे नहीं

xxx

पूरे जोश में जागरणकर्मी, बोले- मजीठिया लेकर रहेंगे

xxx

दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने निलंबन वापसी और वेज बोर्ड लागू कराने के लिए अर्धनग्न होकर इंडिया गेट पर किया प्रदर्शन (देखें तस्वीरें)

xxx

प्रबंधन के हथकंडों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दैनिक जागरणकर्मी हुए तैयार, देखें बैठक की फोटो

xxx

दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मी जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे, कई यूनिटों में हड़ताल (देखें वीडियोज)

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण कर्मियों ने अपने मालिक और संपादक संजय गुप्ता के आवास के बाहर प्रदर्शन कर अपना हक मांगा

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने बुधवार को अखबार के मालिक संजय गुप्ता के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने महारानी बाग से लेकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी तक जुलूस निकाला और संजय गुप्ता के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि दैनिक जागरण के मालिक माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। संजय गुप्ता पर माननीय न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चल रहा है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों को दैनिक जागरण की ओर से 350 से अधिक कर्मचारियों को अपना हक़ मांगने पर संस्थान से बाहर करने की भी जानकारी दी गई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष और तेज करेंगे। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने गुंडागर्दी करते हुए मजीठिया की मांग कर रहे 350 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित व बर्खास्त कर दिया है। कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर नोएडा की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपना हक़ लेकर रहेंगे और मालिकों और उनके चमचों को मेहनतकशों की बद्दुआएं जरूर लगेंगी।

अगली स्लाइड में पढ़ें>> दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने नोएडा में अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन, निकाला जुलूस” नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण के नोएडा कार्यालय में बाउंसर लगा दिए गए!

Fourth Pillar : अब इनकी इज्‍जत होगी बाउंसरों के हवाले… इज्‍जत बहुत बड़ी बात होती है। आम आदमी कमाता है इज्‍जत के लिए। कहा जाता है कि आम आदमी की इज्‍जत लाख रुपये की होती है। अखबार मालिकों की तो करोड़ों में आंकी जाएगी। लेकिन दैनिक जागरण प्रबंधन ने पैसे के लिए अपनी इज्‍जत को दांव पर लगा दिया है। अखबार की प्रोफाइल और छवि दोनों खराब हो गई है, फिर भी संजय गुप्‍ता साहब मस्‍त हैं। उन्‍हें शायद यह नहीं पता है कि वह उसी छवि की रोटी खा रहे हैं। कहावत तो वही चरितार्थ हो रही है कि चमड़ी भले ही चली जाए पर दमड़ी न जाए। दमड़ी से आशय मजीठिया वेतनमान से है।

मजीठिया वेतनमान न देना पड़े, उसकी एवज में भले ही कोई उनकी इज्‍जत लूट ले जाए। मोटी चमड़ी हो गई है उनकी। न लाज रह गया है और न ही लिहाज। जिद किस बात की है, कर्मचारियों का वाजिब हक मार ले जाएं और उन्‍हें कोई कुछ न कहे। बता दें कि मजीठिया वेतनमान के लिए कर्मचारियों का प्रदर्शन लगातार जारी है। कर्मचारियों के आंदोलन को कुचलने के लिए दैनिक जागरण के नोएडा कार्यालय में बाउंसर लगा दिए गए। अब कर्मचारी 21 नवंबर को उनके निवास पर प्रदर्शन करने वाले हैं। जाहिर है कि वहां भी बाउंसर तैनात होंगे। सोचने वाली बात यह है कि मजीठिया वेतनमान की धनराशि इतनी ज्‍यादा नहीं है कि संजय गुप्‍ता उसे न दे सकें।

आखिर कहां-कहां बाउंसर तैनात कराएंगे। उनके कर्मचारी तो संस्‍कारशाला झेलते-झेलते चरित्रवान हो गए है पर बाउंसरों को संस्‍कार कौन सिखाएगा। ऐसा पहले भी हो चुका है कि बाउंसर सुरक्षा के लिए जब भी घरों पर तैनात किए जाते हैं, वे घर की बहू-बेटियों की इज्‍जत लूटने से बाज नहीं आते। यह भी हो सकता है कि ये बाउंसर सीजीएम नीतेंद्र श्रीवास्‍तव और विष्‍णु त्रिपाठी के भी निवास पर तैनात किए जाएं। अब इसमें कर्मचारियों का क्‍या जाता है। वे तो बाउंसरों को शुभकामना ही देंगे कि ठीक है भैया, छानों अधिकारियों के घर का नरम-नरम ‘माल’।

फेसबुक के ‘फोर्थ पिलर’ पेज से साभार.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण कर्मचारी आर-पार लड़ाई को तैयार

प्रबंधकों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ दैनिक जागरण की कर्मचारी यूनियनें एकजुट हो चुकी हैं। इस बार कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। प्रबंधन भी कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने के लिए कई दमनकारी कदम उठा रहा है। मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन की मांग करने पर दैनिक जागरण प्रबंधन ने कभी जागरण परिवार कहे जाने वाले कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है।

प्रबंधन की इस तरह की कार्रवाई से साफ जाहिर होता है कि वह अपनी नीति के अनुसार कर्मचारियों का शोषण करने, उनका हक मारने के लिए कुछ भी कर सकता है। मगर अब कर्मचारी भी अपने आंदोलन से पीछे हटने वाला नहीं है। लुधियाना में हुई जागरण कर्मचारी यूनियन की बैठक में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के अलावा नोएडा (यूपी) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सभी कर्मचारियों में काफी जोश देखने को मिला। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रबंधन किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई उकसावे पूर्ण कार्रवाई करता है तो इसका सभी मिलकर विरोध करेंगे। सबसे बड़ी बात आज दैनिक जागरण में जो स्थिति बनी हुई है उसके लिए पूरी तरह से प्रबंधन ही जिम्मेदार है।

एक जागरणकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण नोएडा के 18 मीडियाकर्मी टर्मिनेट, प्रबंधन ने बाउंसर बुलाया, पुलिस फोर्स तैनात

दैनिक जागरण नोएडा की हालत बेहद खराब है. यहां मीडियाकर्मियों का जमकर उत्पीड़न किया जा रहा है और कानून, पुलिस, प्रशासन, श्रम विभाग, श्रम कानून जैसी चीजें धन्नासेठों के कदमों में नतमस्तक हैं. बिना किसी वजह 18 लोगों को टर्मिनेट कर उनका टर्मिनेशन लेटर गेट पर रख दिया गया. साथ ही प्रबंधन ने बाउंसर बुलाकर गेट पर तैनात करा दिया है. भारी पुलिस फोर्स भी गेट पर तैनात है ताकि मीडियाकर्मियों के अंदर घुसने के प्रयास को विफल किया जा सके. टर्मिनेट किए गए लोग कई विभागों के हैं. संपादकीय, पीटीएस से लेकर मशीन, प्रोडक्शन, मार्केटिंग आदि विभागों के लोग टर्मिनेट किए हुए लोगों में शामिल हैं.

 दरअसल पूरा मामला मार्केटिंग की दो लड़कियों को टर्मिनेट किए जाने से शुरू हुआ. बिना कारण बताए जब दो लड़कियों को टर्मिनेट कर दिया गया तो विभिन्न विभागों के करीब दो दर्जन लोग एकजुट होकर सीजीएम नीतेंद्र श्रीवास्तव के पास गए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया पूरी किए टर्मिनेट किए जाने को अनुचित बताया. कर्मियों के दबाव में लड़कियों को आफिस में आने और काम करने की अनुमति तो दी गई लेकिन जैसे ही सब लोग अपने अपने काम पर लौटे, प्रबंधन ने इन दो दर्जन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा करा दिया.

उधर, मार्केटिंग की लड़कियों ने साफ साफ बताया कि दरअसल उन्हें टर्मिनेट परफारमेंट से कारण नहीं किया गया है बल्कि वे बासेज की कई अनुचित मांगों को पूरा नहीं कर रहीं थी, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया. लड़कियों ने भी छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा लिखाया. इससे परेशान प्रबंधन ने खुद को वजनदार और दमदार दिखाने की कोशिश करते हुए 18 मीडियाकर्मियों को टर्मिनेट कर दिया. फिलहाल नोएडा स्थित दैनिक जागरण के गेट पर भारी तनाव पसरा हुआ है.

आगे की स्लाइड में पढ़ें : क्या है दैनिक जागरण कर्मियों की अगली रणनीति > नीचे लिखे Next पर या 2 पर क्लिक करें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक और मार्केटिंग मैनेजर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज

मीडिया संस्थानों में गजब का खेल है। भले ही लोगों को बाहर से कुछ दिखता हो, लेकिन इसकी हालत आम कारोबार की तरह है। मुनाफा की होड़ में हर तरह के हथकंडे अख्तियार किए जा रहे हैं। देश का नम्बर वन अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण अखबार में भी तरह—तरह के खेल हैं। मामला कार्यस्थल पर सम्मान का है। फिलहाल इस अखबार में सीनियर मार्केटिंग एक्जक्यूटिव के पद पर कार्यरत पीड़ित महिला कर्मचारी ने गौतमबुद्ध नगर थाना में दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक नीतेन्द्र श्रीवास्तव, कार्मिक प्रबंधक देवानंद कुमार उर्फ मुन्ना और नोएडा के मार्केटिंग मैनेजर नकुल त्यागी पर भारतीय दंड विधान की धारा 354ए और 504बी के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। यह मुकदमा कांड संख्या 643/15 के अन्तर्गत दर्ज किया गया है।

दर्ज मुकदमे में पीड़िता ने कार्यस्थल पर लगातार शारीरिक और मानसिक तौर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। बहाना तो मार्केटिंग के टारगेट था, लेकिन उसके पीछे कुछ और चल रहा था। उसका दावा है कि वह मार्केटिंग के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में कामयाब रही है। दर्ज प्राथमिकी में यह आरोप लगाया है कि नोएडा के मार्केटिंग मैनेजर नकुल त्यागी का आचरण मर्यादा के विपरीत है। विरोध करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इतना ही नहीं कार्मिक विभाग के प्रबंधक ने भी यह नसीहत दी कि— ”नौकरी करनी है तो सबकुछ बर्दाश्त करना होगा।” जब इसकी शिकायत मुख्य महाप्रबंधक से की तो उन्होंने भी इन्हीं अधिकारियों का पक्ष ​​लिया।

24 अगस्त को उसे कार्यालय के गेट पर गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया। पूछने पर बताया गया कि कार्मिक विभाग के प्रबंधक के आदेश पर ऐसा किया गया है। इस संबध में जब उनसे इंटरकॉम पर बात की तो वे फिर अभद्रता पर उतर आए। मामला थाने में पहुंचने से पहले पीड़िता ने प्रबंधन के शीर्ष लोगों को भी मेल के माध्यम से वाफिक कराया। उधर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आने के कारण न्याय के लिये पुलिस के पास दस्तक दी है। पुलिस ने प्रबंधन के दबाव में दूसरा मुकदमा पहले ही दर्ज कर लिया है। प्रबंधन ने पीड़िता सहित संस्थान के चालीस लोगों के खिलाफ मुकदमा किया है। इस मुकदमें में आरोप है कि इन लोगों ने नौकरी से निकाले जाने के बाद जबरन संस्थान में घुसकर मुख्य महाप्रबंधक का घेराव किया। यह मुकदमा नोएडा फेजथ्री में दर्ज कराया गया है। सवाल यह उठता है कि यदि प्रबंधन के लोग यह कहते हैं कि इन्हें हटाया गया तो क्या उसके पहले की तमाम प्रक्रिया पूरी की थी।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पत्रकार श्रीकांत सिंह ने जागरण वालों पर यूं मारी पिचकारी, देखें वीडियो

दैनिक जागरण नोएडा से जुड़े हुए वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत सिंह काफी समय से बगावती मूड में हैं. इन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अपना एरियर व सेलरी पाने के लिए मुहिम छेड़ रखी है. साथ ही दर्जनों कर्मचारियों को इस मुहिम से जोड़ रखा है. पिछले दिनों नाराज प्रबंधन ने श्रीकांत का तबादला जम्मू कर दिया. बाद में वे नोएडा बुलाए गए लेकिन उन्हें आफिस में नहीं घुसने दिया गया. साथ ही जागरण के गार्डों ने उनसे मारपीट व छिनैती की. इस पूरे मामले को लेकर वे लेबर आफिस गए लेकिन उनका आरोप है कि अफसर ने सेटिंग करके रिपोर्ट जागरण के पक्ष में दे दी है.

श्रीकांत सिंह ने पूरे मामले को लेकर होली के दिन जागरण पर पिचकारी मारी है. अपने क्रिएटिव अंदाज में उन्होंने विजुवल्स के साथ होरी गीत को यूट्यूब पर लोड किया है. उनके होरी गीत की एक बानगी देखिए…

संजय गुप्ता का दिल भर आया
विष्णु त्रिपाठी देखो मुंहकी खाया
ओम वर्मा हड़के
रंग बरसे
भीगे कर्मचारी
रंग बरसे

पूरे वीडियो को देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=_NfFADVM9zQ

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

विष्णु त्रिपाठी का खेल, दैनिक जागरण की बन गई रेल

दैनिक जागरण में संपादक पद की शोभा बढ़ाने वाला स्वनामधन्य विष्णु त्रिपाठी किस प्रकार गेम करके अखबार को क्षति पहुंचा रहा है उसकी एक बानगी हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। मजीठिया मामले में मालिकों से बुरी तरह लताड़े जाने के बाद अब मालिकों के बीच अपनी छवि चमकाने के लिए विष्णु त्रिपाठी रोज नई नई चालें चल रहे हैं।पिछले दिनों रेल बजट और आम बजट के दौरान सेंट्रल डेस्‍क को नीचा दिखाने और अपनी वाहवाही करवाने की अपने गुर्गों के सहारे चली चालें उल्‍टी पड़ गई लगती हैं। प्‍लान ये था कि बजट और रेल बजट से सेंट्रल डेस्‍क को अलग कर यह दिखाया जाए कि इन महत्‍वपूर्ण अवसरों पर सेंट्रल डेस्‍क की भूमिका न के बराबर है। और इस तरह सेंट्रल डेस्‍क पर अपने चपाटियों के हवाले करने की साजिश कुछ इस तरह रची गई।

रेल बजट से चार दिन पहले नेशनल ब्यूरो के सदस्यों के साथ सेंट्रल डेस्क और नोएडा एडीशन के साथियों की प्लानिंग और तैयारियों के सिलसिले में बैठक हुई थी। मीटिंग में हर साल की तरह पूर्ववत सब कुछ तय हुआ था। सेंट्रल डेस्क का पूरा रोल था। एक्जीक्यूटिव एडीटर विष्णु ने अपनी मंशा जाहिर नहीं होने दी। इसलिए नेशनल ब्यूरो के लोगों तक को पता नहीं चल पाया कि एडीटर के दिमाग में क्या चल रहा है, हां नोएडा एडीशन के प्रभारी बृज चौबे, प्रतीक चटर्जी और सर्वेश को जरूर बता दिया गया था। अचानक रेल बजट वाले दिन अपने गेमप्लान के मुताबिक उसने पूरी प्लानिंग ही बदल दी। सेंट्रल डेस्क को परिदृश्य से लगभग गायब कर दिया। नेशनल ब्यूरो की खबरें पास करने, उन्हें पन्ने पर लगाने और ब्यूरो के साथ कोऑर्डिनेशन सब कुछ नोएडा मदर एडीशन के हाथ में दे दिया गया। सेंट्रल डेस्क सिर्फ प्रतिक्रियाएं बनाकर रह गई। इसका नतीजा यह हुआ कि जागरण पन्ने काले-पीले करने में तो प्रतिस्पर्धियों से आगे था, मगर अमर उजाला और दैनिक भास्कर ने कंटेंट व प्रजेंटेशन में जागरण को जमकर धोया।

यही प्रक्रिया बजट के दिन 28 फरवरी को दोहराई गई। सेंट्रल डेस्क जो रेल और आम बजट का पूरा जिम्मा संभालती थी, बस ट्विटर कमेंट और टिप्पणियां बनाकर रह गई। उन्हें कुछ पता ही नहीं था कि क्या करना है और क्या हो रहा है। कंटेंट में गलती पर गलती देखने के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, क्योंकि सख्त आदेश था कि सेंट्रल डेस्क को नेशनल ब्यूरो की खबरों या किसी अन्य महत्वपूर्ण कंटेंट में हाथ नहीं लगाना है। यानी, लगभग कोई भूमिका ही नहीं बची। नतीजा उसी रात को दिखने लगा, जालंधर, पटना, रांची और लखनऊ जैसी यूनिटों में बन रहे पन्ने देरी से संस्करणों को मिल पाए।

गलतियों की तो कमी थी ही नहीं, मगर खबरें भी पन्नों में रिपीट हुईं। मगर परवाह किसे थी, विष्णु के गेमप्लान को अंजाम देने में उनके सिपहसालार जुटे हुए थे। इसलिए पन्ने काले-पीले कर दिए गए। इस काम में मुस्तैदी से जुटे प्रतीक और बृज चौबे। मगर विष्णु त्रिपाठी के भक्तों से रहा नहीं गया और उनका खामोश गेमप्लान कमोबेश उजागर हो ही गया। चौबे जी को बाहर की यूनिटों के अपने साथियों से कहते सुना गया कि अगर बजट ठीक-ठाक निकल जाए तो सेंट्रल डेस्क पर भी अपना कब्जा हो जाएगा। वैसे विष्णु के निकटस्थ सूत्र भी बता रहे हैं कि बीबीसी या प्रतीक में से किसी को सेंट्रल डेस्क कम नेशनल एडीशन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वैसे, ज्यादा संभावना चौबे की है, जबकि उनकी जगह पर प्रतीत को प्रमोट किया जा सकता है। इस खेल में विष्णु त्रिपाठी कितना कामयाब हो पाता है, यह तो समय ही बताएगा। मगर इतना पक्का है कि किसी भी सूरत में नुकसान दैनिक जागरण का ही होगा, क्योंकि हमेशा से ही विष्णु त्रिपाठी का फंडा रहा है कि जागरण को चाहे जितना नुकसान पहुंचे, उसकी गोटियां बस लाल हो जाएं। लगे रहो भाई, तुम्हारी हरकत तुम्हें मुबारक।

xxx

दैनिक जागरण में लोगों को परेशान कर विष्णु त्रिपाठी ने टीम को इतना कमजोर और असहाय बना दिया है कि अब गलतियों की भरमार हर पेज पर दिखने लगी है और अखबार से पाठकों का विश्वास उठने लगा है। शायद यही वजह है कि अखबार की प्रसार संख्या दिनोंदिन गिर रही है और उसी के साथ गिर रहा है विष्णु त्रिपाठी का आत्म विश्वास। उसे सिर्फ अपनी खुराफात की चिंता रहती है अखबार की नहीं। यकीन नहीं आता तो अखबार के बजट का पेज देख लीजिए, जिसमें लीड खबर ही रिपीट है।

जागरण के दो कर्मियों द्वारा भड़ास को मिली दो मेल पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मीडियाकर्मियों को अपनी कमर कसकर रहना होगा, मालिकान के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का समय करीब आ रहा है…

Abhishek Srivastava : रात साढ़े दस बजे जब मैं शनि बाज़ार में सब्‍ज़ी खरीद रहा था, कि अचानक मोबाइल पर Yashwant Singh का नाम चमका। हलो बोलने के बाद बिना किसी औपचारिकता के उधर से आवाज़ आई, ”जागरण में हड़ताल हो गई है। दो सौ लोग सड़क पर हैं। पहुंचिए।” मैंने Sandeep Rauzi को फोन मिलाया, तो वे दफ्तर में थे। वे बोले कि घर पहुंचकर और बाइक लेकर मेरे यहां कुछ देर में पहुंच रहे हैं। फिर मैंने Pankaj भाई को एसएमएस किया। संयोग देखिए कि आंदोलन के बीचोबीच हम सभी मौके पर घंटे भर बाद मौजूद थे। पंकज भाई के साथ वरिष्‍ठ पत्रकार प्रशांत टंडन भी आंदोलनरत कर्मचारियों को समर्थन देने रात एक बजे पहुंचे। तीन चैनलों के पत्रकारों के वहां कैमरा टीम के साथ पहुंचने से आंदोलन को और बल मिला।

(दैनिक जागरण के महाप्रबंधक का घेराव और कर्मचारियों के साथ सड़क पर समझौते की वार्ता.)

(दैनिक जागरण गेट के सामने खड़े हड़ताली मीडियाकर्मी)

(मीडियाकर्मियों के आंदोलन को कैमरे में कैप्चर करते पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव)

यह सब हालांकि उतना अप्रत्‍याशित नहीं था, जितना सुखद आश्‍चर्य रहा वहां एक बुजुर्ग से मिलना। नाम राजू मंडल, उम्र 70 पार, निवासी सुपौल (बिहार), 14 साल पहले टाइम्‍स ऑफ इंडिया की प्रेस से रिटायर, एक ज़माने में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में छह माह की ऐतिहासिक हड़ताल के सूत्रधार और जागरण के एक कर्मचारी के पिता। एक पिता अपने बेटे को आंदोलन में समर्थन देने आया था। मुझे गोर्की की ”मां” याद आ गई। मंडल बोले, ”नोएडा की धरती पर मैंने पहली बार कदम रखा है। बेटे ने बताया कि सब लोग सड़क पर हैं तो मैंने उससे कहा कि मुझे भी ले चल। आप लोग सिर्फ दो बात याद रखो- ईमानदारी और हिम्‍मत। लड़ाई जीत जाओगे।” महाप्रबंधक के साथ समझौते के बाद दो बजे जब अधिकतर कर्मचारी भीतर चले गए, तो मंडलजी ने वहां मौजूद हम चार-पांच नौजवानों को गले लगाया और हमारा सिर चूमते हुए बोले, ”मेरे बेटे का खयाल रखना।”

जब आंदोलन का पानी चढ़ता है, तो कैसे-कैसे पुराने चावल उसमें उबलने लगते हैं, यह घटना इसकी एक मिसाल भर है। दैनिक जागरण में कल रात एक साथ नोएडा और हिसार में हुई हड़ताल इस बात का प्राथमिक संकेत है कि आने वाले दिनों में मीडियाकर्मियों को अपनी कमर कसकर रहना होगा। मालिकान के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का समय करीब आ रहा है। मुझे लगता है कि अपने आपसी मतभेद भुलाकर पत्रकारों को अपने मजदूर वेश में आ जाना चाहिए। अगले महीने 9 मार्च की तारीख अहम है जब मजीठिया से जुड़े सारे मुकदमों को एक साथ क्‍लब कर के सुनवाई होगी। उम्‍मीद की जाए कि विजय अपनी होगी और मालिक हमारा हक़ देने को मजबूर होंगे।

पत्रकार और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

इसे भी पढ़ें…

संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

लिखित आश्‍वासन के बाद काम पर लौटे हड़ताली जागरणकर्मी

(दैनिक जागरण, नोएडा के कर्मियों द्वारा हड़ताल की जानकारी मिलने पर जनपक्षधर पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव कैमरे समेत मौके पर पहुंचे और फोटोग्राफी में जुट गए)


अरसे से अपने पत्रकारों, कर्मचारियों को अपना दास समझने वाले दैनिक जागरण समूह के मालिकों पहली बार सामूहिक शक्ति के सामने झुकना पड़ा है. दैनिक जागरण के मीडिया कर्मचारी इस मीडिया हाउस के समूह संपादक व सीर्इओ संजय गुप्‍ता के लिखित आश्‍वासन के बाद ही हड़ताल समाप्‍त करने को राजी हुए और काम पर वापस लौटे. मैनेजर टाइप लोगों के लालीपाप थमाकर हड़ताल खत्म कराने के तमाम प्रयास फेल होने के बाद संजय गुप्‍ता को मजबूरी में लिखित आश्‍वासन देकर मामला सुलझाना पड़ा. बताया जा रहा है कि दिल्‍ली चुनाव के चलते गुप्‍ता एंड कंपनी ने तात्‍कालिक तौर पर यह रास्‍ता अपनाया है और किसी को परेशान न करने का लिखित वादा किया है.  

संजय गुप्‍ता ने लिखित तौर पर आश्‍वासन दिया है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर दूसरे यूनिटों में ट्रांसफर किए गए लोगों को उनकी मंशा के अनुरूप यूनिटों में भेजा जाएगा. हड़ताल में शामिल किसी कर्मचारी को किसी भी कीमत पर परेशान नहीं किया जाएगा. साथ ही मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर जो कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट या अन्‍य कोर्ट गए हैं, उनके साथ कोई दुर्व्‍यवहार नहीं होगा, उन्‍हें निकाला नहीं जाएगा. संजय गुप्‍ता के इन तमाम आश्‍वासनों के बाद नोएडा समेत हिसार के कर्मचारी भी काम पर लौट गए हैं. 

बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने ऐसे मौके पर हड़ताल कर दिया था कि प्रबंधन को न तो उगलते बन रहा था और न निगलते. दिल्‍ली चुनाव होने के चलते मालिकों की सांस फूलने लगी थी. वे किसी भी कीमत पर हड़ताल खत्‍म कराकर अखबार प्रकाशित करवाने में जुटे हुए थे. संजय गुप्‍ता के आश्‍वासन तथा वरिष्‍ठों के हाथ-पांव जोड़ने के बाद कर्मचारी काम पर वापस लौटे हैं. हालांकि संभावना जताई जा रही है कि कर्मचारियों की एकता से डरा प्रबंधन अभी भले ही कुछ ना करे, लेकिन धीरे-धीरे वाले इन्‍हें प्रताडि़त कर सकता है. 

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

इसे भी पढ़ें….

संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण, नोएडा के हड़ताल की आंच हिसार तक पहुंची

दैनिक जागरण, नोएडा में कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. प्रबंधन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ कर्मचारियों का सालों से दबा गुस्‍सा अब छलक कर बाहर आ गया है. मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एक संपादकीय कर्मचारी का तबादला किए जाने के बाद सारे विभागों के कर्मचारी एकजुट होकर हड़ताल पर चले गए हैं. मौके पर प्रबंधन के लोग भी पहुंच गए हैं, लेकिन कर्मचारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल को बुला लिया है, लेकिन प्रबंधन के शह पर सही गलत करने वाली नोएडा पुलिस की हिम्‍मत भी कर्मचारियों से उलझने की नहीं हो रही है. 

कई सौ कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन नहीं दिए जाने और कर्मचारियों को प्रताडि़त करने के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जाने से नाराज थे. प्रबंधन के कुछ एक खास लोगों को छोड़कर सभी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं. नोएडा की हड़ताल का असर हरियाणा की हिसार यूनिट तक भी पहुंच गया है. हिसार यूनिट के जागरण कर्मचारी भी प्रबंधन के खिलाफ हड़ताल पर उतर गए हैं. माना जा रहा है कि सूचना मिलने के साथ जागरण समूह के अन्‍य यूनिटों के कर्मचारी भी प्रबंधन की हरामखोरी के खिलाफ सड़कों पर उतर जाएंगे. 

हड़ताल की सूचना मिलते ही दैनिक जागरण के मालिक और संपादक संजय गुप्ता के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी हैं. वे हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद सारे कार्यक्रम स्थगित कर किसी तरह हड़ताल तुड़वाने की कोशिशों में जुट गए हैं और कर्मचारियों में फूट डलवाने के लिए अपने चेले टाइप के मैनेजर नीतेंद्र को लगा दिया है. इस मैनेजर की सारी कोशिशें बेकार हो रही हैं. कर्मचारी प्रबंधन की कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. उनकी मांग है कि मजीठिया मांगने वालों का तबादला रद्द करने के साथ सभी को वेज बोर्ड के हिसाब से सैलरी देने की लिखित घो‍षणा की जाए. साथ ही कर्मचारियों को हटाने या अन्‍यत्र भेजे जाने की कोशिश ना की जाए. 

कर्मचारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनकी मेहनत से प्रबंधन अरबों रूपए कमाता है और जब उनका हक देने की बारी आती है तो उन्‍हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगता है. वैसे भी जागरण कर्मचारियों की सैलरी अन्‍य बड़े अखबारों की सैलरी से काफी कम है. संभावना जताई जा रही है कि कर्मचारी बिना अपनी मांगों के हड़ताल किसी भी कीमत पर खत्‍म नहीं करने वाले हैं. कई अन्य पत्रकार भी मौके पर मौजूद हैं. भड़ास के संपादक यशवंत सिंह समेत पत्रकार राजीव शर्मा, अभिषेक श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, प्रशांत टंडन आदि हड़ताली जागरण कर्मियों के समर्थन में मौके पर डटे हुए हैं.

हड़ताल स्थल पर मोबाइल कैमरे के जरिए शूट किया गया वीडियो देखें: https://www.youtube.com/watch?v=EA32dSYnbgY

अंत में क्या हुआ, जानने के लिए इसे पढ़ें…

संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: